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मोह मोह के धागे (भाग ३)
मोह मोह के धागे (भाग ३)
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© Sonam Rathore

Inspirational

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"छोड़ो मुझे, मेरे पास मत आना..." नैना को अचानक होश आया, और उसने अपने आपको एक कमरे में पाया। " घबराओ मत बेटी, तुम यहाँ सुरक्षित हो। राजीव, डॉक्टर को लेकर आता ही होगा", राजीव की माँ नैना से बोली "आप सब कौन हो? और ये राजीव कौन है?" नैना ने राजीव की माँ से पूछा? राजीव की माँ ने उसे सब कुछ बताया की, कैसे वो राजीव को जख़्मी हालत में, सड़क के किनारे झाड़ियों में मिली थी। इतने में राजीव डॉक्टर को लेकर आया, और डॉक्टर ने नैना का इलाज किया। उसके पीठ पर काफी घाव थे, और उसके सर पर भी काफी चोट थी। "ये सब तुम्हारे साथ किसने किया? और तुम्हारे पति कहाँ है?", डॉक्टर ने नैना से पूछा, पति शब्द सुनकर ही नैना ज़ोर से रो पड़ी "पति... कैसा पति? ऐसा इंसान जिसने शादी जैसे पवित्र बंधन का मज़ाक बना दिया, ऐसे आदमी को आप पति कहेंगे??" नैना की ये बातें सुनकर, राजीव को अपर्णा ने उसके साथ किये हुए धोखे की याद दिला दी।

नैना एक अनाथ थी, बचपन से ही वो एक अनाथ आश्रम में पली बड़ी थी। नौकरी के सिलसिले में उसकी मुलाकात एक सूरज नाम के लड़के से हुई, धीरे धीरे मुलाकात प्यार में बदल गयी। सूरज ने अपने माता पिता से, उसकी और नैना की शादी की बात की, उसके माता पिता भी राज़ी हो गए उन दोनों की शादी काफी ज़ोर शोर में हुई। नैना और सूरज की शादी की पहली रात थी, नैना कमरे में, पलके बिछाये सूरज का इंतज़ार कर रही थी। इतने में उसे दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी, और उसने शर्म से अपने आप को समेट लिया, जब उसका घूँघट उठा तब उसने देखा की, उसके सामने सूरज नहीं बल्कि कोई और ही था "तुम कौन हो? और सूरज कहा है? सूरज.. सूरज...", नैना घबराकर चीखने लगी "चुप कर। सूरज नहीं आएगा, आज रात तू मेरी है मैंने तुझे, सूरज से ख़रीदा है। " उस आदमी की ये बातें सुनकर, नैना को यकीन नहीं हो रहा था। वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी, "बचाओ मुझे , कोई बचाओ" वो आदमी नैना की और बढ़ रहा था, और नैना अपने आप को बचाने की पूरी कोशिश कर रही थी। उस आदमी ने गुस्से में नैना का सर दीवार पर पटक दिया। नैना ज़ोर से चिल्लाई, उसे चक्कर आने लगा था, पर उसने अपने पास पड़े हुए गमले से उस आदमी के सर पर वार किया। वो आदमी उधर ही बेहोश हो गया, नैना अपने आपको सँभालते हुए दरवाज़े की ओर भागी, उसने दरवाज़ा खोला ही था, की अचानक उसके सामने सूरज और उसके माता पिता आ गए। उन्होंने उस कमरे की हालत देखी और उन तीनों को काफी गुस्सा आया। "तेरी हिम्मत कैसे हुई यहाँ से भागने की", सूरज नैना से बोला "तू कही नहीं जाएगी, यही रहेगी। कल सुबह हमारे और भी कुछ मेहमान आ रहे है ", सूरज के माता पिता नैना से बोले "आप लोगो को शर्म आनी चाहिए। आप दोनों तो माँ बाप के नाम पर कलंक हो, और सूरज तुम... तुम तो एक पति के नाम पर काला धब्बा हो। आपको क्या लगा? में कमजोर हूँ? मैं आपकी ये बातें दुनिया के सामने लेकर लाउंगी", नैना काफी गुस्से में थी। "तुझसे पहले, न जाने ऐसे कितनी लड़कियाँ आयी और गयी, वो हमारा कुछ बिगाड़ नहीं पायी, तो तू क्या बिगाड़ लेगी ?" सूरज नैना से बोला। उसने ज़ोर ज़ोर से, नैना की पिटाई की। नैना वही बेहोश हो गयी, करीब आधी रात में नैना को जब होश आया, तब उसने देखा की उस कमरे की एक खिड़की खुली थी। वो आदमी भी वहाँ से जा चुका था, नैना ने अपने दुपट्टे से रस्सी बनायीं और वहाँ से भाग निकली। भागते भागते, वो उस सड़क किनारे झाड़ियों के पास पहुंच गयी थी, जहाँ राजीव ने उसे देखा था।

नैना की ये दर्द भरी कहानी सुनकर, वहाँ मौजूद सभी की आँखें भर आयी। "मैं कल सुबह होते ही यहाँ से चली जाउंगी" नैना ने राजीव की माँ से कहा "नहीं.. तुम कही नहीं जा रही.. तुम यही रहोगी , मेरे साथ। " राजीव के इस फैसले से उसकी माँ और घर के बाकी सभी काफी चौक गए। नैना और राजीव, एक दूसरे की ओर देखते रह गए, मन में कई सवाल लिए हुए..

तो आपको क्या लगता है? राजीव का ये फैसला आगे क्या नया मोड़ लाएगा?

क्रमश:

पति कमज़ोर दर्द

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