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सौ रुपए
सौ रुपए
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© Shyam Kunvar Bharti

Drama Inspirational

25 Minutes   7.2K    22


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प्रस्तुत कहानी एक काल्पनीक कहानी है | इस कहानी मे किसी ब्यक्ति,स्थान और घटना का मिलना एक संयोग मात्र है | यह कहानी शराबखोरी , गरीबी और बेरोजगारी पर आधारित है जो बहुत ही प्रेरनाप्र्द रोचक और काफी गंभीर बिषय पर आधारित है | मुझे उम्मीद है मेरी यह स्वरचित कहानी पाठको को बहुत पसंद आएगी धन्यबाद |

शूकमनी का पति बुधन उससे दारू के पैसे के लिए झगड़ा कर रहा था | हम नहीं जानते है कहा से दोगी हमको दारू पीने केलिए पैसा दो नहीं तो अच्छा नहीं होगा | कहा से लाकर दे तुमको पैसा ,रिकसा चलाकर जो भी पैसा कमाते हो सब दारू पी जाते हो , मै घर मे नौकरनी का कम करके रसन पानी जुटाती हु और तुमको तो बाल बच्चा , घर द्वार का कोई चिंता ही नहीं है , बस रात दिन दारू और दारू चाहिए , शूकमनी ने भी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाकर अपने पति से कहा |

तुम हमसे जुबान लगाती हैअभी बताते है तुमको , इतना कहकर बुधन मुंडा अपनी औरत को मारने के लिए दौड़ा तभी उसके तीनों बच्चो ने उसका पैर पकड़ लिया और कहने लगे –माँ को मत मारो बाबा उसे छोड़ दो , लेकिन बुधन रुका नहीं अपना पैर घसीटते हुये शूकमनी के पास आया और उसका बाल पकड़कर जमीन पर पटक दिया शूकमनी ज़ोर ज़ोर से रोने लगी |उसके सिर और केहुनी मे काफी चोटे लग गई थी , वहा से खून निकलने लगा था , शूकमनी दर्द से कराहती रही , मगर बुधन पर इसका कोई असर नहीं हुआ |

दारू खातिर हमको मार रहा है लो मेरा खून पी लो , मेरा करम फुट गया था जो मेरा बाप ने इस दारू पियंक के साथ मेरा शादी करा दिया , हे भगवान अब मै क्या करू , कहा जाऊ | शूकमनी को रोता छोड़ बुधन घर मे घुसकर एक अलमोनियम का डेकाची उठा लाया और बाहर नीकल गया | जा रहे है इसको बेचकर दारू पियेंगे | शूकमनी उसे बेबस जाता देखती रही |अपनी माँ को रोता देखकर उसके तीनों बच्चे भी उससे लिपटकर रोने लगे |

अरे शूकमनी आज सबेरे काम पर नहीं शूकमनी की मालकिन ने उससे पूछा जहा वो कम करती थी |क्या बताए मेमसाब मेरी तो किस्मत ही फुट गई है, आज मेरे आदमी ने दारू के लिए हमको फिर मारा था |घर का हड़ीया सब बर्तन बेचकर वो दारू पी रहा है |चुप हो जाओ आओ पहले तुम्हारे माथे पर दवा लगा देती हु उसकी दयालु मालकिन ने कहा | कितना दवा लगाइएगा मेमसाब ये तो मेरा रोज का नतीजा है , सोचती हु कही जाकर जन प्राण दे दु लेकिन अपने बच्चो का ख्याल करके खामोश रह जाती हु , शूकमनी ने रोते हुये कहा |

उसकी मालकिन ने उसके छोटो पर दवा लगा दिया और कुछ खाने को देकर कहा –पहले खा लो फिर काम कर लेना जाते समय थोड़ा खाना और लेते जाना अपने बच्चो के लिये , आओ अब मिलकर हमलोग घर का काम कर लेते है रात मे तुम्हारे साहब आएंगे तब मै उनसे तुम्हारी समस्या के बारे मे बात करूंगी हमारे पति जरूर तुम्हारी कोई मदद करेंगे |ठीक है मेमसाब कहकर शूकमनी अपने मालकिन के साथ घर के काम मे लग गई |

शूकमनी जहा काम करती थी वो एक सरकारी डॉक्टर का घर था | वे सब बड़े भले लोग थे | डॉक्टर प्रकाश सिन्हा और उनकी पत्नी मिरा सिन्हा के अलावा उस घर मे मे उनके दो बच्चे थे जो स्कूल मे पढ़ाई करते थे | डॉक्टर सिन्हा मरीजो का इलाज बड़ी ईमानदारी से करते थे कभी किसी को कोई तकलीफ होती तो वो उसकी हर संभव मदद जरूर करते थे |आस पड़ोस के लोग भी डॉक्टर सिन्हा का बड़ा सम्मान करते थे |

घर का कम खत्म होने पर मालकिन मिरा ने शूकमनी को खाना दिया लेकिन उसने खाया नहीं कहा घर मे बच्चे भूखे है , घर जाकर उनके साथ खा लूँगी | ठीक है शूकमनी तुम अबा अपने घर जाओ जब रात मे मेरे पति आएंगे तब मई तुम्हारे बारे मे बात कर लूँगी ,ठीक है मेमसाब कहकर सुकमानी वह से चल दी |जैसे ही शूकमनी अपने घर पाहुची उसने देखा घर के दरवाजे पर रिकसा आड़ा तिरछा खड़ा है और उसका पति उसपर शराब पीकर उल्टा पड़ा है |उसके तीनों बच्चे अपनी माँ को देखकर दौड़ते हुये उसके पास चले आए | शूकमनी उन तीनों को लेकर घर के अंदर चली गई और साथ मे लाये खाना को बच्चो के साथ मिलकर खाने लगी , तभी उसका पति लड़खड़ाता हुआ अंदर आया –अरे तुम लोग अकेले अकेले खा रहे हो हमको खाना कहे नहीं दिया ,लाओ हमको भी खना दो , हम भी खना ख्येंगे बड़ी ज़ोर से भूख लगी है | अपने पिता को आया देखकर तीनों बच्चे डर अपनी माँ के पास से खिसक गए | डेकाची बर्तन बेचकर दारू पिया तो पेट नहीं भरा और हमलोग जूठा खाना मांगकर खा रहे है तो वो भी बरदास्त नहीं हो रहा है , शूकमनी ने गुस्से मे आकर कहा |

दारू पिये तो क्या हुआ , लाओ खाना दो बुधन ने चिल्लकर कहा और जमीन पर पड़ी थाली को अपनी तरफ खिचकर खाने लगा , सुकमानी चुपचाप अपनी क़िसमत को कोसती हुई देखती रही आखिर था तो वो उसका अपना पति ही |शूकमनी अपने अबच्चों को पनि पिलाकर और खुद पीकर चुपचाप सो गई |

शुबह जब शूकमनी डॉक्टर प्रकाश के घर काम करने गई तो वह डॉक्टर प्रकाश भी मौजूद थे , उनकी पत्नी ने उसके बारे मे उनको सब बता दिया था | उसको देखते ही मिरा ने कहा – शूकमनी रात का कुछ खाना बचा है पहले खालो , जाते समय कुछ खाना और लेते जाना , मैंने चाय बना दिया हम दोनों चाय पीते है तबतक तुम खा कर आओ फिर डॉक्टर साहब से बात कर लेना | ठीक है मालकिन कहकर शूकमनी रसोई मे जाकर रात का खाना खाने लगी क्यो की वो काफी भूखी हुई थी | खाना खाते ही उसके जान मे जान आई |रात भर अपने बच्चो के साथ वह भी भूखी रही थी |

जैसे है वो डॉक्टर प्रकाश के पास पाहुची दो नो पति –पत्नी अपनी चाय खत्म कर रहे थे |शूकमनी –मिरा सिन्हा ने उसे आते देख कर कहा आओ बैठो , शूकमनी व्ही नीचे कालीन पर बैठ गई,मिरा ने कहा , वहा नहीं तुम कुर्सी पीआर बैठो ,लेकिन शूकमनी बोली नहीं मालकिन मई यही ठीक हु ,भ ला आप जैसे बड़े लोगो के बराबरी मे कैसे बैठ सकती हु , लेकिन डॉ प्रकाश ने कहने पर वो सकुचाते हुये बागवाली कुर्सी पर बैठ गई |

डॉ प्रकाश ने कहा – देखो शुल्कमनी इस दुनिया म्मे बिना मेहनत और कम किए पेट नहीं चलता है , एक बार दो बार कोई किसिस की मदद कर सकता है मगर बार बार नहीं करता है |आदमी को खुद हाथ पाव मारना पड़ता है | जी साहब शूकमनी ने डॉ परकश की बाटो मे सहमति जताते हुये कहा |तुम्हारे घर की समस्या कोई नई या अकेली नहीं है ऐसी समस्या हजारो ल्खो मे है , इसलिए सब दुखी रहते है मगर जो लोग समझदारी से कम लेते है अपनी और अपने बाल बच्चो के भविस्य की चिंता करते है वे सुखी रहते है | डॉ प्रकाश ने समझाते हुये कहा |

सअहब मेरे पति दारू शराब तो पिता ही है , घर का सारा समान औए बेच देता है ऊपर से रिक्शा भी नहीं चलाता है इसलिए रिकसा मालिक रिकसा का भाड़ा वसूलने के लिए उससे अपने घर मे काम करवाता है | एक पैसा कमा कर नहीं लाता है, कमाता भ है तो सब दारू पी जाता है , साहब घर बड़ा मुसकिल से चल रहा है , ऊपर से दौर पीकर हमको खूब मर पीट करता है | शूकमनी ने अपना दुख सुनते हुये कहा |

हमलोग तुम्हारी समस्या समझते है , तुम्हारी जितनी तंख्वाह होनी चाहिये उससे ज्यादा तमको तंख्वाह देते है इसके अलावा कई तरह की मदद भी करते है |लेकिन इससे तुम्हारी तकलीफ दूर नहीं होने वाली है | तुम्हारे दुखो का कारण तकदीर हो सकती है मगर तुम्हारा पति भी तुम्हारे दुखो का बड़ा कारण है , इसके लिए जरूरी है तुम्हारे पति को सही रास्ते पर लाना , या तो उसकी पीने की आदत छुड़ा देना याम्हमेशा के लिए पीना बंद करवा देना |डॉ प्रकाश ने कहा |

जी साहब आप ठीक कहा रहे है , हम तो माना करते है तो घर मे लड़ाई झगड़ा होता है | उसको कौन समझाएगा साहब शूकमनी ने चिंतित होकर कहा |उसका मैंने एक रास्ता सोचा है , देखो मेरे अस्पताल मे काफी मरीज आते जाते है वह काफी भीड़ भद रहती है , इसलिए बाहर अगर एक चाय नाश्ता की दुकान खुल जाए काफी चलेगी | इसलिए मै चाहता हु इसलिए मै चाहता हु यदि तुम्हारा पति रिकसा नहीं चला सकता तो उसके लिए यही एक रास्ता है |

वो तो ठीक है साहब लेकिन दुकान खोलने केलिए मेरे पास पूंजी नहीं है , और यदि खोल भी दी तो मेरे आदमी सब पैसा का दारू पी जाएगा फिर दुकान कैसे चलेगी साहब , शूकमनी ने चिंता जाहीर करते हुये कहा |पीने दो उसका भी एक उपाय है हमारे अस्पताल मे नास उन्मूलन अभियान के तहत सरकार

की तरफ से नशा छुदवाने और उससे संबंधित बीमारियो का फ्री मे इलाज होता है | हमलोग तुम्हारे पति का इलाज करके उसकी पीने की आदत छुड़वा देंगे | साथ ही यहा रहेगा तो मेरी निगरानी मे रहेगा |डॉ प्रकाश ने उपाय बताते हुये कहा |हा साहब अगर ऐसा हो गया तो हमारा घर परिवर जरूर सुखी हो जाएगा शूकमनी ने खुश होते हुये कहा |लेकीन साहब दुकान खोलें के लिए पूंजी कहा से लाएँगे , उसने फिर डॉ प्रकाश से पूछा |

तुमने सही सवाल किया है देखो तुम हमारे घर मे कम करती हो मगर हम तुम्हें नौकरनी नहीं समझते , तुम्हें अपने परिवार का सदस्य मानते है इसलिय हम भी चाहते है तुम्हारे घर की परेशानी जल्द से जल्द दूर हो जाए |मै तुम्हारे पति को प्र्तिदिन एक सौ रुपया दूंगा प्रति सैकड़ा दो रुपया ब्याज पर ।शाम लो दुकान बंद करते ही मुझे मेरे सौ रुपया ब्याज सहित वापस चाहिए डॉ प्रकाश ने कहा |क्या साहब आप भी ब्याज लेंगे सुकमनी ने हैरानी से पूछा |मै ब्याज पीआर रुपया नहीं लगाता हु और न लगाना चाहता हु , बल्कि तुम्हारे पति को यह एहसास दिलानाचाहता हु की कर्जा , कर्जा होता है जो चुकाना भी पड़ता है |इस दर से शायद तुम्हारा पति कर्जे के पैसे से शराब नहीं पिये , डॉ प्रकाश ने समझाते हुये कहा |और हा ब्याज का दो रुपया तुम मुझसे ले लेना अपने बच्चो के लिए |डॉ प्रकाश ने मुसकुराते हुये कहा |

ठीक है साहब लेकिन सौ रुपया मे चाय नाश्ता की दुकान कैसे खुलेगी शूकमनी ने चिंतित होकर पूछा |देखो तुम्हारे घर मे जो भी बर्तन है जिसमे तुम चावल या दाल बनाती हो , उसमे चाय बनाना , घर का चूल्हा ले लो , चाय चीनी औए दूध मे पैसे लगाने होंगे , मितित की प्याली कुम्हार से ले लेना | शुरू मे सिर्फ चाय बनाना | बाद मे बिस्कुट मिक्स्चर आदि खर्फ लेना |जैसे जैसे तुम्हारी आम्दानी बढ़ती जाए तुम आइटम बढ़ते जाना |मै चाहु तो एक ही बार मे सारी पूंजी दे सकता हु मगर जब किसी को कोई चीज आसानी से मिल जाती है तो वो लापरवाह हो जाता है उसकी कद्र नहीं करता है , ऊपर से तुम्हारा पति शराबी भी है , अभी उसपर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता |इसलिए तुम्हारे पति को सीधे रास्ते पर लाने के लिए इसके अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है , डॉ प्रकाश ने सुकमनी को समझाते हुये कहा|शूकमनी को डॉ प्रकाश कीबाते सही लगी उसने कहा साहब आप तो हमारे लिया भगवान से बढ़कर है आज के जमाने मे कोई भी किसी के लिए इतना नहीं करता जितना आप हमारे लिए कर रहे है | आप जैसा सोच रहे है अगर वैसा हो गया तो हमारा दुख ही दूर हो जाएगा साहब , शूकमनी ने दोनों हाथ जोड़ते हुये डॉ प्रकाश से कहा |अरे नहीं मै कोई भगवाब नहीं हु मै तो थोड़ी सी मदद कर रहा हु और रास्ता बता रहा हु ।ऐसा करो कल शुबह आठ बजे तुम अपने पति को लेकर यहा मेरे पास आ जाना मै उसको सब समझा दूंगा और सौ रुपया भी दे दूंगा |मन लो अगर पैसे लेकर वो सरब भी पी गाय तब भी तुमको अपनी दुकान हर हल मे खुलवानी है , इतने पैसे की वो शराब पिएगा मै उतने पैसे का समान उधारी दिलवा दूंगा ।जिसे चुकान तुम्हारे पति की इम्मेवारी होगी |इतना कहकर डॉ प्रकाश उठ खड़े हुये –मुझे अस्पताल केलिए देर हो रही है अब मै चलता हु |

शूकमनी भी रसोई घर मे अपने कम मे लग गई वो बड़ी खुश लग रही थी डॉ साहब की बाते उसे अच्छी लगी थी मगर अपने पति पर उसे विश्वास नहीं था |उड़े दर थ उसका पति काही उसे धोखा न दे |दूसरे दिन शूकमनी अपने पति को लेकर डॉ प्रकाश के घर गई |डॉ। प्रकाश ने उसके पति को समझाया –देखो बुधन शराब फ्री मे नहीं मिलती है , उसके लिए भी पैसा चाहिए और पैसा कमाने के लिए मेहनत मजदूरी करनी पड़ती है | बिना मेहनत किए यहा कुछ नहीं मिलता है |घर का समान बेचकर कबतक स्शरब पियोगे एक दिन वो सब भी खत्म हो जाएगा तन क्या बेचोगे | तुम अपनी पत्नी को क्यो मरते पीटते हो , आखिर इसकी क्या गलती है , यही न की तुम्हें शराब पीने से मना करती है | इसमे क्या बुराई है कोई भी औरत नहीं चाहेगी उसका पति दीन रात दारू शराब पिये | बाल बच्चो को राशन पानी लाकर नहीं देते हो , उल्टे बाल बच्चो को मरते पीटते हो तुम्हें यह सब अच्छा लगता है |डॉ प्रकाश ने बुधन को समझते हुये कहा |देखो अपना क्या हाल बना रखा है |

एक दिन बीमार पड़ जाओगे और फिर मर जाओगे तब सोचो तुम्हारे बाल बच्चो का क्या होगा |अब भी वक्त है सुधर जाओ, अगर पिये बिना नहीं रहा जाता तो पियो मगर उससे पहले कमाओ और रात मे ख-पीकर सो जाओ , समझे , डॉ प्रकाश ने बुधन को हल्की डाट लगाते हये समझाया | सुनो मैंने कल तुम्हारी पत्नी को तुम्हारे कम धंधे के बारे मे समझा दिया है | मै तुम्हें रोज एक सौ रुपया दूंगा दो रुपया ब्याज पर | दिन भर हमारे अस्पताल के बहहर तुम चाय नाश्ता बेचोगे और शाम को मुझे एक सौ दो रुपया वापस कर देना समझ गए न बुधन डॉ प्रकाश ने बुशन को समझाते हुये कहा |

बुधन ने कहा जी डॉ साहब | ठीक है लो एक सौ रुपया , डॉ प्रकाश ने अपनी जेब से एक सौ रुपया का नोट निकालकर बुधन को दे दिया |जाओ जाकर चाय , चीनी और दूध खरोद लो | अगर किसी चीज की कमी हो तो बताना मै दुकानदार से बोलकर उधारी दिला दूंगा , उसका भी उधारी शाम को चुका देना |घर मे जो चूल्हा है ले लो ,बर्तन भी ले आना घाटी बढ़ी छीजे धीर धीरे जुटाते रहना | अमी तुम्हें रोज एक सौ रुपया देता रहूँगा तुम दिन भर अपनी दुकान चलाकर शाम को वापस करते रहना |यदि तुमने इस पैसे से शराब पी तो मै फिर तुम्हारी कोई मदद नहीं करूंगा , समझ लेना , डॉ प्रकाश ने बुधन को समझा ते हुये कहा - अब तुम जाओ और अपने केएएएम पर लग जाओ , मुझे भी हॉस्पिटल जाना है |

शूकमनी भी अपने कम मे लग गई |शाम को जब वह घर पर पहुची तो देखि बुधन शराब पीकर उल्टा पड़ा हुआ है | उसने अपना माथा पीट लिया हे भगवान अब मै क्या करू इस आदमी का एक तो कोई मदद नहीं करता है दूजे एक भले आदमी ने हमारी मदद भी किया तो ये आदमी दारू पीकर उल्टा पड़ा हुआ है |शूकमनी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी | उसकी बड़ी बेटी राधा जो लगभग चौदह साल की थी –बोली माँ बाबा के जेब मी अभी भी पचास रुपया पड़ा है बाबा हमको रुपया दिखा कर कहा रहा था देखो आज मेरे पास बहुत पैसा है |

शूकमनी ने हिला डुलाकर बुधन को जगाया यही दुकान चला रहे है , उसके उठाते वो चिल्लाने लगी | अब मै डॉ साहब को क्या मुह दिखाऊँगी , फिर डबल्यूपी रोने लगी |हे भगवान मेरी तो किस्मत ही फुट गई है जो ऐसे आदमी से पाला पड़ा है |अरे रोटी क्यो है पागल औरत देख अभी भी मेरे पास पचास रुपया और पड़ा है | कल डॉ साहब फ़्फ़िर सौ रुपया देंगे हम उससे दुकान का सामान खरीद लेंगे , बुधन ने लड़खड़ाती आवाज मे कहा |उसके मुह से शराब की दुर्गंध भक भक आ रही थी | शूकमनी ने झट आँचल से अपना मुह ढक लिया|कल तो खरीद लेंगे लेकिन आज जो एक सौ दो रुपया डॉ साहब को लौटना था वो कहा से लौटाएंगे , शूकमनी ने अपने पति पर बरसते हुये कहा |अरे छोड़ो क्यो चिंता करती है कल सब एक साथ लौटा देंगे बुधन ने शराब के नसे मे झूमते हुये कहा |शूकमनी चिंता मे पड़कर सोचने लगी | उसने साथ मे लाये खाने को सबको बाटकर दे दिया जो कुछ बचा खुचा था खा पीकर सो गई |

अगले दिन शूकमनी अपने पति को लेकर फिर डॉ प्रकाश के घर गई और सारी कहानी कह सुनाई |फिर उसने मीरा सिन्हा से कहा मेमसाब मै जल्दी जल्दी घर का सारा कम केएचटीएम कर लेती हु फिर अपने पति के साथ जाकर दुकान का सारा समान खरदी लूँगी , घटर का जरूरी बर्तन भी लाकर दे दूँगी , आप मुझे घर का कम खत्म होने के बाद छुट्टी दे देना |ठीक है तुम चली जाना मीरा ने कहा |डॉ प्रकाश ने बुधन को एक सौ रुपए दे दिये और अस्पताल चले गए |शूकमनी ने घर का सारा काम खत्म कर अपने पति को लेकर बाजार चली गई |देड़ सौ रुपया मे वो जरूरी समान खरीद कर अपने घर आ गई वहा से उसने चूल्हा बरतन कोला लिया और अस्पताल चली गई | जाड़े का दिन था हल्की हल्की धूप खिली हुई थी इसलिए उसे तिरपाल आदि की जरूरत नहीं थी | उसने चूल्हा जलाया और अपनी पति बुधन को लेकर डॉ प्रकाश के चेम्बर मे चली गई , शूकमनी और बुधन को देखकर डॉ प्रकाश ने अपने एक स्टाफ को बुलाकर कहा –इन लोगो को रसीद कटवा दोऔर नासा- उनमूलन विभाग मे ले जाकर बिनोद गुप्ता से मिलवा दो | बुधन का पुर्जा बनते ही स्टाफ उनदोनों को डॉ बिनोद गुप्ता के पास ले गया | डॉ बिनोद ने बुधन का अच्छी तरह जांच पड़ताल किया और खून , पेसाब और पैख़ाना की जांच के लिए लिख दिया |

शूकमनी ने अपने पति को ले जाकर जांच विभाग मे सारी जांच प्रिकरिया पूरी किया जहा उसे बताया गया की पूरी जांच रिपोर्ट शाम को मिल जाएगी |शूकमनी अपने पति को लेकर आफ्नै दुकान पर आ गई जहा उसका चूल्हा तैयायर हो गया था |उसने तुरंत चाय की केतली को चूल्हे पर चढाकर चाय की सारी सामग्रिया दाल कर चाय बनाना शुरू किया थोंढ़ीही देर मे चाय बनाकर तैयार हो गई |तबतक दुकान पर चाय पीने के लिए कई ग्राहक जमा हो गए लेकिन शूकमनी ने सबसे अनुरोध किया आप लोग थोड़ी देर ठहर जाए मै डॉ प्रकाश को पहली चाय देकर आती हु , फिर आप लोगो को भी चाय दूँगी |इतना कहकर उसने मिट्टी की प्याली मे चाय डालकर ट्रे मे लेकर डॉ प्रकाश के पास चली गई |उसे देखकर डॉ प्रकाश बहुत खुश हुये अरे वाह शूकमनी शूकमनी चाय तैयार हो गई लाओ चाय लाओ लेकी देखो मै फ्री की चाय नहीं पीऊँगा उसके पैसे तो तुम्हें लेने पड़ेंगे , कैसी बात करते है साहब भला मै आपसे पैसे लूँगी , शूकमनी ने लाख मना किया लेकिन डॉ प्रकाश ने उसके जठ मे पाँच रुपया का सिक्का थमा दिया ये लो तुम्हारी पहली बोहनी , बोहनी पाकर शूकमनी बहुत खुश हुई |

शाम तक शूकमनी ने सारा चाय बेच दिया ,उसने अपनी थैली से सारे पैसे निकालकर जोड़ा कुल दो सौ रुपये थे |उसने डॉ प्रकाश को दो सौ रुपए देते हुये कहा –म ये लीजिये साहब आज की कुल कमाई ,मगर ब्याज के चार रुपए नहीं है डॉ प्रकाश ने खुश होते हुये कहा – कोई बात नही टीयूएम ब्याज कल दे देना ये सौ रुपए रख लो घर के लिए कुछ रसन पनि खरीद लेना तुम्हारे पति को कल ये सौ रुपए फिर दे दूंगा शूकमनी खुशा होते हुये अपना चूल्हा वही अस्पताल के एक कोने रखकर अपने पति को लेकर घर आ गई |उसने पच्चीस रूपाए अपने पति को देते हुये कहा –ये लीजिये आपके दारू के पैसे अब से कंट्रोल मे पीना है बाकी पैसो के उसने होटल से खाना खरीद लिया क्योकि चूल्हा तो घर पर था नहीं खाना कैसे बनाती |

अगले दिन बुधन डॉ प्रकाश से सौ रुपये लेकर अस्पताल चला गया , व्हा उसने चाय बनाना सुरू ही किया था की अस्पताल का एक स्टाफ ने आकार डीएस कप चाय का ऑर्डर दिया और कहा की बड़े डॉ प्रकाश साहब का ऑर्डर है जल्दी चाय लेकर आओ अस्पताल मे बाहर से बड़े अधिकारी लोग आए है | बुधन ने कहा – ठीक बस अभी चाय लेकर आता हु |बुधन ने चाय तैयार होते ही दस कप चाय लेकर डॉ प्रकाश के चेम्बर मे पाहुच गया जहा कई बड़े अधिकारी बैठे हुये थे , डॉ प्रकाश ने दस कप चाय का पचास रुपए बुधन को दे दिये ,रुपये पाकर बुधन काफी खुश हुआ और डॉ प्रकाश को परणाम कर पुनः अपनी दुकान पर चला गया

थोड़ी ही देर मे अस्पताल का एक और स्टाफ आया और उसने बुधन से कहा –डॉ बिनोद साहब बुला रहे है जल्दी चलो , ठीक है अभी आता हु | उसने एक ग्राहक को अपनी दुकान देखने को कह डॉ बिनोद के पास चला गया |बुधन को देखते ही डॉ बिनोद ने कहा – कल तुम अपनी रिपोर्ट ले जाना भूल गए थे , तुम्हारी रिपोर्ट मेरे पास आ गई है देखो घबड़ाना नहीं तुम्हारी रिपोर्ट अच्छी नहीं है |तुम्हें खून की काफी कमी है , तुम्हारा शुगर भी काफी बढ़ा हुआ है , तुम्हारे पेसाब मे पित्त की काफी मातरा पाई गई है मतलब जल्स ही तुम्हें जौंडिस हो सकता है।तुम्हारा लिवर डेमेज हो रहा है, लेकी चिंता मत करो मै तुम्हारी सारी बीमारिया ठीक कर दूंगा मगर शर्त ये है की इलाज शुरू होते ही शराब को बिलकुल हाथ नहीं लगाना होगा | अगर शराब पीना अगर बंद नहीं करोगे तो तुम्हारी मुसकिल और बढ़ जाएगी क्योकि ये सारी प्रोब्ल्म्स स्शरब पीने की वजह से ही है |

फिर डॉ बिनोद उसे लेकर डॉ प्रकाश के पास गए उन्होने बुधन की मेडिकल रिपोर्ट उनको दिखाते हुये सारा मामला बता दिया | सब कुछ समझकर डॉ प्रकाश ने बूधन से कहा देखा ये सब बीमारिया तुम्हारे शराब पीने की वजह से हुई है, अच्छा हुआ समय पीआर तुम्हारा जांच हो गई बरना तुम बड़ी भयंकर बीमारी मे पड़ने वाले थे |और सुनो जैसा की डॉ बिनोद ने कहा है शराब को बिलकुल छोड़ देना है, उसके बदले मे जैसे जैसे तुम्हारी आम्दानी बढ़े फल फूल और दूध आदि खाना और अपने बाल बच्चो की भविस्य की चिंता है तो अब सुधार जाओ डॉ प्रकाश ने बुधन को सामजहते हुये कहा |और है कल तुम पनि पत्नी को साथ मे लाकर आना केएल से तुम्हारा इलाज शुरू होगा इसलिए मरीज के साथ एक आदमी का होना जरूरी है ताकि समय पर दवा खिलाने पिलाने मे सुबिधा हो और परहेज का भी ख्याल रखे | ठीक है डॉ साहब इतना कहकर बुधन अपनी दुकान पर आ गया और ग्राहको को चाय बेचने लगा |

शाम तक उसने कुल तीन सौ रुपए की चाय की चाय बेच दिया | उसने तीन दिन का ब्याज और दो दिन का मूलधन कुल दो सौ छ रुपए डॉ प्रकाश को दे दिया बाकी चौरानबे रुपए लेकर बुधन अपने घर चल दिया |रास्ते मे उसने पचास रुपए का शराब पी लिया और झूमता हुआ घर पहुचा, घर पर शूकमनी पहले से ही पहुचकर उसका इंतजार कर रही थी |बुधन को शराब पिया हुआ देखकर वो ज़ोर ज़ोर सेचीखने चिल्लाने लगी |

हाय राम अरे सारे पैसे का शराब पी गए या रासन पानी के लिए कुछ बचा भी है|अरे चिल्लाती क्यो है पागल औरत ये को बाकी के पैसे बुधन ने लढ़खड़ाते हुये कहा और अपनी जेब से सारे खुदरे पैसे निकालकर शूकमनी के हाथो मे रख दिये |पैसे गिनकर शूकमनि ने कहा अरे इसमे तो केवाला चौवालिस रुपए ही है बाकी के पैसे क्या हुये | बुधन ने बताया की दो सौ छ रुपए उसने डॉ प्रकाश को दे दिये , सुंका शूकमनी ने राहत की सांस ली और चुप हो गई | उसने सोचा चलो अच्छा हुआ डॉ साहब का अबतक का कर्जा तो चुकता हो गया , उसके पति ने पीने के बाद भी कुछ तो पैसा बचाया है कुछ तो सुधार हुआ है, अपने पति के इस सुधार से वो खुश थी |

करीब आधी रात को बुधन ज़ोर ज़ोर से खासने लगा शूकमनी हड़बड़ाकर उठ बैठी इसने देख उसके पति की खांसी रुक ही नहीं रही है तभी बुधन ने खासते खासते उल्टी कर दिया , शूकमनी ने देखा उल्टी मे काफी मात्रा मे खून गिरा हुआ था वो घबरा गई उसने अपने पति की छाती और पीठ सहलाना सुरु कर दिया | अपने पिता की खांसी की आवाज सुनकर उसके बच्चे भी उठ गए , उसने अपनी बड़ी बेटी राधा से एक गिलास पनि लाने को कहा राधा ने पनि लाकर दे दिया , शूकमनी ने अपने पति का मुह धोकर पनि पीला दिया | थोड़ी देर मे बुधन की खांसी रुक गई |

शुबह जल्दी उठाकर शूकमनी अपने पति और बड़ी बेटी राधा को लेकर डॉ प्रकाश के घर गई , उसने डॉ प्रकाश को अपने पति की रात वाली घटना बताई | डॉ प्रकाश ने कहा – तुम अपने आप्ति को लेकर दस बजे अस्पताल आ जाना इसका पहले एक्सरे करना पड़ेगा फिर इलाज होगा घबड़ाओ मत सब ठीक हो जाएगा |शूकमनी ने उनकी पत्नी मीरा सिन्हा से कहा –मेमसाहब मेरी बड़ी बेटी राधा आपके पास रहकर आपके कम मे मदद करेगी दस बजे मै इसके बाबा को लेकर अस्पताल जाऊँगी |ठीक है मीरा ने कहा पहले तुम अपने पति का इलाज करवाओ काम की चिंता मत करो |

अस्पताल बुधन का एक्सरे करवाया गया जिसमे टीवी का लक्षण पाया गया | शूकमनी घबरा गई | उसकी ऐसी हालत देखकर डॉ प्रकाश ने कहा – घबराओ मत इस बीमारी का इलाज अब संभव है तुम्हारे पति का खाली पेट शराब पीने और बिना खाये पिये रिक्स्शा चलाने का नतीजा है | और लोग भी रिकसा चलते है मगर तुम्हारे पति की तरह नहीं |उस दिन शूकमनी दिनभर अपने पति के साथ रहकर अपनी दुकान चलाती रही वो काफी चिंतित लग रही थी |उस दिन उसकी काफी आमदनी हुई उसने शाम को कुल आमदनी को गिना कुल पाँच सौ रुपए हुये थे |उसने अगले दिन की भी सामग्रिया खरीद लिया |

उसकी चाय की दुकान तो चल पड़ी मगर उसके पति की पीने की आदत छुट नहीं रही थी और टीवी की बीमारी बढ़ते जा रही थी मजबूरन उसे अपनी बड़ी बेटी को डॉ प्रकाश के घर कम पर भेज कर खुद ही दुकान संभालनी पद रही थी उसका पति दिनभर घर पर ही पड़ा रहता था |डॉ बिनोद ने कहा था पहले बुधन का टीवी की बीमारी का इलाज करना होगा शराब पीने की आदत हर हाल मे छुड़नी होगी तभी कोई दवाई काम करेगी|इस बीमारी मे शराब जहर के समान है |अगर उसने शराब पीना नहीं छोड़ा तो बाकी सारी बीमारिया उभर जाएगी फिर उसका इलाज करना मुसकिल हो जयीगा और उसका जीवन खतरे मे पद जाएगा |शूकमनी काफी चिंतित हो गई थी मगर उसने हिम्मत नहीं हारी | वो खुद ही दुकान चलाती थी और अपने पति के लिए दवा फल फूल औए आँय पौष्टिक आहार देती रही |

बुधन भी समझ चुका था अगर उसने शराब पीना नहीं छोड़ी तो उसका बचना मुसकिल है उसे अपनी पत्नी की सेवा , मेहनत और लगन देखकर बहत आत्म ग्लानि हो रही थी |दिन भर घर मे पड़ा पड़ा उसे बड़ा बुरा महसूस हो रहा था| उसे या अच्छा नहीं एलजी रहा था की उसकी पत्नी रात दिन काम करके उसकी जान बचाने और घर चलाने मे लगी हुई है और उनकी मदद करने के बजाय खुद ही उनपर बोझ बना हुआ है |

एक दिन उसके पड़ोसियो ने जमकर उसका मज़ाक उड़ते हुये कहा – भाई औरत हो तो शूकमनी जैसी पति दिनभर घर पर चारपाई तोड़े और औरत रात दिन मेहनत करके कमाए, ऊपर से दारू पीने के लिए भी पैसा मिले | सच मे बुधन का तो राज ही राज है | दूसरे ने कहा अरे नहीं बुधन एक नंबर का निकम्मा और शराबी है इसको अपनी पत्नी की कमाई खाने मे कोई लाज श्रम थोड़े ही आती है |अपने बल बच्चो की कोई चिंता इसको नहीं है | बुधन की तो बड़े मजे की कट रही है | पड़ोसियो का मजाक और ताना सुनकर बुधन तिलमिला गया मगर उसे उनकी बाते सच ही लगी ठीक ही तो कह रहे है लोग मुझे हर हाल मे बदलना होगा | और उसने यह तय किया की चाहे जो हो जाए वो शराब को अब हाथ भी नहीं लगाएगा |जलड़ी ही ठीक होकर वो अपनी पत्नी को आराम देगा अपने बाल बच्चो का ख्याल करेगा |उसका प्रण रंग लाने लगा और वो जल्दी ही ठीक होने लगा |शराब पीने का मन बहुत करता था उसका मगर उसकी तरफ वो देखता भी नहीं था |

कुछ ही दीनो मे ठीक होकर बुधन अब अपनी दुकान पर जाने लगा उसकी चाय की बिक्री भी अब काफी बढ़ गई थी | उसकी पत्नी शूकमनी ने चाय के अलावा पकोड़े , समोसे , जलेबी , धूसका भी बनाना सुरू कर दीया था , इसके अलावा मिक्सचर ,बिस्कुट नमकीन चॉकलेट और ब्रेड आदि भी रखना सुरू कर दिया था | लोग बड़े चाव से उसकी दुकान पर आकार चाय नासता करते थे अस्पताल मे भर्ती मरीजो के लिए मिस्क्श्चर बिस्कुट और ब्रेड आदि ले जाते थे |अब बुधन की प्र्तिदिन की आमदनी हजारो रुपयो मे होने लगी |उसके घर की हालत दिन पर दिन सुधरने लगी थी |

कुछ महीनो बाद जब बुधन का दुबारा मेडिकल चेकअप कराया गया तो आश्चर्य जनक रूप से उसके स्वास्थ्य मे सुधार पाया गया |रिपोर्ट देखकर डॉ प्रकाश ने खुश होते हुये कहा था- शूकमनी अब जल्दी ही तुम्हारे अच्छे दिन आनेवाले है क्योकि तुम्हारा पीटीआई अब लगभग ठीक हो चुका है | बुधन अब शराब पीना छोड़ चुका है|देखो बुधन अब पहले से काफी मोटा तगड़ा लाग्ने लगा है |यह सुनकर दोनों पति पत्नी हसने लगे |धीरे –धीरे समय के साथ बिलकुल ठीक हो चुका था |उसकी आम्दानी पहले से भी ज्यादा हो चुकी थी |शूकमनी ने अपने घर मे जरूरत की सारी चिजे खरीदने लगी थी |उसने अपने दोनों छोटे बच्चो को बगल के सरकारी स्कूल मे एडमिसन करा दिया , बड़ी बेटी राधा को पढ़ने के लिए घर पर ही एक लेडी टीचर को ट्यूस्न के लिए रख लिया था |डॉ प्रकाश ने ही सलाह दिया था इसे तुमलोग चाहो तो प्राइवेट से भी बोर्ड का फार्म भरवाकर मैट्रिक की परीक्षा दिल सकते हो क्यो की घर से बाहर जाकर स्कूल मे पढ़ना इसका संभव नहीं है तुम्हारा घर देखने वाला कोई नहीं है इसलिए यही एक रास्ता है घर मे ही रहकर पढे लेकिन पढे |

एक दिन बुधन ने अपनी पत्नी से कहा –सुनती हो अब हमारी आमदनी बढ़ चुकी है अब हमे डॉ प्रकाश से रोज सौ रुपये नही लेने चाहिए लेकीन शूकमनी ने कहा – हमलोग डॉ साहब से अब सौ रुपया कर्जा नहीं लेते है बल्कि उनका प्यार , उत्साह और हौशला लेते है |हमारे बुरे वक्त मे डॉ साहब का सौ रुपया ने आज हमलोगो को यहा तक लाया हमे एक खुशहाल जिंदगी दिया इसलिए हमलोग उनसे सौ रुपया का कर्जा लेना बंद नहीं करेंगे |रोज सौ रुपए लेंगे और लौटाते रहेंगे |

मगर उसे अब इसका मौका ही नहीं मिला , कुछ ही महीनो बाद डॉ प्रकाश का ट्रांसफर दूसरे जिला के अस्पताल मे हो गया |उनके ट्रान्सफर से शूकमनी और बुधन को काफी दुख हुआ |डॉ प्रकाश की बिदाइ के समय के दोनों की आंखे भर आई थी |डॉ साहब आज हमलोग जो कुछ भी है आपकी बदौलत है आपने हमे सौ रुपया का कर्जा नहीं दिया था हमे जीने का नया रास्ता नया हौसला दिया था , आपने हमारी दुनिया है बदलकर रखा दिया आपका या एहसान मै और मेरा परिवार जिंदगी भर नहीं भूलेगा , बुधन ने रोते हुये अपने दोनों हाथ जोड़कर कहा था उसकी बाते सुनकर डॉ प्रकाश, उनकी पत्नी मीरा सिन्हा और शूकमनि सबकी आंखे छलक पड़ी थी |

रोना बंद करो तुम लोग और सुनो मेरी बात -मै एक सरकारी नौकर हु हमारा आना जाना तो लगा रहता है इसलिए मेरे जाने पर आँसू ना बहाओ |मैंने तो सिर्फ तुम दोनों को रास्ता दिखाया और थोड़ी सी मदद किया था मगर तुम दोनों की कड़ी मेहनत , लगन और तुम्हारे विसवास ने तुम्हारे परिवार मे खुसहाली लाई, अब मै चलता हु तुम लोग बस इसी तरह लगे रहना और अपने बच्चो को पढ़ा लिखाकर अच्छा आदमी बनाना और डॉ प्रकाश अपने परिवार के साथ अपनी गाड़ी मे बैठकर चले गए दोनों उनको जाता हुआ अपनी भिंगी आंखो से देखते रहे |

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