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ओल्ड एज लव
ओल्ड एज लव
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© Madhu Arora

Inspirational

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सर्द सुबह की गुनगुनी धूप, हरा-भरा लॉन और गर्म कॉफी, भला किसे अच्छा ना लगेगा। फिर भी ना जाने क्यों मन अनमना सा है। आज गीता आँटी बहुत याद आ रही है। कॉलेज के दिनों के वो बीते पल आँखों के सामने घूम रहे हैं।

बरसों पहले मैंने उच्च शिक्षा के लिये दिल्ली के एक कॉलेज में प्रवेश लिया था। शुरू में तो मैं एक होस्टल में रहा पर शीघ्र ही मैं और मेरा दोस्त रवि, गीता आँटी के फ्लैट में पेइंग गेस्ट बनकर रहने लगे।

अक्सर हम उनके छोटे- मोटे काम कर दिया करते, जैसे, बाजार से सामान लाना और निचले माले पर रहने वाले विनय अंकल को कुछ देना इत्यादि। आँटी का फ्लैट तीसरे माले पर और अंकल का पहले माले पर था।आँटी जब भी कुछ खास बनाती तो विनय अंकल को ज़रूर भेजतीं, जैसे राजमा, पाव-भाजी इत्यादि।

आँटी विधवा थीं और उनके दोनों विवाहित बेटे अमेरिका में बसे थे और साल में कुछ ही दिनों के लिये आते थे।विनय अंकल की पत्नी एक बेटी को ही जन्म देकर चल बसी थीं। उनकी बेटी विवाहित थी, जो कभी-कभार मिलने आ जाती। अंकल ने अकेले ही पालपोस कर उस बड़ा करे विवाह कर दिया था।

आँटी अक्सर आते-जाते अंकल का हाल पूछ लेतीं, कोई सब्जी तरकारी घर का सामान तो नहीं लाना। अंकल, आँटी का बिजली-फोन का बिल भर आते। दोनों सुबह-शाम साथ टहलते, पार्क की बेंच पर बैठे बतियातेे, अपना दुख- तकलीफ़ बाँटते।

एक बार अंकल के बीमार होने पर आँटी ने बहुत तीमारदारी की। उनको समय पर खाना, पीना, दवाई देना, बुखार देखना, खुद खड़े रहकर उनका घर साफ करवाना। इस सबके लिये आँटी को कई बार ऊपर- नीचे जाना-आना पड़ता। रात को खाने की टेबल पर वो कहती भी कि इस सबसे उनके पाँव दुखते हैं, पर अगली सुबह फिर वही क्रम चलता।

मैं और रवि अक्सर आँटी, अंकल को एक दूसरे के काम करते देख हँसते और उनके संबंधों की खिल्ली उड़ाते। उनको ओल्ड ऐज लवर्स कहते। उन दिनों हम जवान थे और हमारी सोच भी वैसी थी।

एम.बी.ए. पूरा होते ही मुझे नौकरी मिल गई और पोस्टिंग भी बैंगलोर में हो गई। रवि को भी दूसरे शहर में नौकरी मिल गई। हम दिल्ली से दूर अपनी दुनिया में व्यस्त हो गये।

वक्त बीतता गया, मेरी शादी हुई, एक बेटा हुआ। अब तो वो भी दूसरे शहर में नौकरी कर रहा है। अभी आठ माह पहले ही मेरी जीवन संगिनी कैंसर से चल बसी। माँ, बाबूजी तो पहले ही एक-एक करके संसार छोड़ गए थे। मैं भी रिटायर होने की उम्र पर हूँ। तन्हा शामें और छुट्टी का दिन.... वक्त काटे नहीं कटता। भरा पूरा घर और अकेलापन.....क्या करूँ, कहाँ जाऊँ, किससे बात करूँ? अपनी जरूरत के लिये किसे पुकारूँ ?..... कोई दिखाई नहीं देता। सोचता हूँ, रिटायर होकर वक्त किसके सहारे बीतेगा।

आज सब पुरानी बातें आँखों के सामने घूम रही हैं। गीता आँटी, विनय अंकल और उनके बीच का वो एक अनकहा रिश्ता। वो ओल्ड ऐज लव था या एक दूसरे की जरूरत। जब अकेलापन काटे नहीं कटता और एक सच्चे साथी की कमी महसूस होती है। कितना गलत था मैं और मेरी सोच....।

अकेलापन वक्त रिश्ता

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