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मोहब्बत: 24 कैरेट
मोहब्बत: 24 कैरेट
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© Prashant Virendra Tewari

Drama

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12 जुलाई 1956 की वो भी एक बादलों से लिपटी शाम थी । मुल्क को आजाद हुए अभी चंद बरस ही हुए थे पर आज सूरज के ढलने के साथ साथ जो अमीरी का सूरज ‘द पैरामाउंट होटल‘ में निकल रहा था । उसे देख कर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि ये उसी शहर का एक हिस्सा है । जंहाँ चंद फांसले पर ही पूरे एशिया के सबसे ज्यादा लोग झोपड़-पट्टी में रहते हैं । होटल के बाहर कारों का काफिला लगा था नई कारों से पुराने और पुरानी कारों से नये लोग निकल कर होटल में जा रहे थे । बाँम्बे शहर की पुरुष जनसंख्या के अधिकांश कुलीन आज ‘द पैरामाउंट होटल' में खड़े थे । द रस बार में आज इंच भर जगह खाली न थी, सारी टेबलों की टिकट 4 दिन पहले बिक चुकी थी । कैबरे बाजार की सबसे कीमती चीज़ का नाम है – ‘ यौवन ‘. और इस तरल पदार्थ के ज्वार-भाटे के बहाव में बहने के लिए ही ये मजमा लगा था । आज मारिया का पहला शो था ।

कुछ समय बाद बार के बीचो-बीचो बने स्टेज पर एक सूट में सजा सुंदर युवक हाथ में माइक ले कर खड़ा हो गया। मरिया का इंतजार करती 400 इंसानों की 800 आँखे और कान उस युवक से जा लगी . उस युवक की आवाज़ हाँल के हर कोने में फैलने लगी ।

“ लेडीज़ एंड जेंटिलमैन ! ( हालाकिं उस पुरे हाल में एक भी लेडीज़ नही थी ) आप सबने आज तक जिंदगी में एक से एक हसीनों को देखा होगा, पर यकीं से कह सकता हूँ वो सब अधूरी हैं हमारी मारिया मिन्टो के सामने । यकीं नही होता तो खुद देख लीजिये ... “ उसके इतना कहते ही हाल की बत्तियां बुझ गयीं और कुछ पलो के बाद नीली रौशनी में लाल रेशमी लबादे में जो जिस्म स्टेज पर उभरा वो मारिया मिन्टो का थ।

संगीत की तेज स्वर लहरियों ने इंसान की पशु-प्रवृतियों जगाना शुरू कर दिया, और कुछ ही पलो में उसने अपना लाल रेशमी लबादा उतार फेंका । मारिया का जिस्म तेज गति से नाचने लगा । वासना का नंगा नाच । एक-एक करके उसके कपडें अपने आप कम होने लगे । नारी मांस के शरीर का भूखा शहर बाँम्बे एक नई उतेज्जना से आंहे और सिस्कारियां भरने लगा । शराब और शबाब के दौर में लोग मदहोश होने लगे । और इसी बीच मारिया की नजर आखरी सीट पर बैठे एक 23-24 साल के युवक पर पड़ी . वो इस तमाशे के बीच में हो कर भी नही था . वो चुपचाप शांत आँखों से हाथ में थमे शराब के पैग को देख रहा था । मारिया सहम गयी ये कौन है जिसके मुंह से एक बार भी हुस्न को देख कर आह तक न निकली । मारिया जिस टेबल के बगल से निकल जाती उस टेबल के लोग मरिया के बदन के इंच भर हिस्सा छू लेने के लिए बेताब हो जाते , पर ये कौन था जिसके बगल से मारिया इतने बार गुजरी पर उसके शरीर में हरकत तक न हुई और फिर ये तो रोज का तमाशा बन गया . युवक रोज आता और चुपचाप मारिया को देख कर चला जाता । पर शायद वक्त को कुछ और मंजूर था । उस युवक और मारिया में आँखों ही आँखों एक रिश्ता बन गया और 17 साल की वह नम्र स्वाभाव की कच्ची कैबरे नर्तकी और बम्बई की एक बड़ी कंपनी का वो मार्केटिंग अधिकारी शराबियों के शोरगुल , भद्दे इशारों आँहों और उन्माद के बीच मोहब्बत कर बैठे, और भी 24 कैरेट खरी :मोहब्बत ।

इशारो में बात होती , बैरे 1 रूपए के बदले दिल से निकल कर कागज पर उकेरे गये शब्दों को प्रेम-पत्रों के रूप एक-दूसरें तक पहुँचाने लगे । 3 महीने का मारिया का होटल से करार पूरा होते ही शादी कर लेने का निश्चय हो गया । धीरे- धीरे मोहब्बत की खुशबू फिजा में फैलने लगी और युवक के दोस्त उसको समझाने लगे की वो क्यों ये पागलपन कर रहा .

कहानी सुनाते-सुनाते शंकर रंगराजन रुके और समाने रखे ग्लास से कुछ घूँट पानी पिया, तरुण मलिक के लिए अपने होटल में जन्मी प्रेम कथा को सुनना एक अनोखा अनुभव था, और अभी जैसे कुछ याद करते हुए महेश मलिक ने कहना शुरू किया “ हाँ , मुझे याद है उस समय ‘द पैरामाउंट होटल' का प्रबन्धन मेरे हाथ में ही था, और मैंने मारिया को समझाया भी था की वो ये बेवकूफी ना करे, मारिया की वजह से हमारे होटल की आमदनी बहुत बढ़ गयी थी, और मै इस लिए नही चाहता था की मरिया होटल छोड़ कर शादी करे, मैंने मरिया को भय दिखाया था कि वो कुछ दिनों बाद तंग कपड़ो में किसी बदनाम गली में जिस्म बेचती नजर आएगी । मैं मरिया को समाज की हकीकत समझाना चाहता था कि जो लोग यंहां तुम्हारी एक एक अदा के लिए पलके बिछा कर रखते है , सड़क पर निकलते ही वो नैतिकता , धर्म और समाज सेवक का नकाब पहन लेते है । उस समाज में एक नर्तकी का कोई वजूद नही है । कोई इज्जत नही है । ये लोग अपने जूते तक सोने के कमरे में नही ले जाते , बाथरूम के लिए अलग स्लीपर रखते है तो तुम्हे कैसे अपने समाज में आने देगे ।

मैंने मारिया को पैसे बढानें से लेकर कमीशन तक का लालच दिया पर सब बेकार । मरिया ने कांट्रेक्ट पूरा होते ही शादी कर ली , उसके बाद क्या हुआ मुझे नही पता .” महेश मलिक ने निराश स्वर में बोला ।

शंकर रंगराजन ने एक फिर से खिड़की के बाहर देखा बारिश अब बहुत तेज हो चुकी थी, कुछ पलो की चुप्पी के बाद उन्होंने कहना शुरू किया , “ नहीं मलिक साहब आप कुछ भूल रहे है खैर आगे की कहानी सुनिए शायद याद आ जाये ।

तो एक कैबरे डांसर को अपना जीवन-साथी और एक युवक को उसकी जीवन-संगनी मिल गये । दोनों के अनगिनत अरमान थे और वो बेपनाह खुश भी थे । उन दोनों के जीवन में था सिर्फ प्यार । मारिया हरदम उस युवक से कहा करती थी कि “ हमारा प्यार सोने सा खरा है , बिना मिलावट का हमारी मोहब्बत: 24 कैरेट शुद्ध है . उनके असीम प्यार से फिजाएं झूम उठी थी ।

कहानी रचना कथा

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