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समाज की बलि
समाज की बलि
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© Diwakar Pokhriyal

Drama

17 Minutes   172    3


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'कहाँ जा रहा है बेटा' रोहन के पापा ने पूछा|

'खेलने जा रहा हूँ' रोहन हस्ते हुए बोला|

'अरे तेरा कल पेपर है' रोहन के पापा हैरानी से बोले|

'कोई नही सब कर लिया' रोहन बोला और निकल पड़ा|

'बहुत होशियार है मेरा बच्चा, एक दिन ज़रूर नाम रोशन करेगा' रोहन की मम्मी दरवाज़ा बंद करते हुए बोली|

 

'और रोहन कल की तैयारी कर ली' रवि ने पूछा|

'हा यार कर ली' रोहन बोला|

'तुझे पता है, उस कॉलेज के एक बच्चे ने आत्महत्या कर ली' रवि थोड़ी चिंता से बोला|

'कमज़ोर होगा वो इसलिए आत्महत्या करली| ऐसे बेवकूफ़ बहुत है दुनिया में' रोहन हंसता हुआ बोला|

'भाई आत्महत्या करना आसान नही है' रवि ने समझाने की कोशिश की|    

'इन सब को देख कर तो ऐसा ही लगता है' रोहन फिर ज़ोर से हंसा|

 

रोहन बहुत ही ज़िंदादिल लड़का था और अपने में पूरा विश्वाश रखता था| उसके माता पिता भी उसको बहुत प्यार करते थे| अपने विद्यालय में उसकी बहुत अच्छी छवि थी| अच्छे अंको से उत्तीर्ण हुआ था और अब इंजिनियरिंग की प्रवेश परीक्षा देने का समय था| रोहन के माता पिता को पूरा विश्वाश था की रोहन किसी ना किसी परीक्षा में निकल ही जाएगा और उनका सपना पूरा करेगा| उनकी आशा के अनुसार बहुत जल्दी ही वो एक अच्छे कालेज में दाखिल हो गया| रोहन और उसके माता पिता बहुत ही खुश थे और उनको पूरी आशा थी की रोहन बहुत ही जल्द अच्छी ज़िंदगी जिएगा|

 

'बहुत बढ़िया बेटा' रोहन की मम्मी बोली|

'मैने तो पहले ही कहा था' रोहन हंसता हुआ बोला|

'मुझे पूरा विश्वाश था तुझपर' रोहन की मम्मी बोली|

'बधाई हो बेटा' रोहन के पापा रोहन को गले लगा कर बोले|

'धन्यवाद' रोहन को अच्छा लगा|

'समाज में हमारा नाम ऊँचा किया है तूने' रोहन के पापा बोले|

'समाज़ क्या करेगा| वो तो मेहनत से हुआ ना' रोहन बोला|

'हाँ हाँ तेरी मेहनत का ही फल है' रोहन की मम्मी बोली|

'आपको पता है मेरी सहेली की लड़की ने भी दिया था पेपर पर उसका नही हुआ' रोहन की मम्मी खुशी खुशी बोली|

'हमारा बच्चा समझदार और मेहनती है' रोहन के पापा बोले|

' हाँ वो तो है| इसकी वजह से हमारी नाक ऊँची हुई है' रोहन की मम्मी रोहन को गले लगा कर बोली|

 

रोहन को उनकी बातें समझ मे नही आ रही थी| लेकिन वो अपने मम्मी पापा को खुश देख कर खुश था| उसको विश्वाश था की उसका सपना और उसके माता पिता का सपना एक ही है| रोहन खुश था और ठीक २ महीने बाद वह भी खुशी खुशी कालेज की ज़िंदगी में ढलने चल पड़ा था|

 

तीन साल गुज़र चुके थे कॉलेज के| कॉलेज में बहुत ही मेहनत करता था रोहन और पढ़ाई के साथ साथ उसकी एक दोस्त भी बन गयी थी| राशि पड़ने में बहुत तेज़ थी और व्यवहार से बिल्कुल भोली थी| जो भी उसके मन में होता था वो सॉफ बोल देती थी| यह बात रोहन को बहुत अच्छी लगती थी| वही रोहन का सदापन राशि को भाता था और दोनो एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन चुके थे| तीन साल की अच्छी दोस्ती के बाद उनमें प्यार भी हो चला था और दोनो ने एक दूसरे से इज़हार भी कर दिया था| दोनो एक दूसरे के साथ बहुत खुश रहते थे| लेकिन राशि को सिर्फ़ एक ही चिंता सताती रहती थी की कही कास्ट बीच में ना आ जायें| रोहन अक्सर समझता था की उसके घर वाले इन चीज़ो को नही मानते पर राशि का डर अभी भी कायम था|

 

'क्या तुम्हारे मम्मी पापा मुझे अपनाएँगे' राशि थोड़ी चिंता से बोली| 

'हां, यार क्यूँ नही' मैं अपने मम्मी पापा को जानता हूँ|

'फिर ठीक है' राशि हसी और रोहन के कंधे पर सिर रख दिया|

'और अगर उन्होने मना कर दिया तो' राशि फिर से बोली|

'तो फिर हम दोनो अपना नया घर बनाएँगे' रोहन राशि को गले लगाता हुआ बोला|

'नही, मैं चाहती हूँ कि हम सब साथ में ही रहे' राशि रोहन की आँखो में देखकर बोली|

'तो फिर क्या चिंता है?' रोहन थोड़ा रुक कर बोला|

'हम दोनो अलग अलग कास्ट के है ना इसलिए मुझे डर लग रहा है' राशि दबी आवाज़ में बोली|

'इससे कोई फ़र्क नही पड़ता| अगले साल हम दोनो अच्छी जॉब करेंगे| और जब दोनो ही अच्छी नौकरी करेंगे तो किसी को क्या फ़र्क पड़ेगा' रोहन बोला|

'यह समाज़ बहुत ज़हरीला है' राशि बोली|

'तुम चुप करो, बस डरती ही रहती हो' रोहन ने राशि को फिर से गले लगाया |

 

अगले साल दोनो की नौकरी अलग अलग जगह लग गयी| दोनो अपनी नौकरी में व्यस्त हो गये परंतु एक दूसरे से बात करते रहते थे और जब भी मौका लगता तो मिल भी लेते थे| ऐसे ही एक दिन दोनो बाते कर रहे थे|

 

'और बताओ क्या हो रहा है' रोहन बोला.

'तुम्हे मिस कर रही हूँ' राशि बोली.

'मैं भी बहुत' रोहन बोला

'तो चलो फिर शादी कर लेते है' राशि मुस्कुराते हुए बोली|

'अभी तो आज़ादी मिली है और इतनी जल्दी जेल?' रोहन शैतानी अंदाज़ में बोला|

'अच्छा तो मेरा प्यार तुम्हे जेल लगता है?' राशि बोली|

'मैने कब बोला" रोहन शरारती अंदाज़ में बोला|

'मुझे सब पता है| ठीक है मत करो शादी' राशि गुस्से मे बोली.

'सच्ची क्या?' रोहन हंसा|

'नही, तुम्हे आज़ादी नही मिल सकती' राशि चुटकी बजाते हुए बोली|

'अरे यार, आज़ादी मिलते मिलते रह गयी' रोहन ज़ोर से हंसा|

'तुम एक बार शादी करो, मैं फिर बताती हूँ आज़ादी की परिभाषा' राशि बोली|

'अच्छा? तुम बता रही हो या डरा रही हो?' रोहन ने पूछा|

'जनाब, बता कर डरा रही हूँ' राशि हस्ते हुए बोली|

'हां, मैं डर गया' रोहन बोला|

'वो तो बाद में देखेंगे' राशि बोली और दोनो हंस पड़े|

 

थोड़ी देर बात करने के बाद रोहन ने फोन रखा और उसको लगा की समय आ गया है कि वो घर पर बात करे| यह सोच कर उसने घर में फोन मिलाया|

 

'और बेटा कैसा है' रोहन की मम्मी फोन उठाते हुई बोली|

' अच्छा हूँ मम्मी' रोहन बोला|

'तू घर कब आ रहा है?' रोहन की मम्मी छूटते ही बोली|

'शायद अगले हफ्ते' रोहन बोला|

'ठीक से बता' रोहन की मम्मी बोली|

'क्यूँ क्या हुआ?' रोहन अपनी मम्मी की उत्सुकता देखते हुए बोला|

'तेरे साथ लड़की देखने जाना है' रोहन की मम्मी बोली|

'लड़की मैने देख ली है' रोहन बोला|

'क्या? कब? कहाँ?' रोहन की मम्मी को झटका लगा| उनको रोहन से ऐसी आशा नही थी|

'वही आकर बताऊँगा' रोहन बोला और फ़ोन रख दिया|

 

रोहन को विश्वाश था की उसके मम्मी पापा ज़रूर मान जाएँगे| आख़िर लड़की में भी कोई कमी नही थी| अच्छी ख़ासी नौकरी करती थी और पढ़ी लिखी भी थी| शादी के लिए और क्या चाहिए होता है | यही सोचता सोचता वो अपने कमरे में आ गया|

अगले हफ्ते रोहन घर पहुचा|

 

'कौन है वो लड़की' रोहन के पापा मुस्कुराते हुए बोले|

'खाना तो खाने दो पहले' रोहन पापा को देखते हुए बोला|

'अब तो वो ही खिलाएगी तुझे खाना या तू उसको खिलाएगा' रोहन के पापा हँसने लगे|

 

थोड़ी देर में खाना खाने के बाद:

 

'अब बता कौन सी लड़की है' रोहन से उसकी मम्मी ने पूछा|

 

रोहन ने सब कुछ अपनी मम्मी पापा को बता दिया| यह सुनते ही रोहन की मम्मी की चेहरे की हवाइयाँ उड़ गयी|

 

'बेटा तू ऐसे कैसे कर सकता है' रोहन की मम्मी बोली|

'मैने क्या किया? अच्छी है लड़की, नौकरी भी करती है और स्वभाव की भी अच्छी है' रोहन बोला|

'बेटा शुरू में सभी स्वाभाव के अच्छे होते है' रोहन की मम्मी फिर बोली|

'लेकिन हम दोनो एक दूसरे को ५ साल से जानते है' रोहन बोला|

'लेकिन वो हमारी कास्ट की नही है' रोहन की मम्मी समझाने लगी|

'हमको कास्ट का क्या करना है?’ रोहन ने बोला|

'बेटा तूने अभी समाज़ नही देखा है| वो हमको जीने नही देगा' रोहन की मम्मी दुखी स्वर में बोली|

'मुझे कोई चिंता नही है समाज की' रोहन बोला|

'अपनी नही तो अपने पापा की तो सोच| उनकी समाज़ में कितनी इज़्ज़त है| उसका क्या होगा?' रोहन की मम्मी बोली और तभी उसके पापा वहाँ आ गये|

'क्या हुआ' रोहन के पापा बोले|

रोहन की मम्मी ने सब कुछ बताया|

'बेटा तू फिर अपना घर खुद ही बसा ले' रोहन के पापा बोले|

'क्या?' रोहन आश्चर्य से बोला|

'यह क्या बोल रहे हो आप? बच्चा कहा जाएगा?' रोहन की मम्मी बोली|

'जब लड़की चुन रहा था तब याद नही आया क्या ये इसको' रोहन के पापा बोले|

'ठीक है मैं अलग जा रहा हूँ' रोहन बोला|

'जहाँ जाना है जा, ऐसा बेटा हमको नही चाहिए जो अपने मम्मी पापा की इज़्ज़त को भी ना समझे' रोहन के पापा बोले और वहाँ से चले गये|

'बेटा दूसरी लड़की से शादी करले' रोहन की मम्मी रोहन को समझाते हुए बोली

'नही मम्मी, मैने उससे वादा किया है मैं उससे ही शादी करूँगा' रोहन बोला|

ठीक है फिर  जा और जो करना है कर' रोहन की मम्मी को गुस्सा आ गया' अगर तुझे हमारी इज़्ज़त की कोई परवाह नही 'है तो जा खुद संभाल अपने आप को और वापिस यहाँ मत आइयो रोते रोते बाद में' रोहन की मम्मी गुस्से में बोली और वो भी अपने कमरे में चली गयी|

 

यह पिछला १ घंटा कुछ इतनी जल्दी बीता की रोहन को समझ नही आया की क्या हो गया| पल में उसका सारा विश्वाश चकनाचूर हो गया| उसको लगता था की उसके मम्मी पापा को इस कास्ट में कोई विश्वाश नही है और वो इन सब चीज़ो को नही मानते लेकिन आज सब कुछ उल्टा हो गया था| रोहन ने फिर एक बार सोचा और उसको लगा की राशि के साथ वो धोखा नही कर सकता| रोहन बहुत ही दुखी था| शाम को जब राशि का फोन आया तो रोहन ने ऐसा जताने की कोशिश की कि सब कुछ ठीक है पर राशि को कुछ गड़बड़ लगी|

 

'क्या हुआ?' राशि ने पूछा

'कुछ भी नही' रोहन ने छुपाने की कोशिश की|

'कुछ तो हुआ है| तुमने शादी की बाद की' राशि ने पूछा|

'नही की' रोहन धीरे से बोला|

'इसका मतलब उन्होने मना कर दिया' राशि गंभीर अंदाज़ में बोली|

'मैं कल तुमसे मिलने आ रहा हूँ' रोहन बोला और फोन रख दिया|

 

अचानक से रोहन की ज़िंदगी बिल्कुल ही अलग हो गयी थी| एक दिन पहले तक सब ठीक था लेकिन एक दिन में ही जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो| रोहन अगले दिन राशि से मिलने निकल पड़ा| जैसे ही रोहन ने राशि को देखा तो उसे थोड़ा अजीब लगा| राशि का चेहरा उतरा हुआ था|

 

'क्या हुआ?’ रोहन ने पूछा|

'तुम्हारे घरवालो ने माना किया ना' राशि ने पूछा|

रोहन कुछ नही बोला|

'मैने पहले ही कहा था की हम दोनो की शादी बहुत मुश्किल है' राशि के आँखो में आसू थे|

' अरे कोई नही तुम्हारे मम्मी पापा को तो कोई चिंता नही है ना' रोहन राशि को तस्सली देने लगा पर राशि के आँसू रुक ही नही रहे थे|

'मैने भी कल अपने घर पर बात की और उन्होने मुझे घर बुलाया है' राशि बोली|

'क्या? कब?' रोहन बोला|

'कल मैं घर जा रही हूँ' राशि रोते रोती बोली|

तो इसमें रोने वाली क्या बात है?' रोहन ने राशि के कंधे पर हाथ रखा|

'मुझे घर नही जाना' राशि अभी भी रो रही थी और वो रोते रोते रोहन के गले लग गयी|

'मगर तुम रो क्यूँ रही हो? घर जाओगी तो वापिस कब आओगी?' रोहन ने पूछा|

'शायद कभी नही' राशि धीरे से बोली.

'यह क्या बोल रही हो?' रोहन थोड़ा घबरा कर बोला|

'मैं अपने परिवार को जानती हूँ| कल जब मैं घर जाऊंगी तो वो मेरी शादी किसी और से करवा देंगे|

'ऐसे कैसे ज़बरदस्ती करवा देंगे'रोहन को अब थोड़ा थोड़ा डर लग रहा था|

'तुम घर मत जाओ' रोहन बोला|

'मेरे घर वाले फिर भी हमको ढूँढ लेंगे' राशि की आवाज़ काँप रही थी|

'चलो हम आज ही शादी कर लेते है' रोहन ने राशि का हाथ पकड़ा|

'नही वो हम दोनो को नही छोड़ेंगे' राशि सहमी आवाज़ मे बोली|

'शादी के अलावा कोई रास्ता नही है' रोहन बोला|

'नही मुझे घर जाना ही पड़ेगा मेरे पास और कोई रास्ता नही है| मैं अपने घर वालो को जानती हूँ वो मेरे साथ साथ तुम्हे भी नुकसान पहुचाएँगे|' राशि बोली|

'लेकिन घर में तुम्हे ख़तरा है' रोहन बोला|

'अगर मैं नही आई तो तुम मेरा इंतज़ार मत करना करना क्योकि फिर शायद मैं कभी नही आऊँगी' राशि यह बोलते ही रोहन के लिपट अकर ज़ोर ज़ोर से रोने लगी|

'ऐसा मत बोलो' रोहन की आँखों से भी आँसू निकल पड़े थे| ज़िंदगी में पहली बार वो इतना मायूस था|

भारी दिल से राशि को वहाँ छोड़ कर वो अपने ऑफीस चला गया|

 

आठ महीने के बाद उसके बास ने उसको अपने रूम में बुलाया|

 

'तुम्हारा ध्यान कहाँ है' बॉस बोला|

'सर नौकरी में ही है' रोहन बोला

'तुम्हे पता है तुम पिछले ६ महीने से कंपनी के लिए कोई फायदा नही कर रहे हो' बॉस रोहन की तरफ देख कर बोला|

'सर मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ' रोहन बोला

'तुम्हे कोशिश करने के पैसे नही मिलते यहाँ' रोहन का बॉस बोला और उसको एक कागज दे दिया|

 

रोहन ने देखा और पाया की वो उसका टर्मिनेशन लेटर था| रोहन कुछ नही बोला और अपने कमरे में वापिस आ गया| अगले दिन उसने एक जगह एक कमरा लिया और वहाँ रहने लग गया | उसके पास जमा किए हुए पैसे काफ़ी थे अभी| उसने राशि को फोन किया पर कोई जवाब नही आया | रोहन को थोड़ी चिंता हुई| राशि से उसकी बात पिछले 6 महीने से नही हुई थी| घर से तो रोहन बिल्कुल ही अलग हो गया था| एक दो बार उसने घर फोन भी किया पर उसकी मम्मी और पापा ने कभी उससे बात करने की इच्छा नही दिखाई और इसलिए उसने घर बात करना ही बंद कर दिया|

 

राशि का जवाब नही आया तो रोहन को चिंता होने लगी| उसने सोचा की उसे घर ही जाना पड़ेगा| उसने अपना सामान उठाया और राशि के घर की तरफ निकल पड़ा| उसको राशि का घर नही पता था पर उसको उसकी गली याद थी| रोहन १२ घंटे के सफ़र  के बाद राशि की गली में पहुच गया|

 

'लेकिन राशि को कैसे ढूंढूं?' रोहन ने सोचा और उसका नंबर फिर से मिलाया|

'इस लड़की का फोन बंद क्यूँ है' रोहन को चिंता होने लगी|

 

रोहन कुछ देर वही खड़ा रहा पर उसको कोई रास्ता नही दिखा| उसको थोड़ा डर ज़रूर लग रहा था| वो उसकी गले में अंदर की तरफ गया तो पाया की एक दुकान थी वहाँ|

 

'अंकल आप इसी गली में रहते है क्या' रोहन ने पूछा|

'हां पर मैं तो नया आया हूँ' वो बोले|

'अच्छा' रोहन को समझ नही आ रहा था की क्या करें|

'अच्छा अंकल दो समोसे दे दो मुझे' रोहन बोला और दुकान में बैठ गया|

 

थोड़ी देर समोसे खाते खाते उसको उन अंकल की आवाज़ आई|

'बेटा तुम इनसे पूछ सकते हो| यह यही रहते है' वो एक दूसरे अंकल की तरफ इशारा करते हुए बोले |

'क्या हुआ?' उन्होने पूछा|

'अंकल मेरी एक दोस्त यहाँ रहती है | वो बहुत दिनो से ऑफीस नही आई इसलिए मैं यहाँ आया हूँ' रोहन बोला|

'क्या नाम है उसका' उन्होने पूछा|

'राशि' रोहन बोला|

'राशि, जो बच्ची नौकरी करती थी एबीसी कंपनी में' उन्होने फिर पूछा|                          

'हा जी अंकल' रोहन कुछ आशा भारी आवाज़ में बोला|

'बेटा उसका तो देहांत हो गया' वो बोले|

यह सुनते ही रोहन के हाथ से कटोरी छूट गयी|

'कब हुआ' रोहन हकलाता हुआ बोला|

'यही कोई २ महीने पहले| उसके बाद उसका परिवार यहाँ से चला गया था' अंकल बोले और रोहन की आँखे भर आई थी|

'कोई दुर्घटना हुई थी क्या?' रोहन ने हिम्मत करके पूछा|

'सुनने में आया था की वो किसी और से प्यार करती थी पर उसके घरवाले किसी और से शादी करने वाले थे| शादी से दो दिन पहले ही ये हादसा हो गया' अंकल बोले और चले गये|

'हे भगवान' रोहन के मूह से निकला और वो रोने लगा|

 

आज उसको एहसास हुआ की एक पल में ज़िंदगी कैसे बदल जाती है| राशि ही एकमात्र ऐसी लड़की थी जो रोहन के इतना करीब थी| रोहन राशि को खुद से भी ज़्यादा प्यार करता था| रोहन के दोस्त भी नही थे क्योकि वो दोस्तो के साथ जाता नही था| और आज वो पूरी तरह लेकिन अकेला हो गया था| उसके कानो में राशि की वो सारी बाते गूँज रही थी जो उसने रोहन को बोली थी| समाज़ का ऐसा भद्दा रूप रोहन ने शायद ज़िंदगी में पहली  देखा था| आज एक पल में ही उसको समाज से नफ़रत हो गयी थी| कैसे कोई समाज किसी की ज़िंदगी का मालिक बन सकता है यह सोच कर रोहन का खून खौल रहा था| इंसान कहाँ आज़ाद है? ना पढ़ाई में, ना नौकरी में, ना शादी में| आज रोहन का मॅन इन सब से उठ गया था| जो समाज़ किसी की ज़िंदगी की इज़्ज़त नही करता ऐसा समाज रोहन को मंज़ूर नही था| रोहन तेज़ी से अपने घर के लिए निकल गया|

 

'यहाँ क्या करने आया है?' रोहन के पापा बोले|

'कुछ नही' रोहन बुझे स्वर में बोला|

'नौकरी नही करनी क्या' रोहन के पिता जी बोले|

'नौकरी छोड़ दी मैने' रोहन बोला|

'ज़रूर निकाल दिया होगा तुझे' रोहन के पापा व्यंगात्मक हसी में हँसे|

'तुझे अभी भी चैन नही मिला हमारी बेइज़्ज़ती करवा कर| समाज़ में नाक कटवा कर| अब और क्या करना है?' रोहन की मम्मी रोहन को देखते ही गुस्से में बोली|

'बिना शादी किए कैसे आपकी नाक काट गयी' रोहन गुस्से में बोला|

'तू लड़की के साथ घूमेगा तो लोग क्या देखेंगे नही| तू प्यार में अँधा हो सकता है बाकी लोग नही होते| मैने सोचा भी नही था कभी की मेरा लड़का ऐसा होगा' रोहन की मम्मी बोली और बाहर की तरफ जाने लगी|

'चलो हम दोनो अभी कही जा रहे है, शाम को आकर तुझसे बात करेंगे' दोनो बोले.

बाहर से बंद करदो दरवाज़ा मैं सोने जा रहा हूँ' रोहन बोला और दोनो दरवाज़ा बाहर से बंद करके चले गये|                        

                                                                                              

रोहन अगले आधे घंटे तक जी भर कर रोया| आज ना उसका कोई दोस्त था और नही ही कोई उसको सुनने वाला| बचपन में उसनें दोस्त इसलिए नही बनाए थे क्योकि उसकी मम्मी को लगता था की सब बिगड़े हुए है| रोहन बस पढ़ाई करता था और घर में रहता था| ना किसी से बात और ना कुछ|  राशि से दोस्ती होने के बाद उसको दोस्ती का कोमल एहसास हुआ और पहली बार उसे कोई मिला को उसको उसकी तरह ही जानता था| राशि ने कभी भी रोहन को बदलने की कोशिश नही की थी| जो भी राशि को बुरा लगता वो रोहन को बोलती थी और समझाती थी पर कभी ज़बरदस्ती नही करती थी| रोहन भी यह बात समझता था और राशि की बात को ध्यान से सुनता और समझता था| लेकिन ऐसा साथी भगवान ने रोहन से छीन लिया था| आज उसके साथ कोई नही था| रोहन छत की तरफ गया और वहाँ रखी कुर्सी में बैठ गया|                                                            

रोहन की आँखो के आस पास काले घेरे थे | उसका दिमाग़ जो कह रहा था वो नही करना चाहता था| आख़िर वो हिम्मत वाला लड़का था| उसने ज़िंदगी में हमेशा आगे बढ़ना सीखा था| आगे बढ़ना? हाँ शायद इसलिए ही आज वो टूट चुका था| शायद हमारा समाज ही कुछ ऐसा है जो सिर्फ़ आगे बढ़ना सिखाता है| जो चढ़ते सूरज की पूजा करता है लेकिन डूबते हुए सूरज और गिरे हुए इंसानो को यहाँ कोई नही उठाता | रोहन को आज इस बात का यकीन हो चला था| वो समझ चुका था की दूसरो को समझाना बहुत आसान है लेकिन करके दिखना और वो भी बिल्कुल कोई ग़लत कदम उठयें शायद नामुमकिन के बराबर है| रोहन का दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा था| ख़ूँख़ार गर्मी उसकी जलन को और बढ़ाती जा रही थी| वो अपने मॅन को कुछ समझाने की कोशिश कर रहा था शायद, पर उसका कोई नतीजा आता नही दिख रहा था | रोहन ने एक गहरी सास ली और उसके आँखो से आँसू टपकने लगे| वो दस मिनिट तक रोया और फिर खड़ा हो गया| उसने सामने देखा तो पेड़ पर पक्षी चहचाहा रहे थे| लेकिन उसका उसपर कोई असर नही पड़ा | वो तेज़ कदमो से नीचे गया और अपने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया|

 

थोड़ी देर में रोहन के मम्मी पापा घर आयें|

 

'रोहन कहा गया' रोहन की मम्मी दरवाज़ा अंदर से लगा कर बोली|

'सो रहा होगा' रोहन के पापा बोले और बाथरूम में फ्रेश होने चले गये|

"रोहन दरवाज़ा खोल | क्या कर रहा है?' रोहन की मम्मी दरवाज़ा खटखटाती हुई बोली लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नही आई| रोहन की मम्मी को घबराहट हुई|

 

'दरवाज़ा खोल जल्दी' रोहन की मम्मी की आवाज़ में घबराहट और चिंता सॉफ झलक रहे थे|

'क्या हुआ' रोहन के पापा भाग कर आए|

'पता  नही वो दरवाज़ा नही खोल रहा' रोहन की मम्मी डर के मारे रोने लगी|      

'दरवाज़ा तोड़ना पड़ेगा' रोहन के पापा चिंता से बोले|

'हे भगवान मेरे बच्चे की रक्षा करना' रोहन की मम्मी की आँखे अभी भी गीली थी|

 

रोहन के पापा ने 10 मिनिट के बाद जब दरवाज़ा तोड़ा तो एक भयानक दृश्य उनके सामने था| एक ऐसा दृश्य जो कोई भी माँ बाप अपने जीते जी नही देखना चाहते| रोहन ज़मीन मे गिरा हुआ था और उसकी साँस नही चल रही थी| रोहन की मम्मी यह देखते ही ज़ोर से चिल्लाई और बेहोश हो गयी| शोर सुनते सुनते पड़ोसी भी तब तक अंदर आ चुके थे| रोहन के पापा ने रोहन को तेज़ी से गोद में उठाया और हॉस्पिटल ले गये|

 

'माफ़ कीजिएगा आप बहुत देर से आए है' डाक्टर ने बोला |

 

यह शब्द रोहन के पापा को भी बर्दाश नही हुए और वो वही बेहोश हो गये |                   

 

रोहन कुछ बदकिस्मत नौजवानो की तरह अंधे समाज की बलि चढ़ चुका था| हैरानी की बात यह थी की उसके मम्मी पापा भी उसी अंधे समाज का हिस्सा थे| बातें करतें करतें उसी अंधे समाज के लोगो ने इसको कायरता, बेवकूफी और नपुन्संकता तक का नाम दे डाला था| ऐसे रोहन जैसे हज़ारो नौजवानो की मदद करने के लिए आज भी उनके अंदर हिम्मत नही थी क्योकि ऐसे अंधे लोगो को सच नही दिखता, उनको सिर्फ़ अंधेरा ही दिखता है|

 

समाज बलि परिवार कलह

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