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किस्मत और प्यार
किस्मत और प्यार
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© Sanny Chauhan

Classics

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वो दिन मुझे आज भी याद है जब वो मुझसे बिछड़ी थी | बोल के गयी थी कि अगर हमारा प्यार सच्चा है तो एक दिन हम जरुर मिलेंगे | उसी लाइन के सहारे शायद आज भी उसका इन्तजार कर रहा हूँ | आज दो साल हो गये उससे बिछड़े हुए | पता नहीं कब मुलाकात होगी और होगी भी या नहीं | पता नहीं किस्मत मेरे साथ कौन सा खेल, खेल रही है तभी बस रुकी और मनोहर ने कहा चल भाई ऑफिस आ गया | मैं एक दम जैसे नींद से जगा और बस से उतरने लगा | जैसे ही हम ऑफिस के आगे गए पीछे से किसी ने कहा ‘ हेल्लो ‘ क्या आप मुझे बता सकते हो की यहाँ नजदीक में कोई हॉस्पिटल या मेडिकल स्टोर है? मेरे बच्चे की तबियत बहुत ख़राब है | आवाज़ कुछ जानी पहचानी सी लगी | पीछे मुड के देखा तो वो प्रिया थी | वो आगे बोलने वाली थी की मुझे देख कर उसकी आवाज़ नहीं निकल पायी | उसे देख कर मेरी समझ में नहीं आया की मैं  इसे क्या कहूँ | उसे ऐसे देख कर मैं कुछ भी नहीं कह पा रहा था | हमारा प्यार सच्चा था परन्तु हमारी किस्मत हमारे साथ नहीं थी |

किस्मत प्यार मिलना

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