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दर्द
दर्द
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© भारती कुमारी

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आज मेघना किसी और ही दुनिया में है। रात भर सो भी नहीं पाई थी, आखिर बात ही इतनी खुशी की थी। रात में निखिल ने बताया कि जिस निर्देशक को उसने कहानी मेल की थी उसे बहुत पसंद आई है, कुछ परिवर्तन करने हैं तो मिलने के लिए बुलाया है। सुबह जल्दी सब कुछ निबटा निखिल के साथ निकल पड़ी।

"बहुत खुश हो ना ! जो भी चेंजे चाहेंगे निर्देशक, करने देना। बस स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर तुम्हारा नाम आना चाहिए।" निखिल गाड़ी में समझा रहा था।

"हाँ, ये भी कोई कहने की बात है। मैं कितनी उत्साहित हूं बता नहीं सकती।" मेघना की आवाज से खुशी छलक रही थी।

निर्देशक के ऑफिस तक छोड़ ऑल द बेस्ट कह निखिल चला गया। धड़कते हृदय के साथ मेघना ऑफिस में दाखिल हुई।

"वेलकम, मिसेज मेघना। आपकी कहानी हमें बहुत पसंद आई। शानदार प्रेम कहानी, एक कम - पढ़ें लिखे पति और कॉर्पोरेट जगत की पत्नी। बस एक ट्विस्ट लाना है। शुरुआत थोड़ी अलग होगी। लड़का जो कि थोड़ी आपराधिक प्रवृत्ति का है, लड़की का पीछा करता है। लड़की पहले डरेगी, इनकार करेगी, फिर मान जाएगी।" निर्देशक ने अपनी राय रखी।

"लेकिन सर, अगर बदलनी ही है तो पीछा करना क्यूं? कुछ और भी रख सकते हैं- अमीर - गरीब, कॉलेज का प्रेम या रिश्तेदार।"

"आपको फिल्म मेकिंग का अनुभव नहीं है। हम वो दिखाएंगे जो बिकेगा।"

"तो, इसके लिए स्टाकिंग दिखाना जरूरी है। ये जरूरी तो नहीं कि लड़की को अपने स्टाकर से प्यार हो ही..!!"

"तो अब आप हमें फिल्म - मेकिंग सिखाएंगी !" निर्देशक का रोषपूर्ण स्वर।

"अच्छा ! तो अब तुम सिखाओगी कि समाज में इज़्ज़त किस बात से घटती-बढ़ती है..?" मेघना के कानों में अपने पापा का स्वर गूंज रहा था।

"पर पापा ! मैं उसे ठीक से जानती नहीं। पता नहीं क्यूं पीछे पड़ा है ? और इस बात से समाज की इज़्ज़त का क्या लेना-देना ?" बस इतना ही तो कहा था पापा से।

"भाभी जी, प्यार हो ही जाता है। जब लड़की को पता चलता है कि कोई उसको इतना प्यार करता है।" निर्देशक का सहायक जो शायद निखिल का दोस्त भी था; मुस्कुराते हुए बोला।

"जानेमन, अभी डर रही हो । पर प्यार तो मुझसे ही होगा। फिल्मों में तो देखा होगा....म्म्म...मेघना।" उफ्फ ये आवाज।

"आखिर फिल्मों में लड़की को अपने स्टाकर से प्यार क्यूं करवाना, हर केस में ये अव्यावहारिक है। इसका समाज पर क्या असर पड़ता है कभी सोचा !

"बस कीजिए, छोटा सा चेंज है। आपको इतनी दिक्कत नहीं होनी चाहिए।"

"लेकिन सर !

"लेकिन - वेकिन कुछ नहीं....चेंज कीजिए या फिर हमें दोबारा सोचना होगा आपकी कहानी के बारे में। हमारे पास और भी स्क्रिप्ट पड़ी है।" निर्देशक का फैसला नुमा स्वर।

"कुछ नहीं, आज से कॉलेज - कोचिंग सब बंद। अगले दो महीने में शादी।" फिर से पापा का स्वर।

"नहीं पापा नहीं, मुझे पढ़ना है। इसमें मेरी क्या गलती ?" फिर उसके पास भी गिड़गिड़ायी "मैं नहीं करुंगी तुमसे कभी भी प्यार, छोड़ दो मेरा पीछा।" मेघना अब अपने स्वर सुन रही थी जिसका किसी पर कोई असर नहीं पड़ा था।

"मिसेज मेघना, आपकी कहानी हमें बहुत पसंद आई है। बस ये परिवर्तन मान लीजिए, घर जाकर आराम से सोचिए। हीरोइन को स्टार से प्यार न हो तो बड़ी स्टार - कास्ट और उमदा अभिनय के बाद भी फिल्म फ्लॉप हो जाती है। ये तो आपको भी पता है। स्क्रिप्ट यहीं रहने दीजिए, मैं फिर से सोचूंगा।" निर्देशक के स्वर से वो वर्तमान में लौट आई। वो फिर से खुद को जालों में घिरा हुआ महसूस कर रही थी।

"सर, मैं भी फिर से सोचूंगी।" कहकर मेघना स्क्रिप्ट निर्देशक के हाथ से लेकर बाहर निकल गई, अब जाले साफ हो रहे थे।

दर्द कहानी स्टाकर समाज मानसिकता

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