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हाई हील्स
हाई हील्स
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© Sonam Gupta

Inspirational

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वह आइने के सामने खड़ी होकर कभी अपनी जांघों को देखती तो कभी अपने कंधे को। फिर बेचैन होकर ड्रॉवर में इंचीटेप ढूंढती। उस इंचीटेप से अपना कद नापती। 5 फुट 4 इंच। फिर अपनी जांघों को उसी टेप से नापती। बार-बार आइने के सामने खड़ी होकर अपने आप को ऊपर से नीचे निहारती करुणा। जैसे ही उसकी आंखे आइने की करुणा की आंखों से मिली वैसे ही वह फूट पड़ी। करुणा अपने मुंह पर दोनों हथेली रखकर रोते-रोते फर्श पर बिखरने लगी और एक करूण स्वर के साथ पूरे कमरे में उसके रोने की आवाज गूंज गई। करुणा घंटों वहीं बैठी रोती रही। कुछ देर बाद दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई और उसने तुरंत अपने आंसू पोछकर इंची टेप को ड्रेसिंग टेबल के ड्रॉवर में वापस रख दिया। वापस उसी आइने में अपने चेहरे को जल्दबाजी में देखा और बिखरे बालों को हाथ से ठीक करते हुए अपने टी-शर्ट को कमर तक खींचकर दरवाजे के पास पहुंच गयी। दरवाजे के उस पार मम्मी थी।

कमरे के भीतर प्रवेश करते हुए वे बोली, क्या कर रही थी? इतना टाइम लगता है दरवाजा खोलने में। करुणा ने बेहद धीमी और कुछ हद तक घबराई हुई आवाज में कहा कि नहीं...वो मैं, थोड़ा लेट गयी थी।

इसी बीच मम्मी ने लॉन्ड्री से आए कपड़ों को करूणा के अलमारी में रखना शुरू कर दिया। करुणा भी अपना मुंह मम्मी से चुराते हुए कमरे में यहां-वहां पड़े सामानों को समेटने लगी। मम्मी को और भी काम थे। इसलिए मम्मी ने जल्दी-जल्दी करुणा के कपड़े अलमारी में रखे और करूणा को पढ़ने की हिदायत देकर चली गयी।

करुणा ने मम्मी के जाते ही फिर से कमरा बंद कर लिया और बिस्तर पर औंधे मुंह लेट गयी। लेटते ही उसकी आंखों से आंसू बहने लग गए और वह रोती-रोती कब सो गयी उसे पता ही नहीं लगा। सुबह करुणा की नींद 7 बजे के अलार्म से खुल गई। रो-रोकर उसका शरीर उसे एकदम शक्तिविहीन और भारी-भारी सा लग रहा था। जैसे-तैसे वह ऊठकर बाथरूम में गयी। वहां ब्रश करते हुए उसका ध्यान फिर से बाथरूम में लगे आइने की तरफ चला गया। उसकी पलकों पर लाल-लाल पपड़ी पड़ गई थी।  आंखों की सफेदी रोने की वजह से लाल रेखाओं से पटी थी। उसके गोरे-चिट्टे चेहरे की कांति मानो कहीं खो गई हो। अपना चेहरा देखते ही उसकी आंखें फिर छलक ऊठी। उसने ब्रश को अपनी अंगुलियों से और कस के दबा लिया और वॉश बेसिन की ओर सिर झुकाकर जोर-जोर से रोने लगी। लंबे समय तक बाथरूम में बैठकर वह रोती रही। होश संभालते ही वह बाथरूम से बाहर निकली और बगैर कुछ खाये-पिये घर से निकल गयी।

      थोड़ी देर बाद जब करुणा घर लौटती है, तो घर पर कोई नहीं होता है। मम्मी नानी के घर उनको मिलने गयी है और पापा ऑफिस। बिना कुछ खाए-पिए वह अपने कमरे में चली जाती है। कमरे में लगे आईने को देखते ही वह फूट-फूटकर रो पड़ती है। उसकी नजरों के सामने वह दृश्य पुन: चित्रित हो जाता है। सुनील करुणा का हाथ पकड़कर उसे आइने के सामने अपने साथ खड़ा करता है और उसकी जांघों को और अपनी जांघों को मिलाकर कहता है, "देखो तुम्हारी जांघे मेरी जांघों से कितनी मोटी है। फिर सुनील करुणा को सीधा खड़ाकर कंधे से कंधा मिलाकर कहता है हम एकदम बराबर हैं। तुम अगर थोड़ा-सा भी और तन कर खड़ी हो जाओ तो मैं तुमसे छोटा ही लगूंगा। ये देखो तुम मुझसे कितनी बड़ी लगती हो।"

करुणा सुनील की तरफ आश्चर्य से देखती है। सुनील उसका  चेहरा आइने की तरफ मोड़ते हुए कहता है, "सामने देखो। वहां देखो।" करुणा एकदम स्तबध खड़ी रह जाती है। उसे कुछ समझ में नहीं आता कि सुनील अचानक ऐसी बाते क्यों कर रहा है। वह ये सब क्या बोल रहा है और क्यों बोल रहा है? वह सुनील से कहती है, "तुम क्या कह रहे हेा? मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा।" सुनील अपनी सारी बात वापस दोहराता है। सुनील की चिढ़ और हताशा से उसे सुनील की बाते कुछ-कुछ समझ में आने लगती हैं। 

दरअसलसुनील के शब्दों को तो वह पहले ही समझ गयी थी, लेकिन उसे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था। उसे उन शब्दों के अर्थ कुछ समझ ही नहीं आ रहे थे। उसका सुनील ऐसी बातें थोड़े न कर सकता है। जरूर उसे ही सुनने या समझने में कोई गलतफहमी हुई होगी। लेकिन जब अंत में सुनील साफ शब्दों में कहता है कि मैं, हमारे रिश्ते को लेकर कॉन्फिडेंट नहीं हूं। तो करुणा को तो जैसे एक सदमा सा लगा हो। उसे कुछ समझ नहीं आता। उस पल उसका व्यक्तित्व एकदम अस्त-व्यस्त हो जाता है। वह एक बच्चे की तरह नादान और नासमझ बन जाती है या शायद किसी बच्चे से भी ज्यादा मासूम और इस स्वार्थी दुनिया से अनभिज्ञ। वह सुनील से उसके बातों का मतलब पूछती है। सुनील बार-बार वही बात दोहरा कर खीज ऊठता है। फिर से करुणा के पूछने पर चिढ़ कर वह वहां से चला जाता है।

करुणा भावनाशून्य होकर वहीं खड़ी रह जाती है। वह शाम को सुनील को फोन करती है। सुनील उसे फिर से उसके और अपने बतौर कपल लुक को लेकर अपनी असहजता के बारे में और भी विस्तार से बताता है। करुणा को लगता है कि सुनील नए-नए जॉब की वजह से कुछ परेशान है। इसलिए वह परेशानी में ऐसी बहकी-बहकी बातें कर रहा है। वर्ना अब तक तो ऐसी बात कभी नहीं हुई थी। रात में सुनील करुणा को फोन पर बताता है कि अपने दोस्तों के सामने और अपने परिजनों के सामने करुणा के उससे उम्र में बड़े लगने और हाईट में लगभग बराबर होनी की वजह से उसके साथ असहज महसूस करता है। सुनील समझाते हुए निराश शब्दों में कहता है, "बेबी, तुम समझ नहीं रही हो। आय एम नॉट कर्म्फटेबल द वे वी लुक टुगेदर।"

करुणा, "बट वाय? अचानक ऐसा क्या हुआ?"

      सुनील, "ये अचानक नहीं हुआ। मैं, बहुत दिनों से इस बारे में सोच रहा था। मैंने तुमसे बीच में डिस्कस भी तो किया था।"

      करुणा, "अरे, बट आय थॉट, तुम हमारे रिश्ते को अपने घर में बताने को लेकर अभी अनकर्म्फटेबल हो। मुझे लगा तुम्हे उस बात को लेकर हिचक हो रही है। न कि हमारे लुक को लेकर।"

सुनील, "नहीं करुणा। तुम समझ क्यों नहीं रही। तुम न केवल दिखने में बड़ी लगती हो, बल्कि उम्र में भी मुझसे 1 साल बड़ी हो ही। अभी हम देानों के बीच इतना फर्क साफ नजर आता है। तो जब मैं, 30 का हो जाऊंगा तब तो तुम और भी ज्यादा ऐज्ड लगोगी।"

यह सुनते ही करुणा का गला रूंध जाता है, वह कुछ नहीं कह पाती।

सुनील फिर बोलता है, "करू, मैं, नहीं चाहता कि इन फ्यूचर फिर से ऐसी फिलिंग आए और तब बहुत देर हो चुकी हो। उससे पहले यही ठीक है कि हम अभी अपने रिश्ते के बारे में फिर से सोच लें।"

रिश्ते पर पुर्नविचार का शब्द ककरुणा के मन को एकदम छलनी कर देता हैं, वह अपने रूंधे हुए गले से कुछ हद तक चिल्लाते हुए कहती है, "क्या सोच लें? सुनील, हैव यू लॉस्ट योर सेंसेस। मेरे मॉम-डैड को अभी एक महीने पहले ही हमने हमारे रिश्ते के बारे में बताया है न! और पिछले 5 सालों में तुम्हे कभी याद नहीं आया कि मैं, तुमसे उम्र में 1 साल बड़ी हूं? अब अचानक ये हैप्पी रियालेजशन हो रहा है?" कुछ रूकते हुए और फिर कुछ बिखरी हुई हिम्मत को वापस जुटाते हुए करुणा खीज कर कहती है, "तुम क्या बात कर रहे हो तुम्हे कुछ समझ में आ रहा है? इट्स बिन 5 इयरस् सुनील। तुम्हे अब ये सब महसूस हो रहा है। जब मेरे मां-पापा हमारे रिश्ते की बात करने तुम्हारे घर आना चाहते हैं, तब।"

सुनील का गला भी अब रूंध गया। वह भी अपने 5 साल के इस लंबे रिश्ते को यूं ही खत्म नहीं करना चाहता। लेकिन वह खुद भी नहीं समझ पा रहा है कि वह अचानक से करुणा के उम्र व लुक को लेकर इतना गंभीर क्यों और कैसे हो गया है। वह करुणा को लेकर कश्मकश में पड़ जाता है। वह बाद में बात करने को कहकर फोन रख देता है।

    लेकिन उसी दिन से करुणा बहुत बेचैन रहने लगती है। उसका दिल और दिमाग न तो हॉस्पीटल में लगता है और न ही अपनी पीजी की तैयारी में। उसने जब से सुनील के मुंह से अपने लुक को लेकर अनकंर्फटेबल होने की बात सुनी थी। तब से वह खुद को बहुत बद्सूरत और मोटी मानने लगी थी। उसने पिछले 4 दिनों से न ठीक से कुछ खाया था और न ही अपने पीजी की तैयारी के लिए एक पन्ना पढ़ा। वह दिन-रात सुनील के बारे में उसकी बातों के बारे में सोचती रहती। खुद को आइने में देखती और अपने लंबे होने पर कोफ्त करती।

सुनील से उसका रिश्ता शुरू होने से पहले उसे हाई-हील्स पहना बहुत पसंद था। उसके वॉर्डरोब में दर्जनों एक इंच से लेकर 5 इंच तक की हाई हील्स शूज का ढेर लगा हुआ था। लेकिन सुनील से प्यार होने के बाद जब वे दोनों एक दिन साथ में सुनील के बेहद करीबी दोस्त की बर्थडे पार्टी में गए थे, तो वहां करुणा को हाई हील्स में देखकर सुनील ने उसे बहुत डांटा था। उसने उसे अपने और उसके हाईट के बराबर होने की बात कहकर  पार्टी के अंदर जाने से पहले ही हील्स ऊतारने के लिए कह दिया था। करुणा ने उसी घटना के बाद से सुनील को असहज महसूस न हो इसलिए अपने सारे हाई हील्स एक ड्ड्रॉवर में डालकर उन्हे हमेशा के लिए भूल गयी थी। अब वह केवल फ्लैटस् पहनती थी। जबकि, उसे 13 साल की उम्र से ही हील्स पहनने का बहुत शौक था। इसी शौक के चक्कर में उसने कई अलग-अलग तरह के हील्सवाले सैंडल तब ही से इकट्ठा करना शुरू कर दिया था।

करुणा ने अपना वजन भी 5 किलो से ज्यादा सुनील के लुक के साथ मैच करने के लिए घटा लिया था। वहां सुनील भी दिन-रात अपनी हाईट बढ़ाने की कोशिश करता था। लेकिन जब हाईट बढ़ने की उम्र पार हो गयी। तब उसे धीरे-धीरे करुणा और अपने साथ के फोटोज् देख-देखकर कुछ हिचक-सी होने लगी। पहले कुछ सालों तक सुनील को अपने हाईट के बढ़ने और शरीर के और हस्ट-पुस्ट होने की उम्मीद थी। पर समय के साथ उसकी सारी उम्मीदें टूटती गयी। और शायद उन्ही उम्मीदों के साथ करुणा के प्रति उसका प्यार भी टूटने लगा। 

यहां करुणा को इन सब के बीच एक बार भी अपने स्वाभिमान की याद तक नहीं आयी थी। वह तो बस अपने और सुनील के रिश्ते को बचाने की कोशिश में थी।  वह नहीं चाहती थी कि उसके मम्मी-पापा को इस बारे में पता लगे। शायद वह न केवल अपने लिए बल्कि अपने से ज्यादा अपने मम्मी-पापा के लिए यह रिश्ता बचाना चाहती थी। पिछले 5 सालों में उन दोनों ने हर उस चीज का अनुभव ले लिया था, जिसकी एक युवा युगल को दरकार रहती है। इसी बीच एक दिन जब करुणा हॉस्पीटल में अपना काम खत्म कर बैठी थी कि तब ही रागिनी वहां आती है। रागिनी उसकी और सुनील की कॉमन फ्रेंड है। ये तीनों एक ही साथ बारहवीं तक एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। लेकिन सुनील ने आगे इंजीनियरिंग का क्षेत्र चुन लिया था, तो करुणा और रागिनी का एडमीशन डेंटल कॉलेज में हो गया। रागिनी और उसकी शिफ्ट कुछ दिनों से अलग-अलग हो गयी थी। इसलिए वे दोनों मिल नहीं पा रही थी। आज हफ्ते भर बाद रागिनी को देखकर करूणा अपने आप को संभाल नहीं पाती। उसका चेहरा एकदम रूआंसा हो जाता है और वह तुरंत रागिनी को गले लगा लेती है। रागिनी मामले को समझते हुए उसे हॉस्पीटल के गार्डन की ओर ले आती है। वहां करूणा अपने मन का हाल रागिनी के सामने रखती है।

         करुणा रागिनी का हाथ पकड़ते हुए, "रागिनी। मुझे अपने आप से बहुत चिढ़ हो रही है। इतने लंबे रिलेशनशीप में मैंने उसके लिए क्या कुछ नहीं किया। एग्जामस् के वक्त खुद से पहले उसका रिवीजन करवाने से लेकर उसके जॉब लगने तक उसका साथ हर पल दिया। पर अब सिर्फ मेरी कमबख्त हाईट और इस किलोभर की चर्बी की वजह से हमारा रिलेशनशीप टूट रहा है। मैं, इसे ऐसे नहीं टूटने देना चाहती।"

कुछ ठहर कर सामने शून्य में घूरते हुए वह अधीर होकर कहती है, "मैं, अपने इस शरीर और इस उम्र का क्या करूं रागिनी।"

      करूणा के अपने आप को लेकर अपने शरीर को लेकर इतनी निराशाभरी बाते सुनकर रागिनी अचरज में पड़ जाती है। वह करूणा से स्पष्ट रूप में कहती है, तुम पागल हो गयी हो क्या। यू लुक मच बेटर देन हिम। लुक में भी और पर्सनेलिटीवाइज भी तुम सुनील से बेहतर हो। सो, ऐसी बकवास बातें सोचना बंद करो। और जहां तक सवाल हैं रिश्तों का तो उन्हें तब ही आगे बढ़ाना चाहिए, जब दोनों उसकी कद्र करते हों।"

करुणा और रागिनी के बीच कुछ देर और बहस होती है। फिर करुणा खाली मन से घर लौट आती है, लेकिन अब उसका दिमाग बहुत सारी बातों से भरा हुआ है। जिसके पिछले सप्ताहभर से सोचने समझने की क्षमता कहीं घुम हो गयी थी। वह अचानक फिर से सक्रिय होकर लौट आयी थी। रागिनी से बात कर के करुणा एक नए सिरे से सारे मामले पर सोचने लगी थी। अपने और सुनील के फोटोज को फोन में देखते हुए उसने पहली बार अपने को सुनील से सचमुच बेहतर पाया। सुनील सांवले रंग का पतला-दुबला एवरेज लुकिंग लड़का था। वहीं उसकी तुलना में करूणा का व्यक्तित्व काफी विकसित व आर्कषक था। लेकिन सुनील के प्रखर बुद्धि की कायल करुणा को केवल सुनील का दिल नजर आ रहा था। उसने उसके लुकस् के बारे में कभी सोचा ही नहीं और न ही सोचना चाहती थी।

करुणा के मन में कई विचार घूमड़ने लगे। वह अपने 5 साल के रिश्ते को शुरू से लेकर अब तक सिलसिलेवार एक नए  नजरिये के साथ याद करने लगती है। उसने रिश्ते की शुरूआत के पहले दिन से ही अपने आप को पूर्ण रूप से सुनील को समर्पित कर दिया था। तन, मन और आत्मा से उसने अपने को सुनील को सौंप दिया था। कई ऐसे छोटे-बड़े निर्णय जो उसकी इच्छा और पसंद के खिलाफ थे, सिर्फ और सिर्फ सुनील के खुशी के लिए उसने लिए थे। पीजी की पढ़ाई के लिए वह विदेश जाना चाहती थी, लेकिन सुनील इसके पक्ष में नहीं था। इसलिए उसने भी अपना मन बदल लिया। उसे चौकलेट्स बहुत पसंद थे। लेकिन अपने वजन को नियंत्रित करने के लिए उसने सालभर से चॉकलेट को हाथ भी नहीं लगाया था।

    यह सब सोचते-सोचते करुणा का मन अपने प्रति सकारात्मकता की अनुभूति करने लगता है। करूणा खुद से ही सवाल कर खुद ही उनके जवाब अतीत में गुजरे सुनील के साथ उसके लम्हों से ढूंढकर अपने नए नजरिए से उन्हे विश्लेषित कर देने लगी। जब मुझे किस करना होता था, तब तो सुनील को मेरी हाईट ज्यादा नहीं लगी? जब वह मेरे साथ सेक्स कर रहा था, तब उसे मैं, क्यों मोटी नहीं लगी? उसने तब ही क्यों नहीं कह दिया कि सॉरी तुम मुझे सूट नहीं करती। मेरे साथ डिस्क में नाचते वक्त उसे क्यों नहीं महसूस हुआ कि मैं, उससे एक साल उम्र में बड़ी हूं। मेरे मम्मी-पापा को बताते वक्त उसका कर्म्फट जोन कहां चला गया था? यह सब सोचते-सोचते उसने अपने भीतर एक अदम्य आत्मविश्वास और तेज प्रकाश का उजियारा और गरमाहट दोनों महसूस किया।

उसे लगा जब वह हर मायने में सुनील से सचमुच बेहतर है, तो वह क्यों सुनील के इतना कुछ कहने, इतनी बेइज्जती करने के बाद उसके साथ रहना चाहती है? क्या सिर्फ लुक्स ही सुनील के लिए सबकुछ है? क्या सिर्फ इसलिए कि हमारे रिश्तें को 5 साल हो गए है, इसलिए मैं, इसे अब तोड़ना नहीं चाहती? या फिर इसलिए कि सुनील के साथ मैंने अपने भविष्य के सपनें देखे हैं इसलिए।

करुणा के 5 सालों से दबे हुए स्वाभिमान ने अपने को कुछ जगाते हुए खुद को जवाब दिया, तुम अपने पापा की प्रिंसेस हो। तुम्हारे दोस्त तुम्हे इतना चाहते है। फिर एक सुनील के लिए तुम अपनी इच्छाओं और अभिलाषाओं को क्यों मार रही हो। तुम जैसी भी हो बहुत खूबसूरत और आकर्षक हो। फिर सुनील को क्या हक तुम्हे छोड़ने का?

यह सब सोचते-सोचते करुणा का मन साहस और उल्लास से भर गया। वह चेयर से ऊठती है और अपने वार्डरोब के ड्रॉवर में कहीं धूल-धूसरित पड़े हाई हील्स को बाहर निकालती है और उन्हे कपड़े से एक-एक कर साफ करती है। उनमें से अपनी फेवरेट 5 इंचवाली पहनती है। पहले तो वह ठीक से खड़ी न हो पाती। लंबे समय बाद हील्स पहनने की वजह से उसके पैर लड़-खड़ा जाते हैं। जब एक लंबे अरसे तक किसी के साथ चलने की आदत-सी लग जाए, तो अचानक अकेले चलने में लड़खड़ाहट का होना स्वाभाविक है। लेकिन इसमे कोई दोराय नहीं कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास के सहारे वापस पूरे जोश और एक नई उमंग के साथ खड़े हुआ जा सकता है। फिर वह एकाध कदम आगे चलती है और धीरे-धीरे वह उस पांच इंच की हील्स में एकदम सुखद अनुभव करने लगती है। वह दूसरे ड्रॉवर से तुरंत कुछ कॉफी मग, घड़ी, अलमारी से एकाध टी-शर्ट और फोल्डर में पड़े ग्रीटिंग कार्डस् और ऐसी ही ढेर सारी छोटी-मोटी चीजें इकट्ठा करके एक बड़े पॉली बैग में भरती है। फिर ढंग के कपड़े पहनकर, आंखों में काजल और लिपग्लास लगाकर वह हील्स पहनकर तैयार हो जाती है।

ऑटो पकड़कर वह सुनील के घर के नीचे पहुंचती है और वहां से सुनील को कॉल कर नीचे आने के लिए कहती है। सुनील तुरंत नीचे आता है और वहां करूणा को हाई-हिल्स में देखकर एकदम अचरज में पड़ जाता है। वह उससे सोसायटी के बाहर निकलकर कहीं बाहर चलने के लिए कहता है। करुणा उसे मना कर देती है और हाथ के पॉली बैग को सुनील के हाथों में थमाते हुए कहती है, "थैंक्यू सो मच सुनील। अब तक के सभी बेहतरीन पलों के लिए। और खास कर मुझे अपने आप से वापस मिलाने के लिए। मैं, तो तुम्हारे प्यार में खुद को भूल ही गयी थी। लेकिन आज फिर से करुणा सुनील से मैंकरुणा कश्यप बनकर ज्यादा खुश महसूस कर रही हूं।  सुनील मैं, अपने लिए बहुत स्पेशल हूं। अपने पापा की प्रिसेंस हूं। न मैं तुम्हारे लिए अपने हाई हील्स छोड़ सकती हूं और न ही तुम्हारे लिए महीनों डाइट पर रह सकती हूं। मैं, जैसी हूं, वैसी ही खुद को बहुत पसंद करती हूं। सो, इट्स बेटर की तुम कोई अपने स्तर की लड़की ढूंढ लो।" इतना कहकर करुणा पीछे मुड़कर वहां से जाने लगती है।

उसके इस चाल में अदम्य आत्मविश्वास है। उसके चेहरे पर उल्लास और स्वतंत्र होने की खुशी झलक रही है। उसका मन प्रफुल्लित हो ऊठा है। वह बहुत हल्का महसूस कर रही है और साथ ही जीवंत भी। उसके पैर एकदम चपलता के साथ हाई हील्स के ठक-ठक का आवाज करते पूरे आत्मसम्मान के साथ बढ़ते ही जा रहे हैं। 

High heels Feminism Anti Body Shaming

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