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पहला प्यार
पहला प्यार
★★★★★

© Chandni Sethi Kochar

Drama Romance

4 Minutes   325    16


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प्रेम इंसान को कभी-कभी पागल कर ही देता है , ऐसा ही हाल कुछ कल्पना का था , वह एक कंपनी में जॉब करती थी , और रोज सुबह अपने घर के पास से 8 :40 की बस लेती थी , ऑफ़िस जानें के लिए ! और उसी बस में उसकी मुलाकात विक्की से हुई थी , मुलाकात भी क्या कहे , वह लड़का तो बस कल्पना की बस की सीट के पीछे बैठता था , बिलकुल ख़ामोश रहता था , ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्त से ही बात करता था , और ज्यादा किसी से बात नहीं करता था ! शायद थोड़ा शर्मीला क़िस्म का था , इसलिए बस में सिर्फ अपने दोस्त के अलावा वह किसी से बात करना पसंद नहीं करता था , पर कल्पना तो उस से प्रेम कर बैठी , पर वह बताये भी तो उस लड़के को कैसे बताये , क्योंकि लड़का तो उससे बात ही नहीं करता था ! लेकिन कल्पना को इस बात का फर्क नहीं पड़ता था, क्योंकि वह तो बस उसे देख ले उसके लिए यही काफी होता था , प्यार तो बहुत करती थी , लेकिन बोलना उस के बस की बात नहीं थी,ख़ामोश इसलिए प्रेम ही चलता रहा कल्पना की तरफ़ से , एक बार भी वह उसको बोल नहीं पाई , क्योकि लड़की का एक लड़के के पास जाकर , उसे प्यार का इज़हार करना वह कल्पना के बस में नहीं था , वह तो बस उसको देखकर ही खुश थी !

कल्पना को शायद विक्की को देखकर ही ख़ुशी होती थी , इसलिए शाम को भी वह जानबूझकर कर लेट वाली बस लेती थी , क्योंकि उसी बस में विक्की होता था , उसको देखे बिना वह रहे ही नहीं सकती थी ! धीरे - धीरे समय बिता ता चला गया , और उसका ख़ामोश प्रेम दिल में ही रहे गया , किस्मत ही कही उसके साथ नहीं थी , इसलिए कल्पना का ऑफ़िस ही बदल गया , और अब वह मेट्रो में जाने लगी , बस का सफर तो ऐसे खत्म ही हो चुका था , रह गया था तो ख़ामोश प्रेम और उसकी भावना ये बस , बाकी सब वह पीछे छोड़ कर आगे जा चुकी थी , लेकिन बोलते है ना

" जिसे आप दूर जाओ वो ,आपके सामने ज़रूर आता है "

बस वही हाल उस दिन कल्पना का हुआ था। कल्पना ने ऑफ़िस जाने के लिए मेट्रो लेने ही वाली थी , कि अचानक विक्की उसे ने वहाँ देख लिया, थोड़ी देर तक तो कल्पना को अपनी आँखों पर विश्वास ना हुआ , पर अगले पल ही, विक्की को किसी ने पीछे से आवाज़ दी , शायद उसकी बीवी थी , इतना देख कर ही , कल्पना अपने रास्ते चली गई , पर नज़रे अभी भी विक्की को ही ढूंढ रही थी , लेकिन अब तो , कुछ भी नहीं हो सकता था, इसलिए उस दिन कल्पना ने,विक्की को अनदेखा कर शुरू कर दिया था, क्यूंकि वह भी अब अपनी लाइफ में बिजी हो गई थी, उसने अउपना अखबार खोला और पढ़ने लगी और साथ ही साथ गाने सुनने लगी ! लेकिन कही न कही उसे लगता था , कि शायद उसकी जिंदगी में कोई नहीं है, जो उसे पसंद करे , जो उसे प्यार करे , उसका ख़्याल रखे , पर वह किसी से कुछ बोलती नहीं थी, बस कोई प्यार के बारे में पूछे तो सिर्फ एक बात कहती थी , कि मुझे तो प्यार में पड़ना ही नहीं है, मैं बहुत खुश हूँ अपनी जिंदगी में, लेकिन अकेले इंसान का सहारा उसका एक दोस्त हो सकता है, जो उसकी भी थी , उसकी बेस्ट फ्रेंड हमेशा उसका साथ देती , वह दोनों घूमने जाते , लंच साथ करते कभी - कभी बाहर , इसलिए कल्पना उसके साथ रहना ही पसंद करती थी ! क्योंकि वह अपने अकेले पन से भागनासमय बिता गया , और एक वह दिन आया जब कल्पना के लिए एक रिश्ता आया, जिस लड़के ने उसको एक नज़र में ही देखते पसंद कर लिया था, और शादी में इतनी जल्दी हो गई , कि कल्पना को तो विश्वास भी नहीं होता की सही में उसकी जिंदगी में कोई है अब, जो उसको पसंद करता है ,उसे प्यार करता है ! लेकिन अब उसे लगता है , कि अच्छा ही किया उसने उस समय ख़ामोश रहे कर , क्योंकि उसे विक्की से ज्यादा पढ़ा लिखा लड़का मिला था , और उसे लाख गुना समझदार , शायद प्रेम में ख़ामोशी कई बार अच्छी होती है।

ख़ामोशी इज़हार विश्वास

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