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पहला प्यार
पहला प्यार
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© Gulabchand Patel

Drama

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कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में “पहला प्यार” कभी भूल नहीं पाता, प्यार पवित्र होता है। प्यार के लिए कोई उम्र या जात पात नहीं होती, प्यार से बढ़कर कोई अनुभव नहीं है। प्रभु ने प्रेम का सृजन मनुष्य के जीवन के जन्म के साथ ही किया है, उसने मनुष्य को संवेदना मिली है और उसे परखने की शक्ति स्पर्श के द्वारा और ह्रदय की गहराई के द्वारा दी गई है। ह्रदय में प्यार की धारा बहाने की क्षमता भी दी है। प्रेम शांति और मधुरता देता है प्यार ढूढ़ने की चीज नहीं है, प्यार अपने आप ही प्रकट होता है। सुंदर फूलों को देख कर भी ह्रदय में प्यार की उर्मियाँ खिलती है। कृष्ण और राधा का प्यार भी अटूट था, मनुष्य के दिल को जीतने के लिए प्रेम ज़रुरी है। प्रेम से प्रभु की प्राप्ति होती है, प्यार जिन्दगी जीने का तरीका सिखाता है। जिन्दगी जीने में प्यार बहुत मदद करता है लोग कहते हैं कि, “Love is blind” प्यार अँधा होता है, हमें ये सब देखने को मिलता है, युवा लड़का लड़की कभी कभी प्यार में पागल हो जाते है, उसे अच्छे बुरे का ख्याल नहीं रहता। प्रथम दृष्टि से अपनी आँखों में जो बस जाता है वो पात्र को व्यक्ति अंधे की तरह अनहद प्यार करता है। कभी कभी एकाद पात्र की दगाबाजी से सामने वाली व्यक्ति पर आसमान टूट पड़ता है, मतलब, अपना जीवन आग की ज्वालाओं में लिपट जाता है और अपना बहुमूल्य जीवन अंत कर देते हैं। इतिहास में लैला मजनू और सोहिनी महिवाल का प्यार अमर है प्यार की कोई सीमा नहीं होती, मीरा ने कृष्ण से प्यार किया था, उनका प्यार पवित्र था। पहले प्यार की परिभाषा को समझने के लिए ये बातें लिखी गयी है ।अब हम पहले प्यार के लिए कुछ उदहारण के तौर पर अपनी बात कहने का प्रयास कर रहे है जो आपको पसंद आयेगा।

अल्पेश की शादी दूर के एक गाँव में हुई थी, दोनों का सामजिक जीवन एकाद साल ठीक से चला। उनके परिवार में एक साल बाद एक बेटी का आगमन हुआ, परिवार में ख़ुशी थी। बेटी के ढाई साल की होने पर बाल मंदिर में दाखिला दिलवाया। अल्पेश एक खानगी कंपनी में नौकरी करता था, अपने माँ-बाप के साथ रहता था परिवार का गुजारा करने के लिए वो नौकरी ले आलावा अत्तर बेचता था. बेटी बड़ी हो गई, उसे शहर की एक अच्छी स्कूल में दाखिला दिलवाया और उसकी पढाई अच्छी चलती थी।

अल्पेश को एक बुरी आदत थी, वो रोज़ाना शराब पीकर घर आने लगा, उसकी पत्नी अनीता को ये पसंद नहीं था। लड़की धीरे धीरे बड़ी होती जा रही थी, वो पांचवी कक्षा में आई, अल्पेश के मात-पिताजी को भी बहुत चिंता होती थी। अल्पेश की शराब पीकर आने की आदत से वो भी तंग आ चुके थे, अल्पेश की पत्नी अनीता बहुत दु:खी थी , वो सहनशील थी लेकिन, उसकी भी मर्यादा होती है। धीरे धीरे अनीता का मन अपने पहले प्यार आकाश की ओर जाने लगा, कभी कभी वो आकाश के साथ फोन पर बात भी करने लगी, उसका मन अब अल्पेश में नहीं था। उसे अपना “पहला प्यार” अपनी ओर खींचने लगा, वैसे तो अनीता की शादी हुई तब भी अनीता को आकाश याद सताती थी। वो आकाश से शादी करना चाहती थी लेकिन, वो अपने मत-पिता जी की बात टाल नहीं सकी, अल्पेश नौकरी पर जाता था तब कभी कभी वो आकाश से मिलने भी जाने लगी आकाश दूर के एक गाँव में रहता था लेकिन, उसे भी अपना “पहला प्यार” अनीता की याद सताती थी। वो अब शहर में आ गया, आकाश ने शादी नहीं की थी। अनीता का उसके जीवन में वापिस आना उसे बहुत अच्छा लगा, उसे बहुत ख़ुशी थी क्यूँ कि, अनीता अब उसे सामने से फोन करके मिलने को बुलाती थी, दोनों कभी कभी बहाना बनाकर फिल्म देखने भी चले जाते थे।

अब अनीता को आकाश के बिना कुछ अच्छा नहीं लगता था, वो अपने बेटी तन्वी से बहुत प्यार करती थी अनीता अब अल्पेश से नफरत करने लगी।अल्पेश शराब पीकर घर आता था और कभी कभी अनीता की पिटाई भी करता था, वो ठीक से खाना भी नहीं खाता था। अल्पेश की ये आदत से अनीता बहुत तंग आ चुकी थी, उसने आकाश को ये सभी बातें बताई थी । अनीता और आकाश ने एक निश्चय कर लिया था कि, अब हम दोनों साथ साथ ही रहेंगे. आकाश अनीता को वहां से अपने घर ले जाना चाहता था, अनीता सोचती थी कि, मेरी तन्वी का क्या होगा, अगर में आकाश के साथ घर छोड़ कर चली जाऊँ तो मेरी तन्वी की देखभाल कौन करेगा? अनीता ने आकाश को बताया कि, मैं एक शर्त पर आपके साथ चलने को तैयार हूँ। अगर आप तन्वी को मेरे साथ आपके घर ले आने की अनुमति दे, तो में आपके साथ रहने को तैयार हूँ। आकाश ने कहा कि, मैं तन्वी को पढ़ाउंगा, तुम उसे अपने साथ ले आना।

एक दिन मौका देखकर अनीता घर से निकलकर स्कूल में जा पहुंची और तन्वी को अपने साथ लेकर आकाश के पास पहुँच गई, आकाश बताई गई जगह पर अपनी कार लेकर खड़ा था। तन्वी और अनीता को लेकर आकाश अपने घर गया, अब तन्वी का पढ़ाई का प्रश्न था, अनीता और आकाश ने शहर में ही रहने का मन बना लिया। एक किराये के मकान में रहने लगे, आकाश को नौकरी नहीं थी इसलिए वो कुछ मजदूरी करके पैसे कमाकर लाता था लेकिन, इतने पैसों में घर चलाना और तन्वी की पढ़ाई का खर्चा निकलना मुश्किल था

आकाश को अपना एक मित्र मिल गया। उसने आकाश को बताया कि, तुम आसानी से पैसे कमाना चाहते हो तो एक काम है, आपको थोड़ा रिस्क उठाना होगा, आकाश ने बोला कि, मैं तन्वी की पढ़ाई के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ। उसके मित्र जगदीश ने बताया कि, तुम्हें मेरे साथ चलना होगा, जगदीश उसे एक शराब के अड्डे पर ले आया। उसने शराब के ठेकेदार से आकाश की पहचान करवाई, जगदीश ने बताया कि, तुम्हें शराब की बोतल की डिलीवरी करनी होगी। आकाश थोड़ी देर सोच में पड़ गया लेकिन, उसे तन्वी की पढ़ाई याद आई, उसने मजबूरन ये काम स्वीकार किया और शराब की बोतलें की डिलीवरी करने लगा। उसे बहुत सारे पैसे मिलने लगे, तन्वी की पढ़ाई का ख़र्चा निकलने लगा। अनीता को भी घर खर्च के लिए जरुरत के मुताबिक पैसे मिलने लगे, अनीता और तन्वी दोनों बहुत खुश थे लेकिन, अब नसीब की कठिनाई तो देखो, आकाश को एक दिन पुलिस पकड़ के ले गई। आकाश अब शराब भी पीने लगा था, पुलिस जब पकड़ कर ले गई तब ठेकेदार ने उसे जमानत पर रिहा करवाया, अब फिर से आकाश अपना वही काम शराब की डिलीवरी करने लगा। एक दिन आकाश शराब पीकर घर आया, अनीता के होश उड़ गए। जिस कारण अपने पति को छोड़ा था वो ही मुसीबत सामने आकर खड़ी हो गई, वो पछताने लगी। अपने पहले प्यार को पाने के लिए अपने पति को छोड़ा था, अब वही आकाश अल्पेश की तरह शराब पीकर घर में आते ही धमाल मचाता था और अनीता की पिटाई भी करता था, लेकिन, अनीता ने हिम्मत नहीं खोयी थी। उसने आकाश की शराब की लत छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र का सहारा लिया, उसने आकाश को नशा मुक्ति केंद्र में भरती करवाया आकाश की शराब पीने की आदत छूट गई। अनीता के जीवन में फिर से ख़ुशियाँ लौट आई, अब अनीता भी पढ़ी लिखी होने के कारण घर में ट्यूशन क्लास चलाने लगी। आकाश एक कपड़े की दुकान में नौकरी करने लगा, अब दोनों की कमाई से घर में पैसे की तकलीफ़ नहीं थी। तन्वी की पढ़ाई भी अच्छी तरह होने लगी और तीनों बहुत ख़ुशी से अपना जीवन व्यतीत करने लगे ।

शराब नफ़रत प्यार

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