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हजार का नोट भाग 7
हजार का नोट भाग 7
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© Mahesh Dube

Thriller

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हजार का नोट 

भाग 7

    पप्पू बेवड़े को देखते ही रहमान ने खड़े होकर उसकी अगवानी की और शामराव से हाथ मिलाया। नोट न मिलने की सूरत में आसन्न मौत की धमक ने उसकी अकड़ थोड़ी ढीली कर दी थी। पप्पू ने रहमान के कान में खुसुर फुसुर की तो उसकी आँखें सुर्ख हो गईं लेकिन वह एक कान से दूसरे कान तक मुस्कुराता हुआ बोला, अरे शाम भाऊ! इत्ती सी बात? तुरंत अपने कुर्ते की जेब में हाथ डालकर रहमान ने नोटों का एक पुलिंदा निकाला और उसमें से गिनकर पंद्रह नोट शामराव की ओर बढ़ा दिए और बोला, सुबह जरा टेंशन में था न तो बराबर खातिर नहीं कर पाया माफ़ी देना भाऊ! 

शामराव को लगा मानो उसकी लॉटरी लग गई हो। 

जरा सोच कर बताओ शामराव! रहमान भरसक मीठे स्वर में बोला, मोहन उस होटल में किससे मिला था? क्या तुम उसे पहचानते हो? 

शामराव पंद्रह हजार रूपये की कमाई से ख़ासा प्रसन्न हो गया था। वह बोला, नहीं रहमान भाऊ! मैं उसको नहीं पहचानता

उसका हुलिया बता शामराव! 

वो काले रंग का छोटे कद का क्रिश्चियन आदमी था। 

क्रिश्चियन?

हाँ! उसने गले में बड़ा सा क्रॉस का लॉकेट पहना था और बार बार बॉडी पर भी क्रॉस का निशान भी बनाता था। 

और कुछ बता शामराव! कोई विशेष बात या कोई उसकी आदत?

मैंने बहुत ध्यान से तो उसको नहीं देखा भाई लेकिन वो आँख बहुत जल्दी जल्दी बंद करता था।

मतलब पलकें जल्दी जल्दी झपकाता था? रहमान के मुंह से निकला

गैब्रियल! गैब्रियल डिसूजा!! रहमान के एक मुस्टंडे के मुंह से निकला 

क्या? रहमान उसकी ओर घूमकर बोला, कौन गैब्रियल?

भाई जान! वो लड़का बोला, ये जो हुलिया बता रहा है वो सौ टक्का गैब्रियल डिसूजा का है पहले उस्मान कानिया के साथ रहता था। अपनी दुनियाँ का ही आदमी है। कैरियर का काम कर चुका है। 

उस्मान कानिया अभी भी तस्करी के धंधे में था और लंबू से उसका छत्तीस का आंकड़ा था। 

गैब्रियल किधर रहता है? रहमान ने पूछा 

पहले मालवणी पांच नंबर में रहता था भाई अब्बी का मालूम नई। 

उधर जाके पता करो! कैसे भी उसको लाकर हाजिर करो और ये काम गोली के माफिक होना मांगता है भीडू लोग! समझे क्या? 

रहमान के कई प्यादे फ़ौरन कुछ गाड़ियों में बैठकर मालवणी के लिए रवाना हो गए। रहमान ने पप्पू बेवड़ा और शामराव से हाथ मिलाकर उनका शुक्रिया अदा किया और जाने को कह दिया। 

उनके जाते ही रहमान ने अर्थपूर्ण ढंग से अपने एक विश्वस्त सिपाहसालार की ओर देखा तो उसने सहमति में सिर हिलाया और अपने एक साथी के साथ खामोशी से शामराव के पीछे चल दिया।

अपनी शर्तों पर बात करने वाले लोग रहमान को कतई पसन्द नहीं थे और रहमान की इच्छा के विरूद्ध उससे पैसे ऐंठने की करतूत शामराव को बहुत भारी पड़ने वाली थी अब आज उसकी खैर नहीं थी।

शामराव के साथ क्या हुआ?

पढ़िए भाग 8 

खून खराबा

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