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हजार का नोट भाग 2
हजार का नोट भाग 2
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© Mahesh Dube

Thriller

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हजार का नोट भाग 2

 

दरअसल वह नोट आधा फटा हुआ निकला। जैसे किसी ने झटके से उसे दो टुकड़ों में विभक्त कर दिया हो। चूँकि वह फाड़ा गया था अतः उसका फटा हुआ हिस्सा असमतल और रेशेदार था। आम धारणा के विपरीत नोट कागज़ से नहीं बल्कि कपास से बनते हैं। कपास के छोटे छोटे रेशे उस नोट के फटे हुए भाग से झाँक रहे थे। निराशा से पूनम का चेहरा झुक गया। यह आधा नोट भला किस काम का? लेकिन फिर भी नोट तो था ही, भले अधूरा हो। उसने चुपचाप नोट को मुट्ठी में जकड लिया और वापस लौट कर अपना सब्जी का थैला उठाकर चल पड़ी। घर पहुँचते ही मोहन की बड़बड़ शुरू हो गई लेकिन चूँकि यह रोज की बात थी इसलिए पूनम ने इसपर कान नहीं दिया। मोहन शादी के बाद कई सालों तक बेहद अच्छे स्वभाव का रहा पर दोनों की संतान न हुई और मोहन किसी अजीब बीमारी का शिकार होकर चलने फिरने की ताकत खो बैठा। बीमारी की वजह से उसकी नौकरी भी छूट गई और घर का पूरा बोझ पूनम पर आ गया। इन्ही कारणों से मोहन चिड़चिड़ा हो गया था। पूनम के घर पहुँचते ही उसने बड़बड़ाना शुरू कर दिया। पूनम ने इसपर कोई ध्यान न देते हुए नजदीक जाकर अपनी मुट्ठी खोली और बोली, यह देखो! मुझे क्या मिला। हजार का नोट , लेकिन फटा हुआ! 

मोहन ने हाथ बढ़ा कर नोट उठा लिया और ध्यान से देखने लगा। नोट को ध्यान से देखकर मोहन की आँखें चमकने लगी। पूनम समझ नहीं पाई कि हजार के इस आधे फटे नोट में ऐसा क्या है जिसे देखकर मोहन के चेहरे पर छाई रहने वाली मुर्दनी दूर हो गई।  

पूनम! मोहन बोला, यह नोट नहीं खजाने की चाबी है! 

अरे! पूनम आश्चर्यचकित हो गई, ऐसा क्या है इसमें? फटा हुआ नोट ही तो है। 

मोहन पहले सट्टे के अड्डे पर हिसाब किताब लिखा करता था और उसका कई तरह के लोगों से पाला पड़ता था जो जुर्म की काली दुनियाँ के बाशिंदे थे। उसने पूनम को पास बुलाया और बोला, इस आधे नोट को ध्यान से देखो! तुम्हे क्या नजर आता है? 

आशा बोली, जो आम नोट में होता है वैसा ही है इसमे ख़ास क्या है? 

अरे मूरख! वाटर मार्क की जगह पर कुछ लिखा है न? उसे पढ़ो 

हाँ, पूनम बोली, लिखा है 23 एम आई 3! इसका मतलब क्या है? 

सुनो! यह नोट मामूली नहीं है। इस तरह के नोट स्मगलर्स उपयोग में लाते हैं।  स्मगलर्स का माल लाने वाले और रिसीव करने वाले एक दूसरे को पहचानते नहीं हैं।  दोनों पार्टी के पास नोट का आधा आधा हिस्सा रहता है। नियत समय पर दोनों पार्टी कहीं मिलकर नोट को जोड़कर देखते हैं फिर माल का आदान प्रदान करके रवाना हो जाते हैं। 

ओह! पूनम बोली, इसपर लिखा क्या है? 

यह कोड वर्ड में जगह का नाम होगा जहाँ दोनों पार्टी को मिलना होगा, मोहन बोला , मैं कुछ करता हूँ पूनम! लगता है हमारे दिन बदलने वाले हैं। 

नोट देखने के बाद मोहन के स्वर में जो मिठास आ गई थी, पूनम उसमें ही खुश थी। 

 

क्या नोट में सचमुच भारी रहस्य है? 

कहानी अभी जारी है...

पढ़िए भाग 3

खून खराबा

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