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© Mangi Joshi

Drama Romance

26 Minutes   699    29


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दिल ने फिर याद किया बर्क़ सी लहराई है !
फिर कोई चोट मुहब्बत की उभर आई है !!

एक अंतरे के साथ डिम्पी ने जैसे ही अपना फोन रिसिव किया, सामने से एक चौकानें वाली ख़बर आई !
" अरे, डिम्पी...सुन रही हो ना " !
नेहा कुछ ओर बोलती उससे पहले ही डिम्पी ने फोन रख दिया औऱ खुद को धितकारने लगी, बार-बार खुद को कोसने लगी और रोते-रोते कब उसका मन 6 साल पहले कॉलेज की बीती-बातों के इर्द-गिर्द जा पहुँचा !

माँगी.. तुम्हारी फितरत ही बिस्तरों पर जिस्मो के साथ खेलना है !
एक तलब पूरी होते ही फिर दूसरी मुहब्बत से !
और फिर कॉलेज की कैंटीन में सन्नाटा छा गया !

अरे यह सन्नाटा कैसा ? यह आवाज कैसी ?

कॉलेज की कैंटीन में खड़े-बैठे सीनियर-जूनियर, लड़के-लडकिया, प्रेमी-जोड़े, दोस्त-दुश्मन, पार्टनर, सबके लिए एक सनसनी खबर बन गई थी ! सभी के मन मे एक ही बात चल रही थी, एक ही बात दोहरा रही थी, " काश थप्पड़ वाला सीन रिटेक होता " !
तो कितनों ने शुरुवाती छोटी बात से आखिरी थप्पड़ के क्षण तक को मोबाइल में कैद करके खुद को और खुद की जात के साथ-साथ अपने मोबाइल को भी धन्य मान रहे थे !

" ख़बरदार, अभी एक भी लफ्ज अपनी गन्दी जबान से निकाला तो "! ओर फिर माँगी ने डिम्पी के मुह को जोर से अपनी हाथो की पकड़ में जकड़ा और गुस्से में लाल तमतमाई आँखों से अपने ख़ौफ़नाक चेहरे को डिम्पी के गोरे-मासूम जकड़े चेहरे के पास लाकर फिर से गुस्से में कहा, " अगर तुम्हारी जगह कोई ओर लड़का होता तो, आज उसका अंतिम संस्कार अपने इन्ही हाथों से कर दिया होता पर तुम नारी हो और मैं नारीयो की पूजा नही इज्जत करता हु !!

माँगी, डिम्पी को छोड़, वो मर जाएगी !
जमा भीड़ में से माँगी और डिम्पी के फ़्रेड अपनी-अपनी तरफ से पूरी ताकत लगाकर डिम्पी को माँगी के जकड़े चंगुल से छुडवाने का हर एक प्रयास कर रहे थे ! पर मजाल, माँगी की पकड़ से डिम्पी छूट जाए !

ओर अचानक....यह क्या ?

माँगी खुद डिम्पी को अपने चंगूल की पकड़ से छोड़ता है और डिम्पी जोर-जोर से हाँफते हुए जमीन पर गिर जाती है और फिर खुद को गिरते-संभालते हुए हाँफती-हाँफती कहने लगती है, " तो, कर दो ना ! मेरा भी अंतिम संस्कार वैसे भी तो आज तुमने मेरा अंतिम संस्कार तो कर ही दिया है ना ", गुस्से में डिम्पी माँगी के शर्ट का कोरल पकड़कर कहती है !

कैंटीन की जमा-भीड़ में सबके चेहरे पर होश उड़े हुए थे ! कारण की एक ओर डिम्पी कॉलेज के किसी भी बदमाश से सीधे भिड़ने में माहिर, वो जितनी बला की खूबसूरत, कॉलेज के अप्सराओ की रानी ! उतनी ही सख्त स्वभाव की बोल्ड लड़की भी थी ! तो दूसरी ओर माँगी जो एक-दम विपरीत किसी से कभी कोई लड़ाई-झगड़ा नही, पर अगर किसी ने सांमने होकर जंग छेड़ दी तो फिर स्वाहा, चेहरे पर फीलिंग नाम के अलंकार से कभी-कोई लेना-देना ही नही, खुद की मस्ती में मस्त, कॉलेज का सबसे हैंडसम, बॉडी से टाइगर श्रॉफ का फैन, पर उपरवाले ने उसमे एक ही कमी रख दी थी, वो थी उसकी हाइट ! पर उसने अपनी बॉडी ओर हाइट का मेल-मिलाप करके हर एक लड़की को अपना दीवाना किये हुए था !
ओर आज तो डिम्पी और माँगी की भिड़त ! एक पैट्रोल तो दूसरा बारूद ! दोनो में से कोई एक भी हार मानने वाला ही नही था, अगर एक ब्लास्ट होता है तो दूसरे का अपने-आप ही खात्मा पर विध्वंस के साथ, दोनो ज्वलनशील ! ओर ऊपर से दोनों एक-दूसरे के प्रेम में लबालब, " जब प्यार हद से बाहर होकर आपा खोता है तो फिर पानी मे भी आग लगाने की हिमंत रखता है !

फिर भला...यह दोनों ज्वलनशील प्रेमी !

सुन ले, सुअर..आज के बाद तू तेरे लिए, मैं मेरे लिए, दोनो एक-दूसरे के लिए मर गए, " डिम्पी ने आज सोच ही लिया था कि, " ऐसी जिद्दी कमीनी मुहब्बत से हमेशा के लिए छुटकारा ", वो रोते-रोते गुस्से में माँगी पर चिल्लाए जा रही थी !

आज माँगी को तो कोई बात ही नही सूझ रही थी की वो क्या बोले, क्या कहे, उसे कैसे समझाए ? इसलिए उसने ज्यादातर चुप रहना ही खुद के लिए बेहतर समझा !

शादी का जासा देकर भोली लड़कियों को अपने हवस के जाल में फ़साना, वो तो मैं थी जो तुम्हारी ऐसी कोई चुपड़ीं बातो में न आकर बिस्तर पर ", डिम्पी आज रुकने का नाम ही नही ले रही थी ! कैंटीन की जमा-भीड़ में सबको चीख-चीखकर बताना चाहती थी कि " माँगी कैसा लड़का है, उसके भोले-मासूम चेहरे के पीछे नायक नही लड़कियों के साथ खेलता खलनायक छिपा है " !

डिम्पी, मैं अभी भी कह रहा हु, " बोलने से पहले सोच, तूम क्या बोल रही हो ? मैंने तुमसे पहले भी कहा था कि, " मैं तुमसे बेइंतहा मुहब्बत करता हु, सिर्फ तुम ही मेरे इस दिल मे पहली और आखिरी मुहब्बत हो पर शादी तो तुमसे तो क्या किसी से भी ता-उम्र हरगिज नही कर सकता ! तुम्हारे से भी पहले मैंने अपना दिल मातृभूमि को दे दिया था और उसके साथ ही शादी, जीना-मरना ! उसकी गोदी में ही सर रखकर जिंदगी-भर रोमांस करना चाहता हु और उसकी गोदी में ही अपना सर रखकर चैन की नींद भी सोना चाहता हु " !

ख़बरदार, अपनी दोगली थिंकिंग के साथ अपनी पावन मातृभूमि का नाम भी लिया तो ! सीधे-सीधे क्यो नही कहते, " मुझसे तुम्हारा जी भर गया है, मैं तुम्हारे साथ बिस्तर की नींद नही बनी इसलिए अब मुझे छोड़कर किसी ओर से अपनी नींद गुजारना चाहते हो और मैं यह अब हरगिज़ नही होने दूँगी " !

माँगी और डिम्पी का आपस मे 15 दिनों से शादी को लेकर झगड़ा चल रहा था ! ओर आज बात बढ़कर इतनी बढ़ गयी कि दोनों ने सोच ही लिया था कि, " अब बस..ओर नही "!

माँगी ने डिम्पी को कितनी ही बार समझाया था कि, " वो उससे तो क्या किसी से भी शादी हरगिज नही कर सकता ! अगर वो अपनी मातृभूमि की रक्षा करते-करते शहीद हो गया तो घर पर उसकी पत्नी मतलब डिम्पी विधवा हो जाएगी फिर आजीवन अकेले....ऊपर से यह समाज, " नही, नही वो शादी डिम्पी से तो क्या ? कभी किसी से नही करेगा " !

जब दोनों पहली बार मिले थे, तब माँगी ने सिर्फ दोस्ती तक ही बात को सीमित रखने को कहा था पर फिर बुझे वक्त के साथ दोनो की बढ़ती नजदीकता ने कब एक-दूसरे को अपना लिया पता ही नही चला !

माँगी जो शुरुवात से ही अकेला था, उसका जन्म होते ही उसके माता-पिता की एक एक्सीडेंट में देहांत हो गयी थी ! फिर जैसे-तैसे दुनिया की मार को झेलता बड़ा हुआ ! वो घर मे इकलौता ऊपर से उसके कोई भाई-बहन भी नही !
सगे-सबन्धियों ने भी उससे किनारा कर दिया था, तो ऐसे वक्त में उसका सहारा ऊपर सिर्फ आसमा और नीचे धरती थी ! जिसने उसे सहारा दिया उसके लिए उसने अपने बालमन में बड़ा होकर उसी मातृभूमि की ही सेवा करने का ऐलान कर दिया था !
तो दूसरी ओर डिम्पी अमीर बाप की इकलौती रूवाबी लड़की ! माँ का प्यार तो उसे कभी नसीब हुआ ही नही ! डिम्पी की हर-एक ज़िद को उसका अमीर बाप पूरी करने में कोई कसर बाकी नही रखता था ! इसलिए डिम्पी को हर एक चीज खुद की अपनी ही लगती थी, चाहे वो कोई भी क्यो न हो ? डिम्पी ने अपने पापाजी से भी " माँगी और खुद की शादी " को लेकर बात भी की थी और उसके बाप ने डिम्पी की यह जिद भी !

माँगी गरीब घर का लड़का और वो भी अकेला ! गरीब जरूर पर खुद्दारी से जीने वाला, यह बात डिम्पी भी अच्छी तरह से जानती थी !
आज-तक माँगी ने डिम्पी को कभी छुआ तक भी नही ! फिर भला, वो आज ऐसा कैसे सोच सकती थी ! बस यही बात डिम्पी को माँगी की अच्छी लगती थी कि वो कितना दूसरे लड़को से प्रायः अलग है ! कई बार दोनो अकेले साथ होने के बावजूद भी कोई गैर फायदा तक भी नही उठाया !

आज तो बात बढते-बढ़ते इतनी बढ़ गयी थी कि अब हमेशा के लिए यह प्यार का पावन रिस्ता और दोनो का मुलाकाती सफर भी खत्म ! हुआ भी यही, कैंटीन की हर एक बैच गवाह थी उन दोनों की मुलाकात में प्यार भरी बातो से लेकर हमेशा के लिए अलग हो जाने के अंतिम फैसले तक !
कैंटीन की जमा-भीड़ में अब फिर से कितने चेहरो पर खुशी की लहर चमक रही थी ! कारण की दोनो अब एक दूसरे से अलग हो रहे थे और अब फिर किसको अपना हमसफ़र चुनते है या फिर कौन होगा ? अब हमेशा के लिए साथ चलने वाला हमसफ़र !

दूसरे दिन सुबह डिम्पी जैसे ही कॉलेज आई तो चारो ओर एक ही चर्चा ने जोर पकड़े हुए था, " वो, देख डिम्पी पर आज इसका आशिक़ उसके साथ नही दिख रहा है ", पर डिम्पी को लोगो की बातों की कोई परवाह नही थी ! परवाह थी तो सिर्फ माँगी की पर वो आज कही दिख ही नही रहा था !

वो कहा है ? वो आज क्यो नही आया ? कही-कोई उसने ? " नही-नही, वो इतना कमजोर नही है ! शायद उसका गुस्सा ! कल सबके सामने मैंने कैंटीन में उसके ऊपर हाथ जो उठा लिया था !

पर डिम्पी तुम्हे माँगी पर हाथ नही उठाना चाहिए था, " नेहा ने कहा !

नेहा, डिम्पी की बेस्ट फ्रेंड थी और दोनो का अधिकतर वक्त साथ मे ही गुजरता था और बीतता भी था ! दोनो एक दूसरे को बचपन से जानती थी ! इतना ही नही, दोनो के पापा का बिज़नेस भी शुरुवात की एक छोटी ऑफिस से लेकर अब-तक हर जगह अपनी खुद की ब्रांच बनाने तक पार्टनरशिप में ही था ! पढाई से लेकर शॉपिग तक दोनो की प्रसंद भी काफी एक-दूसरे से मिलती-जुलती थी ! कॉलेज का सबसे हैंडसम बन्दा माँगी भी तो दोनो की ही प्रसंद थी पर एक म्यान में दो तलवार, " बस यही हाल प्यार में प्रेमियों का भी ! फिर भला, " माँगी से दोनो कैसे प्यार फरमा सकती थी " ! नेहा ने आगे होकर माँगी और डिम्पी की मुलाकात कराई और फिर खुद अपने दिल पर पथ्थर रखकर दोस्ती के लिए अपने प्यार को कुर्बान कर दिया !

नेहा, तुम भी तो माँगी से प्यार करती थी ना ", डिम्पी फिर नेहा के दिल मे माँगी को भरना चाहती थी !

करती थी, पर अब नही ! तुम कहना क्या चाहती हो ? " नेहा थोड़ा चकित होकर डिम्पी को पूछती है !

कुछ नही, छोड़ो " !
डिम्पी ने स्माइल के साथ नेहा को कहा !

डिम्पी, पर तुम्हे माँगी पर हाथ नही उठाना चाहिए था, जब वो तुमसे कल मिले उससे माफ़ी माँग लेना..प्लीज " !
नेहा डिम्पी को उसकी गलती समझाने और माफी मागकर बात को वही रफा-दफा करने का प्रयास कर रही थी !

ओके, माय डिअर. नाउ प्लीज लीव इट "!

डिम्पी वैसे भी माँगी को लेकर काफ़ी परेशान दिख रही थी !
डिम्पी ने कई बार माँगी को फोन भी किया पर उसका फोन बंद ही बता रहा था ! वो सोच-सोचकर परेशान होए जा रही थी !
वो कहा है ? उसे कैसे मनाऊ ? उसका गुस्सा ?

डिम्पी फिर कल की सुबह का इंतजार करने लगी,
" कल तो माँगी सुबह कॉलेज आएगा ही उससे माफ़ी माँगकर बात को रफा-दफा कर दूँगी पर उसके सामने कैसे जाऊ ! उसका गुस्सा पर दिल का वो साफ है थोड़ा-बहुत भाव खाएगा ! मैं ख़ामख़ा यू ही ", और शर्माकर सो गई !

सुबह होते ही डिम्पी माँगी को कॉल लगाने का प्रयास करती है, " आप जिस नंबर को कॉल लगाना चाहते हो, वो फोन या तो बन्द है या अस्तित्व में नही है ", धन्यवाद ! और फिर मुड़ खराब !

फिर से डिम्पी के भौओ पर गुस्सा तन गया, " बस माँगी की यही बात मुझे खलती है, मेरे गुस्से का कारण ! उसे मेरी परवाह ही नही है, मैं सांमने होकर सॉरी मांग रही हु और वो है कि ? देखना एक दिन वो जरूर पछताहेगा पर मैं तब.." !
डिम्पी अपने रूम के अंदर लगे विशाल आईने के सामने खड़ी होकर बड़बड़ाए जा रही थी !

बेटा डिम्पी, नास्ता रेडी है ", डिम्पी के पापा सुबह जल्दी उठकर खुद के लिए और अपनी बेटी डिम्पी के लिए नास्ता और चाय बनाकर रख देते है और फिर ऑफिस का टाइम होते-होते वो खुद रेडी होकर डिम्पी को हमेशा की तरह आज आवाज लगाते है और फिर दोनो साथ मे नास्ता करने लग जाते है !

डिम्पी के लिए उसकी माँ, पापा, दोस्त, दादा-दादी.. सब के फर्ज उसके पापा ही अदा किया करते थे ! इतने बड़े विशाल घर मे नॉकर-चाकर की कोई कमी नही थी पर डिम्पी के पापा अपना काम स्वयं करने में ही विश्वास रखते थे ! पूरे दिन ऑफिस में बिजी होने के बावजूद भी वो शाम को डिम्पी से पूरे दिन का हिसाब लिया करते थे, की आज क्या किया ? उसके दोस्त, नेहा, माँगी के बारे में और तुम्हारी पढाई, इत्यादि "!

आज जब डिम्पी सुबह-सुबह कॉलेज आयी और चारो ओर नजर घुमाई पर माँगी कई नजर ही नही आ रहा था ! मानो अब डिम्पी के लिए कॉलेज में रहना एक पल के लिए भी दुर्भर हो रहा था ! वो नेहा को साथ लेकर सीधे माँगी के घर की तरफ गई ! वहां जैसे ही सड़क पर कार रोकी पर टूटे घर के बाहर ताला लगा हुआ था ! आजु-बाझु भी पूछा, पर किसी को कोई खबर-अंतर तक भी नही !

अब क्या करे ? कहा है ? सोच-सोचकर डिम्पी का मन परेशान हो रहा था !
नेहा, माँगी कहा है ? डिम्पी नेहा को पूछती है पर नेहा भी डिम्पी की ही तरह अंजान थी !

किसी ने सत्य ही कहा है, " खामोश चेहरे अक्सर रहस्मयी होते है, समुन्द्र शांत होने के बावजूद भी अंदर हजारो राज ! वैसे ही माँगी, मासूम-खामोश पर खुद में ही " मस्त ए मग्न "!

रात हो आयी पर माँगी का कोई कुछ पता तक भी नही, दिन बितते गये पर माँगी की कही-कोई खबर-अंतर तक भी नही ! तो कॉलेज के कितने खामोश चेहरे भी अब बोलने लग गए थे, " उस दिन माँगी का झगड़ा शायद डिम्पी ने ! अमीर बाप की लड़की जो ठहरी, बदला लेने के लिए कही उसने ही, " नही, नही, वो तो उससे बेइंतहा मुहब्बत करती थी " !
पूरे कॉलेज में तरह-तरह की बाते होने लगी थी पर बेचारी डिम्पी, " वो खुद भी परेशान " !

दिन बितने के साथ ही कॉलेज में परीक्षा का कार्यक्रम शुरू हो चुका था ! पहले दिन ही परीक्षा हॉल में कॉलेज के प्रिंसिपल ने एक चौंकाने वाली खबर देते हुए कहा, " फ़र्स्ट ऑफ माय आल स्टूडेंट बेस्ट ऑफ लक फ़ॉर योर एग्जाम एन्ड सेकंड ऑफ आल आप सभी को बताते हुए काफी हर्ष हो रहा है कि हमारे कॉलेज का इंटेलिजेंट लड़का " माँगी " !
नाम सुनते ही डिम्पी और बाकी सभी जन प्रिंसिपल की बात खत्म होने तक कान लगाकर सुनते है और फिर सभी छात्र-छात्राए आपस मे गुसफुसाते हुए परीक्षा हॉल में जाकर अपनी-अपनी सीट पर जाकर बैठ जाते है और फिर परीक्षा का कार्यक्रम शुरू !

अब डिम्पी को विश्वास हो गया था कि माँगी अपनी जगह सही था पर उसने माँगी को समझने में बहुत बड़ी मिस्टेक कर दी है ! पर अब वो क्या करे ? उसकी कमीनी मुहब्बत से बेचारा दिल परेशान, रातो की नींद, चैन-सुकून सब कुछ हराम " ! काश माँगी एक बार फोन उठा ले तो..मैं माफ़ी मांग लुंगी ! काश..!

वक्त बीतने के साथ ही डिम्पी को विश्वास हो गया था कि, " माँगी अब-कभी वापस लौटकर नही आने वाला ! अब उसका इंतजार मतलब खुद की जिंदगी के साथ ही खेलने जैसा है ! वक्त के साथ डिम्पी, माँगी को भूलने लगी पर उसे एक बात का सदैव पछतावा रहने लगा, " मैंने माँगी को गलत समझकर हाथ उठा लिया " ! काश मैं एक बार उससे माफ़ी मांग लेती तो " !

कॉलेज खत्म होने के साथ ही डिम्पी के पापा ने डिम्पी के हाथ पीले करवा दिए थे ! नेहा और डिम्पी एक तो बेस्ट फ्रेंड और अब ऊपर से सबंधी भी बन गए थे ! नेहा का भाई अपने शहर का जाना-माना बिल्डर था और डिम्पी को बहुत अच्छे से जानता था और खुद डिम्पी भी ! पर कहते है, " अगर प्यार को प्यार ही जीवनभर के लिए मिल जाए तो फिर वो कही पर भी रहे, गरीबी में जिए या अमीरी में क्या फर्क पड़ता है " !
बस कुछ ऐसा ही हाल डिम्पी का था, पैसे-नॉकर, कुछ कमी नही पर कमी थी तो सिर्फ अपने प्यार माँगी की " !

शादी के बाद लड़की की जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है, कल तक वो बिंदास खुले बालो में घूमने वाली लड़की, आज घर की जिम्मेदारियों को साड़ी के पल्लू में बांधकर भागमदौड़ी करना सिख जाती है ! बच्चे, पति, साँस, ससुर, ननद, सबको एक माला मे पिलोहकर खुद अपने गम में भी हौले-हौले मुस्कुराना सिख जाती है !

डिम्पी भी वक्त के साथ परिवार का अर्थ सही मायने में समझ गयी थी ! रात को देर तक अपने पति का इंतजार, बच्चों के पीछे भागमदौड़ी,साँस-ससुर, सबकी अलग-अलग फरमाइश, कब वक्त निकल जाता था, पता ही नही चलता था ! कॉलेज की वो सबसे बोल्ड झगड़ालू लड़की आज वक्त के साथ जीना सीख गई थी, खुद को गृहिणी साँचे के अनुरूप में ढालकर आज खुद में ही सिमट कर रह गयी थी !
वो कैसे इतनी समझदार, " वक्त सबको अपने हिसाब में ढलकर जीना सीखा देता है , शायद " !

रोज की तरह ही रात में डिम्पी अपने बच्चों को सुलाकर, अपने विशाल घर मे अपने पति के आने का इंतजार कर रही थी, मोबाइल में कभी टाइम, कभी म्यूजिक, कभी इंस्टाग्राम, कभी फेसबुक, तो कभी व्हाट्सएप्प, पर आ रहे नोटिफिकेशन को रिप्लाई देते हुए अपना टाइम निकाल रही थी ! अचानक उसका फोन रनकने लगा, देखा तो कोई अंजान नंबर, ट्रूकारल पर कश्मीर से नम्बर शो हो रहे थे ! इतनी रात को कौन हो सकता है ? डिम्पी मन ही मन सोचते-सोचते फोन उठाया ! ओर सांमने से आवाज आती है, " हैल्लो डिम्पी, मैं माँगी !
और डिम्पी को अपने कानों पर विश्वास ही नही हो रहा था " !
उसने एक बार फिर पूछा, " हैल्लो, हु आर यु ?,"
सांमने से फिर वो ही मदहोश करती बुलंद आवाज़, " माय सेल्फ कैप्टन माँगी, बस आखिरकार हमे भूल ही गयी ना " !
और फिर कुछ देर तक दोनो ओर से कोई आवाज नही, शांत सन्नाटा, " मानो दुश्मन अचानक से दोस्ती का हाथ बढाने सांमने से आ गया हो " !
फिर माँगी, " आर यु डिम्पी ओर नॉट " ! अचानक डिम्पी की शांत दलदली खामोशी में मदहोश करती आवाज कानो में सुनाई पड़ती है, और फिर डिम्पी गुस्से में, " या, आई एम डिम्पी बट आज अचानक मेरी याद ? शायद तुमने मेरा अंतिम संस्कार उसी दिन कॉलेज कैंटीन में " !
माँगी नाम सुनते ही डिम्पी के भीतर वर्षो से दफ़न सैलाब उमड़कर कॉलेज की बोल्ड रूवाबी लड़की बनकर " माँगी " पर टूट पडा, जो कॉलेज बाद कही दफ़न हो चुकी थी, आज फिर से वो " !
अरे, तुम अब भी वैसी ही हो, जैसी 6 साल पहले, वैसे ही फालतू की बातों पर डायरेक्ट लड़ना-झगड़ना, पहले हाल-चाल तो पूछ लेने दो ? कैसे झेलता होगा बेचारा तुम्हारा हस्बैंड, " रुद्र " !
माँगी, 6 साल पहले वाली डिम्पी को याद करते हुए हँसते-हँसते कहता है, जैसे कभी-कुछ हुआ ही नही था !
पर तुम " रुद्र " को कैसे जानते हो " !
डिम्पी, माँगी के मुह से अपने पति " रुद्र " का नाम सुनकर थोड़ा आर्श्चय से पूछती है !
मैं और " रुद्र " दोनो कॉलेज वक्त से काफी गहरे दोस्त है ! मैं " रुद " को 6 साल बाद परसो पर्सनली मिला था, जब वो अपने काम के सिलसिले के साथ मुझसे मिलने कश्मीर आया था, और उसने ही तुम्हारा नंबर दिया ! खैर.. अब सब बातें छोड़ो !
तुम्हे मुझसे जो भी प्रॉब्लम हो-जितना भी गुस्सा हो ! मैं कल आ रहा हु, 15 दिन की छुट्टी पर, बस तुम रेडी रहना !
माँगी शार्ट में बाते खत्म करके कल आने की अचानक से डिम्पी को खबर देते हुए कहता है !
अरे, वैट-वैट-वैट, आई नो यू हेव नो टाइम बट प्लीज सेंड मि योर सम पिक्चर, प्लीज ! मुझे देखना है कि तुम 6 वर्षो में कितने बदल गए हो, तुम्हारे ऊपर कैप्टन आर्मी वाली ड्रेस सूट करती है या नही , के तुम आर्मी में हो भी या नही " !
डिम्पी अपने मन की इच्छा व्यक्त करते हुए कहती है !
इश्क़ और प्यार का मज़ा लीजिए,थोड़ा इन्तज़ार का मज़ा लीजिए !
दिल-ए-बेकरार का मज़ा लीजिए, थोड़ा इन्तज़ार का मज़ा लीजिए !!
इतने इन्तजार में थोड़ा और इन्तजार ही सही या फिर हम कैसे जान पाएंगे ? कि आपने हमारा इतना इन्तजार किया भी या नही ? या यूं ही दिल रखने को !
पता है तुम्हे, पानी पीने का असली मजा कब आता है, जब तलब लगी हो और तलब बुझाने को कही पानी नही मिले ! इन्तजार में 1 दिन का इन्तजार और ही सही ! नाउ बाय " !
1997 में आई फ़िल्म " शपथ " का लोकप्रिय गाना गाते हुए डिम्पी को जवाब देता है और फिर फोन रख देता है !

ओर फिर माँगी फोन रखकर अपना बैग रेडी करने लगता है और उधर डिम्पी वक्त की काली करामत में उलझकर रह जाती है, " बड़ा झमेला है, जब दिल तुम्हे बड़ी मुशिकल से भुला बैठा था फिर क्यो तुम वापस जहन में लौटना चाहते हो " ! आखिर क्यों..? फिर से तुम्हारे साथ एक पल भी बिताया तो पर तुम्हे कोई फर्क नही पड़ता !

ओर बाहर से अंदर की ओर डोर-बेल सुनाई पड़ती है ! डिम्पी की तन्द्रा भग होती है ! " शायद, रुद्र ही है " ! बड़बड़ाकर दरवाजा खोलती है !
रुद्र ही है, आइये ! हाथ-मुह थो लिजिए, मैं खाना लगा देती हूं !
ओऱ फिर डिम्पी डाइनिग टेबल पर खाना लगाने लग जाती है ! ओर फिर दोनो रोजाना की भांति एक ही डिस में खाने बैठ जाते है ! दोनो खाते-खाते एक दूसरे की ओर देखते है !

रुद्र, आज का दिन कैसा रहा ?
डिम्पी रोजाना की भांति रुद्र को दिन की व्यस्ता पूछती है !
कुछ खास नही, पर दिन अच्छा ही गुजरा ! और तुम्हारा ?
रुद्र, डिम्पी को भोजन का निवाला देते हुए कहता है !
अच्छा ही, पर आपसे एक बात पूछनी थी ? डिम्पी थोड़ा शर्माते हुए कहती है !
हा, पूछो ? रुद्र हामी भरते हुए कहा !
आप परसो कश्मीर गये थे, तो आपने मेरा नम्बर ?
डिम्पी को कोई सूझ ही नही रहा था कि, " वो कैसे माँगी का नाम ले ! कही रुद्र माँगी का नाम सुनते ही कुछ उल्टा नही सोच ले !
हा, मैने ही माँगी को तुम्हारा नबंर दिया है ! कारण की तुम उसे रोजाना याद करती हो ! मैं नही चाहता कि तुम कभी किसी के लिए इस कदर बैचेन रहो ! पता है, वो आज आर्मी में कैप्टन की सबसे बड़ी पोस्ट पर है !
मुझे पता है, तुम आज भी उससे बेपनाह मुहब्बत " ! ओर फिर दोनो ओर खामोशी छा जाती है !
पर, शादी के बाद आप ही मेरे लिए सब-कुछ हो " ! डिम्पी थोड़ा हिचकिचाहट से बोल रही थी !
पता है, पर वो आज भी तुम्हारे जहन में इस कदर जिंदा है, की वो भुलाए नही भूलता ! और मैं चाहता हु की तुम उसे कभी भुलाओ नही ! जब तुम कॉलेज में थी, तब तुमने सबके सामने बेमतलब उसके ऊपर हाथ उठा लिया था !
मुझे नेहा ने तुम्हारे और माँगी के बारे में सब-कुछ बताया था ! इतना ही नही, जिस दिन तुमने माँगी पर हाथ उठाया उसी दिन माँगी का सिलेक्शन आर्मी में हो गया था ! तुम्हारा पहला प्यार " माँगी " है !
उपरवाले का लेखा भी बड़ा अजीब होता है, " जिंदगी को जीना हमारे हाथ मे होता है, पर जिंदगी के सफर में होता वही है जो किश्मत के लेखे में लिखा होता है " ! मैं भी तुम्हारी तरह ही अभागा हु " !
अगर तुम्हें मेरे और माँगी के बारे में सब कुछ पता था, फिर क्यो मेरे साथ धोखा किया ! मुझे अब-तक अंधेरे में रखा ? सब-कुछ पता होने के बावजूद भी तुमने मुझे माँगी का नंबर क्यो नही दिया, आखिर क्यों ? मेरी बैचैनी को एक बार भी नही समझा और आज मेरे पूछने पर सब-कुछ बता रहे हो ! मैं आज-तक तुम्हारे जैसे गिरकीट के साथ क्यो रह रही थी ! फिर डिम्पी का गुस्सा रुद्र पर तन गया, डिम्पी रुद्र पर जोर-जोर से चिल्लाए जा रही थी !
यू आर राइट डिम्पी ! मैं आज-तक तुम्हें कभी-कोई धोखे में नही रखा ! माँगी का आर्मी में सेलेक्शन हो जाने के बाद उसकी कोई खबर-तक भी नही थी ! उसका सेलेक्शन, उसकी पोस्ट, वो कहा है ? इत्यादि मुझे खुद को भी उसके बारे में कुछ भी पता नही था ! उसका जो फोन नंबर था वो भी बंद था !
6 साल बाद उसका अचानक मेरे ऊपर 4 दिन पहले फोन आया था ! उसका जैसे ही फोन आया, मैं अपने काम के साथ-साथ माँगी से भी मिलकर आया और मैंने ही तुम्हारा नंबर " माँगी " को दिया ! ताकि तुम उससे बात कर सको ! तुम्हारी खुशी जो 6 साल पहले ग़ुम हो चुकी है वो वापस लौट आ सके !
मैं समझ सकता हु डिम्पी, बारिस और प्यार अगर वक्त रहते नही बरसे तो ! मैंने भी अपना पहला प्यार खोया है " !
मै भी किसी से बेइंतहा मुहब्बत करता था और उसको ही अपना हमसफ़र बनाना चाहता था और वो भी मेरी ही बनकर रहना चाहती थी ! पर किश्मत, 6 साल पहले जिस दिन तुमने " माँगी " को थप्पड़ मारी थी, बस उसी दिन मेरी " राधिका " एक्सीडेंट में " ! मैं और राधिका दोनो " उसी दिन नाइट को " माँगी " को रेलवे स्टेशन पर छोड़कर वापस आ रहे थे और हम दोनों रॉंग साइड में थे और हमारी कार सांमने से आ रहे ट्रक के साथ ! मिस्टेक मेरी थी बारिश का वक्त होने के कारण आसमान में काले बादल उमड़कर बरस रहे थे, रात में रोडलाइट न होने के कारण उस सुनसान रोड पर काला अंधेरा था और राधिका ने मुझे मना भी किया था, रॉंग साइड में जाने का ! पर मैं पागल शार्टकट के चक्कर मे चले जा रहा था और अचानक तेज बारिश के झपटे में मुझे आगे मुझे कुछ दिखाई ही नही दिया और मेरी कार सांमने से आ रहे बेकाबू ट्रक के साथ, ओर मेरी गलती की सजा, ! ओर रुद्र की आँखों मे आँसूओ का झरना बहते जा रहा था !
बडा, अजीब है ना ! यह वक्त भी ! मैंने तुम्हें ख़ामख़ा गलत समझ लिया ! मतलब जिस दिन मेरा और माँगी की फाइट और उसी दिन " माँगी " का सलेक्शन ! वो चाहकर मुझसे दूर चला गया और तुम ही माँगी को छोड़ने भी गए और ठीक उसी दिन तुमसे तुम्हारी " राधिका " न चाहते हुए भी ! यह विधाता भी न कैसा लेख लिखता है, तुमने " राधिका " को अपना हमसफ़र बनाने की सोची थी और मैंने अपना हमसफ़र " माँगी " को पर विधाता ने कुछ और ही सोचकर रखा था ! तुमसे तुम्हारा प्यार विधाता ने छिन लिया और मेरा प्यार मुझसे दूर करके, दोनो को आपस मे मिलवा दिया ! " वाह रे, उपरवाले तेरा कोई जवाब नही ? डिम्पी रोते-रोते रुद्र को अपने गले से लगा लिया और कुछ पल के लिए वक्त जैसे ठहर गया हो !

रुद्र, तुम कही अपनी तरफ से मनगढ़ंत स्टोरी तो नही बना रहे ना ! " ओर अचानक डिम्पी को न जाने क्या सूझती है !
डिम्पी, शायद तुम्हे अब भी मेरी बातों पर विश्वास नही है, वेट " ! रुद्र चिल्लाकर कहता और फिर डाइनिग टेबल से उठकर तेजी से अपने कमरे में चला जाता है " !
प्लीज़ सी एन्ड बिलीव मी " ! रुद्र डिम्पी को अपने कमरे में से एक रद्दी न्यूज़पेपर लाकर दिखाता है !
रुद्र, सॉरी ! मुझे माफ़ कर दो, मैंने तुम्हें गलत समझ लिया था " ! ओर न्यूज़पेपर की पहली हेडलाइंस को पढ़कर डिम्पी को रुद्र की बातों पर विश्वास आ जाता है !
नो, सॉरी..नाउ आल क्लियर, तुम अपना बैग रेडी रखना, कल माँगी 15 दिन की छुट्टी पर आ रहा है " ! रुद्र डिम्पी के माथे को चूमता है और फिर डाइनिग टेबल की लाइट बन्द करके सीधा अपने रूम में चले जाता है !

डिम्पी अब भी डाइनिग टेबल की कुर्सी पर बैठकर किसी गहरी सोच में डूबी हुई होती है !

आज डिम्पी की खुशी का कोई ठिकाना नही था, वो बार-बार रुद्र की बातों को याद करने की कोशिस में लगी होती है, " डिम्पी, तुम अपना बैग रेडी रखना, कल माँगी 15 दिन की छुट्टी पर आ रहा है " !
तो कभी माँगी से फोन पर की हुई बातो को रह-रहकर याद करती है और मन ही मन खुश होकर मुस्कुराती है ! तो दूसरी ओर डिम्पी को खुद पर ही शर्मिंदगी महसूस होती है ! उसने आज-तक क्यो रुद्र को जानने की कोशिस नही की ? उसके पास्ट, उसकी खामोशी के पीछे की वजह, वो सबसे अपने काम से काम ही क्यो मतलब रखता है ? आज-तक जिस रुद्र को उसने गलत और बोरिंग समझ रखा था, न जाने क्यो, आज वो ही रुद्र, डिम्पी को इतना इंटरेस्टेड और रहस्यमयी लग रहा था " ! न चाहते हुए भी डिम्पी का मन रुद्र की ओर खींचा चले जा रहा था ! ओर फिर डिम्पी डाइनिग टेबल से उठकर सीधे अपने रूम में चली जाती है !

रुद्र, अपने ऑफिस के काम बिजी होता है और डिम्पी रुद्र के पास जाकर फिर से आज की गलती के लिए सॉरी माँगती है और फिर इतने सालों में पहली बार आगे होकर रुद्र को अपनी बाहों में भर लेती है ! " डिम्पी, नो सॉरी...चलो अब तुम सो जाओ " ! ओर फिर रुद्र डिम्पी को अपनी बाहों से अलग करके डिम्पी की ओर देखकर कहता है और फिर डिम्पी भी " गुड नाइट " कहकर सो जाती है " !

दूसरे दिन सुबह डिम्पी जल्दी उठकर उत्साहित मन से अपने दैनिक कामो से निवर्त होती है और फिर अपना बैग रेडी करने लग जाती है ! बैग रेडी करके वो अपने कमरे में तैयार होने लग जाती है ! विशाल आईने के सामने खड़ी होकर वो खुद को निहारती है और बड़बड़ाती है, " क्या पहनू, एक काम करती हूं ! लाल साड़ी पहन लेती हूं, नही..नही ! वो अच्छी नही लगेगी ! क्या पहनू ?

एक काम करो, " ब्लैक टी-शर्ट और जीन्स " पहन लो, बहुत ही सुंदर दिखोगी " रुद्र ने डिम्पी के कंधे पर अपना हाथ रखते हुए कहा !
या, यु आर राइट, वो ही पहनती हु " ! डिम्पी रुद्र की बात मानकर अपने कपड़े लेकर दूसरे कमरे में बदलने चली जाती है ! डिम्पी जब वापस कपड़े बदलकर आती है तो वो देखती है कि, रुद्र वहां था ही नही, वो ऑफिस के लिए निकल गया होता है और डिम्पी का खुश-खुशाल मूड उत्तर जाता है !
उतरे मूड के साथ अपने कमरे में लगे विशाल आइने में खुद को निहारती है !

डिम्पी के गोले बदन पर ब्लैक हॉफ टी-शर्ट उसकी खूबसूरती पर कहर बरसा रहा था, ऊपर से नशीली-भूरी आँखे और बालो की भीगीं लटे ओर चार-चाँद लगा रही थी ! ब्लैक टी-शर्ट में उसके वक्ष: उभार मानो कमल की तरह खिलकर सुभोहित हो रहे थे ! उसके होठो की लालिमा की तो बात ही निराली थी ! इतना ही नही उसका भरा बदन ऊपर से ब्लैक हॉफ-टी-शर्ट और टाइट जीन्स " !

अरे 01 तो बज भी गया है, माँगी आने की तैयारी में ही होगा ! माँगी डायरेक्ट यहां पर ही आएगा या उसके घर जाएगा ! उसके पास यहां का एड्रेस होगा भी या नही, उसे फोन करु या नही " ! सोच-सोचकर डिम्पी का हाल बुरा होते जा रहा था ! अब एक पल के लिए भी अकेले रहना उसके लिए दुर्भर होते जा रहा था ! इतने में डिम्पी का फोन रनकने लगता है और डिम्पी की तन्द्रा भंग होती है " शायद माँगी ही है " ! उत्साहित मन से डिम्पी फोन की डिस्प्ले पर नाम देखती है, " नेहा है, ! ओर डिम्पी अपना फोन रिसीव करती है !

हैल्लो..डिम्पी " ! सांमने से आवाज आती है !
हा, नेहा बोलो "! डिम्पी ने प्रतिउत्तर देते हुए कहा !
डिम्पी, माँगी " ! नेहा ने कहा !
या, आई नो, वो आज आ रहा है और मैं तैयार होकर रेडी हु ", डिम्पी उत्साहित होकर जल्दबाज़ी में कहती है !
हा, पर तिरंगे में लिपटकर ! कल नाइट को चीनी सैन्य ने अचानक सरहद पर भारतीय चौकीयो पर हमला बोल दिया और उसमें कैप्टन माँगी और बाकी के 2 जांबाज " ! नेहा रोते-रोते कहती है !
पर " ! डिम्पी आगे कुछ बोल नही पाई !
अरे, डिम्पी ! सुन रही हो ना ",नेहा खुद को संभालते हुए कहती है !

नेहा कुछ ओर बोलती उससे पहले ही डिम्पी ने फोन रख दिया औऱ खुद को धितकारने लगी,कोसने लगी और रोते-बिलखते अनायास ही उसके मुह से कुछ शब्द निकल गए, " शायद, यही विधाता का लेखा था " ! और डिम्पी अपनी सूझबूझ खोए वही गिर जाती है !

लेखा कैप्टन इन्तजार

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