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क़त्ल का राज़  भाग 11
क़त्ल का राज़ भाग 11
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© Mahesh Dube

Thriller

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क़त्ल का राज़ 

भाग 11

            नियत तारीख पर कोर्टरूम लोगों से खचाखच भरा हुआ था। ज्योति शुक्ला और प्रीतम अरोरा अपनी कुर्सियों पर बैठे हुए थे। सब इंस्पेक्टर रामबचन और इन्स्पेक्टर अमर सिंह दोनों मौजूद थे। दर्शक दीर्घा में चौधरी, सोनू सिंह, कान्ता, आशा, उसकी बेटी ईशा, गायत्री, चंद्रा बाई और काफी दूसरे लोग भी मौजूद थे। समय होते ही जज साहब का आगमन हुआ। सबने खड़े होकर उनका सम्मान किया फिर गायतोंडे साहब के बैठने पर सब अपने स्थान पर बैठ गए और कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई। सम्यक बाबलानी कटघरे में खड़ा व्याकुल भाव से इधर-उधर देख रहा था। रह-रह कर उसकी दृष्टि अपनी बेटी ईशा पर टिक जाती। आज फैसले का दिन था। 

    सरकारी वकील प्रीतम अरोरा ने पुरजोर तरीके से एक बार फिर ज्योति शुक्ला द्वारा पिछली तारीख पर फंसाए गए फच्चर की बखिया उधेड़नी शुरू की। मीलार्ड! मेरी काबिल दोस्त ने एक कहानी गढ़ कर कोर्ट को कुछ समय के लिए गुमराह जरूर किया लेकिन सच परेशान हो सकता है हार नहीं सकता। इनके बताए रास्ते पर चलकर भी पुलिस ने सारी जांच कर ली पर परिणाम ढाक के तीन पात ही रहा। ऐश ट्रे पर केवल कामवाली बाई की ऊँगली के निशान मिले जो सहज ही है। तो मेरी अदालत से गुजारिश है कि इस मामले में जल्दी से जल्दी मुजरिम को सख्त सजा दे। 

अब ज्योति शुक्ला खड़ी होकर बोली, मीलॉर्ड! हिन्दुस्तान का संविधान कहता है कि चाहे लाख मुजरिम छूट जाएं लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। मैंने पिछली तारीख पर जो बातें कहीं थी वो शत प्रतिशत सच हैं। केवल उन्हें सिद्ध करना बाकी है। 

इतने में कोर्ट रूम में जोर से किसी का मोबाइल बज उठा। जज साहब की त्यौरियां चढ़ गई उन्होंने हथौड़ा उठाकर टेबल पर पटका और डांटते हुए बोले, कोर्ट रूम में सभी अपने अपने मोबाइल साइलेंट मोड़ पर रखें। ये गार्डन नहीं है जहां आप लोग तफ़रीह करने आए हैं। कान्ता का नया- नकोर सैमसंग गैलेक्सी नोट जोरों से बज रहा था तो उसने खिसिया कर उसे साइलेंट किया और सर झुकाकर बैठ गई। जज साहब संतुष्ट होकर बोले, जिरह जारी रखें! 

मैडम जी। कोर्ट हवाई बातों के आधार पर नहीं सबूतों के आधार पर चलता है प्रीतम बोला। 

मीलॉर्ड! मेरी थ्योरी पूरी तरह सच थी। ज्योति बोली और हर बात का सबूत मेरे पास है। 

अच्छा! तो आज आप सिद्ध कर देंगी कि सम्यक कातिल नहीं है? गायतोंडे के मुंह से निकला

जी मीलॉर्ड! न केवल इतना बल्कि आज मैं इसी कोर्ट में असली कातिल को बेनकाब भी कर दूंगी। 

यह सुनकर सभी आश्चर्य से एक दूसरे को देखने लगे।

ज्योति बोली, कत्ल की रात जब सम्यक मंगतानी के ऑफिस में पहुंचा तो उसके पीछे-पीछे एक और शख्स वहां पहुंचा जिसने मंगतानी और सम्यक के बीच की सारी बातचीत सुनी फिर जब सम्यक ऐश ट्रे से वार करके घबराहट में भाग निकला तब उसने ऐश ट्रे उठाकर मंगतानी के सर पर पटक दिया और एक लाख रूपये लेकर फरार हो गया।  

इतना कहकर ज्योति ने एक गुप्त निगाह दर्शक दीर्घा पर फेरी। आशा और कान्ता आपस में जल्दी-जल्दी कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी। गायत्री उनसे पर्याप्त दूरी पर खामोश बैठी थी लेकिन उसका चेहरा तमतमा गया था। बाकी लोग भी खासे उद्वेलित लग रहे थे। वातावरण काफी बोझिल-सा हो गया था।

ये तो आप पिछली तारीख पर भी कह चुकी हैं पर सबूत कहाँ हैं? वातावरण की खामोशी तोड़ता प्रीतम बोला 

देती हूँ सबूत वकील साहब। ज्योति बोली और उसने अपने बैग में से कुछ कागज निकाले। फिर उसे क्लर्क द्वारा जज साहब के सामने भिजवाती हुई बोली, मीलार्ड! ये लीजिए उन रुपयों का हिसाब! जो मंगतानी की लाश के पास से उठाए गए थे। नोट के सीरियल नंबर भी लिखे हुए हैं और कैश मेमो की रसीद भी है।  

जज ने हैरान होकर कागजों का मुआयना किया और गंभीर होकर दर्शक दीर्घा पर निगाह फेरी। अब आशा कान्ता और गायत्री एकदम खामोश हो चुके थे। 

मीलॉर्ड! इस कैश मेमो पर लिखे नाम को देखते ही आप समझ गए होंगे कि कातिल कौन है? यही वो औरत है मीलॉर्ड जो उस दिन मंगतानी और सम्यक के साथ ऑफिस में मौजूद थी और इसी ने बाबलानी के भाग खड़े होते ही ऐश ट्रे के एक ही वार से मंगतानी की जान ले ली थी और एक लाख रूपये लेकर रफूचक्कर हो गई थी। फिर इसने उन रुपयों से काफी इलेक्ट्रॉनिक चीजें खरीदी जिनकी रसीद आपके सामने मौजूद है। यही औरत मंगतानी की कातिल है मीलॉर्ड!

 

कहानी अभी जारी है...

कौन थी वो औरत? 

जानने के लिए पढ़िए  भाग 12 

रहस्य रोमांच

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