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Jindagi
Jindagi
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© Anonymous

Inspirational

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ज़िंदगी

 

जिंदगी की  रफ़्तार जैसे थम सी गयी .

आसमान में कोहरा छा सा गया .

हवाओं ने दी ऐसी ठोकर, खुद को आइने के सामने ने उठा न सका .

 

खुदा से मांगी थी एक दुआ .......

न जाने उसने सुन के भी अन्सुना कर दिया .

खुद से ही खफा बैठा था की क्यों उस ने ऐसा दर्द दिया .

 

खामोश खड़ा....सोचा ऐसे क्यों हुआ...?

क्या दुनिया में उसे में ही मिला ?

फिर सामने से आज़ाद पंछी उड़ा, न कोई फिक्कर, न कोई परवाह .....

अपने पंखों को लहराता निकल पड़ा .

उसकी आज़ादी को देख कर दिल में जलन सी हुई ......लेकिन !!

आज़ाद पंछी को देख कर यूँ न समझना की, ज़िन्दगी  उसकी आसान है .

ठोकरे तो उसको भी खानी पड़ती है, ये न समझना  खुद मेहरबान है .

 

दिल में खवाइश सी है की काश में भी आज़ाद होता .

रोज़ की थकन  से कहीं  दूर  होता.

पूरी  ज़िन्दगी रिश्ते नातो में गुज़ार कर, जंजीरो से जकड़ा बैठा था .

काश में भी आज़ाद होता ........काश में भी आज़ाद होता .........

#life

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