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लकीरें
लकीरें
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© Nadeem Naviwala

Drama Romance

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कुछ लकीरें हाथों की मिलती नहीं हैं कई बार, और कुछ मिलकर फिर जिंदगी भर बिछड़ती नहीं। कुछ अनकही यादें जो हमेशा आँखों में कैद रह जाती हैं, बस आँखें बंद करते ही सामने आ जाती हैं। इस कहानी में न कोई शिकवा है न कोई शिकायत, बस जो बयान है वो सिर्फ और सिर्फ हमारी मोहब्बत।

मोहब्बत के बाज़ारों में कुछ लोग अक्सर दर्द की दुकानों पर खड़े मिलते हैं, आज उसी दुकानों के सामने हम भी खड़े रह गए। ये दर्द की वजह सिर्फ और सिर्फ, कुछ सरहदों के फासले हैं, हमारी मोहब्बत हमसे आज, कोसो दूर हो चुकी है।

क्या वो फिर लौट आएँगे ?

यह सवाल जब भी दिमाग में आता है मुझे सैकड़ों टुकड़ों में तोड़ कर चला जाता है। कुछ पुरानी हसीं यादों में डूबा जाता है, जहाँ से शायद निकलपाना बहुत ही मुश्किल-सा अब लगने लगा है।

आज भी वो आखरी घंटे याद हैं हमें, जब उन्हें आखरी बार महसूस किया था।

वो सुबह बड़ी हसीं थी, वह हमारी बाहो में थी, पर कुछ घंटो बाद शायद सब बदलने वाला था। शायद रूह जिस्म से बिछड़ने वाली हो। बिखरे हुए रूम को सुधारा और फिर कुछ देर उनकी बाहों में बैठे रहे। हर पल उन्हें चूमते रहे, पता था कुछ वक्त बाद यह चेहरा काफी दूर जा चूका होगा। रूम्स से सारा सामन समेटा, मन नहीं था कुछ भी करने का पर पता कुछ घंटो में हमें इस लम्हे को यहीं समेटना है और उन्हें कोसो दूर जाना है।

बैग्स पैक हो चुके थे, बस एक फाइनल लुक बाकी था। इतने में एक मैसेज आना कि "डिअर कस्टमर योर फ्लाइट हैस बीन कैंसिलड, प्लीज कांटेक्ट दी कस्टमर केयर।" वो ख़ुशी से झूमने लगी पर मुझे पता था क यह सिर्फ पल भर की खुशियाँ हैं। एक लहर और सब डूबने ही वाला था। कस्टमर केयर को कॉल करते ही नेक्स्ट अवेलेबल फ्लाइट से बुकिंग कन्फर्म होगी। इस सब में मिला क्या बस एक और घंटा जिसमें जीना था।

वक्त चलता गया और धीरे-धीरे वह पल नज़दीक आने लगा। रूम छोड़ने से पहले हमने उसे गले से लगाया और उन्हें बेइन्तहाँ चूमने लगे और वह हमे चूमने लगी। बाहों में रोने लगे, नहीं जाना नहीं जाना की रट लगाने लगे। हमें पता था जाना तो होगा ही पर बस दिल नहीं मान रहा था, उसे समझाना मुश्किल था।

रिक्शा आ गयी और हम सारे बैग्स लेकर नीचे उतर गए। रिक्शा में हम एक दूसरों से सिर्फ नज़रे चुराते गए के अब देखकर रोना नहीं है, बस सामने खुश रहना है। हमने उनका सर अपने कंधो पर रख दिया और एक बच्चे की तरह उन्हें और खुद को समझाने लगे। पता था की अब बहुत जल्द हर रंग-बेरंग हो जाएगा। हर तरफ अँधेरा-सा छा जाएगा। अब कुछ वक्त उनकी आवाज़ और यादों क सहारे जीना होगा।। बस फिर कुछ देर एयरपोर्ट के बाहर बैठकर दोनों रोने लगे। वक्त के कांटे मिल गए और हम बिछड़ गए।

काश प्यार करने से पहले तक़दीर पता होती तो कोई शायद प्यार नहीं करता। मिलना बिछड़ना तो सब उसके हाथ में है, हम तो बस कटपुतली हैं जो लिखा है उसे पूरा करना है।

आज सब कुछ है पर वह नहीं है, काश कुछ नहीं होता और सिर्फ वो साथ होते तो ज़िन्दगी जीना मुश्किल नहीं होता। प्यार सब कुछ दे देता है; एक छोटा-सा आशियाना भी उनके साथ जन्नत बना देता है। वो थे तो मंज़िले थी रास्ते थे, आज सिर्फ एक सूखे पत्ते की तरह रास्तों पर हैं, बस अब हवाएँ हमें उड़ा ले जाती हैं, न रास्ता है ना कोई मंज़िल।

हमने हमेशा उनसे यह कहा है:

"इश्क़ में हम नाम करेंगे, हम मरकर भी तुझे याद करेंगे, जीते जी गर न पाया तुझे, तो फिर क़ब्र में तेेरा इंतज़ार करेंगे।"

कहानी लकीरें भाग्य मोहब्बत

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