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तीन दिन भाग 8
तीन दिन भाग 8
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© Mahesh Dube

Thriller

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तीन दिन

भाग 8  

शाम 6 बजे 

                अचानक गुंडप्पा के मन में विचार आया कि क्या किले के दरवाजे को तोड़ा नहीं जा सकता? उसने चंद्रशेखर से इस बारे में बात की तो सब अपने अपने विचार बताने लगे। सुदर्शन जी बोले वैसे तो इस किले का दरवाजा सैकड़ो साल पुराना होने के कारण जर्जर हो चुका है पर अभी भी इतना मजबूत है कि इसे तोड़ना असम्भव है। पहले जमाने में हाथी अपने मस्तक पर भारी लोहे की ढाल बांधकर ऐसे दरवाजों को टक्कर देते थे तब ये टूट पाते थे। ऐसे में बिना किसी औजार के हम इसे कैसे तोड़ पाएंगे? लेकिन चंद्रशेखर खिड़की में खड़ा होकर दरवाजे की दिशा में देखने लगा उसका कसरती बदन दरवाजे पर जोर आजमाइश करने को मचलने लगा था। उसने कहा कि अगर एक लोहे की छड़ मिल जाए तो वह दरवाजों के कब्जों में घुसाकर उन्हें उमेठने की कोशिश कर सकता है। हाथी वाली तरकीब आक्रमणकारी सेना बाहर से उपयोग में लाती थी जबकि हम भीतर हैं और लोहे के कब्जे हमारी जद में हैं। इतना सुनकर सदाशिव भी उत्साहित होकर खिड़की पर आ खड़ा हुआ वो किसी भी तरह इस जंजाल से निकलना चाहता था। उसने भी विशाल दरवाजे के जंग लगे कब्जों को ध्यान से देखा तो उसे चंद्रशेखर की बातों में दम नजर आया। वह बोला, बात तो सच है पहलवान भाई! चलो कहीं से लोहे की........

बाकी के शब्द उसके मुंह में ही रह गए। बाहर से किसी ने एक बांस की पतली डंडी ऐसे घुमाकर मारी कि उसकी नोंक सीधे सदाशिव की आँख में आ धंसी और वह चिल्लाता हुआ भूमि पर गिर पड़ा। चंद्रशेखर घबरा कर नीचे बैठ गया। हमलावर तब तक फरार हो गया। ललिता जोर से चिल्लाती हुई दौड़ी और पति का चेहरा गोद में लेकर उसने डंडी खींचकर बाहर निकाल दी। रक्त परनाले की तरह बहकर उसकी साड़ी को भिगोने लगा। सदाशिव बेहोश हो चुका था। अचानक ललिता भी अपनी छाती पकड़ कर एक ओर को लुढ़क गई। भीषण हृदयाघात से उसके प्राण पखेरू उड़ गए। सदाशिव भी अधिक रक्त बह जाने से चल बसा। थोड़ी देर पहले जिस बात की आशंका प्रकट करके उसने ललिता को डांटा था वह उसी के साथ घटित हो गया। डॉ मानव ने उन दोनों को जांचा और मृत घोषित कर दिया।

    चंद्रशेखर की आँखें अंगार उगलने लगी। वह खिड़की में से ही बाहर कूद पड़ा। बाहर उसे जमीन पर कुछ चमकता सा दिखाई पड़ा उसने झुक कर उठाया तो वह झाँवर की वजनी सोने की चैन का एक टुकड़ा था। अगर अभी झाँवर उसे मिल जाता तो वो खाली हाथों से ही उसकी तिक्का बोटी कर देता। वह चैन का टुकड़ा लिए भीतर आया और रमन के सामने उसे फेंक दिया।

        रमन की आँखों में भी खून उतर आया। बाकी सभी भी झाँवर को बुरा भला कहने लगे। लेकिन सबकी हालत बहुत खराब थी।

कहानी अभी जारी है ......

क्या झाँवर पकड़ा जा सका?

अगला शिकार कौन था?

जानने के लिए पढ़िए भाग 9

 

रहस्य रोमांच मर्डर मिस्ट्री

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