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प्यार का पंचनामा 1
प्यार का पंचनामा 1
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© Vikram Rathore

Inspirational

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शाम का समय था बारात बस रवाना ही होने वाली थी दूल्हा आज मन ही मन बहुत मुस्कुरा रहा था।शायद कुछ पाने की खुशी उसके मन को उत्साहित कर रही थी। सब बाराती बारात वाली बस में चढ़ चुके थे और दूल्हा भी कुछ बाकी बची रस्मो को जल्दी जल्दी अदा कर रहा था क्योंकी सबसे ज्यादा जल्दी तो उसे थी ना किसी से मिलने की।

दूल्हे के लिए अलग से लक्ज़री गाड़ी पास में खड़ी थी जिसके आसपास 5-6 लोग डोल रहे थे। ये शायद दूल्हे के फूफा या जीजा ही थे जिनमे कुछ अलग ही अकड़ थी। ये सब में दूर अपने मित्र के साथ खड़ा रिकॉर्ड कर रहा था। जी हाँँ में कोई शादी में आया हुआ मेहमान नही था बस फोटोग्राफी करने के लिए आया हुआ था।

कुछ समय बाद दूल्हे ने अपनी माँ का दूध पिया (एक राजस्थानी रस्म) और गाड़ी में चढ़कर शान से बैठ गया। हमने भी अपना सारा सामान समेटा और चुपचाप बस में जाकर बैठ गए और बारात रवाना हो गयी। बारात के पहुँचते ही काफी सादर सत्कार हुआ और बारातियों के लिए खाने का बुलावा आ गया।परन्तु खाना खाने के लिए कोई बाराती ही नही मिल रहा था। क्योंकी शायद सभी पिने में व्यस्त थे। और थोड़ी देर बाद दूल्हे को बुलावा आ गया के फेरो का समय हो गया है। और दुल्हेराजा चल दिए अपने सपनो की रानी से मिलने।

राजस्थान और खासकर मारवाड़ की तरफ राजपूत घरानो एवम् अन्य जातियो में भी आजतक ये प्रथा है की फेरो के वक्त दूल्हे के परिवार के कोई भी जेंट्स फेरो में घर के अंदर नही आ सकते। क्योंकी इसके पीछे ये कारण है की उस समय लड़की वालो की तरफ वाली सारी लेडीज़ और लडकियाँ वहाँ रहती है इसलिए इस बात का पर्दा किया जाता है।

चूँकि में पिछले 3 दिन से दूल्हेवालो के घर में रह रहा था तो दूल्हे के परिवारवाले मेरे अच्छे मित्र बन गए थे। तो उन में से दूल्हे के एक चचेरे भाई ने मुझसे कहाँ की वैसे मुझे फेरो में आने नही देंगे पर आप चाहो तो में आपके साथ फोटोग्राफर बनकर फेरे देख सकता हु और साथ में लडकियाँ भी।

वैसे तो हम 2 जने थे एक में फोटोग्राफर और एक मेरा मित्र वीडियोग्राफर। पर मैं उसे मना नही कर पाया और उसे मैंने ये कहकर साथ ले लिया के चल तू फॉक्स लाइट ही पकड़ लेना। इस तरह दूल्हे के अलावा हम 3 लोग दूल्हेवालो की तरफ से फेरो में पहुंचे। काफी भीड़ थी क्योंकी शादी किसी मैरिज हॉल में नही घर में ही हो रही थी। फेरे शुरू हुए। और अभी तक एक फेरा हुआ ही था की लड़कीवालों की तरफ से कोई एक ताऊ आया और हमें देखकर बोला के ये 3 लोग कौन है? तो किसी ने बताया ये फोटोग्राफर है और शादी की फोटोग्राफी कर रहे है।

फिर क्या था एक तो फूल पिया हुआ और ऊपर से ताऊ पुराने विचारो वाला बोला ये क्या होता है। और बोला ये हमारी लुगाइयों के फ़ोटो लेंगे। वगरह वगरह।

तो वहाँ मौजूद किसी समझदार ने हमें कहाँ आप प्लीज़ 2 मिनट बाहर जाइये और उसने ताऊ को साइड में लगया और फिर हमें वापिस बुलाया। परन्तु इस बार हम 2 ही थे क्योंकी दूल्हे के भाई को उन लोगो ने आने नही दिया। और इस बार फोक्स लाइट हमें खुद को पकड़नी पड़ी। वैसे वो लाइट भी हमें काफी हेल्प कर रही थी क्योंकी सर्दी के दिन थे और रात को ठण्ड बहुत थी तो इसलिए हम दोनों दोस्त एक दूसरे को बारी बारी से लाइट शेयर कर रहे थे ताकि ठण्ड से बच सके। अब क्या था हम अपना काम कर रहे थे और दूल्हा अपना काम। और उस समय वो लाइट मेरे हाँथ में थी। तभी मेरी नज़र एक लड़की पे पड़ी जो एक कोने में कुछ लेडीज़ के बीच अपनी 3-4 सहिलियो के बीच बैठी थी। मैंने एक नज़र उसको देखा तो वो भी मुझे देख रही थी। उस समय मेरे मन में ये डर भी था के कुछ उलटी सीधी हरकत मुझे पिटवा भी सकती है। फिर भी में उसे एक नज़र से देखता रहा और उसकी तरफ जो मेरे हाँथ में लाइट थी उसकी तरफ करता रहा। इस तरह से रात को फेरो के वक़्त मैंने उसे अच्छे से देख लिया था।और उसके बाद रात को फेरे खत्म होने के बाद हमने खाना खाया व सो गए।

दूसरे दिन सुबह हम नहा धोके तैयार हो गए थे क्यों की मारवाड़ी परम्परा अनुसार विदाई रातो रात ना होकर दूसरे दिन शाम को होने वाली थी। और इसलिए आज के दिन दूल्हा अपने नई नवेली दुल्हन के साथ अपने ससुराल के सारे मंदिरो में जाकर अपनी नए जीवन की खुशहाली की कामना करने जाने वाला था। तो मॉर्निंग में 10 बजे सब तैयार होकर रवाना हो गए और उन सभी ग्रुप में बहुत सारी लेडीज़ लड़कियाँ थी और अब दूल्हे के भाई और दोस्त भी साथ में थे।

उन सभी में वो रात वाली लड़की भी थी। और हम हर जगह जाते तो उसकी नज़र मुझ पे और मेरी नज़र उसी पे रहती थी। और मेरे साथीगण यानि मेरे साथ वाला वीडियोग्राफर और दूल्हे के भाई भी इसी काम में लगे हुए थे के अपना कम बन जाये। इस तरह से वो दिन गुज़र गया और वो समय आ गया के विदाई होने वाली थी। दुल्हन के घर में दूल्हा दूल्हन विदाई से पहले वाली रस्मे अदा कर रहे थे और हम उसने फ़ोटो में उतार रहे थे। इतने में मैंने देखा के वो लड़की अपनी मम्मी के साथ घर जाने की तैयारी में थी। और रवाना होने से पहले उसने हिम्मत जुटायी और मेरे पास आकर खड़ी हो गयी कुछ 5 मिनट रुकने के बाद उसके मम्मी के बुलावे पे वो चल दी।

तभी मैंने अपना कैमरा अभी साथी को पकड़ाया और उसके पीछे जाने लगा। तभी एकदम से मैंने देखा के मेरे साथी और दूल्हे के एक भाई की नज़र उसी लड़की पे है। तो उन्होंने मुझे रोकना चाहा। पर मैंने कहा के चलो तीनो ट्राय करते है देखते है के लड़की का मन कहाँ है। और तीनो निकल पड़े।

मैंने भी फटाफट एक कागज़ का टुकड़ा लिया और किसी से पैन मांगकर उसपे अपने नम्बर लिखे और उस शादीवाले घर से बाहर आ गया। तभी मैंने देखा के शादीवाले घर के पास वाले घर के आगे उसकी मम्मी किसी लेडीज़ से बात कर रही थी। और वो पास में ही खड़ी थी और जैसे ही उसने मुझे देखा तो देखती ही रह गयी। और मैंने भी जान लिया था के ये आखरी मौका है अभी नही तो फिर कभी नही। परन्तु उसकी मम्मी के सामने मैं उसे नंबर भी कैसे देता, फिर मैंने देखा के वो जहाँ खड़ी है उससे आगे कुछ दुरी पर एक पुरानी जीप खड़ी थी। तो मैंने अपने फोन को कान पे लगाया और बात करने की एक्टिंग के साथ उस पुरानी जीप तक गया और उसके ऊपर अपने मोबाइल नंबर की पर्ची रख के वापस आ गया। और उस समय मैंने देखा के वो उस रखी हुई पर्ची को देख रही थी।और घर जाते समय उसने अपनी मम्मी से नज़र बचाकर वो पर्ची ले ली। उस समय मेरी चहरे पे खुशी साफ दिखाई दे रही थी। मेरे दोनो साथी ये सब नज़ारा दूर खड़े आसानी से देख रहे थे। मैं मन ही मन खुश हुआ जा रहा था मुझे इस बात की ज़्यादा ख़ुशी नही थी के मैंने जिन्दगी में पहली बार किसी लड़की को अपने नम्बर देकर उसे पटाया है बल्कि इस बात की ख़ुशी थी के मैंने ये काम उन दोनों को हराकर किया है।

प्यार का पंचनामा 1

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