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पहेली !
पहेली !
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© Arun Pradeep

Thriller

1 Minutes   7.1K    8


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जीवन तेरे रूप अनेक

 

हुआ चकित मैं देख

बहुरूप बिखराये !

 

 

पल पल रंग बदलता तेरा

कभी प्रकाशित कभी अँधेरा

करे दंग, समझ न आये !

 

सुन्दर सपना देख विहँसता

समझ अपाहिज कभी सिसकता

क्यूँ इतना भरमाये !

 

कभी दीखता केवल सपना

अगले ही पल बनता अपना

तेरा ढंग समझ न आये !

RIDDLE

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