नवल पाल प्रभाकर दिनकर

Drama Fantasy


नवल पाल प्रभाकर दिनकर

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विज्ञान तेरी जय हो !

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मैं और मेरे दोस्त सभी लोग एक बगीचे में घुमने गए वहाँ पर खूब मौज-मस्ती की, चारों तरफ हरियाली ही हरियाली । पेड़ फलों से लदे पड़े थे । न वहाँ कोई डांटने वाला था, न कोई कहने वाला । बस चढ़ो पेड़ों पर और खाओ अपना मनपसंद फल । बिल्कुल देवों की नगरी की भाँति शोभा पा रहा था वह बगीचा ।

खेलते-खेलते मेरे कुछ साथी जामूनों के पेड़ पर चढ़ गये, तो मैंने सोचा क्यों न मैं भी एक जामून के पेड़ पर चढूँ । यह सोच कर मैं एक जामून के पेड़ पर चढ़ा, जिस पर नीचे से देखने पर वह जामूनों से लदा हुआ दिखाई दे रहा था । बस फि र क्या था, बस चढ़ गया उस पेड़ पर । वहाँ पर चढक़र सर्वप्रथम तो मैंने वहाँ चारों तरफ की हरियाली को अपनी आँखों में उतारा फि र जामून तोडऩे लगा ।

नीचे की जामून खत्म कर फिर ओर ऊपर चढ़ा तो मैंने देखा कि उस जामून की चोटी अर्थात लोरियों में दर्जनों केले लगे हुए थे । केलों को देख कर मेरा मन हर्षित हो गया । मानों ऐसा प्रतीत हुआ कि मुझे आज तो जैसे राम मिल गया । मेरे कुछ साथी नीचे खड़े थे । मैनें उनसे कहा कि अरे दोस्तों यहाँ आओ देखो तो कितने केले लगे हुए हैं । यदि खाओ तो तोड़ूं । तभी नीचे से एक दोस्त बोला-अरे वाह, जामून के पेड़ पर केले । फें क ों तो जरा । हमें तो बहुत भूख लगी है । यार आज तो जी भरकर केले खायेगें । मैंने उनके लिए केले तोडक़र नीचे फेंके । उन्होंने वे सभी केले उठाकर खाये ।

मैंने सोचा- ये सभी केले खा रहे हैं, तो मैं भी खाऊँगा । जामून के पेड़ पर लगे केले कैसे होते हैं । आज तक तो मैंने भी केले के पेड़ पर लगे हुए केले ही खाये थे, मगर जामून के पेड़ पर लगे केले आज पहली बार ही खाकर देखूंगा । यह सोचकर मैंने पेड़ पर बैठे-बैठे ही एक केला छिलकर खाया तो उसका स्वाद बिल्कु ल वैसा ही था, जैसा कि प्राकृतिक केले का होता है । मैंने सोचा कि यह तो बहुत ही अच्छा हुआ जो जामून के पेड़ों पर केले लगे हुए हैं ।

वहाँ से घूमते हुए हम बगीचे की शोभा देखने लगे । वहाँ की शोभा क्या थी मानो स्वर्ग था, स्वर्ग । मगर कब यह स्वर्ग, नरक में बदल जायेगा । यह कौन जानता है ? और ना ही जानने की कोशिश की । इसलिए खुशी-खुशी उस बगीचे में घूम रहा था । अचानक मैंने उस बगीचे में देखा कि- एक औरत अपने नवजात शिशु को स्तन पान कराने की बजाय निप्पल से दूधिया-दूधिया सा पानी पिला रही थी ।

तब मैंने उसके पास पहुँचकर पूछा कि-आंटी आप इसे यह क्या पिला रही हैं । वह औरत हँसते हुए बोली-क्या तुझे नही पता । मैंने कहा, नही तो आंटी । तब वह बोली-यह यूरिया की पहली घूटी है । इसे पिलाकर मैं अपने बेटे को जल्दी से बड़ा करना चाहती हूँ । जिस प्रकार से यूरिया खाद से फसल जल्दी से बहुत लम्बी, सुन्दर तथा अधिक अनाज देने लगती है । उसी प्रकार से मेरा बेटा भी जल्दी ही लम्बा, मोटा, तगड़ा और सुन्दर होकर नौकरी लगकर देश सेवा और पैसे कमाएगा, मगर आंटी यह इस खाद से मर गया तो, मैंने आतुरता से पूछा ।

नही बेटे, इसे कुछ नही होगा । देखना अभी तीन-चार महीने में ही यह लगभग छह फुट नजर आयेगा । मैं उनके यहाँ से दौड़ता हुआ अपने घर की तरफ रवाना हुआ तो रास्ते में एक महाशय जी मुर्गी दाना लिए अपने घर की तरफ जा रहे थे । मैंने पूछा - क्या लाये हो चन्दू भाई, बाजार से ।

क्या बताऊंँ भाई, आज सांईस का जोर-जार से बोल-बोला है । सारा देश प्रगति कर रहा है । कोई बच्चों को दूध की जगह यूरिया पिला रहा है तो कहीं आम के पेड़ों पर आम के साथ-साथ सेब लगे हैं तो कहीं आलू के पौधे के नीचे आलू और ऊपर मिर्चे लगी हुई हैं, तो कहीं पर टमाटर के पेड़ के नीचे मूली और शलगम लगी हुई हैं और ऊपर टमाटर लगे हुए दिखाई दे रहें हैं । डबल-डबल तरक्की करता जा रहा है देश ।

इसलिए मैं भी अपनी बीबी के लिए ये मुर्गी दाना लिए जा रहा हूँ, ताकि वह इस खाकर अंडे दे । अंडे बेचने से आमदनी होगी और घर का खर्चा चलेगा ओर जो बच्चे होंगे उन्हें तो हम पाल ही लेंगे । आगे चलने पर देखा कि एक महाशय को चार औरतें लिए जा रही थी । उनसे पूछने पर पता चला कि इस आदमी की डैथ हुए पन्द्रह दिन हो गये हैं । अब इसका स्थानान्तरण कराने जा रही हैं । अभी वे कुछ ही दूर पहुँची थी कि - एक गाड़ी बड़ी जल्दी बिल्कुल हवा की गति से मेरी तरफ ही आ रही थी । मैंने उनकी तरफ रूकने का इशारा किया तो उन्होनें गाड़ी बिल्कुल मेरे समीप लाकर रोक दी और कहा भाई जल्दी से अन्दर आइये, हमारा आदमी सीरियस है । मैं जल्दी ही अन्दर बैठ लिया । मेरे अन्दर बैठते ही फिर से वह गाड़ी हवा से बातें करने लगी । मैंने वहीं अन्दर बैठे एक भाई से पूछा - कौन सीरियस है भाई । तब वह आदमी मेरे से बोला- ये जो आदमी लेटा है वही सीरियस है, इसको आज बच्चा होने वाला है सुबह से परेशान है । उसके पेट में दर्द चल रहा है, और बेचारा तड़प रहा है।

मैंने उसकी तरफ देखा तो वाकई वह आदमी सीरियस था । वह जोर-जोर से कराह रहा था । उसका पेट तो मानो कुम्हार के घड़े के समान लग रहा था । अस्पताल आ गया । वहाँ पर उसे स्ट्रेक्चर पर उतारा गया ओर जल्दी ही अन्दर दाखिल कर दिया गया । कुछ ही समय बाद हमें खुशखबरी भी मिल गई कि लड़का हुआ है । कुछ देर बाद वहाँ पर नर्स आई तो मैंने उससे पूछा कि - यह क्या माजरा था । तो उसने बताया कि - देखो भाई आज सांईस का युग है । जिस चाँद को दुनिया देवता मानती थी उस चाँद पर आज हमारी दुनिया के लोग राज कर रहे हैं । वहाँ पर रह रहे हैं । जब इतनी बड़ी उपलब्धि हमारे देश के लोगों ने पा ली है तो यह क्यों नही हो सकता ।

यह अपनी बीबी से बहुत प्यार करता था । इसलिए उसकी प्रसव पीड़ा को इन्होने ले लिया । मैंने पूछा - वो कैसे डॉक्टर । तब वह डॉक्टर कहने लगी- इन दोनों के जनन अंग हमने एक-दूसरे से निकालकर बदल दिए थे । बस अब यह आदमी बच्चे पैदा करता है । यही नही भाई पशु और पक्षी भी कुछ कम नही हैं । वे भी बिल्कुल ही सांईस रूपी दुनिया अपना चुके हैं ।

एक जगह पर कौओं की पंचायत बैठी हुई थी तभी मैं वहाँ पहुँचा तो देखा कि - कौवों के मध्य मानव के पुराने जमाने की शराब की बोतलें रखी हुई थी । सभी कौएं मस्ती में झूम रहे थे । कौए बारी-बारी से शराब को पैग उठाते और पीकर चने, नमकीन व शलाद आदि खाते । मुझे देखकर एक कौवा कहने लगा - अरे देखो तो ये आ गया एक ओर सांईटिस्ट साहब, इसे भी एक पैग दो । मैं बोला-नही कौए भाई साहब, मैं शराब नही पीता । बस पूछने के लिए धन्यवाद । और हाँ आपने मुझे सांईटिस्ट क्यों कहा ?

अरे यार ये तो सीधी सी बात है, जब आप सांईस के युग में पैदा हुए हो तो सांईटिस्ट ही तो कहलाओगे ।

मैंने कहा -ठीक है भाई साहब ।

तभी कुछ आदमी एक मरतले से युवक को उठाये चले आ रहे थे । मैंने उन्हें रोका और पूछा - तुम कौन हो भाईयो जो इस आदमी को लिए जा रहे हो । तब उन में से एक आदमी कहने लगा - देख भाई इस दुनिया में हमें केवल तू ही एक ऐसा इंसान मिला है जिसने हमारे बारे में पूछा, अन्यथा तो खुद इंसान ही इंसान के बारे में नही पूछता । देखो भाई हम सभी भूत हैं ।

यह सुनकर मैं चौंका, और मेरे दिल में एक कंपन सी पैदा हो गई । तभी वह भूत अपनी बात को पूरी करते हुए बोला - आज इस सांईस ने तो हमारा वजूद ही समाप्त कर दिया है । आज तो इंसान भूतों से बढ़कर हो गया है । हम इसे मना कर रहे थे कि इंसानों के चक्कर में मत पड़, मगर इसने हमारी एक ना सुनी और गया इंसानों के पास । एक सांईटिस्ट ने इसे ऐसा घुमाकर दिया कि - यह खुद ही पागल हो गया । अब किसी तरह से इसे झाड़-फूंक करने वाले के पास ले जा रहे हैं यदि बच गया तो ठीक है नही तो हमारा यह एक और सदस्य गया । धीरे-धीरे हम खत्म होने की कगार पर हैं । सरकार भी हमारी तरफ कोई ध्यान नही दे रही है । मैंने कहा- जल्दी करो भाईयों, इसे जल्दी से ले जाओ वरना देर हो जायेगी ।

वहाँ से बचकर मैं आगे निकला तो कि कुछ बच्चे परिन्दों की तरह आसमां में उड़ते फिर रहे थे । मैंने उन्हें नीचे बुलाया और पूछा -अरे बच्चों तुम यह कैसे उड़ रहे हो तो उन्होंने कहा कि यह सब सांईस का कमाल है । हमारे बुजुर्ग तो जहाजों में उड़ते थे मगर हम तो ऐसे ही उड़ते फिर रहे हैं । माँ के गर्भ में ही छोटा सा जैट इंजन इंजैक्शन के द्वारा हमारे खून में पहुंचा दिया जाता है । जिसके कारण आज हम उड़ रहे हैं ।

तभी मेरे मुँह से निकल पड़ा - वाह सांईस तेरी जय हो, जय हो ।


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