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अनजाना-सा इश्क़
अनजाना-सा इश्क़
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© NikiTa NiMje

Drama Romance Thriller

10 Minutes   3.1K    16


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कहते है मोहब्बत जिंदगी में आँधी की तरह आती है और लहर बनकर चली जाती है। जब मोहब्बत हो जाती है तब ये सोचने को भी वक्त नहीं मिलता की कोई अजनबी दिल के इतने करीब कैसे आ जाता है। वही तो प्यार होता है जहा हर इंसान कुछ बिना सोचे ही फैसला कर लेता है।

यह कहानी है एक ऐसी लड़की की जो खुद के जिंदगी में इतना खुश थी की उसे किसी और के प्यार जरूरत ही नहीं थी। ना किसी के प्यार की चाहत थी उसे न किसी के साथ की बस हमेशा सोचा करती थी जिंदगी में हमेशा खुश कैसे रहे ओर दूसरों को कैसे खुश रखे।

मेहर का मेडिकल कॉलेज में पहला दिन था। अपनी स्कूटर से वह कॉलेज जा रही थी अचानक उसका एक भीड़ से सामना हुआ। वहाँ ४ लोग मिलकर एक लड़के को मार रहे थे। मेहर ने वो जब देखा तब उससे रहा नहीं गया क्योंकि सब लोग तमाशा देख रहे थे कोई उस लड़के की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था। तब मेहर सोच में पड़ गयी अब इसको कैसे बचाया जाये ? क्योंकि किसी को मरने के लिए अपने आँखों के सामने छोड़ दे यह उसके उसूलों के खिलाफ था। मेहर ने वक्त बर्बाद ना करते हुए पुलिस को मदद के लिए बुलाया और जब तक पुलिस नहीं आयी तब तक अपने हेलमेट और बैग से सबको धूल चटाई। पुलिस आने के बाद सब बदमाश भाग गए। लड़का खून में भीगा था और उसके हाथ और सर पर लगी थी। मेहर ने अपना दुपट्टा निकाला और उसके सर पर बांध दिया।

मेहर ने उसे उठाया और पानी पिलाया और अपनी स्कूटर पर बिठाकर डायरेक्ट कॉलेज अपने कॉलेज के रस्ते पर निकल पड़ी। उसने कभी सोचा नहीं था उसका पहला कॉलेज का दिन इस तरह प्रैक्टिकल नॉलेज के साथ पूरा होगा। गाड़ी पर वो लड़का बोल रहा था प्लीज तुम मेरे लिए अपनी जान खतरे में मत डालो वो लोग तुम्हे भी मार डालेंगे।

मेहर ने कहा, "तुम अपनी बकवास बंद करो और चुपचाप बैठे रहो वैसे भी उन लोगों ने मेरा चेहरा नहीं देखा मैंने दुपट्टा बांधा था सो यू डोंट वरी।"

क्या मैं तुम्हें मि. फट्टू बुलाऊँ या तुम्हारा कोई नाम है।

वो बोला ,"यू कैन कॉल मी रेवान !"

मेहर ,"नाईस नेम !"

आपने तो मेरा नाम भी नहीं पूछा, चलो कोई बात नहीं हम हमारा इंट्रोडक्शन खुद ही करवा देते हैं।

"कभी कभी लोग मुझे झांसी की रानी भी कहते हैं या मुझे प्यार से मेहर भी बुलाते हैं।"

"अब मुझे ये बताओ ये लोग तुम्हारे साथ इतने प्यार से होली क्यों खेल रहे थे।"

रेवान, "बहुत लंबी स्टोरी है बाद में बताऊँगा।"

मेहर,"यार तू शोर्ट में भी तो बता सकता है ना।"

रेवान मन ही मन में, "यहाँ इतना प्रॉब्लम चल रहे हैं और ये लड़की को नाम और स्टोरी की पड़ी है।"

"फिर कभी बताऊँगा।"

मेहर,"आई नो, व्हाट यू आर थिंकिंग अबाउट मी !"

"बस तू इतना समझ ले टेंशन में टेंशन को बढाकर टेंशन को कम नहीं कर सकते सो चिल यार !"

"चलो फाइनली कॉलेज पहुंच गये !"

रेवान मन ही मन में ,"पता नहीं इस लड़की में ऐसी क्या बात है ना किसी से डरती है ना इसकी बाते समझ आती हैं बस अपनी ही दुनिया में खोई रहती है।"

मेहर ने डायरेक्ट कॉलेज के ओपीडी के पास जाकर स्कूटी रुका दी और डॉक्टर को देखते हुए हवा के झोके की तरह वहाँ से ही चिल्लाई "डॉक्टर प्लीज स्टॉप ! हियर इस एन इमरजेंसी !"

सभी लोग देखने लगे और सोचने लगे इतने जोरों से किसका लाउडस्पीकर चल रहा है।

मेहर दौड़ते हुए डॉक्टर के पास पहुँची और रेवान की हालत के बारे में बताने लगी।

डॉक्टर ने मेहर से कहा, बेटा "प्लीज कूल डाउन" "हम उन्हें चेक करते हैं।"

डॉक्टर ने रेवान को एडमिट कर लिया। पूरा ट्रीटमेंट कम्पलीट हो गया। रेवान के हाथों में गहरा फ्रैक्चर होने के कारण प्लास्टर लगाना पड़ा। मेहर का फर्स्ट डे ऐसे ही चला गया था उसके बावजूद भी वो बहुत खुश थी क्योकि डॉक्टर ने बोला था रेवान जल्द से जल्द ठीक हो जाएगा। रेवान को मिलने के लिये मेहर रूम नंबर १० में चली गयी। जब मेहर रूम में पहुँची तो उसने देखा रेवान की आँखों में पानी था। न जाने क्यों उसकी आँखो में पानी देखकर उससे रहा नहीं गया और बाहर आकर रोने लगी। आँखों की नमी छुपाते हुए उसने रूम में प्रवेश किया।

मेहर,"अरे वाह ! हाथ में प्लास्टर लगाये मस्त ऐसी में लेटे हुये हो, तुम तो जन्नत की सैर कर रहे हो, कभी हम गरीब लोगों के बारे में भी सोच लिया करो। "

रेवान, "अब क्या करुँ मोहतरमा वैसे तो सचमुच की जन्नत में जाने का चांस था पर तुमने वक्त पर आकर सब गड़बड़ कर दी बस अब इसी में एडजस्ट कर रहा हूँ।"

मेहर, "चल अब बाते ना बना और हमारे होते हुये किसी की इतनी मजाल जो तुम्हे हाथ भी लगाये वरना हम उसके हाथ ना कलम करवा दें।"

रेवान, "वाह ! मोहतरमा तुम कटिंग का भी साइड बिसिनेस भी करती हो क्या ?"

"चल पहले तू ये बता बाहर जा कर क्यों रो रही थी वैसे तो बहुत फिलोसोफी करती रहती है फिर तुझे तब क्या हुआ ?"

मेहर, "रो नहीं रही थी सिर्फ आँखों में कुछ चला गया था।"

रेवान, "तुम झूठ भी बोलती हो। कभी कभी सच भी बोल दिया करो।"

मेहर, "नहीं यार ! तेरे आँखों में पानी देखकर पता नहीं आँसू कैसे आ गये। पर अब तू बता तू क्यों रो रहा था ?"

रेवान,"मै तो इस सिचुएशन के कारण परेशान था इसलिए। पर तू तो इतनी स्ट्रोंग बनी फिरती है तो तब क्या हुआ।"मेहर, "छोड़ मेरा पहले ये बता ये चक्कर क्या है।"

रेवान, "ये दरअसल पहले की बात है मेरे पापा ने बहुत विश्वास के साथ अपने जिगरी दोस्त के साथ जमीन ली थी। सब ठीक चल रहा था। पर कुछ दिन बाद पापा के दोस्त ने दगाबाजी करके पूरी जमीन अपने नाम पर कर ली। इसी कारण पापा भी चल बसे और हमारा सब कुछ चला गया। हम लोग रास्ते पर आ गये। एक घर के अलावा हमारे पास कुछ भी नहीं था। पापा के दोस्त ने कहीं से जाली पेपर बनवाये और उस पेपर में लिखा था उसे बाकि के २ लाख देना है। ये सब उसने अपनी चालाकी से पैसे हड़पने के लिये किया था। पेपर में लिखा था ज़मीन का पैसा बाकि है तब मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था ये क्या हो रहा है। मैं मकान भी बेच नहीं सकता था क्योंकि अपनी माँ को लेकर मैं कहाँ जाता। फिर सोचा की मैं सामना करूँगा तब प्लानिंग के साथ वहां गया और मेरे हाथ में रिकॉर्डिंग लगी जिसमें साफ-साफ उसकी आवाज में कहा था कि हमारी जमीन भी उसने धोखे से ली थी और पैसा भी धोखे से लेना चाहता है। वैसे ही मैं पुलिस स्टेशन पहुँचा पर कोई फायदा नहीं हुआ। क्योंकि उसने पहले से ही उनको ख़रीद लिया था। पर मैंने पहले से ही एक्स्ट्रा कॉपी बनाई थी और ये बात उसे पता चल गयी इसलिए वो मेरी जान के पीछे पड़ा है।"

मेहर," अब सब चक्कर समझ में आया पर तुम अब एक काम करो वो कॉपी मुझे दे दो मेरे पापा कमिश्नर है। मैं सब ठीक करवा दूँगी। उतना तो भरोसा करते ही होंगे।"

रेवान, "नहीं यार भरोसे की बात नहीं पर मैं खुद नहीं चाहता की मेरे वजह से फिर से तुम्हें और कोई तकलीफ हो जाये वैसे ही तुमने मेरे लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए मेरी जान बचाई है।"

मेहर, "अब इतना सेंटी मत हो ३० मिनिट में सब ठीक कर दूँगी।"

रेवान, "नहीं प्लीज !"

मेहर ने पापा को फ़ोन लगाया और सब बात बताई। ५ मिनिट में पुलिस वह आ चुकी थी। रेवान बयान ले लिया गया। और २५ मिनट तक रेवान के पापा के दोस्त सहित सभी मारने वाले लोग गिरफ्तार हो चुके थे।

मेहर के पापा ने अपनी बेटी की प्रशंसा की और वो चले गये।

मेहर,"देख बेटा ३० मिनिट इसलिए कहा था की २५ मिनट पूरी प्रोसीजर में चले गये और बचे ५ मिनिट मैंने मेरे काम के लिए बचाये। जिंदगी कभी दूसरों के लिए जी कर देखो कितना सुकून मिलता है।"

रेवान सिर्फ उसकी तरफ देखता ही गया और वो बाते करती गयी। २ घंटे पहले उसकी जो जिंदगी थी वो किसी के आने से इतनी बदल गयी थी। उसे अब सब खूबसूरत लगने लगा था। जैसे प्यार का पहला इशारा मिलने लगा था।

मेहर बातें करती रही और वो उसी की बातो में कहीं खो सा गया। और सोच में डूब गया की जो लड़की की बातों से उसे इतनी चिढ़ आ रही थी नजाने वो बाते अपनी सी क्यों लगने लगी। यही वो पल होता है कोई अनजाना अजनबी अपना-सा लगने लगता है।

मेहर,"ये १९७० के हीरो तू कहाँ खो गया। तुझसे कुछ पूछ रही हूँ।"

"अरे क्या आप मुझे बताओंगे मार खाने के अलावा आप कुछ करते हो।"

रेवान, "मेरा यही के ऑटोनोमस कॉलेज में फाइनल इयर मैकेनिकल इंजीनियरिंग शुरू है।"

मेहर, "दैट्स ग्रेट !"

चलो अब हम निकलते हैं हमारा कॉलेज का फर्स्ट डे तो ख़तम हो गया। बाय बाय, एंड टेक अ रेस्ट।"

रेवान ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला, "मेहर मत जाओ ना।"

मेहर शर्माकर ,"क्यों ?"

रेवान, "ऐसे ही, अब ख़ामोशी में रहने का मन नहीं करता।"

मेहर, "अब तो बहुत दिनों का साथ है। क्योंकि रोज कॉलेज तो यही आना पड़ेगा। चलो अब बाय !"

मेहर भी घर जाते वक्त सिर्फ उसी के बारे में सोच थी।

और हॉस्पिटल में रेवान दीवाना हुए जा रहा था।

दूसरे दिन से दोनों हॉस्पिटल में मिलने लगे। बाते होने लगी और कुछ ही दिनों में दोनों में अच्छी दोस्ती हो गयी।

रेवान को समझ नहीं रहा था ये प्यार है या दोस्ती क्योंकि वो जब भी आँखें खोलता तब उसे ही पाता और आखे बंद करता तो उसी के सपने सजाता। यह प्यार का एहसास उसे धीरे-धीरे होने लगा था। पर डरता था कहीं मेहर बुरा ना मान जाये।

मेहर का हाल भी वही था। रोज सुबह उठकर उसके.लिए खाना बनाती। बेवजह कभी-कभी सपनो में खो जाती थी। कुछ तो था जो दोनों को एक डोर से बांधे रखता था।

रेवान को एहसास हो चुका था की वो मेहर से प्यार करने लगा है। फिर उसने एक दिन वो आने से पहले अपने रूम में टेबलेट्स और इंजेक्शंस की मदद से एक टेबल पर आई लव यू लिख दिया और साइड में कैंडल्स जला कर सरप्राइज रेडी कर लिया। इतने रोमांटिक माहौल में सिर्फ ड्रिंक्स की कमी थी जो भी रेवान ने आईडिया से पूरी कर दी। उसने दो गिलास रख दिये ओर उसकी एप्पल जूस की बोतल रख दी। और जो प्रिस्क्रिप्शन रिपोर्ट पर अपना पहला लव लेटर लिख दिया। उसमें ऐसा लिखा था।

टू,

माई डिअर, झांसी की रानी,

तुम्हारे साथ रहते हुये हम कब आपको दिल दे बैठे,

तेरी हर इक अदा के हम इस तरह दिवाने हो गये,

दिल समझता नहीं अब बातें मेरी,

हॉस्पिटल में बहुत याद आती है तेरी।

इस इंजेक्शन और टेबलेट्स कसम खा कर कहता हूँ,

तेरे ही खयालों में हमेशा खोया रहता हूँ,

तू माने या ना माने अभी,

सच्चा प्यार तो सिर्फ तुम्हीं से ही करता हूँ।

लव यू...

बंदा सर कलम करवाने के लिए तैयार है।

फ्रॉम,

मि. फट्टू

रेवान के मन में सौ तरह के सवाल चल रहे थे। मेहर उसी वक्त वहां आयी दरवाजा खोलने के लिए नॉक करना चाहा तो दरवाजा खुला ही था। उसने कमरे में देखा तो लाइट्स बंद थी। जब कमरे के अन्दर झुकी तो उसने देखा कैंडल्स जल रही थी। उसने रोशनी देखकर टेबल के पास पहुंची तो उसने वहा टेबलेट्स और इंजेक्शन से लिखा आई लव यू देखा और लेटर पढ़ा। यह सब देखकर वो सरप्राइज हो गयी। वो रेवान को ढूढ़ने लगी। रेवान रैक के पीछे छुपा था। मेहर जोर से चिल्लाई यह सब क्या लगा कर रखा है। तुम जल्दी बाहर निकलो वरना मैं वहा आ जाऊँगी।

रेवान घबराते हुये बाहर आया और बोला "आई एम सो सॉरी इफ आई हर्ट यू !"

मेहर, "तुमने यह नहीं सोचा की तुम अगर ऐसा करोंगे तो मैं इसी इंजेक्शन से तुम्हारा कचुम्बर बना दूँगीI"

रेवान कुछ नहीं बोला।

मेहर, "ओये फट्टू तू फिर डर गया।"

मेहर ने उसके पास जाकर कहा, "इडियट ! आई लव यू टू सिर्फ तू ही समझ नहीं पाया।"

"इतना खूबसूरत सरप्राइज मेरे लिए किसी ने प्लान नहीं किया।" थैंक यू सो मच फॉर एव्रीथिंग !"

रेवान, "ये मेरी जिंदगी है ही नहीं जब से तुमने इस जान को बचाया है तब से ये जान तो सिर्फ तुम्हारी ही हो गयी है।"

इस तरह यह अनोखी प्रेम कहानी शुरु हुई थी।

पहला प्यार अनजान इश्क़ प्रेम लड़का लड़की

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