Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
चमकीली साड़ी
चमकीली साड़ी
★★★★★

© Swapnil Ranjan Vaish

Drama

1 Minutes   585    11


Content Ranking

दूर क्षितिज में डूबते सूरज की मद्धम पड़ चुकी रोशनी में छोटी ने घर की तरफ तेज़ी से बढ़ रहे अपने पिता गिरधारी को देखा और अति हर्ष के साथ भाग कर गेट खोला और पिता के हाथ में लटका थैला लेकर माँ के पास भीतर भाग आयी।

अगले हफ्ते मीना के भाई की शादी है। सबको शादी में जाना अनिवार्य है। पहले तो कर्ज़ के चलते मीना ने गिरधारी से कोई चीज़ नहीं माँगी, पर अब जब कर्ज़ माफ हो गया और पेमेंट भी टाइम से खाते में आने लगा तो गिरधारी, मीना के मन की जान आज एक चमकीली साड़ी भेंट में ले आया।

"अजी सुनो...ये तो बहुत महंगी लगती है। क्या ज़रूरत थी इतने पैसे हमारे ऊपर उड़ाने की ?"

"अरी चिंता मत कर, अबकी बार जो सरकार बनी है वो किसानों की हितैषी है, सीमेंट के हाथी घोड़े या अखबारों की सुर्खियां बनाने की चाह रखने वाली नहीं। अब तुझे या छोटी को अपना मन मारने की ज़रूरत ना है।"

"तुम कब से सरकार की तरफदारी करने लगे ? मैं तो कहती हूँ इसे बसंत मानों। अपने यहाँ सरकारें ऋतुओं की तरह ही तो बदलती हैं। ऐसा न हो कि अगली सरकार इस बसन्त को पतझड़ में बदल दे। हम किसान हैं...ये कभी ना भूलना छोटी के बापू।"

सरकार किसान साड़ी

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..