Yash Yadav

Drama Romance


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शादी की वर्षगांठ

शादी की वर्षगांठ

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शादी के सात साल बीत चुके थे। पर एक दूसरे की कमियों को खोजने में लगा इस सुंदर जोड़े के अंदर कभी भी एक-दूसरे के लिए दिल में प्यार का अंकुर न फूटा था। इन लड़ाई-झगड़ों के बीच भी दाम्पत्य जीवन घुट-घुट कर ही सही पर सांसें ले रही थी।

एक बार की बात है उनकी शादी की वर्षगांठ नजदीक आ रही थी। लड़के को जहां तक याद था कि उसकी शादी छः मई को हुई थी और जबकि लड़की को लगता था छः जून को। आखिरकार छः मई तो गुजर गया पर लड़के ने कुछ नहीं किया। पर लड़की अपने मन में संजो कर रखी थी कि वह अपनी शादी की वर्षगांठ को छः जून को केक काटकर कर मनाएगी और वह लड़के को सरप्राइज गिफ्ट देगी।

पर छः जून जब आया तो लड़का काम पर चला गया। लड़की के सज-संवरकर बाहर घूमने जाने वाले प्लान पर पानी फिर गया। लड़की मन मारकर रह गई।

लड़का रात में घर पर आया और थोड़ा आराम करके बोला, " मुझे भूख लगी है फटाफट खाना निकाल दो, "

इस पर लड़की बोली,

"पहले थोड़ी देर के लिए अपना मोबाइल दो, "

लड़के ने मोबाइल दे दिया। लड़की ने खुशी से चहकते हुए अपनी उस बहन को फोन किया जिस दिन उन दोनों की शादी एक ही दिन और एक मंडप में हुई थी।

जब वह फोन पर बोली,

''अरे तू किधर है?''

तो वह बोली,

''घर पर। क्यूं?"

इस पर वह लड़की हैरानी भरे स्वर में बोली,

"अरे, तू बाहर घूमने नहीं गई। तूझे याद नहीं है आज क्या है?''

लड़की खुशी से पागल हो कर पूछ रही थी, जबकि उसकी बहन को हैरानी हो रही थी कि आखिर आज ऐसा क्या हुआ था।

उसकी हैरानी का आनंद लेते हुए लड़की खुदी बोली, '' अरे तू कैसे भूल सकती है, आज हमारी शादी की वर्षगांठ है, ''

इस पर उस लड़की की बहन बड़ी शान्त भाव से बोली,

''दीदी, पगला गई है क्या। हमारी शादी छः जून को नहीं छः मई को हुई थी। "

यह सुनते ही लड़की की सारी खुशी गायब हो गई। वह अपने भरे हुए गले से कुछ कहती उससे पहले उसकी बहन बोली,

''अच्छा फोन रख, खाना बनाना है मुझे,"

लड़का जो सब कुछ बड़े ध्यान से सुन रहा था, वह अपनी पत्नी यानी लड़की की मनोदशा को समझ गया। दूसरी तरफ से कब का फोन काटा जा चुका था। पर लड़की की आंखों में अब भी गरम-गरम आंसू भरे थे। उसे दुःख हो रहा था कि उसे अपनी शादी की वर्षगांठ का दिन भी ठीक से पता नहीं है।

लड़के ने उस चुप कराया और बोला चलो अब खाना खाते हैं। लड़की उठी और छुपाकर रखी एक रंगीन बैग निकाली। लड़का बड़े ध्यान से सब कुछ देख रहा था। उस बैग में से वह एक केक का पैकेट निकाली और केक को काट कर लड़के को देने लगी।

उस लड़के के जिंदगी में ऐसा पहली बार हुआ था कि कोई उसको खुश करने के लिए कभी इतना सब कुछ किया हो।

लड़की की आंखों से तो आंसू बह ही रहे थे। लड़के की आंखों में भी स्नेह मिश्रीत आंसू छलछला आये। दोनों एक-दूसरे के गले मिल गये। जो प्यार का अंकुर सालों से नहीं फूटा था आज वह पल भर में अपनी जड़ें जमा चुका था। हमेशा - हमेशा के लिए।


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