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कनक (भाग एक)
कनक (भाग एक)
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© Anshu sharma

Inspirational

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मीशू ने सुबह न्यूज पेपर उठाने के लिये दरवाज़ा खोला, सामने देखा तो सामने का दरवाज़ा खुला था, चलो कोई पड़ोस मे तो आया। रोहन चलो मिल आये मीशू ने रोहन को कहा, रोहन ने कहा मीशू अभी अभी आये है सामान बिखरा हुआ है कल चलेगें। क्या रोहन बैठेंगे नही केवल कुछ औपचारिकता तो निभानी चाहिये, नये नये है कुछ चाय, पानी चाहिये हुआ तो...चलो ना ,हाथ पकड़ कर ले जाने लगी अच्छा ठीक है रोहन ने कहा...चलो पर थोड़ी देर के लिये।

सामने डोर बैल बजायी, एक मीशू की हम उम्र ने दरवाज़ा खोला, कौन है एक पीछे से तेजी से आवाज़ आई ...हम है आपके पड़ोसी मीशू ने भी तुरंत कहा और एक छोटी सी मुस्कुराहट, सामने हम उम्र सी दिखने वाली शिफान की साड़ी को पल्ला कमर मे दबाये ,पसीने से लथपथ, एक छोटी सी मुस्कुराहट से कहा आईये अंदर मैं कनक हूँँ, तभी जा तू काम कर, एक बुजुर्ग महिला आती हुई बोली। कनक घबराकर अंदर चली गयी। आओ अंदर आओ ..मेरा बेटा राघव और उसके पिता जी बाहर गये है। नही नही बस रोहन ने कहा आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो बे झिझक कहियेगा। जी ज़रूर और मीशू , रोहन घर आ गये। रोहन ने कहा कुछ अजीब सी डरी थी ना कनक, मीशू रसोई से ही बोली..अरे एसा नही है काम कितना होता है नये घर मे आने से..रोहन ने बोला। वैसै तो दोनो घर के दरवाज़े बंद ही रहते थे।

पर कभी कभी आंटी और मीशू एक दूसरे से हालचाल पूछ लेते पर कनक कभी दिखती नही, शायद काम मे लगी रहती, राघव भी कभी कभी रोहन से बात कर लेते थे। मीशू की आँखें कनक को तलाशती। एक दिन पूछ ही लिया आंटी कनक नही दिखती ...नही वो ज्यादा किसी से नही बोलती, अपने घर के काम मे ही उलझी रहती है। अरे आंटी उस से बोलना यहाँ सब बहुत अच्छे है, नीचे पार्क मे बहुत सहेलियाँ शाम को आती है, आप कहें तो मैं मिला दूँगी। कनक का खूब मन लगेगा मीशू ने हसँते हुये कहा। नही वो कहीं नही आती, जाती कहकर आंटी घर मे चली गयी ।

मीशू को लगा शायद कम ही बोलती होगी, शाम को रोहन आँफिस से आये मीशू चाय ले आई..रोहन मैं क्या सोच रही थी कनक ये सब नये है हमे चाय पर बुलाना चाहिये..जैसा ठीक लगे रोहन ने टीवी न्यूज़ देखते हुये बोला। ठीक है कल संडे है सब घर होंगे शाम को आने को बोलती हूँ। कहकर मीशू इनवीटेशन देने पहुँच गयी । दरवाज़ा खुला ही था ,राघव को सामने देखकर मीशू ने चाय पर बुला लिया, राघव ने भी आने का वादा कर दिया। मीशू ने भी नाश्ते मे कसर नही छोडी कोई पहली बार आ रहे थे .गरम समोसा ,जलेबी ,ढोकला और भी ना जाने कितना सामान खुशी से लगा दिया था। कनक भी साड़ी मे आई थी, मीशू ने चाय बनाते समय उसे रसोई मे ही बुला लिया। कनक भी हाँ और ना मे ही मीशू की बात का जवाब दे रही थी, इतने में आंटी ने आवाज़ दी अरे बहुत देर से क्या कर रही हो अंदर कनक बिना कुछ कहे तेजी से बाहर कमरे मे आकर बैठ गयी ।

सब बातें करते रहे पर कनक चुप ही थी, कनक तुम पार्क आया करो मैं मिलवाती हूँ अपनी सहेलियों से तुम्हें अच्छा लगेगा। नही इसे पसंद नही आंटी कनक से पहले ही बोल दी। सब ने चाय की तारीफ की और सब चले गये। रोहन, ये कनक कौन से जमाने की है बोलती ही नही। रहने दो तुम्हें क्या तुम्हारे पास क्या दोस्तों की कमी है।

कुछ दिन बाद मीशू जींस टाप पहने घर से निकल ही रही थी, कनक और आंटी सामने लिफ्ट मे देखकर नमस्ते आंटी कहाँ जा रही है ? बस कुछ घर का सामान ..और तुम एक निगाह ऊपर से नीचे मीशू को देखते हुये बोली...मेरी किटी पार्टी है, कनक तुम जोइन करना चाहोगी ,मैं मैं ..नही कनक ने सकुचाते हुए कहा अरे आकर देखो एक बार..नही ये सब नही इसे पंसद..कहकर आंटी लिफ्ट से बाहर चली गयी। मीशू को समझ आ गया था कि कनक की कुछ नही चलती। अगले दिन कनक सामने देख कर मुस्कुरायी मीशू ने भी मुस्कुरा दिया । कैसी है आप? कनक को पहली बार खुद से बोलता देख मीशू को अच्छा लगा मैं ठीक हूँ, आंटी कहाँ है?

उनकी कुछ सहेली बन गयी रोज़ पाँच बजे जाती है और सात बजे वापस। और बाबू जी भी घूमने जाने लगे है।तुम तो चलोगी नही ये पूछ कर मीशू पार्क चली गयी। अब रोज़ आंटी के जाने के बाद मीशू से बोलने लगी ,मीशू भी पार्क आधा घंटे बाद जाने लगी। कनक धीरे धीरे खुलने लगी पर घर के लोगो के सामने आते ही डर से आवाज़ नही निकलती। राघव, रोहन भी आपस मे खुलने लगे थे।

एक दिन राघव हमारे घर हमे डिनर पर बुलाने आये। दोनो समय पर पहुँच गये, राघव रोहन की अच्छी बनने लगी थी वो बातों मे बिजी हो गये। मीशू कनक काकी मदद करने रसोई मे आ गयी। आंटी नही दिखाई दे रही है ,नही वो अपने मायके शादी मे गयी है तभी तो...इतना कहकर कनक काम मे लग गयी। कनक ने बहुत कुछ बनाया था छोले ,कोफ्ते रायता, भँरवा सब्जियाँ खीर पुलाव.... सबने खूब तारीफ भी की। मीशू ने राघव को कहा कनक किटी मे आये ,राघव ने तुरंत हाँ कर दी हाँ हाँ प्लीज आप इसे ले जाइये घर से बाहर ही नही जाती। हाँ हाँ क्यो नही ! तो कल से ही सही कल मेरे ही घर किटी है और थीम है शार्ट कुर्ता, पटियाला सलवार ,दुप्पटा। नहीं नहीं किटी नहीं ...

क्रमशः-

पार्क सहेलियाँ चुप

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