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ओमा
ओमा
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© Amar Adwiteey

Drama Inspirational

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स्कूल में प्रार्थना आरंभ हो चुकी थी जब वह विद्यार्थी हाँफते हुए प्रवेश किया। लपकते हुए साइकिल खड़ी कर प्रार्थना स्थल के निकट पहुँच कर उसने अनुमति की मुद्रा में पी.टी. आई की ओर देखा, जिसका सिर स्वतः प्रिंसिपल की तरफ घूम गया। उन्होंने छात्र को देख विशेष आक्रोश नहीं जताया, और उसे ही अपने पक्ष में समझ छात्र पंक्ति में खड़ा हो गया। तब तक विसर्जन का समय हो गया।

सभी छात्र-छात्राओं के बीच खुसुर-पुसुर होने लगी। चूँकि प्रधानाचार्य अति अनुशासित व्यक्ति थे तो बच्चों में चर्चा इस तरह से हो रही थी- "आज उनका मूड अच्छा लगता है, शायद अपनी छड़ी साथ नहीं लाये होंगे, नहीं यार, छड़ी तो थी, कोई जान पहचान या रिश्तेदार का लड़का होगा, क्या तुमको पता नहीं, ओमा का गाँव यहाँ से बहुत दूर है, फिर उसकी क्या पहचान, कैसी रिश्तेदारी यहाँ", आदि।

अन्य विद्यार्थियों के साथ ओमा अपनी कक्षा की ओर जाने लगा तभी चपरासी ने आवाज दी। इशारा पाकर वह कार्यालय में गया जहाँ उसे तुरंत प्रिंसिपल साहब ने बुला लिया। उसके कक्षा-अध्यापक पहले ही उपस्थित थे। उन्होंने अपनी कर्नल-छड़ी को ऊर्ध्वाधर कर धीरे से टेबल पर ठोका, जो वह बात शुरू करने से पहले करते थे।

'आपको पता है वर्मा जी, आज इस लड़के ने क्या काम किया है...' वर्मा जी ने (फुर्ती दिखाते हुए) उनकी बात समाप्त भी नहीं होने दी। 'तुम देरी से स्कूल पहुँचने के बाद प्रार्थना स्थल पर कैसे चले गए, तुम्हें पता नहीं, इस स्कूल के नियम। प्रार्थना समाप्त होने के बाद कार्यालय में उपस्थित होना है और प्रथम पीरियड माली के साथ श्रमदान करना पड़ता है।' यह सब उन्होंने एक साँस में कह दिया, जैसे छात्र से अधिक उनको दण्ड मिलने का भय हो।

'क्या आप समझ रहे हो कि इसे सजा देने के लिए हमने तुम्हें बुलाया है, उसके लिए तो यह छड़ी बहुत है।' आगे की बात उन्होंने सीधे सपाट झट पूरी की और छात्र को कक्षा में जाने का आदेश दिया। वर्मा जी दूसरे पीरियड में कक्षा में गये। उन्होंने देखा है अधिकांश बच्चे ओमा की ओर अपराध की शंका एवं भय की नजर से देख रहे थे। उन्हें लगा कि विषय व्याख्यान आरंभ करने से पहले इस बात को ही स्पष्ट करना आवश्यक है लेकिन प्रिंसिपल साहब ने कहा कि वह कल सर्व सभा में इसकी जानकारी सबको देंगे।

अगली सुबह सभी छात्र, अध्यापक एवं अन्य स्टाफ यथास्थान पर उपस्थित थे। बस, ओमा बच्चों के बीच न होकर उनके सामने प्रधानाचार्य के साथ खड़ा था। अब बच्चों का संशय यकीन में बदल गया कि आज इसकी पिटाई होगी। दैनिक औपचारिकता पूरी होने के साथ ही प्रिंसिपल साहब ने वक्तव्य शुरू किया।

'प्यारे बच्चों, कल यह लड़का विलम्ब से स्कूल पहुँचा, तुम सब सोच रहे होंगे कि मैंने इसे दण्डित क्यों नहीं किया। कई अध्यापकों को भी यही लगा। लेकिन पिछले कई महीनों से इसके आचरण ने मुझे बिना तथ्य जाने इसे सजा देने से रोक लिया। मुझे लगा कि अवश्य ही कोई प्रतिकूल परिस्थिति बनी होगी। न कि किसी अन्य छात्र की तरह बहाना बनाकर देर की हो।'

'गाँव के कुछ लोगों ने चौकीदार मोहना को बताया कि तुम्हारे स्कूल में जो लड़का शहर से आता है उसने हमारी कई एकड़ जमीन को गलने से बचा दिया और नहर का बहुत सारा पानी भी बेकार बह जाने से।'

'हुआ यूँ कि सुबह जब ओमा स्कूल समय से डेढ़ घंटे पहले ट्यूशन के लिए आ रहा था तो देखा कि नहर में जलस्तर बढ़ने के कारण इस गाँव की ओर आने वाली पगडंडी के मुखार पर पानी उफनने लगा है और अनियंत्रित हो सकता है। उसने इधर-उधर देखा कि कोई किसान दिखे तो सूचित कर दे लेकिन उस समय वहाँ कोई नहीं था। इस लड़के को न जाने क्या सूझी, अपने पाजामे-बुशर्ट मोड़ कर खाली हाथ उसे संभालने में जुट गया। इधर इसे अपने ट्यूशन की चिंता हो रही होगी, उधर नहर में पड़े कटाव की। जल्दबाजी में बेचारे की साइकिल स्टैंड से लुढ़क गई और कुछ पुस्तकें भी गीली हो गईं। क्या तुम अंदाज लगा सकते हो कि वहाँ कटाव का जितना नियंत्रण फावड़े से होता लगभग उतना ही काम इसने निहत्थे किया। उसके लिए इसे कई गुना मेहनत अवश्य करनी पड़ी। वह अकेला पानी को बहने से नहीं रोक पाया। पानी बहता रहा और वह मिट्टी से रोकता रहा। लेकिन उसने कटाव को एक इंच भी फैलने नहीं दिया। बाद में कुछ किसान वहाँ पहुँचे, उन्होंने इसे खूब शाबाशी दी और कटाव की जगह पर अच्छी तरह से बांध लगाया।'

'इसे कहते हैं, व्हेअर देयर इज ए विल, देयर इज ए वे! यह सब जानकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई और हम सब ओमा के इस कार्य के लिए गर्व महसूस कर रहे हैं। मुझे बताया गया है कि ओमा ट्यूशन पढ़ने के लिए शहर से बहुत जल्दी चलकर यहाँ आता है और सन्ध्या काल में भी अन्य विषय के लिए दूसरे स्थान पर जाता है। इस प्रकार उसे 25-30 किमी साइकिल से दौड़ना पड़ता है जो एक अच्छे विद्यार्थी की पढ़ाई को अवश्य प्रभावित करेगा। पता चला कि उसने पूर्व में गाँव में किराए पर कमरा लेने की कोशिश की थी लेकिन यहाँ ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हो पायी। मैंने अपने स्टाफ के लोगों से इस विषय पर बात की है और विद्यालय परिसर में ही कोई छोटा कमरा खाली कर ओमा की मदद करने का विचार प्रस्तावित किया है।'

लड़का विद्यार्थी स्कूल संकट प्रिंसिपल रक्षक वीर

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