Nandini Upadhyay

Drama


Nandini Upadhyay

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अग्नि परीक्षा

अग्नि परीक्षा

2 mins 59 2 mins 59

   आज फिर मोनिका को घर आने लेट हो गया । ऑफिस में मीटिंग थी उसका होना बहुत जरूरी था । नहीं तो वह ऐसी मीटिंगों को तो अवाइड ही कर देती । क्योकि वह जानती थी कि राकेश को यह सब पसंद नहीं है ।

            वह मन में विचार कर रही थी कि घर जाकर वही कलह होगा । राकेश फिर उस पर चिल्लाएगा उसका तो यही काम हो गया है । पर आखिर कब तक वह सहेगी । मैंने उसके प्यार के लिए क्या कुछ नहीं किया है । अपना घर बार मम्मी पापा सब छोड़ दिये । फिर भी वह ऐसा करता है । मैं उससे प्यार इतना प्यार करती हूं और उसको मुझ पर विश्वास ही नहीं है । उसे लगता है मुझे देर हो गई है तो मैं रंगरलिया मना रही हूं । पता नहीं कौन से विचार उसके दिमाग में आते है । पहले तो ऐसा नहीं था । पता नहीं जबसे उसकी नौकरी छूट गयी है तबसे उसका व्यवहार ही बदल गया है । क्या हो गया है उसको । मैंने बहुत बातें सुन ली उसकी । क्या कुछ नहीं सहा है अपनी शादी बनाए रखने के लिए मैंने । उसका जुल्म सहती रहती हूं और वह हमेशा मुझे रुलाता रहता है है अब एक महीने से तो हाथ भी उठाने लगा है । वह मुझे धोखेबाज कहता है । मगर आज उसने कहा तो मैं उसे जवाब दूंगी । और उस घर में मेरा आखरी दिन होगा । अब यह अग्नि परीक्षा और नहीं दूंगी ।



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