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वह आम का पेड़
वह आम का पेड़
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© Rahul Bohara

Children Drama

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मैं अख़बार पढ़ रहा था।अचानक मेरा ध्यान पड़ोस के घर के आँगन में बैठी उस बच्ची की ओर गया।वह बैचेन थी,उसके दिल का दर्द उसके मुख से साफ़ दिखाई दे रहा था क्योंकि जिस आम के पेड़ को उसने 4 साल पहले कक्षा मे शिक्षक से वृक्षारोपण का वादा करने पर लगाया था उसे आज उसी के ही पिता कटवाने जा रहे थे।दोष इतना था कि आम का पेड़ घर के सामने आँगन पर लगा हुआ था और किसी पंडित ने उन्हें बताया था कि घर के मुख्यद्वार के समीप आम का पेड़ अशुभ होता है।अभी उस पेड़ मे फल आने मे एक वर्ष शेष था किन्तु उससे पहले ही उसकी निर्मय हत्या की तैयारियॉ पूरी कर ली गयी थी।बच्ची बार बार उस पेड़ को निहार रही थी,वह अपने पिता से कुछ कहने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी और मौन रहकर अपने दुःख को दबाने का प्रयास कर रही थी।पेड़ पर आरी चलनी शुरू होती है,बच्ची दौड़कर उस पेड़ के पास जाती है और उस पर लगे एक चिड़िया के घोंसले को सुरक्षित अपने पास ले आती है।

यह घटना मुझे झकझोर कर रख देती है।मैं अपने चश्मे को निकालकर आसुंओ को पोंछता हूँ और फिर से अखबार पढ़ना शुरू कर देता हूँ किन्तु मेरे सामने वही घटना बार बार नजर आती है और मन ही मन आवाज़ निकलती है कितनी भ्रमित है ना दुनिया,जो वास्तव मे समझदार है उसे अनजान समझती है और अज्ञानी को समझदार।अपने लाभ के लिए ना जाने कितने जीवनों का अंत करने मे भी नही हिचकिचाती।

फिर अचानक से अख़बार मे प्रकाशित एक घटना मे मेरी नजर पड़ती है,"एक नन्ही कली की जन्म से पहले ही भ्रूणहत्या"।

अंधविश्वास हिम्मत घोंसला

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