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ख़्वाहिशें
ख़्वाहिशें
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© Sanjay Nayka

Drama

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शहर के हाई क्लास एरिया में शाम का वक्त है। सड़को पर गाड़ियाँ तेज़ रफ़्तार से गुज़र रही है, ट्रैफिक सिग्नल ही है जो उन्हे थामे हुए है। शौपिंग मॉल में कस्टमर की भीड़ लगी है। पिज़्ज़ा-बर्गर की स्टाल लबालब भरी पड़ी है।

एक लकज़री कार सिग्नल पर आ कर रुकती है, कार में बैठी एक लेडी अपनी 7 साल की बेटी को बड़ी सी चॉकलेट देती है। लेकिन उसकी बेटी चॉकलेट खाने के बजाय हाथ में लेकर कार की सीट के उपर खड़ी होकर खिड़की से सिग्नल से थोड़े आगे फुटपाथ के उपर हवा में झूम रहे रंग बिरंगे गुब्बारों को देखती है। वो बच्ची मम्मी को दिखा कर गुब्बारों की तरफ इशारा करती है। उसकी मम्मी उस तरफ देखती है जिस तरफ उसकी बेटी इशारे कर रही है, वो देखती है की एक औरत फुटपाथ पर बैठी खिलौने बेच रही है और उसकी बेटी गुब्बारे बेच रही है। गुब्बारे बेचने वाली बच्ची का ध्यान गुब्बारे बेचने के बजाय सामने वाली बर्गर-पिज़्ज़ा की दुकान पर ज्यादा है ... जैसे उस बच्ची को बहुत भूख लगी हो ! उसका चेहरा भूख से बेहाल है। उसकी माँ खिलौने बेचती-बेचते नींद का झोंका ले रही है।

ग्रीन सिग्नल होते ही वो कार वहां से आगे बढ़ती है। कार में बैठी बच्ची का ध्यान अभी भी रंग बिरंगे गुब्बारों के उपर है। उसकी मम्मी मोबाइल में व्यस्त है।

कार अब वहाँ से गुजरती है जहां पर वो बच्ची गुब्बारे बेच रही है, दोनो बच्ची की नजर एक होती है। फुटपाथ पर खड़ी बच्ची की नजर चॉकलेट पर जाती है जो कार में बैठी बच्ची के हाथ में है।

कार बड़े से शौपिंग मॉल पर रुकी। वो शौपिंग मॉल गुब्बारे बेच रही लड़की से थोड़े से फासले पर ही है।

कार से मम्मी और उसकी बच्ची उतरते हैं। बच्ची अपनी मम्मी को गुब्बारे दिखा कर उसे दिलाने की ख़्वाहिश ज़ाहिर करती है पर उसकी मम्मी इशारे से ना बोलती है और आगे बढ़ने लगती है।

बच्ची गुब्बारे की ज़िद करते करते रोने लगती है। उसकी मम्मी उसे शांत करने के लिए दूसरी बड़ी सी चॉकलेट हाथ में थमा देती है। ये सब गुब्बारे बेचने वाली बच्ची देख रही है उसका अभी भी ध्यान चॉकलेट के उपर ही है।

बच्ची चॉकलेट को हाथ में लेकर गुब्बारे को देखते -देखते मॉल में जाती है। गुब्बारे बेचने वाली बच्ची भी उसकी तरफ देखती रहती है।

शौपिंग मॉल में जाते ही गाड़ी से उतरी बच्ची की मम्मी को फोन आता है और उसकी मम्मी बातें करने में बिज़ी हो जाती है। बच्ची मॉल के आईने से गुब्बारे वाली लड़की को देखती रहती है।

शौपिंग मॉल के गेट पर खड़ा सिक्युरीटी गार्ड बिल चेक करने में व्यस्त होता है और वो बच्ची अपनी मम्मी और सिक्युरीटी गार्ड की नजर से बच कर उस मॉल से बहार चली जाती है।

फुटपाथ पर खड़ी बच्ची ....मॉल से बहार आ रही उस बच्ची को देखती है।

वो उसकी माँ की तरफ देखती है, उसकी माँ अभी भी नींद का झोंका ले रही होती है। वो रंग बिरंगे गुब्बारे हाथ में लेकर उस बच्ची की तरफ आगे बढ़ती है।

दोनो चमकते चेहरे के साथ एक दूसरे के सामने आ रही है।

अब दोनो आमने-सामने खड़ी है।

दोनो एक दूसरे को देखकर फूलों जैसी मुस्कराहट बिखेरी ।

गुब्बारे वाली बच्ची उस बच्ची को एक गुब्बारा देती है और वो बच्ची अपने एक हाथ से गुब्बारा लेती है और दूसरे हाथ से गुब्बारे वाली लड़की को अपनी चॉकलेट देती है।

बिना किसी को पता लगे दोनो की ख़्वाहिश पुरी हो होती है।

गुब्बारे वाली बच्ची मुँह में चॉकलेट रख के और कार से आई बच्ची गुब्बारे से खेलती हुई जहाँ से दोनो आई थी वहाँ की तरफ बढ़ जाती है।

गुब्बारा चॉकलेट बच्ची

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