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पापा, मेरी भी दवाई दे दो
पापा, मेरी भी दवाई दे दो
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© Yogesh Suhagwati Goyal

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पेशे से मैं एक मरीन इंजिनियर हूँ | उन दिनों मैं भारतीय नौवहन निगम मुंबई के साथ कार्यरत था | कलकत्ता में २ मार्च १९८५ को मैंने अपना जहाज “विश्व आशा” बतौर सेकंड इंजिनियर ऑफिसर ज्वाइन किया | इस बार मेरे साथ मेरी पत्नी मंजू और बेटी पूजा ने भी ज्वाइन किया | उस वक़्त पूजा बहुत छोटी थी, सिर्फ १ साल १ महीने की | उसका स्वास्थ्य काफी खराब रहता था | हर २-३ हफ्ते में बीमार हो जाती थी | ज्यादातर पेट की परेशानी से ग्रसित रहती थी | खाना ठीक से नहीं पचता था | दस्त हो जाते थे | कमजोर भी बहुत थी |


करीब २० दिन बाद हमारा जहाज कोचीन पहुंचा | यहाँ पहुंचकर पता लगा कि तम्बाकू लोड होने के बाद जहाज ३-४ महीने की लम्बी यात्रा पर रसिया जा रहा है | मुझे इस बात का अंदाज़ा था कि रसिया में स्वास्थ्य सेवाएँ ज्यादा अच्छी नहीं है | यही सब सोचकर हम दोनों ने पूजा के बारे में किसी बच्चों के डाक्टर से परामर्श करना ठीक समझा | किस्मत से वहां के अस्पताल में हमारी मुलाकात एक सीनीयर महिला डाक्टर से हो गयी | वो बच्चों के रोगों की विशेषज्ञ थी | हमने उनको पूजा के बारे में सब कुछ विस्तार से बताया और साथ ही रसिया की ३-४ महीने लम्बी यात्रा की बात भी बताई |


उन्होंने पूजा के कुछ परीक्षण भी किये | इस सबके बाद डाक्टर साहिबा ने हमको बताया कि पूजा की प्रतिरक्षण प्रणाली (Immunization System) कमजोर है | और इसका एक मात्र उपाय इस प्रणाली का विकास है, जो धीरे धीरे करना होगा | यही एक वजह है कि पूजा को बीमारियाँ बार बार पकड़ लेती हैं | उन्होंने यह भी बताया कि हमारी किस्मत अच्छी है, जहाज रसिया जा रहा है | वहां का ठंडा मौसम पूजा की प्रतिरक्षण प्रणाली के विकास और स्वास्थ्य सुधार में बहुत मददगार सिद्ध होगा | डाक्टर साहिबा ने अस्थाई उपचार के लिए थोड़ी सी दवाइयाँ दे दी, लेकिन स्थायी उपचार के लिये एक ख़ास नुस्खा बताया | उन्होंने सुझाव दिया कि हमें अच्छी से अच्छी एक ब्रांडी की बोतल खरीद लेनी चाहिये | और प्रतिदिन शाम को एक चम्मच ब्रांडी पानी में मिलाकर पूजा को पिलानी चाहिये | इससे उसको अच्छी नींद आयेगी | अच्छी नींद आने से अच्छी भूख लगेगी | और ठीक से खायेगी पीयेगी तो प्रतिरक्षण प्रणाली और स्वास्थ्य दोनों सुधर जायेंगे |


कुछ दिनों के बाद जहाज रसिया के लिये चल पड़ा | हमने अपने जहाज के चीफ स्टेवार्ड को पूजा की जरूरत के बारे में बताया और एक अच्छी ब्रांडी बोतल खरीदने के लिये कह दिया | इस्तानबुल में स्टोर के साथ हेनेसी की ब्रांडी बोतल आ गई | उस वक़्त तक मौसम भी ठंडा हो चला था | जैसा डाक्टर साहिबा ने कहा था, हमने ठीक वैसा ही किया | शुरू में पूजा को ब्रांडी हम दवाई कहकर पिलाते थे | जहाज पर एक छोटा सा गिलास था जो पूजा को बहुत प्रिय था | हर शाम, हम उसी गिलास में उसकी दवाई बनाकर दे देते थे | शुरू में तो उसको स्वाद पसंद नहीं आया, थोडा परेशान करती थी | लेकिन धीरे २, उसको अपनी दवाई की आदत लग गई | कभी कभी जब मैं अपनी बीयर या और कोई दूसरा ड्रिंक लेकर बैठता तो पूजा अपना छोटा सा गिलास लेकर आती और कहती “पापा मेरी भी दवाई दे दो” |


डाक्टर साहिबा का नुस्खा यानि पूजा की दवाई ने सच में चमत्कार किया | इस सबमें करीब ३ महीने तो लगे, लेकिन पूजा की प्रतिरक्षण प्रणाली और उसका स्वास्थ्य बहुत सुधर गया | हाँ ये अलग बात है कि उस दवाई से पीछा छुड़ाना हमारे लिये एक नयी मुसीबत बन गया |

बेटी बीमारी कमजोर डॉक्टर ब्रांडी दवाई ग्लास

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