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बोल भी इब
बोल भी इब
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© Neelima Sharrma

Inspirational

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सुनसान भोपा रोड पर एक लड़के ने हाथ से लडक़ीक की चलती सायकिल रोक ली-

"ऐ छोरी, माण ले म्हारी बात। 

एक भी लुगाई ना मेरे घर में। माँ को गुजरे एक बरस हो लिया। 

तेरे आने से उजाला हो जावेगा।रोटी भी गरम मिलन लगेगी सबको। 

तन्ने सब सुख दूँगा, कपड़ा गहना सब।यो मत समझ कि मैं आवारा छोरा और तेरे पीछे प्रेम की खातिर भाग रा, मेरे तो इब्बी पढऩे के दिन। "

"बस बापू, भाई को रोटी मिलती रवे टेम से तो मैं बेफिक्र होके सहर जाऊँ पढऩे, बोल भी इब?

तो सुन मेरी भी बात, मेरे  को मरे 5 साल हो लिए।" 

"अपने बापू को भेज मेरी माँ पे चादर डाल दे, उन दोनों का भी कटेगा और थारे घर गर्म

रोटी भी पकेगी और मैं भी आ जाओंगी थारे घर थारी

बहन बनके। 

राखी पर दे दियो यो कपडे गहने सब, बोल भी इब!”

सुनसान सड़क पर अब लड़की अकेली खड़ी थी। 

#postiveindia

समाज सोच लड़की

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