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अब न गोविन्द आयेंगे
अब न गोविन्द आयेंगे
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© Alpana Harsh

Drama Tragedy

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"हाल ही मैं एक रचना पढी़ थी शायद मैंने इस चित्र पर, शायद कुछ ऐसी, "द्रोपदी तुम ...अब गोविन्द न आयेंगे" ,याद नहीं आ रही।", चित्र को देखते ही जानकी के जेहन में विचार दौड़ने लगे।

"तो क्या जिसने लिखी है उसके साथ भी ऐसा कुछ घटा हो, ओहह नहीं ! इतना प्रेरणास्पद लिखा हो तो वे वैचारिक दृष्टि से सम्माननीय और अच्छे स्थापित परिवार की महिला या पुरूष ही रहें होंगे।"

अब वह उस लेखिका/ लेखक के पारिवारिक बेकग्राउंड तक सोचने लगी। एक क्षण को फिर विचार कौंधा,

"अच्छे घराने से तो मैं भी थी पर कोख में अजन्मी बेटी को ही बचा न पाई।"

फफक कर रो उठी, "काश, मैं शस्त्र उठा लेती, गोविन्द के इन्तजार में बेटी गँवा बैठी।"

बेटी कोख रक्षा

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