Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
ऑफलाइन
ऑफलाइन
★★★★★

© Sreenesh Ramesh Bindu Kini

Drama Romance Tragedy

3 Minutes   14.9K    35


Content Ranking

एक रविवार की सुबह। बागीचे में खिला गुलाब, आसमान में मुसकुराता सूरज उसे छूता हुआ। ठंडी हवाओं ने जॉन के घर दस्तक दी। बेडरूम के परदे से लिपटकर उन हवाओं ने रुख बदली। झंकार को चूमकर, छन-छन नाचते हुए वो कुछ तस्वीरों की ओर चली। तस्वीरें, जो यादें थी, यादें, जॉन और क्रिस्टीना की।

घड़ी पुकारती हुई, और समय हो चुका था सवा-नौ, मगर महाशय जॉन की नींद खुलने से रही। मोबाइल ने आवाज़ दी, जॉन आधी नींद में ब्लैंकेट से झाँका, सोती हुई आँखों से उसने कॉल काट दिया और फिर ब्लैंकेट ओढ़कर सो गया।

वहाँ तस्वीर में हँसती क्रिस्टीना, जैसे जॉन की तरफ देखते हुए। अचानक से जॉन उठा, एकदम आश्चर्यचकित। उसे पता था आज का दिन खास है, कोई उसका इंतज़ार कर रहा था। बिना वक्त गवाए वो तैयार होने चला गया। सफेद कमीज़, काली पैंट, लाल टाई पहने जॉन अपनी महबूबा से मिलने निकलने ही वाला था कि उसे याद आया वो कुछ भूल रहा है। अपने कबर्ड की ड्रावर खोलते हुए उसका चेहरा महक उठा। एक छोटा सा डिब्बा उठाते हुए उसने आईने में देखा, खुशी से फुला न समाया, वो चल पड़ा।

सफर में चलते - चलते, उसकी नज़र एक बूढ़े जोड़ी पर पड़ी। वो एक दूसरे को प्यार कर रहे थे, फूल देकर अपने दिल की बात का इज़हार कर रहे थे। जॉन ने सोचा क्यों न वो भी एक गुलदस्ता ले ले।

दौड़ते - दौड़ते जॉन अपनी मंज़िल को पहुँचा। चारों तरफ शांति थी। पेड़ के डाल पर बैठी चिड़िया ये सब देखते हुए। जॉन ने गुलदस्ता पीछे छिपाया और क्रिस्टीना को आवाज़ दी।

“हाय, देखो मैं आ गया।"

सामने से कोई जवाब नहीं आया।

जॉन दिल बहलाते हुए बोला,

“हे सॉरी यार ! आई नो आई एम लिटिल लेट।"

समां पूरा सूना था।

जॉन आगे बढ़ते हुए बोला

"ओके ओके, पूरा दो घंटे लेट हूँ...हम्म।"

गहरी सांस लेते हुए उसने कहा,

“तुम्हें पता है ना, मुझसे सुबह उठा नहीं जाता, और आज रविवार भी है...हम्म, मगर तुम घबराओ मत। आज कोई फोन कॉल्स नहीं, कोई ऑफिस नहीं, कोई मीटिंग नहीं, सिर्फ तुम और मैं।" गुलदस्ता आगे करते हुए वो शर्माया,

“देखो, क्या लाया हूँ तुम्हारे लिए, चलो अभी गुस्सा थूक दो। प्लीज़ स्माइल ! स्माइल...।

ऐसे कहते हुए जॉन ने गुलदस्ता सामने वाली कब्र पर रख दिया। आँखों में पानी ने कब्ज़ा कर लिया था। जो चेहरा अब तक सोने ही तरह चमक रहा था, अब काले बादलों ने उन्हें घेर लिया। आसमान गरजने लगा, हवाओं में ग़म की खुशबू फ़ैल गई। अपने आप को सँभालते हुए जॉन ने कहा,

“तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।"

घुटनों पर बैठ, जॉन ने उस छोटे से डिब्बे को जेब से निकाला और पूछा,

“विल यू बी माय वैलेंटाइन ?"

एक हाथ जॉन की तरफ बढ़ा, जैसे क्रिस्टीना वहाँ मौजूद थी। मुस्कुराते हुए क्रिस्टीना ने जवाब दिया,

"आई डू।"

फिर क्या, जॉन ने डिब्बे से अंगूठी निकाली और क्रिस्टीना को पहना दी।

जॉन ने पूरा दिन क्रिस्टीना के साथ बिताया। वो हँसे, वो रोए, गले मिले, दिल जुड़े, ढेर सारी बातें की। जॉन ने क्रिस्टीना का हर एक पल ख़ुशी से भर दिया।

अपने सिर को क्रिस्टीना के गोद में रखते हुए जॉन लेट गया। बालों में हाथ फेरते हुए क्रिस्टीना बोली,

“तुम पागल हो जॉन, आई लव यू।"

मौसम बरसने लगा और साथ ही साथ जॉन के आंसू।

समय बीता, बारिश तेज़ हुई, वो डाल अभी खाली थी और जॉन वहीं, क्रिस्टीना के कब्र पर सिर रखते हुए भीगता रहा।

हर बूँद एक ही सवाल कर रही थी कि ऐसा क्यों हुआ ! और जवाब सिर्फ एक ही था,

"मैं तुमसे बेहद प्यार करता हूँ, तुम हो मेरे पास। यहीं पर, मेरे साथ...ऑफलाइन।"

Love Lovers Death

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..