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अरमान
अरमान
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© Sachin Kumar

Drama Tragedy

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"चल ना क्या देख रहा है राजू, तुझे दिखता नहीं है क्या, हमें बहुत दूर जाना है अभी, माँ मारेगी ! काम भी सारा बचा पड़ा है, देख तेरा थैला बिल्कुल खाली पड़ा है।" रानी चलते हुआ कहे जा रही थी पर राजू ना जाने किस सोच मे है आज।

"अरे चल रहा हूँ, तू माँ से इत्ता क्यों डरती है ? चल यहाँ से !" कुत्ते को डंडी से भगाते हुए राजू बोला, "हमारी भी क्या किस्मत है, कुत्तों के बीच में ही रहना पड़ता है।" रानी मुस्कुरा दी और पन्नी से गंदगी हटाते हुए और थैले में रखते हुए बोली, "और अगर कुत्ता किसी सेठ का हो तो मार भी खानी पड़ती है।"

"अच्छा ये बता राजू ,अमीरों के घर जनम लेने के लिए क्या करना पड़ता होगा, क्या टोटका करना पड़ता होगा वहाँ जनम लेने के लिए, बढ़िया खाना, बढ़िया पहनना, खूब सारा पैसा, अच्छी-अच्छी जगह घूमना फिरना, और एक हम हैं, जो सारी जिंदगी बस पन्नियाँ चुगने में गुजार देते हैं, और पैसा बाप दारू में पी जाता है। बापू इत्ता क्यों पीता है ?" "मुझे नहीं पता", राजू ने चिढ़ते हुए कहा मानो उसे अपने बाप से जुड़ी कोई बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं हो, "और तू चिंता मत कर हम हमेशा ऐसे नहीं रहेंगे।"

"मैं हूँ ना ! तू बस तैयारी कर ले, मैंने एक स्कूल देखा है, जिसमें हम दोनों पढ़ने जाया करेंगे, फिर पढ़ लिख कर हमारे और हमारी माँ के दिन बदल जायेंगे।"

"सच्ची !!" रानी ने खुश होते हुए राजू की तरफ देखा।

पर अगले ही पल कुछ मायूस होते हुए बोली, "हम जैसे लोगों के सपने पूरे नहीं होते राजू, तू अपने काम पे ध्यान दे वरना मैं तो बच जाऊँगी, पर बापू तेरी खाल खींच लेगा। अगर उसे पैसे नहीं मिले तो जानता है ना तू ?" "हम्म !" कहते हुए राजू ने लम्बी सांस ली।

"आज तो ठंड भी बहुत है।" "हम्म, तीन दिन से सूरज के दर्शन ही कहाँ हुए हैं।" रानी बोली, "और कहीं आग भी नहीं मिली की थोड़ी सेक ही लगा लेते, अबकी तो ठण्ड भी हर साल से ज्यादा ही पड़ रही है सब लोग कह रहे हैं", राजू लकड़ी को कुरेदते हुए बोला, "आ चल कहीं आग ढूँढ़ते हैं, कहीं तो जल ही रही होगी।"

"नहीं रे !" रानी ने मायूस होते हुए कहा, "हमें पास भी नहीं आने देगा कोई, डांट कर भगा देंगे, देख लेना इस दुनिया में गरीब होना सबसे बड़ा अपराध है, जैसे पता तो है नहीं तुझे।" "एक दिन में बड़ा आदमी बनकर दिखाऊंगा ! तू बस देखती जा।" राजू ने हाथों को हवा में हिलाते हुआ कहा। "वह क्या है ?" रानी ने दूसरी तरफ इशारा करते हुए कहा। "इतने आदमी क्यों है वहाँ पर ? अरे वहाँ तो भोला भी खड़ा है, वो सुंदरलाल का बेटा।" राजू ने भी उस ओर पलट कर देखा, "अरे हाँ !"

"तू यहीं रुक, मैं अभी देख कर आता हूँ", कहकर राजू उस और चला गया।

"अरे भोला तू यहाँ पर क्या कर रहा है, और ये सब क्या है, इत्ते लोग यहाँ क्या कर रहे हैं ?" राजू ने अपने सवालों की बरसात भोला पर कर दी, भोला ने सांस लेते हुए बोला, "बताता हूँ, तस्सली तो कर।"

"अच्छा बता !" राजू बोला।

"ये शेल्टर होम है", भोला बोला, "यहाँ पर हम जैसे गरीब लोगों के लिए रात गुजारने की व्यवस्था सरकार ने की है, यहाँ पर आग है, पानी है, और सोने के लिए सिर पर छत है, जिससे सर्दी से कुछ राहत मिल जाती है।"

"पर तू बता, तू यहाँ क्या कर रहा है ?" "वही पन्नियाँ चुग रहा हूँ ।" राजू ने सर नीचे करते हुए कहा। "और रानी कहाँ है ?" भोला बोला, "वो भी यहीं है ।" पास में राजू ने जवाब दिया।

"अच्छा ये बता, क्या हम भी यहाँ पर रात गुजार सकते हैं ?" राजू ने संकोच करते हुए कहा। "क्यों नहीं ! कोई भी यहाँ आ सकता है और ये सब फ्री है !" भोला चहकते हुए बोला।

इतने में रानी भी वहीं पर आ गई, राजू ने सारी बात रानी को बताई और उसे वहाँ रुकने को बोलकर माँ को बुलाने के लिए निकल गया।

"माँ-माँ कहाँ है तू ?" जोर-जोर से राजू फ्लाईओवर के नीचे खड़ा चिल्ला रहा था, कि तभी रेल की पटरियों की तरफ से माँ को आते हुए देख कर भाग कर वहीं जाकर बोला, "माँ तू चल मेरे साथ, मुझे तुझे कुछ दिखाना है !" "पर तू इतनी जल्दी कैसे आ गया ?" कुंती गरम होते हुए बोली, "तुझे पता नहीं है क्या कि तेरा बाप तुझे कितना मारेगा अगर तू उसे पैसे लाकर नहीं देगा तो, और रानी को कहाँ छोड़ आया ?" "बताता हूँ माँ, सब बताता हूँ, तू चल तो सही मेरे साथ।" "पर कहाँ ?" कुंती बोली।

"बस यहीं दो कोस पे, और रानी भी वहीं है, तू चल ना इत्ते सवाल क्यों पूछ रही है ?" "अरे वो कलुआ भी आने वाला है, तेरे बापू ने उससे भी पैसे ले रखे हैं, और वो आज आ रहा है, उसे अगर पैसे नहीं मिले तो ये जगह भी छोड़नी पड़ेगी हमें।" "अरे माँ ! वहीं तो ले जा रहा हूँ तुझे मैं, मैंने एक जगह ढूँढी है, वहाँ पर छत भी है, जलाने को आग भी है, और पीने का पानी भी है।"

"क्या बके जा रहा है तू ? यहाँ रहने के तो पैसे हैं नहीं, और तू इत्ती सुविधाओं वाली जगह बता रहा है, पैसे कहाँ से लाएँगे ? उसके लिए तेरा बाप खाने तक के तो पैसे छोड़ता नहीं है वहाँ कैसे रहेंगे।"

"तू बोलती बहुत है माँ ! बस तू चल मेरे साथ।" हाथ पकड़ कर खीचते हुए राजू बोला। "अच्छा चल !"

कुछ ही देर में माँ के साथ राजू उस जगह पर पहुँच गया और माँ को वहाँ के बारे में सारी बात बताई, साथ कह दिया, "बापू को बुलाने की कोई जरूरत नहीं है, वैसे भी वो करता ही क्या है, सिवा दारू पीने और हमें मारने के।"

कुंती भी जगह को देख कर खुश थी, सबसे ज्यादा ख़ुशी उसे राजू और रानी को देख कर हो रही थी, के आज इत्ते दिनों बाद दोनों को हँसते देख रही थी, के तभी उसके आँसू भी उसकी ख़ुशी का इज़हार करते हुए गालों से नीचे की तरफ टपक पड़े। राजू बोल पड़ा "गरीब दुःख में नहीं, खुशी में रोता है।" "बहुत बड़ी बातें करने लगा है रे तू तो !" कुंती ने प्यार से राजू के गाल पर मारते हुए कहा, और वो तीन एक साथ अलाव के पास बैठ गए।

रानी ने माँ से स्कूल के बारे में राजू की बात बताई। सारी बातें माँ को एक-एक कर के बताई, तीनो की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था आधी रात तक। "मैं बहुत बड़ा आदमी बनूँगा माँ, तू देख लेना, और रानी के लिए एक अच्छा-सा लड़का देखेंगे, और शादी करेंगे ये सब काम अब नहीं करना है इसे !" बात करते-करते कब तीनों एक दूसरे से लिपट कर सो गए पता ही नहीं चला।

ये उन तीनों की अरमानों भरी रात थी।

सुबह करीब 6 बजे एक तेज धमाके के साथ सबकी आँख खुली और चंद ही मिंटो में वहाँ पर चीख पुकार और मातम का माहौल था। किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था कि हुआ क्या है, तभी देखा की एक बड़ी गाड़ी शेल्टर होम में घुसी हुई है और एक 30 -34 साल का आदमी उसमें से नशे में धुत गालियाँ देते हुआ निकला। सड़क पर रहने का क्या मतलब है, सड़क पर रहोगे तो कीड़े-मकोड़ों की तरह ही मर जाओगे।

आस पड़ोस के लोगों ने उसे पकड़ लिया, कोई कह रहा था की कम से कम 10 लोग मर गए हैं और इतने ही घायल है।

वहीं किसी कोने में टायर के नीचे एक माँ अपने बच्चों के अरमानों की लाश के साथ पड़ी है।

सच कहती थी रानी- "गरीब होना सबसे बड़ा अपराध है !"

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