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थॉट पायजनिंग
थॉट पायजनिंग
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© Anshu sharma

Inspirational Others

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थाॅट पायजिनिंग.......

क्या है यह शब्द !ये तो हमने कभी नहीं सुना हमने तो फूड पॉइजनिंग सुना है है ना! आप ये ही सोच रहे होंगे । पर ये शब्द आपको समझ आ गये होगें। थॉट यानी विचार पॉईजन यानि जहर पॉइजनिंग । फूड पाइजनिंग हो जाने पर हम इलाज कराकर जल्दी ही इसका समाधान पा सकते हैं।

 पर अगर उनके विचारों में नकारात्मक सोच हावी हो जाती है तब यह थॉट पॉइजनिंग कहलाती हैं।

नकारात्मकता का कारण..

इसकी जडें उनके मन पर इस तरह तेजी से फैलती हैं ।उसका असर उनके दिल और दिमाग पर पड़ता है

दिमाग के बहुत हिस्से होते हैं।जिनका काम अलग होता है।ऐसे ही विचारों को नियंत्रित करने के लिए हमारे दिमाग का एक अहम हिस्सा है। कोर्टिसोल नामक हार्मोन के असंतुलन से नकारात्मक विचार जन्म लेते हैं।

नकारात्मकता के लक्षण.....

नकारात्मक विचार उनकी सकारात्मक सोच को भी गलत सोच से नकारात्मक बना देते हैं ।उनको अपने चारों तरफ का वातावरण भी नकारात्मक ही प्रतीत होता है।

__स्वभाव में चिंता का नजर आना

_निराशा का भाव

_चूप रहना

_अकेले रहने से डर लगना

_सुख शांति की उम्मीद खो देना

_भूख नहीं लगना

_ नींद नहीं आना

_घबराहट

उनके विचार खुशियों से मुंह मोड़ लेते हैं और उनके विचारों के साथ यह उनका शरीर को भी बीमार बना देता है ।यह बीमारी दिल और दिमाग दोनों पर हावी हो जाती है। ऐसे व्यक्ति तनाव में रहने लगते हैं ।और उनको हर अच्छे इंसान में भी हर अच्छी बात में भी बुराई दिखाई देती है अपने में बदलाव ना ला पाने से ये व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को खराब कर लेते हैं।

लोगों को चुनौतिया मिलती ही है।उसका सामना करने की हिम्मत होनी चाहिए।

किसी की मानसिक शक्ति अधिक होती है ,वो जल्दी नकारात्मकता से निकल जाते हैं।किसी की नहीं।उनको नकारात्मकता, निरूत्साहित और कमजोर बना देती है

    

विचार ही हमें अच्छा और बुरा और हमारे आसपास के दोस्त कैसे होंगे ?इसका चुनाव हम अपनी सोच से करते हैं ।हमारे विचार के अनुसार ही हमारे दोस्त बनते हैं हमें उन्हीं लोगों के विचार पसंद आते हैं ,जो हमारी ही विचारों से मेल खाती हो फूड पॉइजनिंग से भयंकर बीमारी थॉट पॉइजनिंग जिसका बचाव हमें सही टाइम पर सही फैसलों से कर लेना चाहिए ।यही तनाव आगे बढ़कर हमें डिप्रेशन का नाम दे देता है ।

ये मानसिक तनाव बढकर हमारे शरीर को नुकसान पहुंचता है। यह शारीरिक और मानसिक तनाव है ।

जब ऐसे व्यक्ति का कोई काम नहीं होता ,या सामाजिक परेशानियाँ उसे घेर लेती हैं ।कोई रास्ता नजर नहीं आता ,उनका मन परेशान हो उठता है और वो अपनी बात किसी से साँझा नहीं करते और अपने ही मन में सोच कर परेेशान हो जाते है। और वो अपने चारो तरफ एक रेखा खिचँते है ,ना उसके बाहर जाना चाहते है ना किसी को अंदर बुलाना ।एक तरह से उन्हें चुप पंसद होता है।

   

भावनात्मक रूप से इतने कमजोर हो जाते है कि बात बात पर रोना आता है। हमे अपनी सोच पर नकारात्मकता को हावि नहीं होने देना चाहिये ।अगर ऐसा होता है तो...ऐसे वातावरण में हँसी खुशी का माहौल हो, अच्छे लोगों के सम्पर्क में रहे ,कोई परेशानी हो किसी अपने से बांंटे,मन पंसद संगीत सुने ,अपनेे को व्यस्त रखे चाहे तो फोन पर बात करे। जिस से बात करकेे आपका मन खुश होता हैै ,कुुुछ लिखे जो अच्छा लगे।

समाधान----

_सकारात्मक विचार सोचे

_व्यस्त रहे

_संगीत सुने

_जिसके साथ मुस्कुराहट आ जाये,उससे बात करें।

उदासी या अपनी बीमारी की बात नहीं करें।

_घूमने जाये

_प्राणायाम करें

_ऊॅ॓ का उच्चारण करें मन शांत होगा

हमेशा अच्छा सोचें।खुश रहने की कोशिश करें ।जरुरत से ज्यादा ना सोचे। नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूूूर रहे।

बुरा समय भी चला जाता है । हंसी मजाक के कार्यक्रम टीवी पर देखें। मन परेशान करने वाले कार्यक्रम नही देखें।

नींद ना आ रही हो तो भजन सुने ,गायत्री मंत्र सुने।

दवाइयां भी तभी असर करती है जब आप कोशिश करते हो सही होने की।

नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदला जा सकता है।

बस हिम्मत चाहिए कि हमें हार नहीं माननी‌।

थाॅट पाॅयजिनिंग केवल बुरे विचार है । आप इन पर काबू पा सकते हैं। आप कौन से विचार को मन में रखते हैं ये आप पर निर्भर करता है ।अच्छे या बुरे।

मौलिक रचना

अंशु शर्मा


विचार डिप्रेशन नकारात्मकता

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