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मवाना टॉकीज भाग 6
मवाना टॉकीज भाग 6
★★★★★

© Mahesh Dube

Thriller

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जब सोमू डॉ चटर्जी के साथ मवाना टॉकीज पहुंचा, तब अँधेरा घिर आया था। उजाड़ पड़ी अधजली इमारत बेहद भयानक लग रही थी। डॉ चटर्जी ने बाहर से ही समझाना शुरू किया, देखो! यहाँ का वातावरण ही कितना रहस्यमयी और भयानक है। इसका प्रभाव चित पर पड़ता है और मन तरह तरह की कल्पनाएं करने लगता है। फिर वही कल्पनाएं मूर्त रूप में भी दिखाई पड़ने लगती हैं। 
सोमू ने सहमति में सिर हिलाया। अचानक दो आगंतुकों को आया देखकर आदतानुसार कुत्तों ने भौंकना शुरू कर दिया जो अपने आराम में खलल पड़ता देख क्रोधित हो गए थे। सोमू ने एक पत्थर उठाया और उन्हें धमकाने लगा। फिर कुत्तों ने उसे पहचान भी लिया और चुप हो गए। 
सोमू डॉ चटर्जी सहित मवाना टॉकीज के भीतर दाखिल हो गया। भीतर नीरवता का साम्राज्य था। पूरी जगह धूल से अटी हुई थी। भीतर जहाँ कल सोमू बैठा था वहाँ जाकर डॉ चटर्जी निरीक्षण करने लगे। उन्होंने अपने हाथ में एक शक्तिशाली टॉर्च पकड़ी थी जो वे अपनी कार से ले आये थे। उन्होंने देखा कि उस कुर्सी की धूल पुछीं हुई थी जिस पर बैठने का दावा सोमू ने किया था। 
इसका मतलब सोमू कल यहाँ आकर बैठा तो था 'डॉ ने सोचा। सोमू! वे बोले, कल तुमने उस भयानक औरत को कहाँ देखा था? 
सोमू ने बिना कुछ कहे तीन कुर्सी बाद इशारा कर दिया 
डॉ चटर्जी ने जाकर देखा और बोले, देखो! इस कुर्सी पर धूल जमी हुई है। 
वे सिर हिलाते हुए बोले, अगर तुम्हारे कहे अनुसार कोई इसपर बैठा होता तो इसपर से भी धूल पुछ गई होती न? 
सोमू क्या कहता? उसे सहमति में सिर हिलाना ही पड़ा। 
डॉ चटर्जी ने टॉर्च की रौशनी फेंक कर हॉल के कोने कोने का निरीक्षण किया। एक नीरवता और अशुभ वातावरण के अलावा और कुछ दृष्टिगोचर नहीं हुआ। 
चलो अब फिल्म देखने वाली बात की भी पड़ताल कर लें, डॉ साहब बोले, और सोमू के साथ प्रोजेक्शन रूम में जा पहुंचे। प्रोजेक्शन रूम में घुसते ही सोमू आश्चर्य से भर गया क्यों कि वह पूरी तरह खाली था। वहाँ कोई प्रोजेक्टर था ही नहीं! संकरा होने के कारण दो लोगों के आ जाने से प्रोजेक्शन रूम का वातावरण थोड़ा घुटन भरा हो गया था जिसे चटर्जी ने अपने ठहाके से कम करने का प्रयास करते हुए कहा, देखा बरखुरदार? यहाँ कुछ भी नहीं है! न प्रोजेक्टर और न ही फिल्म!! 
लेकिन डॉ साहब, सोमू बोला, मैंने यहाँ दोनों चीजें देखी थी, मैं कसम खाकर कहता हूँ 
देखो सोमू! डॉ गंभीर स्वर में बोले, तुमने अपनी समझ में सब देखा होगा लेकिन असल में वह सब तुम्हारे दिमाग का कमाल था। असल में ऐसा कुछ नहीं हुआ होगा। चलो नीचे चलकर बात करें। 
नीचे आकर डॉ ने एक कुर्सी झाड़ी और उसपर बैठकर सोमू को समझाने लगे। सोमू भी उनके बगल की कुर्सी पर बैठकर सुन रहा था। अचानक ऊपर प्रोजेक्शन रूम में फिर खड़खड़ की आवाज आने लगी और कल की ही तरह एक प्रकाश रेखा आकर स्क्रीन पर नाचने लगी। दोनों बुरी तरह चौंक उठे। 
यह क्या गड़बड़ घोटाला था?
क्या प्रेत लीला ही थी?
पढ़िए कल भाग 7

भुतही कहानी

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