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© Dipak Mashal

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इमीना नाम था लड़की का, तुर्की देश से थी। हिरनी जैसी आँखें, गोरा रंग और कत्थई एवं सुनहरे को मिलाने से बने रंग के बाल थे उसके, व्यक्तित्व आकर्षक था। फ़्रांस में फ्रैंच भाषा से दोस्ती के दौरान उस हिन्दुस्तानी लड़के की उससे मुलाक़ात हुई। उस विद्यालय में एक साथ एक ही कक्षा में नई भाषा सीखते हुऐ  उन्हें अभी दो ही हफ़्ते बीते थे। इमीना को अपनी मातृभाषा के अलावा कोई दूसरी भाषा न आती और लड़के की पकड़ भी सिर्फ़ हिन्दी-अंग्रेज़ी में ही थी, बावज़ूद इसके दोनों कुछ और दोस्तों के साथ मध्यावकाश में एक साथ खाते-पीते और फ्रैंच बोलने का अभ्यास करते।   

एक दिन मध्यावकाश में कक्षा से बाहर बैठे हुऐ  थे कि दूसरी कक्षा के कुछ लड़के जो मध्य-पूर्व के किसी देश से लगते थे, चील की तरह उनके आस-पास मँडराने लगे। एक ने इमीना की तरफ़ इशारा करके फ्रैंच में पूछा 

- एलो मादाम! इजिप्शियाँ?

अपरिचित लोगों के अचानक हुऐ  सवाल से इमीना हैरान थी। उसने अपने बाकी साथियों की ओर देखा, पर किसी ने कुछ न कहा। वही लड़का फिर बोला 

- अल्ज़ीरिया?

इमीना ने इंकार में सिर हिलाया और अपना लंच बॉक्स सिमेट कर कक्षा में चली गई, उसकी आँखों में आँसू थे। शक्ल-सूरत से बदमाश लगते उन लड़कों से कोई कुछ न बोला, बस सबने अपना सामान उठाया और इमीना के पीछे-पीछे कक्षा में आ गऐ ।    

हिन्दुस्तानी लड़का रात भर ख़ुद को समझाता रहा 

- 'इतने लोग थे, जब किसी ने उन्हें नहीं रोका तो मैं ही क्यों बोलता? मुझे तो अभी फ्रैंच भी ढंग से नहीं आती, कुछ कहता भी कैसे? और क्या मालूम उन्हें भी अंग्रेज़ी न आती हो।'

उसको ख़ुद के न बोलने की ढेरों वजहें मिल रही थीं। 

- 'फिर इमीना को भी तो स्कूल वालों से शिक़ायत करनी चाहिऐ थी। जाने कैसे लड़के हों, शक्ल से ही गुण्डे लगते थे। ऊपर से पराऐ देश में जहाँ अब तक कानून ही नहीं मालूम वहाँ फसाद में क्यों पड़ना…. और फिर मैं कुछ बोलता भी तो और सहपाठी जाने क्या समझते ……'

इस तरह बहाने खोजते वह नींद में चला गया। अगले दिन दोपहर में सभी ने कक्षा के भीतर ही खाना खाया और वहीं बात करने लगे। मगर वो लड़के आज फिर इमीना को खोजते सीधे कक्षा में पहुँच गऐ  । उनकी हिम्मत आज कुछ और बढ़ी हुई थी, एक ने कुर्सी पर बैठते हुऐ  अपने जूते मेज़ से टिका दिऐ। पिछले दिन वाला लड़का फिर से फ्रैंच में बोला

- मोरक्को मादाम? ये तो बता दो नाम क्या है? 

इमीना ने दोनों हाथों का घेरा बनाया और उस पर माथा टेक, झुककर बैठ गई। सभी सहपाठी मूकदर्शक बने रहे। वह बोलता रहा

- तुम से ही बात कर रहा हूँ ख़ूबसूरत मादाम 

 अचानक पीछे से कोई आवेश भरी आवाज़ में टूटी-फूटी फ्रेंच में बोला

- जब वह तुम लोगों से बात नहीं करना चाहती तो क्यों तंग कर रहे हो उसे? अब तुम लोग कक्षा से बाहर जाते हो या हम सीधा प्रिंसिपल के पास जाऐं… 

असर हुआ, सारे लड़के चुपचाप बाहर चले गऐ। इमीना ने उस आवाज़ वाले हिन्दुस्तानी दोस्त की तरफ भरी आँखों से देखकर कुछ कहा। वह भी अपने पर हैरान था कि कैसे इमीना की भाषा समझ गया। 

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