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जाति क्यों नहीं जाती ?
जाति क्यों नहीं जाती ?
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© VIVEK ROUSHAN

Drama

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दो मित्र थे, एक का नाम मिथुन था और दूसरे का नाम भीम था।

दोनों शहर में अपने परिवार के साथ किराये के मकान में रहते थे। मिथुन छोटी जाति का था और भीम ऊँची जाति का था।

दोनों के पिता एक ही सरकारी संस्थान में काम करते थे जो शहर से दो किलोमीटर की दूरी पर था। एक ही जगह काम करने और एक ही जगह रहने की वजह से दोनों के परिवारों में जान-पहचान भी अच्छी थी, पर एक-दूसरे के घर आना-जाना नहीं था। मिथुन और भीम एक ही जगह रहते थे इस वजह से दोनों अपना बचपन का ज्यादातर समय एक ही साथ बिताते थे। दोनों एक साथ ही शाम को खेलते थे दूसरे बच्चों के साथ मिलकर। दोनों दोस्तों में बहुत प्रेम था, कभी-कभी भीम, मिथुन को बुलाने के लिए उसके घर भी चला जाता और कभी उसके साथ एक ही थाली में बैठकर खाना भी खा लिया करता था।

भीम के परिवार में छुआ-छूत का भेदभाव था, पर इसका असर भीम पर नहीं पड़ा था, शायद इसलिए कि भीम अभी बच्चा था और समाज की इन कुरीतियों से अनजान था। दोनों मित्र बड़े हो रहे थे और दोनों १२वीं का इम्तिहान देने वाले थे। दोनों ने अपना-अपना इम्तिहान दिया, भीम भी अच्छे नम्बरों से पास हुआ और मिथुन भी अच्छे नम्बरों से पास होने में सफल रहा, दोनों के पिताजी बहुत खुश थे। दोनों मित्र जानते थे कि अब उनके रास्ते अलग होने वाले हैं, पर दोनों एक दूसरे के लिए बहुत खुश थे।

भीम के पिता ने भीम को इंजीनियरिंग करने के लिए बाहर भेजने की योजना बनाई। भीम ने मिथुन से मिलकर उसको ये बात बताई और आखिरी बार मुलाकात करके, मिथुन से गले मिलकर, अपने पिता के कहे अनुसार इंजीनियरिंग करने दिल्ली को चला गया। मिथुन को भी बहुत इच्छा थी भीम की तरह इंजीनियरिंग करने की, पर मिथुन के पिता के पास इतना पैसा नहीं था जिससे मिथुन का दाखिला इंजीनियरिंग कॉलेज में हो सके। मिथुन के पिता के पास पूर्वजों का कोई ज़मीन नहीं था, सिर्फ एक सरकारी नौकरी थी जिससे पूरे परिवार का पालन-पोषण चलता था। इसलिए मिथुन के पिता ने मिथुन को समझाया और मिथुन का दाखिला बी.ए. करने के लिए शहर के ही सरकारी कॉलेज में करवा दिया।

सब कुछ ऐसे ही चलता रहा, दूर जाकर भीम भी अपने दोस्त मिथुन को याद करता और यहाँ मिथुन भी अपने दोस्त का छुट्टियों में आने का इंतज़ार करता रहता। कुछ दिन गुज़र गए, भीम अपने सेमेस्टर एग्जाम के बाद घर को आया, मिथुन के घर गया और जैसे पहले रहता था वैसे ही अपने दोस्त मिथुन से मिला उसके साथ खाना खाया, खूब घूमा और दोनों ने अपनी-अपनी बातों को एक दूसरे से बताया। रात को दोनों अपने-अपने घर गए। रात में खाने के वक़्त भीम के पिता ने भीम को ऊँच होने की शिक्षा दी और बतलाया कि तुम बड़े हो और तुम जिसको दोस्त कहते हो वो छोटी जाति का है, तुमको उसके साथ खाना-खाना या घूमना-फिरना बंद कर देना चाहिए, तुमको बड़े लोगों के साथ उठना-बैठना करना चाहिए, मिथुन अछूत है उससे कम से कम मिला करो या बिलकुल मिलना बंद कर दो।

उधर मिथुन के माता-पिता मिथुन को बोल रहे थे कि भीम के संस्कार कितने अच्छे हैं, भीम हम छोटे जाति के घर खाना भी खा लेता है और मिथुन के साथ दोस्ती भी अच्छे से निभाता है। मिथुन के माता-पिता ने मिथुन को भीम की तरह बनने को कहा, किसी को ऊँच या नीच न समझने की हिदायत दी। मिथुन को बताया कि सब इंसान एक हैं कोई बड़ा या छोटा नहीं होता है। जो सब इंसानों को एक सामान समझता है, सबके लिए अपने मन में इज़्ज़त का भाव रखता है वही इंसान सबसे बड़ा होता है। दोनों ने अपने माता-पिता की बातों को समझा। भीम ने मिथुन से मिलना-जुलना कम कर दिया था। उस मुलाकात के बाद भीम कभी भी मिथुन से पहले जैसा नहीं मिल पाया, भीम अपने आप को बड़ा समझने लगा और बड़े-बड़े लोगों के साथ उठना-बैठना शुरू कर दिया। अब भीम सेमेस्टर की छुट्टियों में भी आता तो अपने दोस्त मिथुन से नहीं मिलने जाता। इधर मिथुन जाप करता रहता कि सब इंसान एक हैं कोई छोटा-बड़ा नहीं होता।

भीम जब मिथुन से मुलाकात नहीं करता तो मिथुन समझता कि भीम अब बड़ा आदमी बन गया है, इंजीनियर बन गया है, उसके पास वक़्त नहीं होता होगा, व्यस्त रहता होगा। मिथुन अभी भी अपने दोस्त भीम को याद किया करता था उसका इंतज़ार किया करता था |

हमारे समाज में जात-पात, छूत-अछूत जैसी कुरीतियाँ बहुत सारे खूबसूरत रिश्तों को तोड़ देती हैं। बहुत खूबसूरत रिश्ते को उपजने नहीं देती हैं। ये जात-पात का भेदभाव हमारे समाज को खोखला बना रहा है।

जाति भदभाव छुआछूत

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