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दशमलव
दशमलव
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© Brajesh Singh

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उसे पहले लगता था की दुनिया में सिर्फ वो नहीं है, बहुत सारे लोग हैं. सैकड़ों, हजारों, लाखों, करोड़ों, अरबों, खरबों, लोग. खरबों से भी ज्यादा बहुत ज्यादा लोग हैं मगर आज उसे ये ख्याल आया की नहीं दुनिया में सिर्फ बस वही है. दुनिया में बस एक ही शख्स हैं जो वो है. बाकी सड़क पर चलने वाले लोग. बसों, कारों, रिक्शों में बैठे लोग भी वही हैं  सब वही है. कहीं किसी मुल्क में बम धमाका करने वाला भी वही है, धमाके में मारे जाना वाला भी वही है. लूटने वाला भी वही, लूटा जाने वाला भी वही है.

ये पूरी दुनिया भर में घूमने वाले लोग वही हैं उनकी शक्ल, उनकी पहचान बस इसलिए जुदा है की ऊपर कोई एक सिरफिरा इंजीनियर जो खुद को भगवान समझता है अपने लैपटॉप के इंटर बटन पर अपना हाथ रख सो गया है. हर एक इंटर के साथ उसकी शक्लें बदल रही है. एक इंटर की वजह से वो सड़क पर खड़ा शक्ल बदलकर मूंगफली बेच रहा, किसी काले शीशे वाली कार में बैठा अपनी प्रेमिका को चूम रहा है, कहीं किसी भीड़ वाले जगह पर बच्चे की शक्ल में गुब्बारे बेच रहा है, कहीं किसी सुनसान गली में किसी लड़की का पीछा करते हुए अपने शक्ल पर एक गन्दी मुस्कान की स्टीकर चिपका रहा है. दुनिया में हर शख्स वही है.

बदचलन, बेईमान, ईमानदार, शरीफ, कातिल, प्रेमी, चोर, मुजरिम, निर्दोष, गरीब-अमीर, बच्चा, बूढ़ा, जवान सब वही है. वो सब कुछ है. पर उसे ये लगता है की वो बुरे से अच्छा ज्यादा है. इस बात को साबित करने के लिए की वो बहुत अच्छा है उसने दशमलव का ईजाद किया है. वो अब शून्य के बाद दशमलव लगा कर अपनी बुराइयों को सबकी नजरों से बचाने की कोशिश करता है. वो कहता है की वो जो बुरा करने वाले इंसान हैं वो भी मैं ही हूँ पर उन बुरे "मैं" की गिनती दशमलव के बाद शुरू होती है. दशमलव से पहले सब कुछ अच्छा है.

उसे एक दफा जब ये लगता था की दुनिया में सिर्फ वो नहीं है और भी बहुत सारे लोग हैं तब उसके गणित के मास्टर ने उसे हर परीक्षा में शून्य दिया था. पर आज जब उसे ये पता है की वो गणित का मास्टर भी वो खुद ही था तो अब उस बात को याद करके हंसता है. वो अब ये सोचता है की इस दुनिया का सबसे बड़ा गणितज्ञ वही है जिसने इस दुनिया की यानि खुद की बुराई दशमलव के उस पार कड़ी कर दी है. वो आज अपने आप पर बहुत खुश है. इसलिए वो चला जा रहा है. उसे लगता है की सामने से आ रही बस जिसका ड्राइवर भी उसी का कोई एक रूप है उसके सामने बस रोक देगा इसलिए वो बेफिक्र चला आ जा रहा. मुस्कुराता हुआ. उसने आज गणित का एक बहुत बड़ा आविष्कार किया है. उसने दुनिया भर की बुराई को दशमलव के आगे धकेला है इसलिए उसे लगता है की बस उसके सामने आते हुए रुक जायेगी...

बस रुकती भी है.... मगर तब जब उसकी ठोकर से एक लड़का इतनी दूर जाकर गिरकर मर जाता है की दुनिया भर के हर संख्या से दशमलव गायब हो जाता है. सड़क पर गिरकर मरने वाला लड़का गणित में फेल ही रह जाता है. उसकी लाश के आगे खड़ी भीड़ में से कोई ये चिल्ला के नहीं कहता की अरे ये तो मैं ही हूँ...

बस का ड्राइवर उस लड़के की लाश से करीब 20 किलोमीटर दूर किसी ठेके में शराब पीते हुए अपने सामने वाली टेबल पर एक आदमी से कहता है "आज साला एक पागल बस के नीचे आ के मर गया, साले को मरने को मेरी ही बस मिली थी।"

कहानी हिंदी कहानी अमूर्त काल्पनिक

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