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© K D Charan

Crime Drama Fantasy

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अखबार प्रिंट सेक्शन में गए अभी पंद्रह मिनट ही हुए थे। लगभग सारे रिपोर्टर कॉन्फ्रेंस रूम के पास वाले कमरे में ही थे। किसी के गले में कैमरा था तो किसी के रिपोर्टिंग बैग, कोई सिगरेट का कश ले रहा था तो कोई चिप्स से चुहल कर रहा था। अचानक कार्यकारी संपादक और एक नए एडिटर के रूम में पहुँचते ही सारी सिगरेटें और चिप्स के पैकेट एक साथ दबा दी गयी, पूरा रूम सिगरेट के धुंए से ही भरा हुआ सा लगा। कोई आवाज़ नहीं आ रही थी सिवाय चाय बांटने वाले चपरासी की चप्पलों के घिसटने और एडवरटाइजिंग सेक्शन के म्यूजिक सिस्टम पर चल रही इंस्ट्रुमेंटल धुन के। उन दोनों ने आते ही हर एक रिपोर्टर के चेहरे पर एक परीक्षक की नज़र डाली और निरंजन पर आकर नज़रें रुक गयी, जो अभी तक अपना चिप्स पैकेट बैग में छिपाने की कोशिश कर रहा था। 

इसी बीच नए एडिटर की आवाज़ नाराज़गी से लपेटी हुई निकली- सुनो! तुम ही गए थे न वो रॉयल वेडिंग वाली न्यूज़ लाने के लिए? क्या हुआ?

निरंजन ने हम सबकी तरफ कातर नज़रों से देखकर ढीला सा जवाब दिया "मैं गया तब तक वो लोग निकल चुके थे। हर तरफ से कोशिश की लेकिन खबर हाथ न लगी।"

नए एडिटर ने हाथ सिर तक ले जाकर झटकते हुए कहा- "बुल शिट! ऐसे ही निकालते रहना। किसी काम के नहीं रहोगे एक दिन। यहाँ ये चाय बांटने वाला है न वो भी तुमसे ज़्यादा समझदार है, उसकी जगह भी नहीं रखूँगा तुम्हें।"

-क्या हो गया था? दस मिनट ही तो लगते है वहां पहुँचने में और तुम आधा घंटा पहले निकले थे।

निरंजन ने इस बार और धीमे स्वर में कहा "रास्ते में एक बुज़ुर्ग मिल गया, मिन्नतें करते हुए बोला "मुझे रात में दिखता नहीं, क्या तुम घर छोड़ दोगे.........."

इस बीच एडिटर की आवाज़ और कड़क के साथ गरजी "और तुम! निकल गए गधों की तरह समाज सेवा करने। इस तरह समाज सेवा करने से इतना बड़ा अखबार नहीं चल सकता। आज के बाद ऐसा नहीं होना चाहिए।"

रूम में उगला हुआ सारा धुआं मानो निरंजन के आस-पास जमा करके सब लोग एक के बाद एक निकल गए। वो धीरे-धीरे धुंए से भरा जा रहा था। उसे इस बात का कोई गम नहीं था कि अगले एक महीने तक उसे लाइम लाइट में रखने वाली खबर उससे छूट गयी बल्कि गम था कल किस अखबार के दफ्तर में जाकर नौकरी ढूंढेगा। वो इतने बड़े और नामी अखबार के नाम को इस तरह डुबाना नहीं चाहता था। कई बार टटोलने के बाद वो किसी तरह अपने चिप्स के पैकेट को बाहर निकाल पाया और उसे डस्टबीन में डालकर खुली हवा में आ खड़ा हुआ......

कहानी के_डी_चारण नयी कहानी नयी जॉइनिंग कहानीजिंदगीकी

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