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     कैसा ये इश्क हे........!
कैसा ये इश्क हे........!
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© Irfan Sathiya

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"एक्सक्यूज मी। क्या आप के पास कोर्नेटो मीलेगा?"  बड़ी  शालीनता  से  हेमल ने काउंटर पे खड़े लड़के से पूछा। दस साल अमरिका में रहने के बाद इतना डीसिप्लिन तो आना ही था।

  " सिर्फ कप मीलेंगे साब"। काउंटर पे  खड़े लड़के ने जवाब दीया।

  "ठीक है,  तीन चॉकलेट कप और एक  कोक बोतल निकलवा दीजिए ।" कहता हुआ हेमल वाश बेसिन की और बढ़ा । पुरी तरह रगड़  के अपना मुंह धोया और बालो में पानी छींटक कर आईने में बाल बनाये । काउंटर बॉय  को सौ का नोट दिया और बाकी के पैसे तुम रख लेना कहता हुआ अपना पार्सल लिए हेमल पार्किंग की और बढ़ा । हाई-वे के उस होटल का पार्किंग एक बहुत बड़ा मैदान था। उसके एक कोने में झाड़ियों  के पास हेमल ने अपनी कार पार्क की थी,वो गुनगुनाता हुआ अपनी कार की और बढ़ा , उसके चेहरे पर आज अजीब चमक थी। उसकी चाल में आज कुछ नयी ताज़गी  थी, होती क्यों नहीं  ? आज पुरे दस साल बाद वो अपने प्यार से, अपनी चाहत से मिला था, दुर से ही मुस्कुराता हुआ कार के पास जा खड़ा हुआ । पहुंचने से पहले कार का दरवाज़ा खोले प्यार भरी मुस्कान के साथ स्वागत हो इतनी आस  रखना तो इस आधुनिक मजनू के लिए लाज़मी था। हेमल कार के पास खड़ा रहा लेकिन उसकी आशा के विपरीत दरवाज़ा न खुला , उसने सोचा खुशी की मारे  सपने देखते -देखते  मेघा को नींद लग गई होगी। हेमल के एक हाथ में आइसक्रीम और दुसरे हाथ में कोक की  बोतल थी । उसने घुटने और कोहनी से दरवाज़ा खटखटाया। दो मिनट तक अंदर से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। उसने थोड़ी और ताकत के साथ दरवाज़े  को नॉक किया ।

" मेघा, मेघा, सो गई क्या ??मेघा दरवाज़ा  खोलो ज़ान "

हेमल ने आसपास नजर डाली और थोड़ी उंची आवाज से कहा।

" मेघा, दरवाज़ा  खोलो। तुम्हारी आईसक्रीम पिघल जायेगी ।"

पांच मिनट बीत गये पर कार के अंदर से कोई हरकत न हुई । हेमल ने अपने दोनो हाथो के पार्सल को बोनट पे रखा और  विन्डो पे नॉक  करने लगा। वो इसी आस  में था की मेघा कांच के पार  से अपना पंजा मिलायेगी।

"स्वीटी दरवाज़ा  खोलो। मेरा सोने सा कीमती वक्त जाया हो रहा है, मुझे अंदर आने दो, तुम मेरी गोद में सो जाना।"

हेमल की आवाज में अब गिड़गिड़ाहट  थी, पर कार के अंदर  कोई हरकत ना हुई ।

हेमल ने अपना मोबाइल निकाला और मेघा को कॉल लगाया। सोयी हुई मेघा को जगाने का अब यही एक  तरीका बचा था।

" डायल किया  गया नंबर पहुँच से  बाहर  है"

एक बार, दो बार, तीन बार यही कैसेट बजता रहा।

उसका गला अब सुखने लगा था। चेहरे पे पसीने की बुंदे उठने लगी थी। उसने कोक खोला दो तीन सीप से गला भिगोया । फिर विन्डो के पास जाके प्यार से बोला।

"जान, उठ भी जाओ । आप को दस बजे घर पहुंचना  है न ,नहीं पहुंचना है क्या ?। " इसी मशक्कत में दुसरे पांच मिनट नीकल गए ।

उसके दिमाग मे एक  और आइडिया आया। हेमल ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाई  और मोबाइल कार विन्डो के ठीक करीब चीपका के रखा। उसे उम्मीद थी की अचानक उजाले से मेघा उठ जायेगी। लेकिन ऐसा न हुआ तो उसने टिन्टेड ग्लास के परे अपनी नजर दौड़ाई । उसे अपने आप पे यकीन न हुआ । बेक सीट खाली थी। वो अपने-आप को तलाशने  लगा कि  खुद तो नींद मे नहीं है ना?। वो अब बार-बार  मोबाइल टॉर्च की सहायता से कार की  अंदर झांकने लगा। फ्रंट और बैक  दोनो सीट खाली थी।

"शायद वो बाथरूम गई होगी" मन  ही मन सोच कर खुद की परेशानी पे हॅसने  लगा। लेकिन उसका दिमाग काफी तेज था। फौरन उसने कार की चारो दरवाज़े  खींच कर देखा । चारो अंदर से लॉक  थे ।

" तुम्हारी मुझे सताने की आदत अभी तक नहीं  गई है ज़ान "  फौरन वो कार के पीछे गया और डिक्की  को ठोकते हुए बोला। पंद्रह मिनट और निकल गये।  घड़ी मे साढ़े नौ बज चुके थे,दस बजे से पहले मेघा को अपने घर पहुंचना था, जो कि दिल्ली की ट्राफिक मे मुश्किल काम था। आईसक्रीम बोनट पे ही पुरी  पिघल चुकी  थी । वो लेडिज टॉइलेट की तरफ बढा।

" आज मेघा ने मीलने के लिए मन्नत  मांगी थी कि जब तक वो मुझे नही मीलेगी, पानी तक नहीं पीयेंगी। शायद उसे चक्कर आ गये होंगे । कही गिर  तो नहीं गई होगी?" दिल में ऐसे  कई  ख्यालो  के साथ उसने होटल के बड़े मैदान में फैले  हुये  पार्किंग  को दो बार छान लिया। मौका देख कर वो लेडिज टॉइलेट भी छान आया। लेकिन वहां से कोई सुराग न मीला। उसने अब कार का दरवाज़ा  किसी  भी तरह से खोलने की सोची । मैकेनिकल इंजीनियर हेमल के लिए यह कतई मुश्किल काम नहीं था,वो ऐक पट्टी का जुगाड कर लाया और ड्राइवर साईड से सेन्ट्रल लोक खोल लिया ।  कार में मेघा नहीं थी। फौरन उसने बुट ओपन किया । कार की बड़ी  डिक्की बिल्कुल  खाली थी । अब हेमल की  चिंता बढ़ने  लगी थी। पसीना जो बुंद मे अटका हुआ था अब बहने लगा था।

" क्या उसके पति को  पता चल गया होगा? क्या वो  यहां आ गया होगा? गुस्से मे पता नहीं उसने मेघा के साथ कैसा बर्ताव क्या  होगा,क्या कोई लुटेरा आया होगा? "  हेमल के दिमाग मे एक के बाद एक नये सवाल खड़े  हो रहे थे, पर जवाब की बजाय दुसरे हज़ारो  सवाल उसका दिमाग ख़राब कर रहे थे ।

" कार के सारे डोर अंदर से लॉक  थे, तो फिर उसे कोई कैसे ले गया होगा? या वो कैसे बाहर निकली  होगी?"

घड़ी में अब साढ़े  दस बज चुके  थे। दस बजे तक वो बड़ी बेसब्री से फोन डायल करता रहा लेकिन फोन पहुंच के बाहर ही पाया। साढ़े दस बजे  के बाद फोन करना अलाउ नहीं था। वहां किसी  को भी पूछने से हंगामा होने की आशंका थी, फिर भी उसने सावधानी से वॉचमैन को पूछ ही लीया। वॉचमैन के पास से किसी तरह की कोई भी जानकारी नहीं मिली । घड़ी में अब दोनो कांटे एक होने जा रहे थे, झाड़ियों  में से आ रही मेढक की आवाज़  घबराये  हुए हेमल को और डरा रही थी,  फिर भी वो हिम्मत जुटा के झाड़ियों में टाॅर्च के प्रकाश में नजर फेंकता रहा। मेघा के साथ बेइंतेहा प्यार से  गुजारे लम्हे अब डर मे तब्दील हो रहे थे। वो बार-बार मोबाइल को देखता  कि  शायद मेघा का मेसेज ब्लिंक हो जाये । जब  तक मेघा सामने से मेसेज न करे उसे कॉन्टेक्ट करने की मेघा की और से सख्त मनाही थी । मेघा के पति ने साफ धमकी दे रखी थी की अब की अगर पकड़ी  गई तो उसे वो जान से मार देगा। बोखलाहट अब एन.आर.इ.  के सर के  उपर जा रही थी। वो यहां से निकलने  की भी  नहीं सोच  सकता  था। बार बार व्हाटएप नोटीफीकेशन मे 'लास्ट सीन' देखता लेकिन परिस्थिति जस  की तस  ही थी। दो तीन मर्तबा  हेमल हाई-वे पे  दोनों तरफ पैदल ही जा कर देख आया । सिगरेट से अब उसके फेफडे  पुरे भर चुके थे  ,गले से खांसी के स्वरूप बाहर आ रहे थे। रात के अब दो बजने वाले थे, वो कार में सीट फ्लेट करके सोने की नाकाम कोशिश करता रहा। आँख खुल जाने का सवाल ही नहीं था , क्योंकि उसकी आंखो के शटर बंद  ही नहीं हो रहे थे । यह बात ही एसी थी कि वह किसी को बता भी नहीं सकता था। आखिर इंजीनियर साहब के दिमाग ने ठंडे दिमाग से एक हल निकाला । उसने अपने कॉलेज का वोटसएप ग्रुप ओपन किया ,दिल्ली में रहने वाले सहपाठीयो की लिस्ट बनाई । उसमे वो सबसे ज्यादा जिसके करीब था उनसे  मिलना तय किया । वहां होटल के वॉचमैन को  हजार का नोट थमाया और अपना मोबाइल नंबर दिया  कि यहां कोई भी लड़की उसे ढुंढती हुई आये तो बताना के वो रात दो बजे यहां से तुम्हे  ढुंढने को निकला है। हेमल का दिल व दिमाग अब बुरी तरह से झुलस रहा था।

"जो होगा  देखा  जायेगा " फुसफुसाते हुए उसने अपने कॉलेज के दोस्त  इंस्पेक्टर भूपेश को फोन  किया । एक बार घंटी पुरी हो गई ,उसने तेज धड़कनो  के साथ दुबारा  इंस्पेक्टर भूपेश को फोन किया । इस बार वो खुशी से उछल पड़ा  जब उसके कानो में सामने से "हेल्लो" की आवाज सुनाई दी।

" हेल्लो भूपेश में हेमल बोल रहा हूं" थोड़ी  घबराहट  के साथ  हेमल बोला।

" हां, हेमल बोलो। कैसे हो यारा? कब तशरीफ लाये मियां? बताया भी नहीं और चुपचाप चले आए? "भूपेश आगे सवालों की झड़ी लगाता उससे पहले उसकी बातों को बीच में काटते  हुए हेमल ने कहा।

" दोस्त,  वो सब बाते बाद में भी कर लेंगे। फिलहाल में इक उलझन मे फंसा हुं।" हेमल की  आवाज में बोखलाहट सुन भूपेश ने फौरन कहा।

" ठीक है , ठीक है  क्या  हुआ ये बता दोस्त, तेरा ये इंस्पेक्टर दोस्त है ना, कुछ भी जुगाड़ ढूंढ लेंगे। वैसे अभी तु है कहां??।"  भूपेश के दिलासे से हेमल ने मुकम्मल दो घंटे बाद चैन की गहरी साँस ली।

दोनो ने हाई-वे होटल के पते के बारे मे गुफ्तगू की। हेमल जगह न छोड़ने की अपनी मजबूरी बताता उससे पहले इंस्पेक्टर भूपेश ने कहा।

" ओये, मेरा थाना यहीं पास मे ही है। तु वही पे रूक । मेरे पास जीप है, में अभी आया।"

 फोन काटते ही फिर हेमल ने वोटसएप चेक किया । लेकिन मेघा के मेसेज का कोई नोटीफीकेशन नहीं था। वो फिर से यहां वहां दुर तक नज़रों  से तलाशता रहा , आधी रात अब बीत चूकी थी,वाहनो की आवा जाही भी अब कम हो रही थी, दरख्तों  के पत्तो की सरसराहट अब साफ सुनाई देने लगी थी। दो तीन गाड़ियों  की आवाज पे हेमल ने उम्मीद से नजरे घुमाई  । लेकीन वो उसे निराशा करते  हुए निकल  गये  । दिल्ली की सर्द  रात मे हेमल पसीने से तर हो रहा था ,इतने में दुर से गाड़ी के इंजन की आवाज हेमल के कानों के करीब आती सुनाई दी, दूर  से मोमबत्ती सी दिख रही हेडलाइट जैसे जैसे करीब  आती गई  रौशनी बढ़ती गई   । जीप ठीक उसके पास आकर खड़ी हुई । अंदर से उतरते लंबे चौडे वर्दी पहने इंसान को पहचान ने में हेमल को कोई परेशानी नहीं हुई ,उसे देखते ही वह उसके पास दौड़ गया, दोनो गले मिले। कालेज ख़त्म  होने के बाद आज पुरे दस साल बाद दोनो मिले थे। इंस्पेक्टर साहब  के आदेश पे पहले एक लड़का चाय लेकर हाजिर हो गया था , चाय का प्याला हाथ मे लिए भूपेश ने चुप्पी तोड़ी ।

"बता दोस्त क्या माज़रा  हे? कोई लड़की का चक्कर है या किसी की पिटाई कर दी है ?"भूपेश ने मुस्कुराते हुए सवाल किया ।

 "यार, तुझ  से क्या  छुपाना। अपनी मेघा का मसला है " हेमल ने हिम्मत इकठ्ठा कर कह ही दिया ।

 " कोन मेघा?" भूपेश ने फौरन सवाल किया ।

" वो ही जो अपने साथ पढ़ती थी। जिसके साथ मेरा अफेयर था। हम दोनो कालेज के बाद भी एक दूजे को मीलते रहे थे। उसके घर वालो को ये बात पता चली। हमारी जाति अलग होने की वजह से उन्होने रिश्ता नकार दिया  ,मैने बहुत कोशिश की लेकिन वो हरगिज न माने। लेकिन हम दोनो भी अपनी ज़िद पे अड़े थे। हमने भाग निकलने का तय किया  था,लेकिन रात को उसके घर वालो को इस  बात की जानकारी हो गई । उन्होने गुंडो को भेज कर मेरी पिटाई करवा दी । और रातों रात मेघा को दुसरे गाँव भेज दिया । मैं  ठीक होकर अस्पताल से निकला तो मुझे  पता चला कि मेघा की जबरन शादी करवा दी गई है। मुझे वार्निंग दी गई थी कि आइंदा अगर में मेघा से मिलूंगा तो वो लोग मेघा को जान से मार देगे। मैं  वह सदमा बर्दाश्त करने के काबिल नहीं था सो मैने देश छोड़  दिया । अमरीका जाने के बाद दो साल तक मेरा मेघा से किसी भी तरह का कोई संपर्क नहीं हो पाया । और मैं  भी अब उसके वैवाहिक जीवन में जहर घोलना नहीं चाहता था। लेकिन आठ साल पहले मुझे  कॉलेज के वोटसएप ग्रुप में एड किया  गया। मेरी नजर उसमे सब से पहले मेघा का नंबर ढूंढ रही थी। और वो मुझे  दिख  गया, उस दिन में बहुत खुश हुआ था ग्रुप में बाते करते करते हम पर्सनल चैट करने लगे। हमारा प्यार फिर से जाग उठा , हम एक दूजे मे खोने लगे । लेकिन एक दिन उसके पति के हाथ मे फोन आ गया, उसने हमारी  बातें पढ़  ली । उसने मेघा को धमकी दी के अब से ऐसा नहीं होना चाहिए । लेकिन हम दोनो एक दूजे से बाते किये बिना चैन नहीं पाते थे। फिर वो ही सिलसिला शुरु हो गया । फिर वो पकड़ी गई, एसे दो-तीन हादसो के बाद हमने समय मर्यादा तय कर ली ,  वो जब सामने से कॉन्टेक्ट करती तो ही हम बाते करते। लाख अड़चने आयी लेकिन हम एक दूजे को भुल नहीं पाये। दिन ब दिन हमारा प्यार नई गहराई और नई ऊंचाई छुता गया। दिन रात , महीनों व सालो की तड़प के बाद हमने मिलना तय किया । और में यहाँ बड़े  सपने लिए हिन्दुस्तान आ पहुंचा । मेघा की भलाई सोच कर मैने कार में ही मिलना तय किया । आखिरकार वो लम्हा आ ही गया था जिसका में दस साल से इंतजार कर रहा था,वो साक्षात परी लग रही थी उसे  देख में दस साल के सारे गीले शिकवे भुल गया। सदियों के इंतजार लम्हो में घुल गया । चार घंटे यहाँ  इसी दरख्त के नीचे मिनटो में  गुजर गये। बार-बार सूखे हुए हमारे सदियो से प्यासे लब एक दूजे मे घुल रहे थे। मेघा का हलक सुख रहा था, उसने आईसक्रीम खाने की इच्छा जताई । हम जब दस साल पहले आखरी बार मिले थे मेघा को अगले दिनआइसक्रीम खिलाने के वादे के साथ जुदा हुए थे। वही वादा मेघा ने याद दिलाया । में आइसक्रीम लेने निकला  और सिर्फ पांच मिनट ...."। उसके बाद जो हुआ वो वाक्या हमने तुम्हे  बताया ।

भूपेश दो मिनट तक कुछ न बोला।फिर धीरे से बोला

"तुमने ज्यादा पी ली है हेमल। तुम्हे देसी नहीं पिनी चाहीये थी"

हेमल ने गुस्से मे उत्तर दिया । " तुझे मजाक सुझ रहा है  यार? मेने कुछ नहीं पीया। मैं  पुरे होश  में हूं।

फिर भी भूपेश हेमल को घूरता रहा। हेमल से यह सहा नहीं गया। वो हाथ पटकता हुआ बोला।

" यार मेने तुझे मदद के लिए बुलाया था, मजाक के लिए नहीं"

अब बारी भूपेश की थी। थोड़ा  चिल्लाता हुआ बोला।

" मजाक तो तु कर रहा है मेरे से जो व्यक्ति इस दुनिया मे है ही नहीं तुने उससे प्यार भी कर लिया और मिल भी लिया?? वाह भाई वाह,  क्या  मनोहर कहानीकार बन गया अमरीका  जाकर मेरा यार।" भूपेश ताली बजाने लगा। उसे रोकते हुए हेमल ने कहा।

" मैं  कुछ समझा नहीं। मजाक ना कर यार, मेरी हालत समझ  दोस्त ।" हेमल थोड़ा गिड़गिड़ाया ।

"मेरे भाई हेमल, मेघा दस साल पहले ही उसके पति के हांथों मर चूकी है । उसे ज्यादा दहेज की दरकार थी और उपर से उसे तुम्हारे और मेघा के रिश्ते के बारे मे पता चल गया था। वैसे भी वो मनोरोगी था। उसने  गुस्से मे आकर मेघा का कत्ल कर दिया । फिर उस पर  मुकदमा चला, दो साल केस चला और इल्जाम साबित हो गया। कहा तो यह भी जाता था कि मेघा के पति का किसी और से नाजायज संबंध था । उस औरत ने मेघा का कत्ल किया और उस औरत के पति ने मेघा के पति का कत्ल कर दिया था।"

   अब की बारी हेमल की थी। उसने ठीक वैसी ही शक्ल बनायी जैसी भूपेश ने बनायी थी। भूपेश को उपर से नीचे तक देखता हुआ बोला।

" इंस्पेक्टर साब, मुफ्त में मिले तो क्या , थोडी लिमिट में पीया कीजीये।और देसी तो हरगिज न पीजीये। और हां, थाने  में बैठे बैठे आप भी काफी मनोहर कहानिया बनाने लगे हो।"

" हेमल, तुम होश  मे नहीं हो। प्लीज तुम होटल चलो। आराम करो।" भूपेश ने हेमल का हाथ पकड़ना चाहा।

 हाथ छुडवाते हुए हेमल ने कहा।

" इंस्पेक्टर साब, तुम पुलिस वाले कभी सबुतो के बीना मानने वाले नहीं हो। अपने स्कूल के वोटसएप ग्रुप में मेघा एक्टिव सदस्य है । और लो ये देखो । ये पुरा कॉल लॉग । हमने कितनी  बार बाते की है। लो यह हमारा पर्सनल चेट बॉक्स कि हम दिनभर कितनी चटर पटर करते है, और यकीन न आये तो काॅल रिकार्डिंग सुनाउं क्या ?लिजिए जनाब चेक कर लिजिए ।" हेमल ने अपना फोन थमाते हुए कहा।

 " मेरे भाई, तेरे हाथ जोड़ता हूं। तुझे भ्रम हुआ है। इस फोन मे एसा कुछ भी नहीं हे। ना तो मेघा अपने स्कूल के वोटसएप ग्रुप में कभी थी। ना तो तेरे काॅल लोग में उसका नंबर है ।"

 अब हेमल थोड़ा गुस्साए हुए बोला।" अब मजाक की हद होती है। या तो इंस्पेक्टर साहब तुम होश में नहीं हो। ले ये नंबर डायल कर अभी दुध का दुध और पानी का पानी हो जायेगा।"  हेमल ने भूपेश को नंबर दिया ।

भूपेश ने अपने मोबाइल से फोन डायल किया ।

" डायल किया गया नंबर अस्तित्व मे नहीं है"। तीन बार,चार बार डायल किया लेकिन यही कैसेट बजा।

भाई तुझे मतिभ्रम की बिमारी है। जिसे  हेल्यूसीनेशन कहते है। तु अपना इलाज करवा यार। अपने ही स्कूल का दोस्त अजय बहुत बड़ा सायकायट्रिस्ट बन चुका  है। बहुत से कैदियों  को ठीक करने हम उसे बुलाते हे। (एक  इलेक्ट्रिक शॉक मे वो सब ठीक कर देता है। (वो मन मे ही बड़बड़ाया )। मैं उसे काॅल करता हूं। वो ही तेरी मदद कर सकता है। और फोन डायल करता हुआ सिगरेट लेने को वहां से निकल पड़ा ।

 थोड़ी ही देर मे एक चमचमाती कार आकर खड़ी हो गई। सफेद बाल और थोड़ी  झुर्रीयो के बावजूद अजय को पहचान ने मे हेमल को दिक्कत न हुई । दोनो गले मिले और कार मे जा बैठे  डॉ .अजय ने सिगरेट जलाई। कुछ देर इधर उधर की बाते करने के बाद अजय ने पूछा।

   "माफ करना यार हेमल, देर रात हो गई है। काम की बात करले ?। बता क्यों मुझे इतनी रात गये याद किया ?"

" मैने??" हेमल ने आश्चर्य से पूछा।

" हां भाई तुने दो बार काॅल किया और मुझे गहरी नींद से उठाया"। अजय ने अपना मोबाइल दीखाते हुए कहां।

" नहि यार, मेरे पास तो तेरा नंबर भी नही हे। वो कॉल भूपेश ने की थी"  हेमल जैसे सफाई दे रहा था की उसने उसे डिस्टर्ब नही किया ।

यह सुन कर अजय ठहाके मार हॅसने  लगा।

" यार, तू अमरीका से पगला के आया है क्या ? तुने और किसी को भूपेश समझ  लिया लगता है।"

" अरे यार, भूपेश को मे नही पहचानता क्या ? वो पुलिस की वर्दी में था। हमने साथ मे चाय पी और सिगरेट के कश लगाए"। अब हेमल तप रहा था।

फिर अजय ने ठहाके लगाए । और हेमल का हाथ पकड़ कर बोला।

" दोस्त, भूपेश को मरे हुए आठ साल हो गए है । अपनी कलीग मेघा के मरने के ठीक दो साल बाद वो मरा। मेघा को उसने मारा या उसकी प्रेमिका ने ये पता नही चल पाया। पर वो सायको हो चूका था। पुलिस की वर्दी ही पहन कर घुमता रहता ।उसने  खुदकुशी करली थी ऐसा लोग कह रह थे। पर कुछ लोग का मानना है की उसकी प्रेमिका ने अपने पति के साथ मिल कर उसका कत्ल कर दिया था। "  बोलते बोलते अजय का हलक सूख गया हो वैसे ही पानी की बोतल उठाई। हेमल ने फिर वही स्कूल वोटसएप ग्रुप और कॉल लोग की बाते दोहराई ।अजय ने कहा कभी भी ग्रुप मे मेघा या भूपेश थे ही नही । अपना फोन थमाते हुए उपर से नीचे सारे कन्वरजेशन दिखाए ।

रात अब पूरी तरह से ढल चूकी थी। कुत्तो और लोमड़ियों  के रोने की आवाजे साफ सुनाई दे रही थी। अचानक भारी बारिश शुरु हो गई । डॉ .अजय ने अपनी बात को पुख्ता करने को और सबूत देती बाते कही। पास मे से हेमल का कोई रिस्पॉन्स न देख उसने मोबाइल मे से मुंह उपर किया । पास मे हेमल नही था। वो झट से कार से नीचे उतरा।

" मजाक करते हो। रात की मेरी नींद हराम कर खुद इतनी सी सच बात मे बोर हो गया??"  दिल ही दिल मे गुस्से से भिन्ना  उसने कार के दरवाज़े  को जोर से लात मार दी। अचानक उसकी नजर झाडीयों मे एक दरख्त पर जा ठहरी। कुछ चमकती चीज दिखाई दी। वो थोड़ा करीब गया,वहां एक कपल फुसफुसाहट कर रहे थे । अजय को ताज्जुब हुआ के इतनी रात गए और वह भी दरख्त पे??

और कान देकर सुनने लगा। लड़की लड़के का हाथ थाम कर कह रही थी।

" वादा करो हेमल, अब मुझे छोड़ कर कभी नही जाओगे "।

नही जान,मैं अब हमेशा के लिए तुम्हारा हो चुका हुं मेघा।"

अजय को खुद पे यकीन न हुआ । घबराहट मे उसके पांव पीछे चलने लगे। सामने के किनारे दुसरे पेड़ पर उसकी नजर अटकी । वहां कुछ धुंआ सा उठ रहा था। वो उसके पास गया और चौंक उठा। पुलिस की वर्दी मे भूपेश वहां सिगरेट पी रहा था। मुँह घुमाये हुए एक लड़की बैठी थी।  भूपेश गिड़गिड़ा रहा था। मुझे  माफ कर दो जान। उन लोगो ने मेरी शादी जबरन करवाई थी। लडकी ने बेहद गुस्से मे चीखते हुए कहा।

"अब जरा सी भी बेवफाई की तो मैं कितनी  बुरी बन सकती हूँ तुम्हे मालूम  हो चुका है ना?"। लड़की ने मुँह  घुमाया और डॉ अजय के मुंह से चीख नीकल गई । चीख सुनकर होटल का स्टाफ बाहर आ गया।

" अरे कोई उन्हे नीचे उतारो ....अरे कोई उन्हे नीचे उतारो...। वो चीखता रहा।

मैनेजर ने कहा। " साहब  आपको  कुछ भ्रम हुआ है। यहां कोई नही है।

अजय और जोर से चिल्लाने लगा।

" आप सब पागल हो क्या । वो मीना, भूपेश,  हेमल, मेघा आप को नही दिखते है क्या ? मैं मनोचिकित्सक हूं। आप मुझे भ्रम सिखा रहे हो??"

 अजय आपे से बाहर हो रहा था कि पुलिस की जीप आई। तीन- चार दरोगा ने बड़ी  मशक्कत के बाद अजय को कंट्रोल किया । और जीप मे डाला।

पुलिस के साथ आए डाक्टर ने अजय को इंजेक्शन लगा दिया और वो शांत हो गया ।

पुलिस की जीप शहर की और बढ़ रही थी। इंस्पेक्टर ने डाक्टर से पूछा।

" खुराना साब , ये लगता तो बड़े  अच्छे घराने का हे। क्या ये कोई ड्रग के सेवन का असर है ?"।

डो .खुराना ने आराम से जवाब दीया।

" दर असल ये मेरा क्लास फेलो था। आठ साल पहले उसकी पत्नी मीना ने किसी भूपेश नाम के लड़के के साथ मिल कर मेघा नाम की किसी लड़की का मर्डर कर दिया था । और फिर दोनो ने खुदकुशी कर ली थी। जब से ये जनाब मतिभ्रम के मरीज हैं । "

  जीप अब मेन्टल हॉस्पिटल के ठीक सामने आकर खड़ी  हो चुकी थी......

 

 

 

 

"एक्सक्यूज मी। क्या आप के पास कोर्नेटो मीलेगा?"  बड़ी  शालीनता  से  हेमल ने काउंटर पे खड़े लड़के से पूछा। दस साल अमरिका में रहने के बाद इतना डीसिप्लिन तो आना ही था।

  " सिर्फ कप मीलेंगे साब"। काउंटर पे  खड़े लड़के ने जवाब दीया।

  "ठीक है,  तीन चॉकलेट कप और एक  कोक बोतल निकलवा दीजिए ।" कहता हुआ हेमल वाश बेसिन की और बढ़ा । पुरी तरह रगड़  के अपना मुंह धोया और बालो में पानी छींटक कर आईने में बाल बनाये । काउंटर बॉय  को सौ का नोट दिया और बाकी के पैसे तुम रख लेना कहता हुआ अपना पार्सल लिए हेमल पार्किंग की और बढ़ा । हाई-वे के उस होटल का पार्किंग एक बहुत बड़ा मैदान था। उसके एक कोने में झाड़ियों  के पास हेमल ने अपनी कार पार्क की थी,वो गुनगुनाता हुआ अपनी कार की और बढ़ा , उसके चेहरे पर आज अजीब चमक थी। उसकी चाल में आज कुछ नयी ताज़गी  थी, होती क्यों नहीं  ? आज पुरे दस साल बाद वो अपने प्यार से, अपनी चाहत से मिला था, दुर से ही मुस्कुराता हुआ कार के पास जा खड़ा हुआ । पहुंचने से पहले कार का दरवाज़ा खोले प्यार भरी मुस्कान के साथ स्वागत हो इतनी आस  रखना तो इस आधुनिक मजनू के लिए लाज़मी था। हेमल कार के पास खड़ा रहा लेकिन उसकी आशा के विपरीत दरवाज़ा न खुला , उसने सोचा खुशी की मारे  सपने देखते -देखते  मेघा को नींद लग गई होगी। हेमल के एक हाथ में आइसक्रीम और दुसरे हाथ में कोक की  बोतल थी । उसने घुटने और कोहनी से दरवाज़ा खटखटाया। दो मिनट तक अंदर से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। उसने थोड़ी और ताकत के साथ दरवाज़े  को नॉक किया ।

" मेघा, मेघा, सो गई क्या ??मेघा दरवाज़ा  खोलो ज़ान "

हेमल ने आसपास नजर डाली और थोड़ी उंची आवाज से कहा।

" मेघा, दरवाज़ा  खोलो। तुम्हारी आईसक्रीम पिघल जायेगी ।"

पांच मिनट बीत गये पर कार के अंदर से कोई हरकत न हुई । हेमल ने अपने दोनो हाथो के पार्सल को बोनट पे रखा और  विन्डो पे नॉक  करने लगा। वो इसी आस  में था की मेघा कांच के पार  से अपना पंजा मिलायेगी।

"स्वीटी दरवाज़ा  खोलो। मेरा सोने सा कीमती वक्त जाया हो रहा है, मुझे अंदर आने दो, तुम मेरी गोद में सो जाना।"

हेमल की आवाज में अब गिड़गिड़ाहट  थी, पर कार के अंदर  कोई हरकत ना हुई ।

हेमल ने अपना मोबाइल निकाला और मेघा को कॉल लगाया। सोयी हुई मेघा को जगाने का अब यही एक  तरीका बचा था।

" डायल किया  गया नंबर पहुँच से  बाहर  है"

एक बार, दो बार, तीन बार यही कैसेट बजता रहा।

उसका गला अब सुखने लगा था। चेहरे पे पसीने की बुंदे उठने लगी थी। उसने कोक खोला दो तीन सीप से गला भिगोया । फिर विन्डो के पास जाके प्यार से बोला।

"जान, उठ भी जाओ । आप को दस बजे घर पहुंचना  है न ,नहीं पहुंचना है क्या ?। " इसी मशक्कत में दुसरे पांच मिनट नीकल गए ।

उसके दिमाग मे एक  और आइडिया आया। हेमल ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाई  और मोबाइल कार विन्डो के ठीक करीब चीपका के रखा। उसे उम्मीद थी की अचानक उजाले से मेघा उठ जायेगी। लेकिन ऐसा न हुआ तो उसने टिन्टेड ग्लास के परे अपनी नजर दौड़ाई । उसे अपने आप पे यकीन न हुआ । बेक सीट खाली थी। वो अपने-आप को तलाशने  लगा कि  खुद तो नींद मे नहीं है ना?। वो अब बार-बार  मोबाइल टॉर्च की सहायता से कार की  अंदर झांकने लगा। फ्रंट और बैक  दोनो सीट खाली थी।

"शायद वो बाथरूम गई होगी" मन  ही मन सोच कर खुद की परेशानी पे हॅसने  लगा। लेकिन उसका दिमाग काफी तेज था। फौरन उसने कार की चारो दरवाज़े  खींच कर देखा । चारो अंदर से लॉक  थे ।

" तुम्हारी मुझे सताने की आदत अभी तक नहीं  गई है ज़ान "  फौरन वो कार के पीछे गया और डिक्की  को ठोकते हुए बोला। पंद्रह मिनट और निकल गये।  घड़ी मे साढ़े नौ बज चुके थे,दस बजे से पहले मेघा को अपने घर पहुंचना था, जो कि दिल्ली की ट्राफिक मे मुश्किल काम था। आईसक्रीम बोनट पे ही पुरी  पिघल चुकी  थी । वो लेडिज टॉइलेट की तरफ बढा।

" आज मेघा ने मीलने के लिए मन्नत  मांगी थी कि जब तक वो मुझे नही मीलेगी, पानी तक नहीं पीयेंगी। शायद उसे चक्कर आ गये होंगे । कही गिर  तो नहीं गई होगी?" दिल में ऐसे  कई  ख्यालो  के साथ उसने होटल के बड़े मैदान में फैले  हुये  पार्किंग  को दो बार छान लिया। मौका देख कर वो लेडिज टॉइलेट भी छान आया। लेकिन वहां से कोई सुराग न मीला। उसने अब कार का दरवाज़ा  किसी  भी तरह से खोलने की सोची । मैकेनिकल इंजीनियर हेमल के लिए यह कतई मुश्किल काम नहीं था,वो ऐक पट्टी का जुगाड कर लाया और ड्राइवर साईड से सेन्ट्रल लोक खोल लिया ।  कार में मेघा नहीं थी। फौरन उसने बुट ओपन किया । कार की बड़ी  डिक्की बिल्कुल  खाली थी । अब हेमल की  चिंता बढ़ने  लगी थी। पसीना जो बुंद मे अटका हुआ था अब बहने लगा था।

" क्या उसके पति को  पता चल गया होगा? क्या वो  यहां आ गया होगा? गुस्से मे पता नहीं उसने मेघा के साथ कैसा बर्ताव क्या  होगा,क्या कोई लुटेरा आया होगा? "  हेमल के दिमाग मे एक के बाद एक नये सवाल खड़े  हो रहे थे, पर जवाब की बजाय दुसरे हज़ारो  सवाल उसका दिमाग ख़राब कर रहे थे ।

" कार के सारे डोर अंदर से लॉक  थे, तो फिर उसे कोई कैसे ले गया होगा? या वो कैसे बाहर निकली  होगी?"

घड़ी में अब साढ़े  दस बज चुके  थे। दस बजे तक वो बड़ी बेसब्री से फोन डायल करता रहा लेकिन फोन पहुंच के बाहर ही पाया। साढ़े दस बजे  के बाद फोन करना अलाउ नहीं था। वहां किसी  को भी पूछने से हंगामा होने की आशंका थी, फिर भी उसने सावधानी से वॉचमैन को पूछ ही लीया। वॉचमैन के पास से किसी तरह की कोई भी जानकारी नहीं मिली । घड़ी में अब दोनो कांटे एक होने जा रहे थे, झाड़ियों  में से आ रही मेढक की आवाज़  घबराये  हुए हेमल को और डरा रही थी,  फिर भी वो हिम्मत जुटा के झाड़ियों में टाॅर्च के प्रकाश में नजर फेंकता रहा। मेघा के साथ बेइंतेहा प्यार से  गुजारे लम्हे अब डर मे तब्दील हो रहे थे। वो बार-बार मोबाइल को देखता  कि  शायद मेघा का मेसेज ब्लिंक हो जाये । जब  तक मेघा सामने से मेसेज न करे उसे कॉन्टेक्ट करने की मेघा की और से सख्त मनाही थी । मेघा के पति ने साफ धमकी दे रखी थी की अब की अगर पकड़ी  गई तो उसे वो जान से मार देगा। बोखलाहट अब एन.आर.इ.  के सर के  उपर जा रही थी। वो यहां से निकलने  की भी  नहीं सोच  सकता  था। बार बार व्हाटएप नोटीफीकेशन मे 'लास्ट सीन' देखता लेकिन परिस्थिति जस  की तस  ही थी। दो तीन मर्तबा  हेमल हाई-वे पे  दोनों तरफ पैदल ही जा कर देख आया । सिगरेट से अब उसके फेफडे  पुरे भर चुके थे  ,गले से खांसी के स्वरूप बाहर आ रहे थे। रात के अब दो बजने वाले थे, वो कार में सीट फ्लेट करके सोने की नाकाम कोशिश करता रहा। आँख खुल जाने का सवाल ही नहीं था , क्योंकि उसकी आंखो के शटर बंद  ही नहीं हो रहे थे । यह बात ही एसी थी कि वह किसी को बता भी नहीं सकता था। आखिर इंजीनियर साहब के दिमाग ने ठंडे दिमाग से एक हल निकाला । उसने अपने कॉलेज का वोटसएप ग्रुप ओपन किया ,दिल्ली में रहने वाले सहपाठीयो की लिस्ट बनाई । उसमे वो सबसे ज्यादा जिसके करीब था उनसे  मिलना तय किया । वहां होटल के वॉचमैन को  हजार का नोट थमाया और अपना मोबाइल नंबर दिया  कि यहां कोई भी लड़की उसे ढुंढती हुई आये तो बताना के वो रात दो बजे यहां से तुम्हे  ढुंढने को निकला है। हेमल का दिल व दिमाग अब बुरी तरह से झुलस रहा था।

"जो होगा  देखा  जायेगा " फुसफुसाते हुए उसने अपने कॉलेज के दोस्त  इंस्पेक्टर भूपेश को फोन  किया । एक बार घंटी पुरी हो गई ,उसने तेज धड़कनो  के साथ दुबारा  इंस्पेक्टर भूपेश को फोन किया । इस बार वो खुशी से उछल पड़ा  जब उसके कानो में सामने से "हेल्लो" की आवाज सुनाई दी।

" हेल्लो भूपेश में हेमल बोल रहा हूं" थोड़ी  घबराहट  के साथ  हेमल बोला।

" हां, हेमल बोलो। कैसे हो यारा? कब तशरीफ लाये मियां? बताया भी नहीं और चुपचाप चले आए? "भूपेश आगे सवालों की झड़ी लगाता उससे पहले उसकी बातों को बीच में काटते  हुए हेमल ने कहा।

" दोस्त,  वो सब बाते बाद में भी कर लेंगे। फिलहाल में इक उलझन मे फंसा हुं।" हेमल की  आवाज में बोखलाहट सुन भूपेश ने फौरन कहा।

" ठीक है , ठीक है  क्या  हुआ ये बता दोस्त, तेरा ये इंस्पेक्टर दोस्त है ना, कुछ भी जुगाड़ ढूंढ लेंगे। वैसे अभी तु है कहां??।"  भूपेश के दिलासे से हेमल ने मुकम्मल दो घंटे बाद चैन की गहरी साँस ली।

दोनो ने हाई-वे होटल के पते के बारे मे गुफ्तगू की। हेमल जगह न छोड़ने की अपनी मजबूरी बताता उससे पहले इंस्पेक्टर भूपेश ने कहा।

" ओये, मेरा थाना यहीं पास मे ही है। तु वही पे रूक । मेरे पास जीप है, में अभी आया।"

 फोन काटते ही फिर हेमल ने वोटसएप चेक किया । लेकिन मेघा के मेसेज का कोई नोटीफीकेशन नहीं था। वो फिर से यहां वहां दुर तक नज़रों  से तलाशता रहा , आधी रात अब बीत चूकी थी,वाहनो की आवा जाही भी अब कम हो रही थी, दरख्तों  के पत्तो की सरसराहट अब साफ सुनाई देने लगी थी। दो तीन गाड़ियों  की आवाज पे हेमल ने उम्मीद से नजरे घुमाई  । लेकीन वो उसे निराशा करते  हुए निकल  गये  । दिल्ली की सर्द  रात मे हेमल पसीने से तर हो रहा था ,इतने में दुर से गाड़ी के इंजन की आवाज हेमल के कानों के करीब आती सुनाई दी, दूर  से मोमबत्ती सी दिख रही हेडलाइट जैसे जैसे करीब  आती गई  रौशनी बढ़ती गई   । जीप ठीक उसके पास आकर खड़ी हुई । अंदर से उतरते लंबे चौडे वर्दी पहने इंसान को पहचान ने में हेमल को कोई परेशानी नहीं हुई ,उसे देखते ही वह उसके पास दौड़ गया, दोनो गले मिले। कालेज ख़त्म  होने के बाद आज पुरे दस साल बाद दोनो मिले थे। इंस्पेक्टर साहब  के आदेश पे पहले एक लड़का चाय लेकर हाजिर हो गया था , चाय का प्याला हाथ मे लिए भूपेश ने चुप्पी तोड़ी ।

"बता दोस्त क्या माज़रा  हे? कोई लड़की का चक्कर है या किसी की पिटाई कर दी है ?"भूपेश ने मुस्कुराते हुए सवाल किया ।

 "यार, तुझ  से क्या  छुपाना। अपनी मेघा का मसला है " हेमल ने हिम्मत इकठ्ठा कर कह ही दिया ।

 " कोन मेघा?" भूपेश ने फौरन सवाल किया ।

" वो ही जो अपने साथ पढ़ती थी। जिसके साथ मेरा अफेयर था। हम दोनो कालेज के बाद भी एक दूजे को मीलते रहे थे। उसके घर वालो को ये बात पता चली। हमारी जाति अलग होने की वजह से उन्होने रिश्ता नकार दिया  ,मैने बहुत कोशिश की लेकिन वो हरगिज न माने। लेकिन हम दोनो भी अपनी ज़िद पे अड़े थे। हमने भाग निकलने का तय किया  था,लेकिन रात को उसके घर वालो को इस  बात की जानकारी हो गई । उन्होने गुंडो को भेज कर मेरी पिटाई करवा दी । और रातों रात मेघा को दुसरे गाँव भेज दिया । मैं  ठीक होकर अस्पताल से निकला तो मुझे  पता चला कि मेघा की जबरन शादी करवा दी गई है। मुझे वार्निंग दी गई थी कि आइंदा अगर में मेघा से मिलूंगा तो वो लोग मेघा को जान से मार देगे। मैं  वह सदमा बर्दाश्त करने के काबिल नहीं था सो मैने देश छोड़  दिया । अमरीका जाने के बाद दो साल तक मेरा मेघा से किसी भी तरह का कोई संपर्क नहीं हो पाया । और मैं  भी अब उसके वैवाहिक जीवन में जहर घोलना नहीं चाहता था। लेकिन आठ साल पहले मुझे  कॉलेज के वोटसएप ग्रुप में एड किया  गया। मेरी नजर उसमे सब से पहले मेघा का नंबर ढूंढ रही थी। और वो मुझे  दिख  गया, उस दिन में बहुत खुश हुआ था ग्रुप में बाते करते करते हम पर्सनल चैट करने लगे। हमारा प्यार फिर से जाग उठा , हम एक दूजे मे खोने लगे । लेकिन एक दिन उसके पति के हाथ मे फोन आ गया, उसने हमारी  बातें पढ़  ली । उसने मेघा को धमकी दी के अब से ऐसा नहीं होना चाहिए । लेकिन हम दोनो एक दूजे से बाते किये बिना चैन नहीं पाते थे। फिर वो ही सिलसिला शुरु हो गया । फिर वो पकड़ी गई, एसे दो-तीन हादसो के बाद हमने समय मर्यादा तय कर ली ,  वो जब सामने से कॉन्टेक्ट करती तो ही हम बाते करते। लाख अड़चने आयी लेकिन हम एक दूजे को भुल नहीं पाये। दिन ब दिन हमारा प्यार नई गहराई और नई ऊंचाई छुता गया। दिन रात , महीनों व सालो की तड़प के बाद हमने मिलना तय किया । और में यहाँ बड़े  सपने लिए हिन्दुस्तान आ पहुंचा । मेघा की भलाई सोच कर मैने कार में ही मिलना तय किया । आखिरकार वो लम्हा आ ही गया था जिसका में दस साल से इंतजार कर रहा था,वो साक्षात परी लग रही थी उसे  देख में दस साल के सारे गीले शिकवे भुल गया। सदियों के इंतजार लम्हो में घुल गया । चार घंटे यहाँ  इसी दरख्त के नीचे मिनटो में  गुजर गये। बार-बार सूखे हुए हमारे सदियो से प्यासे लब एक दूजे मे घुल रहे थे। मेघा का हलक सुख रहा था, उसने आईसक्रीम खाने की इच्छा जताई । हम जब दस साल पहले आखरी बार मिले थे मेघा को अगले दिनआइसक्रीम खिलाने के वादे के साथ जुदा हुए थे। वही वादा मेघा ने याद दिलाया । में आइसक्रीम लेने निकला  और सिर्फ पांच मिनट ...."। उसके बाद जो हुआ वो वाक्या हमने तुम्हे  बताया ।

भूपेश दो मिनट तक कुछ न बोला।फिर धीरे से बोला

"तुमने ज्यादा पी ली है हेमल। तुम्हे देसी नहीं पिनी चाहीये थी"

हेमल ने गुस्से मे उत्तर दिया । " तुझे मजाक सुझ रहा है  यार? मेने कुछ नहीं पीया। मैं  पुरे होश  में हूं।

फिर भी भूपेश हेमल को घूरता रहा। हेमल से यह सहा नहीं गया। वो हाथ पटकता हुआ बोला।

" यार मेने तुझे मदद के लिए बुलाया था, मजाक के लिए नहीं"

अब बारी भूपेश की थी। थोड़ा  चिल्लाता हुआ बोला।

" मजाक तो तु कर रहा है मेरे से जो व्यक्ति इस दुनिया मे है ही नहीं तुने उससे प्यार भी कर लिया और मिल भी लिया?? वाह भाई वाह,  क्या  मनोहर कहानीकार बन गया अमरीका  जाकर मेरा यार।" भूपेश ताली बजाने लगा। उसे रोकते हुए हेमल ने कहा।

" मैं  कुछ समझा नहीं। मजाक ना कर यार, मेरी हालत समझ  दोस्त ।" हेमल थोड़ा गिड़गिड़ाया ।

"मेरे भाई हेमल, मेघा दस साल पहले ही उसके पति के हांथों मर चूकी है । उसे ज्यादा दहेज की दरकार थी और उपर से उसे तुम्हारे और मेघा के रिश्ते के बारे मे पता चल गया था। वैसे भी वो मनोरोगी था। उसने  गुस्से मे आकर मेघा का कत्ल कर दिया । फिर उस पर  मुकदमा चला, दो साल केस चला और इल्जाम साबित हो गया। कहा तो यह भी जाता था कि मेघा के पति का किसी और से नाजायज संबंध था । उस औरत ने मेघा का कत्ल किया और उस औरत के पति ने मेघा के पति का कत्ल कर दिया था।"

   अब की बारी हेमल की थी। उसने ठीक वैसी ही शक्ल बनायी जैसी भूपेश ने बनायी थी। भूपेश को उपर से नीचे तक देखता हुआ बोला।

" इंस्पेक्टर साब, मुफ्त में मिले तो क्या , थोडी लिमिट में पीया कीजीये।और देसी तो हरगिज न पीजीये। और हां, थाने  में बैठे बैठे आप भी काफी मनोहर कहानिया बनाने लगे हो।"

" हेमल, तुम होश  मे नहीं हो। प्लीज तुम होटल चलो। आराम करो।" भूपेश ने हेमल का हाथ पकड़ना चाहा।

 हाथ छुडवाते हुए हेमल ने कहा।

" इंस्पेक्टर साब, तुम पुलिस वाले कभी सबुतो के बीना मानने वाले नहीं हो। अपने स्कूल के वोटसएप ग्रुप में मेघा एक्टिव सदस्य है । और लो ये देखो । ये पुरा कॉल लॉग । हमने कितनी  बार बाते की है। लो यह हमारा पर्सनल चेट बॉक्स कि हम दिनभर कितनी चटर पटर करते है, और यकीन न आये तो काॅल रिकार्डिंग सुनाउं क्या ?लिजिए जनाब चेक कर लिजिए ।" हेमल ने अपना फोन थमाते हुए कहा।

 " मेरे भाई, तेरे हाथ जोड़ता हूं। तुझे भ्रम हुआ है। इस फोन मे एसा कुछ भी नहीं हे। ना तो मेघा अपने स्कूल के वोटसएप ग्रुप में कभी थी। ना तो तेरे काॅल लोग में उसका नंबर है ।"

 अब हेमल थोड़ा गुस्साए हुए बोला।" अब मजाक की हद होती है। या तो इंस्पेक्टर साहब तुम होश में नहीं हो। ले ये नंबर डायल कर अभी दुध का दुध और पानी का पानी हो जायेगा।"  हेमल ने भूपेश को नंबर दिया ।

भूपेश ने अपने मोबाइल से फोन डायल किया ।

" डायल किया गया नंबर अस्तित्व मे नहीं है"। तीन बार,चार बार डायल किया लेकिन यही कैसेट बजा।

भाई तुझे मतिभ्रम की बिमारी है। जिसे  हेल्यूसीनेशन कहते है। तु अपना इलाज करवा यार। अपने ही स्कूल का दोस्त अजय बहुत बड़ा सायकायट्रिस्ट बन चुका  है। बहुत से कैदियों  को ठीक करने हम उसे बुलाते हे। (एक  इलेक्ट्रिक शॉक मे वो सब ठीक कर देता है। (वो मन मे ही बड़बड़ाया )। मैं उसे काॅल करता हूं। वो ही तेरी मदद कर सकता है। और फोन डायल करता हुआ सिगरेट लेने को वहां से निकल पड़ा ।

 थोड़ी ही देर मे एक चमचमाती कार आकर खड़ी हो गई। सफेद बाल और थोड़ी  झुर्रीयो के बावजूद अजय को पहचान ने मे हेमल को दिक्कत न हुई । दोनो गले मिले और कार मे जा बैठे  डॉ .अजय ने सिगरेट जलाई। कुछ देर इधर उधर की बाते करने के बाद अजय ने पूछा।

   "माफ करना यार हेमल, देर रात हो गई है। काम की बात करले ?। बता क्यों मुझे इतनी रात गये याद किया ?"

" मैने??" हेमल ने आश्चर्य से पूछा।

" हां भाई तुने दो बार काॅल किया और मुझे गहरी नींद से उठाया"। अजय ने अपना मोबाइल दीखाते हुए कहां।

" नहि यार, मेरे पास तो तेरा नंबर भी नही हे। वो कॉल भूपेश ने की थी"  हेमल जैसे सफाई दे रहा था की उसने उसे डिस्टर्ब नही किया ।

यह सुन कर अजय ठहाके मार हॅसने  लगा।

" यार, तू अमरीका से पगला के आया है क्या ? तुने और किसी को भूपेश समझ  लिया लगता है।"

" अरे यार, भूपेश को मे नही पहचानता क्या ? वो पुलिस की वर्दी में था। हमने साथ मे चाय पी और सिगरेट के कश लगाए"। अब हेमल तप रहा था।

फिर अजय ने ठहाके लगाए । और हेमल का हाथ पकड़ कर बोला।

" दोस्त, भूपेश को मरे हुए आठ साल हो गए है । अपनी कलीग मेघा के मरने के ठीक दो साल बाद वो मरा। मेघा को उसने मारा या उसकी प्रेमिका ने ये पता नही चल पाया। पर वो सायको हो चूका था। पुलिस की वर्दी ही पहन कर घुमता रहता ।उसने  खुदकुशी करली थी ऐसा लोग कह रह थे। पर कुछ लोग का मानना है की उसकी प्रेमिका ने अपने पति के साथ मिल कर उसका कत्ल कर दिया था। "  बोलते बोलते अजय का हलक सूख गया हो वैसे ही पानी की बोतल उठाई। हेमल ने फिर वही स्कूल वोटसएप ग्रुप और कॉल लोग की बाते दोहराई ।अजय ने कहा कभी भी ग्रुप मे मेघा या भूपेश थे ही नही । अपना फोन थमाते हुए उपर से नीचे सारे कन्वरजेशन दिखाए ।

रात अब पूरी तरह से ढल चूकी थी। कुत्तो और लोमड़ियों  के रोने की आवाजे साफ सुनाई दे रही थी। अचानक भारी बारिश शुरु हो गई । डॉ .अजय ने अपनी बात को पुख्ता करने को और सबूत देती बाते कही। पास मे से हेमल का कोई रिस्पॉन्स न देख उसने मोबाइल मे से मुंह उपर किया । पास मे हेमल नही था। वो झट से कार से नीचे उतरा।

" मजाक करते हो। रात की मेरी नींद हराम कर खुद इतनी सी सच बात मे बोर हो गया??"  दिल ही दिल मे गुस्से से भिन्ना  उसने कार के दरवाज़े  को जोर से लात मार दी। अचानक उसकी नजर झाडीयों मे एक दरख्त पर जा ठहरी। कुछ चमकती चीज दिखाई दी। वो थोड़ा करीब गया,वहां एक कपल फुसफुसाहट कर रहे थे । अजय को ताज्जुब हुआ के इतनी रात गए और वह भी दरख्त पे??

और कान देकर सुनने लगा। लड़की लड़के का हाथ थाम कर कह रही थी।

" वादा करो हेमल, अब मुझे छोड़ कर कभी नही जाओगे "।

नही जान,मैं अब हमेशा के लिए तुम्हारा हो चुका हुं मेघा।"

अजय को खुद पे यकीन न हुआ । घबराहट मे उसके पांव पीछे चलने लगे। सामने के किनारे दुसरे पेड़ पर उसकी नजर अटकी । वहां कुछ धुंआ सा उठ रहा था। वो उसके पास गया और चौंक उठा। पुलिस की वर्दी मे भूपेश वहां सिगरेट पी रहा था। मुँह घुमाये हुए एक लड़की बैठी थी।  भूपेश गिड़गिड़ा रहा था। मुझे  माफ कर दो जान। उन लोगो ने मेरी शादी जबरन करवाई थी। लडकी ने बेहद गुस्से मे चीखते हुए कहा।

"अब जरा सी भी बेवफाई की तो मैं कितनी  बुरी बन सकती हूँ तुम्हे मालूम  हो चुका है ना?"। लड़की ने मुँह  घुमाया और डॉ अजय के मुंह से चीख नीकल गई । चीख सुनकर होटल का स्टाफ बाहर आ गया।

" अरे कोई उन्हे नीचे उतारो ....अरे कोई उन्हे नीचे उतारो...। वो चीखता रहा।

मैनेजर ने कहा। " साहब  आपको  कुछ भ्रम हुआ है। यहां कोई नही है।

अजय और जोर से चिल्लाने लगा।

" आप सब पागल हो क्या । वो मीना, भूपेश,  हेमल, मेघा आप को नही दिखते है क्या ? मैं मनोचिकित्सक हूं। आप मुझे भ्रम सिखा रहे हो??"

 अजय आपे से बाहर हो रहा था कि पुलिस की जीप आई। तीन- चार दरोगा ने बड़ी  मशक्कत के बाद अजय को कंट्रोल किया । और जीप मे डाला।

पुलिस के साथ आए डाक्टर ने अजय को इंजेक्शन लगा दिया और वो शांत हो गया ।

पुलिस की जीप शहर की और बढ़ रही थी। इंस्पेक्टर ने डाक्टर से पूछा।

" खुराना साब , ये लगता तो बड़े  अच्छे घराने का हे। क्या ये कोई ड्रग के सेवन का असर है ?"।

डो .खुराना ने आराम से जवाब दीया।

" दर असल ये मेरा क्लास फेलो था। आठ साल पहले उसकी पत्नी मीना ने किसी भूपेश नाम के लड़के के साथ मिल कर मेघा नाम की किसी लड़की का मर्डर कर दिया था । और फिर दोनो ने खुदकुशी कर ली थी। जब से ये जनाब मतिभ्रम के मरीज हैं । "

  जीप अब मेन्टल हॉस्पिटल के ठीक सामने आकर खड़ी  हो चुकी थी....

 

 

 

 

 

प्यार चाहत भटकाव उलझन

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