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आया अटरिया पे कोई चोर
आया अटरिया पे कोई चोर
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© Kailash Mandlekar

Comedy

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शहर में चोरियां बढ़ रही हैं। दुकानों के ताले और शटर टूट रहे हैं। छत से लेकर बाथरूम तक सेंधमारी हो रही है। चोर इस कद्र सक्रिय हैं कि पलक झपकते ही माल पार कर लेते हैं जबकि पुलिस वाले इतने आरामतलब हैं कि उन्हें पलक झपकने में भी अलाली आती है।

कहते हैं चोर जो है चोरी छोड़ सकता है लेकिन हेराफेरी फिर भी नहीं छोड़ता। हेराफेरी उस पवित्र अनुष्ठान को कहते हैं जिसके अंतर्गत चोर जो है सतत इस बात की निगरानी करता है कि दरवाजे के कुंडे को किधर से तोड़ा जाये। या दीवार में जो खिड़की है उसकी चिटकनी कैसे उखड़ेगी अथवा मकान मालिक ने जो गलियारा या पैसेज जैसा बनवाया है उसमें किधर से जम्प लगाया जाये कि सीधे उस जगह पर पहुँच जाएँ जिधर मैडम की गहनों वाली अलमारी रखी है। और यह भी कि दारी ने गहने अलमारी में रखे भी हैं या लॉकर में रख आई है।

हाँ भाई साब आजकल लोग बड़े चालाक हो गए हैं। बाहर से ऐसा दिखावा करते हैं कि कपाट में करोड़ों का माल भरा है और अन्दर देखो तो सेल की बुसांदी साड़ियाँ और पॉलिश वाले झुमकों के सिवा कुछ नहीं निकलता। लोगों की इसी बदमाशी के कारण चोर लोग बिला वजह हलकान होते हैं। लेकिन क्या करें चोर जो है चोरी छोड़ सकता है हेराफेरी फिर भी नहीं छोड़ता।

कालोनी में सतत चोरियां हो रही हैं। चार दिन पहले मोहल्ले की एक दुकान में सेंधमारी हुई। आज पड़ोसी का ताला टूट गया। मैंने डरते हुए पत्नी से कहा - अब अपना नम्बर है। श्रीमती जी आदत और परम्परा के अनुसार असहमत होते हुए बोली - आप  कैसे कह सकते हैं ! यह फैसला तो चोरों को करना। फिर सहमति जताते हुए कहने लगी आपसे कितनी बार कहा कि आर्नामेंट्स बैंक के लाकर में रख आओ लेकिन सुनते ही नहीं। मै चौकन्ना हो गया। मुझे यह चोर चर्चा गृहयुद्ध की तरफ जाती दिखाई पड़ी। मैंने युद्ध विराम जैसा करते हुए कहा – नहीं मै तो यूँ ही कह रहा था। वैसे अपने घर में रखा भी क्या है और वाचमैन भी तो है अपनी कालोनी में। मैंने अपने को ढाढस जैसा बंधाया। हालाँकि इस सच्चाई से कालोनी के सभी लोग वाकिफ हैं कि चोरी से बचने के लिए हमने वाचमैन के नाम पर जिस नेपाली गोरखे को नियुक्त किया है वह सारी रात सिर्फ नींद से लड़ता है। और सुबह तीन चार बजे जब चोरी का पीक टाइम होता है तब नींद के हाथों परास्त होकर एक तयशुदा ओटले पर अपनी टोपी उतारकर धराशायी हो जाता है। नींद उसे इस कदर मीठी और गहरी आती है कि चोर लोग उसके कपडे़ भी उतार ले जाये तो वह जागने को तैयार नहीं होता। एक दफे ऐसा हो भी चुका है। उस रात कालोनी में दो जगह चोरियां हुई। सुबह गुस्से से भरे लोग जब वाचमैन की तलाश में निकले तो वह एक खंडित ओटले पर लगभग अर्ध नग्न अवस्था में खड़ा था। उसके शरीर पर सिर्फ अंडरवियर बचा था। हम लोग उसके सामने अपना रोना रोते उसके पहले वह हँसते हुए बोला – शाब जी ! शाब जी ! कोई हमारा पतलून उतार ले गया। लोग उसकी हंसी का अर्थ आज तक नहीं समझ सके कि वह पतलून चुराने वालों की मूर्खता पर हंस रहा है या अपनी इस दीन दशा पर कि साला सरे आम चीरहरण हो गया।

चोरी करने के लिए ऊंचा आत्मबल होना चाहिए। आत्मविश्वास जब तक कूट कूट कर नहीं भरा हो तब तक आदमी और कुछ भले ही कर ले चोरी नहीं कर सकता। चोरी करते हुए पकड़ा जाने पर जो कुटाई होती है वह आत्मविश्वास को बढ़ाती है। आत्मविश्वास एक ऐसा तत्व है जो चोरी करने से लेकर एवरेस्ट पर चढ़ने तक में काम आता है। मैं अपने बारे में सोचता हूँ तो मुझे लगता है कि मेरा आत्मबल बहुत कमजोर है। मुझे रात में किसी की डोरबेल बजाने में भी डर लगता है जबकि चोर लोग डोरबेल की तो छोडिये पूरा शीशम का दरवाजा उखाड़ ले जाते हैं।

इधर निमाड़ और मालवा में चोरों का एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो चड्डी बनियान गिरोह कहलाता है। ये बिचारे इतने विनम्र और निष्ठावान चोर हैं जो अपनी वेशभूषा तक की परवाह नहीं करते और चोरी के कर्म को बहुत समर्पण भाव से सम्पन्न करते हैं। हालाँकि चोरों के पास भगवान का दिया इतना होता है कि वे चाहें तो सूट पहनकर चोरी करें। लेकिन जब चड्डी बनियान के बल पर ही एक समूचे घर का सूपड़ा साफ़ हो सकता है तो फिर सूट की क्या जरूरत। कर्म के प्रति निष्ठावान लोग कपड़ों की तरफ कम ही ध्यान देते हैं। ऐसा नहीं है कि चोरी केवल चड्डी पहनकर ही होती है सूट और कलफदार कुरते पहनकर भी लोग चोरियां करते हैं। लेकिन यह चोरी दूसरे किस्म की होती है। इस चोरी में आदर्शों और सिद्धांतों की आड़ ली जाती है। लोकतंत्र में ऐसी चोरी जनसेवा कहलाती है।

चोरियों के बाबत यह भी सुनने में आया है कि जिस इलाके में पुलिस कि गश्त ज्यादा होती है वहां चोरियां खूब होती है। लोग कहते हैं यह मिलीभगत वाला मामला है। मैं इसे सिरे से नकारता हूँ। ऐसी बातों से पुलिस का मनोबल गिरता है। चोरी चकारी जैसी बातों से पुलिस का मनोबल नहीं गिराना चाहिए। वैसे भी आजकल पुलिस वालों को सैकड़ों काम है। आतंकवादी रेलगाड़ियों में बम रख रहे हैं पुलिस वाले उनको पकड़ें या आपकी जेब में पड़ी चवन्नी की हिफाजत करते फिरें। बल्कि देखा जाये तो आपकी जेब में चवन्नी भी नहीं है। पुलिस वालों को सब पता रहता है भाई साब। यात्रा में चोरी होना आम बात है। प्राचीन काल में लोग गठरी लेकर यात्रा करते थे। कबीर ने कहा है “ तेरी गठरी में लागा चोर मुसाफिर “। जैसा कि सभी जानते हैं कि गठरी में काफी मालमत्ता हुआ करता था लिहाजा चोर लोग इस गठरी के पीछे लग जाते थे। आजकल गठरी के बजाये सूटकेस का चलन है इसलिए सूटकेस चुराए जाते हैं। दिल चुराने वाले सिर्फ दिल ही चुराते हैं तथा दीगर वस्तुओं की तरफ ध्यान नहीं देते। दिल चुराने के उपरांत ये सामने वाले को तो बैचेन करते ही हैं खुद भी काफी परेशान रहते हैं। दिल का मामला ख़राब होता है। दिल चुराते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जिस कन्या का दिल चुराया जा रहा है उसका बाप पहलवान या थानेदार इत्यादि न हो। वर्ना ऐसे मामलों में दिल तो अलग रह जाता है और जूते इस कदर पड़ते हैं कि तबीयत हरी झक्क हो जाती है। जो लोग किडनी चुराते हैं वे डॉक्टर कहलाते हैं। किडनी चुराने वाले डॉक्टर देखा जाये तो बहुत अव्वल दर्जे की मानव सेवा करते हैं। यार आपको परमात्मा ने दो दो किडनियाँ दे रखी हैं जबकि आपका काम एक ही किडनी से चल जाता है। ऐसे में कोई डॉक्टर बिचारा एक किडनी निकाल कर सामने वाले को लगा देता है तो क्या गलत करता है। भाई साब आप दो दो किडनियों का अचार डालोगे क्या। जबकि किडनी का तो कमबख्त अचार भी नहीं डलता।

पिछले दिनों एक ऐसी वारदात हुई जिसमें चोरों ने चोरी के पहले किचन में घुसकर कूकर चढ़ाया दाल चावल बनाये और तृप्त होकर भोजन किया तथा उसके बाद चोरी के पुनीत कार्य को सम्पन्न किया। घरवाले चूँकि दूसरे शहर में शादी में गए थे इसलिए चोरों ने पूरी स्वतंत्रता से प्रीतिभोज निपटाया। ठीक भी है। भाई साब आप पराये शहर में जाकर डिनर उड़ायें और चोर लोग बिचारे भूखे पेट चोरी करें यह एक समता वादी देश में कैसे हो सकता है। एक फिल्मी गाने कहा है कि चाँद चुराकर लाया हूँ चल बैठे चर्च के पीछे। इस गाने से चोरों को यह प्रेरणा मिलती है कि जब भी चाँद आदि चुराया जाये तत्काल चर्च के पीछे चले जाना चाहिये। चर्च के पीछे जाकर आप चाहें तो ईश्वर से अपने गुनाहों कि माफ़ी मांग सकते हैं और लगे हाथ चोरी के माल का बंटवारा भी कर सकते हैं। इसी को सुधी जन एक पंथ दो काज कहते हैं। चाँद का चोरी से कुछ परम्परागत रिश्ता नजर आता है। एक हाइकू में कहा है

आकाश में पूर्णिमा का

खूबसूरत चाँद देखकर

चोर का मन गाने को मचल उठा।

इस हाइकू की कवयित्री का नाम बुशन है। जो लोग छोटी चोरियां तथा चोरी के दौरान ओछी हरकतें करते हैं उन्हें उत्कृष्ट चोरों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। चोरी की दुनिया में वर्षों से सक्रिय एक नामी और वरिष्ठ चोर ने बताया कि आजकल इस धंधे में कुछ गलत लोग आ गए हैं जो महिलाओं के गले से चैन झपटते हैं। ऐसे लोगों ने इस धंधे को बदनाम कर दिया है। चोर दादा ने बताया कि वे जब तक इस धंधे में रहे उन्होंने किसी महिला को हाथ भी नहीं लगाया। जबकि अलमारी में रखे उस के गहने पूरी तरह साफ़ कर दिए। चोर दादा ने कहा कि उसने बैंक के लाकर से लेकर रेल के वैगन तक तोड़े पर किसी का गला नहीं काटा। आखिर चोरी के भी कुछ उसूल होते हैं भाई साब। मैंने कहा दादा आजकल क्या कर रहे हो। वह बोला अब तो समाज सेवा ही बची है वही कर रहे हैं। इस धंधे में भी मजा आ रहा है। आगे देखते हैं किसी अच्छी पार्टी का टिकिट मिला तो चुनाव लड़ लेंगे। कि गलत कह रहा हूँ।

#satire #hindistory #shortstory

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