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सच क्या है ?
सच क्या है ?
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© ARUN DHARMAWAT

Drama

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"राम - राम चाचा।"

"राम - राम, अरे आओ-आओ लंपट।"

"अब खाली राम - राम से ही काम चलाओगे चाचा या बीड़ी भी पिलाओगे।"

"अरे हाँ हाँ बेटा, क्यूँ नहीं, बैठो -बैठो लो बीड़ी पीओ।"

"अब चाचा ये बीड़ी तम्बाकू ही बेचते रहोगे या गांव की कोई खैर खबर भी रखोगे।"

"अरे बेटा मेरा तो अब कहीं आना-जाना होता नहीं, कोई आ कर बता देता है बस वही मालूम पड़ जाता है, क्यों कुछ हुआ है क्या।"

"हुआ ...? बहुत कुछ हुआ है चाचा.... वो अपना कालू है ना, अरे वही जो कई महीनों से बाहर गया है काम करने, किसी ठेकेदार के साथ। सुना है उसकी जोरू ने खूब हंगामा किया बतावें रात भर, कोई बता रहा था, ऊपरी हवा या कोई आत्मा वात्मा आई उसमें।"

"अरे बेटा..…आई होगी, इन बैचारी औरतों का दुःख दर्द कौन समझ सकता है।"

"कैसा दुःख दर्द चाचा।"

"अरे छोड़ो बेटा, क्या रखा इन बातों में।"

"कुछ छुपा रहे हो चाचा या बताना नहीं चाहते, मैं तो बस यूं ही पूछ रहा था कि जिन औरतों के मर्द नहीं होते या बाहर परदेस कमाने निकल जाते, ज्यादातर उनको ही ये आत्माएं, भूत प्रेत क्यों सताते हैं। अब गए बरस रामदेई को डायन बता कर सब गांव वालों ने मिलकर मार डाला था, याद है तब पुलिस आई थी गांव में, तब शहर से डॉक्टरों की पूरी टोली भी आई थी, मालूम है वो बड़ी डॉक्टरनी क्या कह रही थी...ये भूत प्रेत, ऊपरी सुपरी हवा ये डायन और आत्मा कुछ नहीं होते, किसी को भी कोई मानसिक रोग हो सकता है, जिसका इलाज संभव है, उसका इलाज करवाना चाहिए ये झाड़ फूंक, टोने टोटके कोई इलाज नहीं है।"

"अब चाचा कालू की बहू को वो भोपा ठीक करेगा क्या जो खुद नशा करके पड़ा रहता है, अरे वही जिसपे बलात्कार का केस भी चल रहा है, वो तो कहता बतावें की मैं थोड़े किसी के पास जाता हूँ, जिसको गरज होती है वो खुद मेरे पास आती है।

चाचा कुछ नहीं बोलते लंपट की नजरों से नजरें मिलती है। दूर कालू की बहू अपनी सास के साथ भोपे की कुटिया की तरफ जाती नज़र आती है ...

भूतप्रेत मानसिक रोग ओझा

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