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दफ्तर में खून, भाग- 5
दफ्तर में खून, भाग- 5
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© Mahesh Dube

Thriller

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गतांक से आगे-

भीतर रामनाथ पांडे अपनी कुर्सी से नीचे लुढ़का हुआ था। उसकी खोपड़ी से रक्त बहता हुआ जमीन को भिगो रहा था। उसकी सफ़ेद शर्ट आधी लाल हो चुकी थी। प्रभाकर ने झपट कर उसकी नब्ज थामी तो वह धीमे धीमे चल रही थी। प्रभाकर ने जल्दी से एम्बुलेंस को फोन किया। तुरंत पांडे को अस्पताल के इंसेंटिव केयर में रखा गया। शीशे की भारी टूटी हुई ऐश ट्रे की पहचान आला ए कत्ल के रूप में हुई। चूँकि वह कई लोगों के उपयोग में आती थी तो उसपर से किसी स्पष्ट फिंगर प्रिंट की छाप नहीं मिली। एकबार फिर समूचे ऑफिस से पूछताछ की गई। हमलावर स्टॉफ का ही कोई आदमी था। अब यह क्लीयर नहीं था कि अग्निहोत्री की हत्या और पांडे पर हमला एक ही आदमी का काम था या नहीं। परिसर में पुलिस की मौजूदगी और हत्या की जांच चल रही थी, ऐसे में एक और हत्या की कोशिश काफी हैरतअंगेज थी। रामनाथ होश में आकर बयान दे देता तो काफी परतें खुल सकती थीं। प्रभाकर ने हॉस्पिटल फोन करके अपने जूनियर, प्रतीक से वहाँ का हाल पूछा। 

अभी पोजिशन सेम है, सर एंड क्रिटिकल टू, प्रतीक बोला। डॉ ने कहा है कि अभी 48 घंटे कुछ नहीं बोला जा सकता। अगर उतना टाइम बच गए तो होप हो सकता है।

ओके। अलर्ट रहो और जैसे ही वे होश में आते हैं उनसे हमलावर का नाम पूछने की कोशिश करो। 

ओके! सर! प्रतीक के शब्द उसके मुंह में ही रह गए थे क्योंकि प्रभाकर ने फोन काट दिया था क्योंकि दो हवलदार शामराव को दोनों तरफ से पकड़े हुए लाते दिखाई दिए। उसकी हालत एकदम उजड़े चमन सी लग रही थी। प्रभाकर ने सख्ती से शामराव से पूछताछ शुरू की। 

शामराव! तुमने अग्निहोत्री साहब को मारा है न? अपना अपराध कबूल कर लो।

नाही, साहेब ! शामराव गिड़गिड़ाया, मैंने नहीं मारा! मैं तो घर चला गया था, अभी वापस आया हूँ। 

बनो मत! प्रभाकर गरजा, चाक़ू पर तुम्हारी उँगलियों की छाप है ।

साहेब! वो चाक़ू कल शाम से गायब था। मैं उसी से किचेन में काम करता हूँ। किसी ने चुरा कर रख लिया होगा। 

किसने ? 

मेरे कू नई मालूम साहेब ! पर मैंने अग्निहोत्री साहेब को नई मारा। 

सारे सबूत तुम्हारे खिलाफ हैं शामराव। तुम्हें गिरफ्तार करना ही होगा। इतना सुनकर शामराव फूट-फूटकर रोने लगा। प्रभाकर ने उसे हथकड़ी लगाकर थाने भेज दिया। 

अगले दिन प्रभाकर फिर दैनिक सबेरा के ऑफिस पहुंचा। मौत की परछाई मानो वहाँ मनहूसियत बनकर छाई हुई थी। सभी मन मारकर अपना काम कर रहे थे। अस्थाई तौर पर रविकिशन बिष्ट नामक वरिष्ठ संवाददाता ने कमान संभाल रखी थी क्योंकि दोनों सीनियर अब काम करने लायक नहीं बचे थे। एक आई सी यू में थे और दूसरे स्वर्ग में! प्रभाकर ने बिष्ट से मुलाक़ात की और चला गया। थोड़ी देर में जुंदाल बिष्ट के ऑफिस में आया और इधर उधर की बातें करने लगा। फिर उसने पांडे के स्वास्थ्य के बारे में पूछा तो बिष्ट ने बताया कि पांडे के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है और जल्दी ही वह बयान देने के काबिल हो जाएगा।  

जुंदाल ने सहमति में सिर हिलाया और बाहर निकल आया। पांडे जी उसके सीनियर थे और उन्होंने उसे काफी मदद की थी। उसका मन था कि हॉस्पिटल जाकर उनसे मिल आये ।

 

क्या रामनाथ स्वस्थ होकर बयान दे सका?जुंदाल ने अस्पताल जाकर क्या किया?

पढ़िए, भाग-6 में 

 

रहस्यपूर्ण मर्डर मिस्ट्री

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