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कस्तूरी की ख़ोज
कस्तूरी की ख़ोज
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© Saumya Jyotsna

Inspirational

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कॉलेज जाते वक़्त, कुछ आवारा कुत्ते वाहिदा को परेशान करते थे| लड़कियों पर फब्तियां कसना,जबरदस्ती करना,ये उनकी आदत में शुमार था| ये लड़के;आवारा,जंगली कुत्ते ही तो हैं|इतनी जदोजहद के बाद कॉलेज जाने का मौका मिला था, पर ये तो चैन से पढ़ने भी नहीं देते|कुछ लड़कियाँ तो वहीं पर इन्हें इनकी औकाद से रूबरू करवा देती हैं| पर वाहिदा अंतर्मुखी स्वभाव की है और चुप रह जाती है|

कुछ दिन से वाहिदा का कॉलेज जाने का मन नहीं हो रहा था,क्योंकि वो आवारा कुत्ते घर तक आ जाते थे| जब अम्मी ने ज़ोर देकर पूछा "तो वाहिदा ने सारी घटना उन्हें बता दी”| अम्मी ने कहा, "वाहिदा बेटी, तुमने घर पर सबसे लड़कर कॉलेज में दाखिला लिया था| तुम्हारी लड़ाई वहीं पर खत्म नहीं, बल्कि शुरू हुई है| ऐसे लड़के तुम्हें हर जगह मिलेंगे| अपने अंदर के सैनिक को जगाओ, जो विपरीत परिस्थियों में भी डटकर मुकाबला करते हैं| याद रखो, कस्तूरी मृग की नाभि में होती है और वह उसकी महक को तलाशता फिरता है”| उठो अपने कॉलेज के लिए तैयार हो जाओ”| इतना कहकर अम्मी ने वाहिदा की पीठ थपथपाई|

वाहिदा को कस्तूरी मिल गई थी| अब चाहे जितनी भी परेशानी हो वाहिदा सबका जवाब देना सीख गई थी| 

कस्तूरी की ख़ोज हिंदी कहानी

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