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पहला प्यार
पहला प्यार
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© Darshna Jain

Drama Fantasy Romance

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"प्रिया,क्या हुआ तुम आजकल काफी परेशान रहती हो" पंकज ने पूछा।

"पंकज, मम्मी-पापा लड़का देख रहे हैं मेरे लिए, तुम आखिर कब तक चुप रहोगे ?" प्रिया ने भीगी आँखों से कहा।

"प्रिया, तुम रोओ मत...जो मेरा है, वो मुझसे कोई नहींं छीनेगा, जब तक कुछ बन न जाऊँ, तब तक हाथ माँगना फिजूल है, कौन देगा अपनी बेटी मुझे" पंकज ने गंभीरता से कहा।

दो दिन बीते।

"प्रिया, तुमको एक खबर देनी है, मुझे नौकरी मिल गई है, अब बस कुछ समय और फिर तुम्हारे पिता से जरूर बात करूँगा" पंकज ने चहकते हुए कहा।

"एक खबर मेरी भी सुन लो, पापा ने मेरा रिश्ता तय कर दिया है, अब तुम कहते रहना जो मेरा है, वो कोई नहीं छीनेगा" प्रिया ने गुस्से से कहा और फोन रखते ही रोने लगी।

शादी की तिथि भी निश्चित हो गई। पंकज ने न जाने अभी भी उम्मीद लगा रखी थी।

कहते है ना "जहाँ चाह वहाँ राह।" ऐसा ही कुछ हुआ।

प्रिया के पापा के खास दोस्त का एक्सीडेंट हो गया, और अस्पताल में उनसे मिलने गए। पंकज इत्तेफाक से वहीं था, क्योंकि जान उसी ने बचाई थी, उनके दोस्त की।

"त्रिपाठी जी,कैसे हो...अब ठीक है...ये लड़का कौन है" प्रिया के पापा ने पूछा।

"फरिशता होगा...जिसने मुझे बचाया...इसकी जीवन में हर इच्छा पूरी हो यहीं दुआ है" त्रिपाठी जी ने मुस्कुराते हुए कहा।

"ये पर्स किसका है बाहर पड़ा था" प्रिया के पापा ने कहा।

पंकज ने नजरे झुकाते हुए कहा "जी मेरा है, गिर गया होगा हड़बडी मेंं।"

"बेटा कैफेटेरिया कहाँ है, जरा चलोगे साथ" प्रिया के पापा ने कहा।

"जी जरूर।"

"तो क्या करते हो...तुम...।"

"जी, मैं इंजीनियर हूँ, बस अभी कुछ समय ही हुआ है जॉब करते हुए।" पंकज ने कहा।

"प्रिया को कब से जानते हो...?"

शायद इस सवाल की उम्मीद न की थी पंकज ने,माथे पर पसीना आ गया।

"जी..वो...कुछ समय से...मतलब कॉलेज...से..." पंकज ने अटकते हुए कहा।

"उसकी शादी है परसों जरूर आना...आ पाओगे...?" भौंंहे तानते हुए पापा ने पूछा।

"जी...वो...." फिर कुछ देर बातचीत का, पूछताछ का दौर चला।

शादी के दिन प्रिया भरे मन से पंकज को याद कर रही थी।

"पापा, आइए...बैठिए" प्रिया ने कहा "भई, आज तो बहुत प्यारी लग रही हो, जब भी घर में शादी होती थी किसी की भी, तुम्हारी फरमाइश हमेशा बढ़ चढ़कर होती थी, पापा ये लाना...ये दिला दो...अब तो तुम्हारी शादी हो रही है कुछ माँगोगी नहीं, चलों आज बिना माँगे ही दे देता हूँ" पापा ने कहा।

"अंदर आओ..." पापा ने जोर से कहा।

"पंकज तुम...।"

"जी हाँ...इसे ही चाहती हो ना...।"

"आपको कैसे पता लगा..." प्रिया ने पूछा।

"अस्पताल से...तुम्हारा फोटो देखा था इसके पर्स में, इससे बातचीत की, मुझे काफी सुलझा हुआ लगा तो मैंंने हाँ कर दी

खुश हो ना...।" पापा ने कहा।

"प्रिया मैंनै कहा था ना, जो मेरा है उसे कोई नहीं छीन सकता" और दोनों वैवाहिक जीवन में बंध गए।

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