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पीढ़ियों का अंतराल
पीढ़ियों का अंतराल
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© Susheela Pal

Children

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-ज़िन्दगी किस ओर करवट लेगी... कुछ पता नहीं है। है न गोलू..!!
-फिर से गोलू कहा मोटी तूने!
-नही रे...तू तो मेरा प्यारा भाई है।
-अभी कहाँ से मुँह उठा के चली आ रही है?
-दरवाजे से।
-बाकि जगह तो सिर झुकाकर जाना होता है...मम्मी के आदेश अनुसार।
छुटकी की बातों में रोष और करारा व्यंग्य था।
 
छुटकी को गए घंटो बीत गए थे लेकिन उसके शब्द बारह वर्ष के गोलू के कान में गूंज रहे थे। गोलू विचारों में ही था कि मम्मी की पुकार आयी।
"गोलू हाथ-मुँह धुल लिए हो तो चलो खाना परोसा है। खाने के मेज़ पर बैठते हुए... "मम्मी..दीदी आज गुस्सा है क्या?"
मम्मी ने प्रश्न का उत्तर तो नही दिया किन्तु उबल पड़ी।
"आजकल के बच्चों को एक नसीहत दे दो तो बर्दाश्त नही कर सकतें। और एक हम थे, गलती न होने के बावजूद चुपचाप सुन लेते थे, मजाल है कि आँख उठाकर देखभर लें।

गोलू थाली में परोसा हुआ खाना खा चूका था और मांगने की इच्छा न हुईं।
गोलू ने प्रश्न किया... ऐसा किये जाने पर आप खुश थीं?
माँ बर्तन साफ करते हुए गोलू को देखती रह गयी।
गोलू भी कुछ नही बोला, मेज़ से उठा जूठी थाली सिंक में रखकर अपने कमरे में चला गया।
माँ सारे काम से निपटकर बच्चों के कमरे में गई। छुटकी उठो, कुछ खा लो,बेटा।
छुटकी रुआँसे स्वर में "मम्मी! आप ऐसी बात करती ही क्यों हैं? कि हमें नाराज़ होना पड़े।" अब आ गईं, मनाने।
माँ छुटकी को लगभग अपने गोद में लेते हुए कहती हैं "बेटा! तुम पंद्रह वर्ष की हो गई, है न?
छुटकी ने बात काटते हुए 'मम्मा... इस बात को सिक्स मन्थ हो गए हैं।"
हाँ, जानती हूँ।
हम जिन लोगों के बीच रहते हैं, वो सारे अपने ही तो हैं।
जैसे तुम्हारे कॉलेज में कुछ नियम बनाए गए हैं, वैसे ही हर परिवार और समाज के कुछ नियम होते हैं।
हम जिस समाज में जन्म लेते है, उस समाज के नियमों का पालन करना हमारा कर्तव्य है। उनके आधीन रहने से हमें ज़िन्दगी से तालमेल मिलाने में सहजता बनी रहती है।
वही तो मैं भी कर रही हूँ।
मम्मा आप का दौर कुछ और था...न...!
आज समय बदल रहा है। आप के समय में सिर झुकाकर चलना शालीनता माना जाता था। किंतु आज के समय में कमज़ोरी मानते हैं। मैं कमज़ोर नही बनना चाहती।
आप मुस्कुरा क्यूँ रही हैं?
माँ ने छुटकी को खींच कर अपने सीने से लगा लिया। और सिर पर हाथ फेरते हुए, कहा मेरी छुटकी तो बहुत समझदार हो गयी।
थाली से निवाला खिलाते हुए कहती है "अब से कुछ नही कहेंगे।"
किन्तु छुटकी को मम्मा से प्रॉमिस करना होगा कि छुटकी मम्मा से सब कुछ शेयर करेगी... हैं न?
छुटकी माँ से गले लगते हुए कहती है, बिलकुल मम्मा...आफ्टर ऑल, वी बोथ आर फ्रेंड्स।

मानवीय संवेदना प्रकट करती है।

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