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शुभ चिंतक - Part 5
शुभ चिंतक - Part 5
★★★★★

© Bharti Suryavanshi

Romance

8 Minutes   14.6K    28


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प्रिया रूद्र से मिलकर घर पहुंची, नीलम बड़ी बेसब्री से जानने के लिए इंतज़ार कर रही थी...

नीलम - क्या हुआ कुछ मालूम चला "

प्रिया - “(उदास होकर)नहीं…”

ये सुन नीलम भी उदास हो गयी, फिर प्रिया ने उसे ख़ुशी से बताया "सबकुछ पता चल गया... वो शुभ चिंतक Mr. रूद्र ही है। उसे देख कर तो लगा ही नही था की वो ये सब भी कर सकता है...But Finally सब clear हो गया ”नीलम - “OMG…Yes...Yes…! I am so Happy for you..!”

दोनों सहेलियाँ इस उलझन को सुलझा कर खुश थी। रूद्र धीरे धीरे प्रिया को इम्प्रेस करने की सारी कोशिशें करने लगा... प्रिया भी उसे वक़्त दे रही थी लेकिन जितना समय वो उसके साथ रहती उतना ही उसे महसूस होने लगा की ये उसका वेल विशेर नहीं है...पर वो इस बात को साबित नहीं कर सकती थी सिर्फ शक होने लगा था उसे। एक दिन प्रिया करन के साथ डिज़ाइन के बारे में चर्चा कर रही थी पर उसका मन नहीं लग रहा था ये देख करन ने पूछा "क्या हुआ आज फिर कहीं जाना है?"

प्रिया-"नहीं सर...बस कुछ ख्यालों में थी...Well let’s ignore that"

करण-"क्या मैं कुछ मदद कर सकता हूँ ?"

प्रिया - "आप?"

करण -"हाँ यहाँ कोई और है भी नहीं…!”

प्रिया (हंस कर)- “नहीं...नहीं I mean… अच्छा क्या सर आप के साथ कभी ऐसा हुआ है की कोई शख्स पास होकर भी अजनबी लगे, मतलब मैं उससे कुछ कहना चाहती हूँ...पर डर सा लगता है!

करण -"हम्म मेरे साथ भी ऐसा हुआ है, मैं कुछ कहना तो चाहता हूँ पर फिर ?”

प्रिया-"फिर क्या?"

करन -"फिर क्या...प्रिया? जब हालात ही ऐसे हो जाते हैं की चाह कर भी हम कुछ नहीं कह सकते... तो चुप रहना चाहिए.. हो सकता है आपके शब्द एक रिश्ता ख़राब कर दे... उससे तो अच्छा है खामोशी से सही वक़्त इंतज़ार करे।"

प्रिया- हाँ सर! आप ठीक कह रहे है... एक उम्मीद दे दी आपने तो (मुस्कुरा कर)"

करन - "तुम खुश रहा करो… हंसी तुम्हारे face पर अच्छी लगती है!"

प्रिया-"क्या....?"

करन -"हम्म...वो... वो ...कुछ नहीं...!"

प्रिया जब मीटिंग ख़त्म ऑफ़िस से बहार आयी तब रूद्र ने उसे कहा "आज मेरा बर्थडे है इसलिए मैं चाहता हूँ हम लोग कुछ वक़्त अकेले स्पेंड करे... तुम आओगी ना? प्रिया के मन में था के आज वो रूद्र से कह देगी के "वो उसके साथ इस रिलेशन को आगे नहीं बढ़ाना चाहती वो दोनों सिर्फ अच्छे दोस्त ही ठीक है" मन में यही सब सोच वो खो गयी थी। रूद्र ने दोबारा पूछा "प्रिया... प्रिया..."

हाँ... हाँ मैं आउंगी " प्रिया ने कहा और चली गयी।

करन अपनी ऑफ़िस के शीशे से उन्हें बात करता हुआ देख रहा था...और जब भी वो ऐसा कुछ देखता उदास हो जाता। 

प्रिया शाम को जब होटल पहुंची तब वेटर ने उसे हॉल में जाने को कहा वंहा पहुँच कर उसने देखा की पूरे हॉल में अंधेरा है और उसके पहुंचते ही एक लाइम लाइट उस पर फॉक्स हो रही थी, सामने से रूद्र काले रंग का सूट पहने हाथ में गुलाब लिए प्रिया की तरफ आ रहा था और फिर अपने घुटनों पर झुक उसने प्रिया से कहा "प्रिया में जबसे तुमसे मिला हूँ मेरी ज़िदगी पूरी हो गयी है क्या तुम मेरी हमसफ़र बनोगी Will you marry me?”

“क्या" प्रिया ने चौक कर कहा लेकिन जैसे उसके ये शब्द किसी ने सुने ही नहीं रूद्र के प्रपोज़ल के बाद पुरे हॉल में लाइट्स ओन हो गयी और तालियों के शोर के साथ ऑफ़िस के लोग, प्रिया की दोस्त नीलम और राज सभी वहां मौजूद थे यहाँ तक की करन भी, सब लोग प्रिया और रूद्र को बधाइयाँ दे रहे थे। बर्थडे केक आया रूद्र ने प्रिया के साथ Cake कट किया इतने सारे लोग मौजूद थे की प्रिया कुछ कह नहीं पा रही थी। लेकिन उसके आश्चर्य का पार तब न रहा जब केक कटाई के बाद रूद्र ने एक और अनाउंसमेंट की "आप सभी लोगों का यहाँ आने के लिए शुक्रिया अपना जन्मदिन मैंने कभी भी इतनी ख़ुशी के साथ नहीं मनाया, लेकिन आज आप सब लोगों के साथ ने इस दिन को अनमोल बना दिया और ये सब प्रिया की वजह से है इसलिए आज ही के दिन मैंने प्रिया से सगाई करने का फैसला किया है।" ये सुनते ही प्रिया ने रूद्र को रोका और कहा मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।"

रूद्र -"बोलो"

प्रिया-"देखो मैं इन सब के लिए..." तभी वहां करन आया उसने प्रिया को वही लिल्ली के फूल दिए और कहा "sorry to disturb you...लेकिन मुझे काम से निकलना है। प्रिया... अपनी ज़िन्दगी में हमेशा तरक्की करना और खुश रहना। कभी भी अपने सपनो के लिए जीना बंद मत करना...bye and conratulations to both of you!” करन के लफ्जों में एक दर्द सा था ये कहते वक्त जो प्रिया उसकी आँखों में देख सकती थी। दोनों एक दूसरे को कुछ पल के लिए सारी दुनिया को भूल देखते रहे, तभी रूद्र ने फूल लिए और कहा थैंक यू सर और करन वहां से चला गया! प्रिया उसे जाता हुआ देख रही थी, रूद्र ने प्रिया के हाथों में फूल दिए और दूसरों से बातें करने में बिजी हो गया। तब ही नीलम उसके पास आयी और गले लग कर प्रिया को बधाइयाँ दी लेकिन उसे खामोश देख उसने प्रिया से पूछा "हे क्या हुआ you look upset!"

प्रिया- "नीलम यार कुछ ठीक नहीं लग रहा...मैंने तुझसे कहा था न ये रूद्र मेरे वेल विशेर जैसा लगता नहीं है"

नीलम- "हां सामने मिलना और खत में बात करना थोड़ा अलग तो है (उसके हाथो में फूलो को देख) ये देख आज special day पर वो तेरे लिए वही लिल्ली फ्लावर्स लाया है पिंक कार्ड के साथ! और तुझे लग रहा था रूद्र वो नहीं अब तो शक मत कर।

प्रिया को ये सुनकर शायद अपने मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल गया था वो बिना कुछ कहे वहां से फ़ौरन भागी नीलम उसे आवाज़ देती रही लेकिन प्रिया को आज कोई रोक नहीं सकता था वो तेज़ी से बिना कुछ सोचे बस भागे जा रही थी, उसकी आँखों में आँसू थे समझ नहीं आया के करन कहाँ होगा। उसने सड़क पर पहुँच एक टैक्सी रोकी टैक्सी वाले ने उससे पूछा मैडम कहां जाना है...प्रिया सोच रही थी की क्या बोले? टैक्सी ड्राइवर उसे मिरर से घूर रहा था उसने फिर पूछा "मैडम?"

प्रिया-"हम्म...हाँ.. जुहू बीच ले चलो "

पुरे रास्ते उसके मन में डर था की उसने अंदाज़ा तो लगा लिया है लेकिन करन वहां मिलेगा या नहीं...और जब मिलेगा तो क्या जो वो सोच रही है वही सच है? है तो करन ने क्यों किया ये सब.. अनचाहे ख्यालों में खोयी प्रिया जुहू बीच पहुँच कर जल्दी टैक्सी से ड्राइवर को पैसे देकर उतरी। उसकी नज़र आसपास दौड़ने लगी बाकी पैसे भी ना लिए और प्रिया ने समुद्र की बहती लेहरों की तरफ रुख किया...लेहरों के थोड़ा पास पहुँच उसने देखा समन्दर की लेहरें उफान मार रही है सामने चाँद की रोशनी में एक लड़का जूते बगल में रखे, अपनी नज़रे नीची करे हुए बहुत ही उदास और मायूस बैठा है...आँसू जैसे छलकने को तैयार हैं पर रुके हुए हैं। प्रिया उसके पास जाकर बैठी और कहा "करन... चाहे सच को कितना भी छुपाया जाये वो सामने आ ही जाता है और आप मुझसे भाग नहीं सकते। करन यूँ अचानक प्रिया को देख हैरान था और ऊपर से सोने पर सुहागा उसकी बातें सुन बड़े आश्चर्य से उसने पूछा "तुम पार्टी छोड़ यहाँ ? और कौन सा सच?"

प्रिया-"ओह्ह तो अब भी सारी बातें मैं ही बताउंगी? आप कुछ नहीं कहोगे ?" प्रिया ने जिस स्वर में ये कहा मानो करन को चेतावनी थी।" करन की चुप्पी देख वो खड़ी हो कर चल दी तब उसका हाथ पीछे से पकड़ करन ने उसे रोका और कहा "मैं ही हूँ तुम्हारा शुभ चिंतक ! समझ नहीं आ रहा था प्रिया के तुम मानोगी या नहीं मैं तुम्हारा बॉस और मैं ही...फिर जब रूद्र ने भी झूठ कहा तो मेरा सच जैसे मुझे हारता हुआ नज़र आ रहा था ! मुझे लगा अगर मैं तुम्हें सच बताऊ लेकिन तुम्हें विश्वास ना हुआ और कहीं तुम मुझसे नफ़रत करने लगी तो ?

प्रिया-"ग्रेट तो आप सब कुछ बिना कुछ कहे ही सोच लेते हैं क्या, होता अगर मैं रूद्र से शादी कर लेती आप ज़िदगी भर एक डर की वजह से मुझसे सच नहीं बोलते...? (कुछ पल बाद भावुक होकर ) पागलों की तरह ढूंढती रही अपने वेल विशर को हमेशा! तब भी आप को समझ नहीं आया। बहाने है बस झूठे हो तुम..सॉरी आप..." प्रिया को एकदम एहसास हुआ की वो कुछ ज़्यादा ही गुस्से में बोल गयी है, वो अब और कुछ कहना या सुनना नहीं चाहती थी आँखों में आँसू लिए प्रिया सब बोल तो गयी पर एक क्षण भी अब उसे रुकना नहीं था वो जाने लगी तभी करन उसके आगे आया और अपने घुटनों पर झुक हाथ जोड़ प्रिया से कहा "मत जाओ..! I...I love you! इस बात का एहसास मुझे तब हुआ जब तुम्हें रूद्र के साथ देखा अब तक मैं सिर्फ तुम्हारी ज़िदगी में ख़ुशियाँ लाना चाहता था तुम्हें कामयाब देखना चाहता था, पर ये जाना ही नहीं की वो एहसास प्यार था...! प्लीज मुझसे दूर मत जाओ। करन ने अपना दिल खोल कर रख दिया, प्रिया का गुस्सा भी ये देख पिघल गया उसने करन के दोनों हाथ पकड़ कहा " I love you too…! तुम्हारे पहले ख़त से पर...बहुत सताया है तुमने मुझे..." गले लग प्रिया ने रोते हुए कहा आखिर कार कुछ देर बाद जब दोनों शांत हुए तब दोनों चांदनी रात की खूबसूरती को साथ में बैठकर निहार रहे थे और करन ने पूछा "तुम्हें कैसे पता चला मैं यहाँ हूँ ?तुम ही याद करो जब पहला ख़त तुमने लिखा था, उसकी अगली रात मैं यही पर थी इसका मतलब उस रात तुम भी यहाँ थे... मेरी और तुम्हारी उदासी का सुकून एक ही जगह पर है ये मैं समझ गयी थी !"

करन ने हँसते हुए कहा "वैरी स्मार्ट लेकिन बिना कुछ कहे ये कैसे जाना की वेल विशर भी मैं हूँ "

"इसका जवाब मैं देती हूँ " नीलम ने कहा नीलम और राज जो भी वहां आ चुके थे

नीलम - ये तुम्हारे लिल्ली के फूलों ने कह दिया, रूद्र ने इतने दिनों में कभी भी लिल्ली गिफ्ट नहीं की थी वो जब भी मिलता रेड रोजेज लाता.. वो कितना भी क्रेडिट ले ले लेकिन वो तुम जैसा नहीं था...

राज- यस सर आप तो मास्टर निकले...!(चारों हँसते है)

और वेल विशर की ये कहानी यही समाप्त होती है..

सच ख़त लिल्ली

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