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बदचलन लड़की
बदचलन लड़की
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© Pawan Kumar

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जिम में वर्कआउट करता आबिद चोर निगाहों से उसी जिम में मौजूद अपनी सोसाइटी में रहने वाली सनाया सिद्दकी को देखे जा रहा था। देख क्या रहा था बल्कि अपने स्कैनरनुमा आंखों से सनाया के कपड़े को भेदता उसमें पोशीदा उसकी खूबसूरती का लुत्फ़ लिये जा रहा था। उस समय उसे अपने दोस्त सोहेल की कही यह बात याद आ रही थी-'यार ये सनाया न बड़ी चालू चीज़ है।'

'तू ये कैसे कह सकता है ?'आबिद ने जब यह सवाल दागा तो सोहेल अपनी बात को तर्क का जामा पहनाते हुए कहने लगा।

'उसका पति क्रूज़ पर काम करता है, छह छह महीने बाहर रहता है। इतने दिनों की जिस्मानी भूख बड़े बड़े सती सवित्रियों को चालू बना देती है । और ये सनाया, उसका रंग ढंग देखा है.....इतना उत्तेजक मेकअप, इतना भड़काऊ ड्रेस, ठुड्डी में रिंग, बदन के मुश्तइल हिस्से पर टैटू कौन करवाती है, एक अच्छी चलन वाली औरत क्या ? आई बेट कोई भी गुड लुकिंग मर्द इसपे चांस मारे न तो ये चुटकी बजाते पट जाएगी।'

जहां सनाया की खूबसूरती को देखकर आबिद के दिल में कई नाजायज़ हसरतें कुचालें मार रही थीं वहीं सोहेल की कही यह बात याद कर उसके दिल में उन हसरतों को अमली जामा पहनाने की दीदादिलेरी भी पनपती जा रही थी। खुद के शकील चेहरे और कसरती बदन के जाज़िब तास्सुर पर यकीन करता हुआ और शायद उससे भी ज्यादा सनाया को एक आसान शिकार मान वह सनाया की ओर बढ़ चला।

'आप यहां वर्कआउट करने रोज आती हैं ?'

आबिद ने अपनी शतरंजी बिसात की पहली चाल चलते हुए कहा।

'हाँ' सनाया ने जवाब दिया।

'तभी तो बड़ी जबरदस्त फिगर है आपकी !'

कसीदानुमा यह आबिद की दूसरी चाल थी।एक ऐसी चाल जो आबिद के मुताबिक शर्तिया कारगर होने वाली थी।

'मैं आपसे यही एक्सपेक्ट कर रही थी !'

'जी मैं समझा नहीं ?'

'आप वहां से खड़े खड़े जब मेरे बदन का एक्सरे कर रहे थे न तो मैं जान गई थी कि आप ऐसी हीं कुछ ओछी हरकत करेंगे।' सनाया ने जब थोड़े तल्ख लहज़े में ऐसा कहा तो आबिद घबरा गया। उसने लुकनत-ज़दा ज़ुबान में कहा-'म मैं बस आपको एक जेन्युइन और फ्रेंडली कॉम्प्लिमेंट दे रहा था !'

'डोंट ट्राय टू बी ओवरस्मार्ट विथ मी। और हाँ अपना फ्रेंडली कॉम्प्लिमेंट न अपने दोस्तों के लिए बचा कर रखिये। मुझसे आइंदा से अदब से पेश आइयेगा वरना आप जैसे लोगों से निपटना मुझे अच्छी तरह से आता है।'यह कहकर सनाया वहां से चली गई।आबिद भी बेहुरमती भरा चेहरा लेकर बगले झांकते वहां से चला गया। इत्तिफ़ाक़न इस वाकये के अगले हीं दिन आबिद की फिर से सोहेल से मुलाकात हो गई। सोहेल को देखते हीं ज़नाब का पहला जुमला यह था, 'तू सच कह रहा था यार, ये सनाया बड़ी बदचलन औरत है।'

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