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मेरी गुड्डू बड़ी हो गई है
मेरी गुड्डू बड़ी हो गई है
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© Archana kochar Sugandha

Children

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मैं सोई हुई होती थी। माँ काम में लगी होती थी। मेरे उठने से पहले नाश्ता तैयार होता था। स्कूल जाने से पहले दोपहर का टिफिन। जाते-जाते निर्देशों की झड़ी भी तैयार होती थी। गुड्डू स्कूल में ध्यान से जाना, दोपहर में टिफिन खा लेना, समय बर्बाद न करना और पढ़ाई ध्यान से करना। जिससे अक्सर मुझे खींझ महसूस होती थी। आप क्यों इतनी संभाल रखते हो। मेरी जिंदगी है, मुझे पता है इसे अच्छे से कैसे जीना है, आपके ज्यादा ख्याल रखने से क्या हो जाएगा? स्कूल से आते ही माँ का भाषण फिर शुरू हो जाता। आज फिर टिफिन क्यों नहीं खाया, चलो जल्दी से हाथ-मुँह धो लो, तुम्हारे मन-पसंद राजमा- चावल बनाए हैं। मैं फिर शुरू हो जाती, क्या खाऊँ? आपसे तो कभी कुछ भी ढंग से बनता नहीं है, ओरों की मम्मियाँ देखी हैं-----। माँ मुझे पुचकारती, मेरे मुँह-नाक सिकोड़ने के बावजूद फिर से खाना बनाना शुरू हो जाती। आज अच्छा बना है न---, भरपेट खा ले। जिस दिन मैं भरपेट खा लेती उनके चेहरे पर एक असीम तृप्ति की अनुभूति मुझे महसूस होती थी। मेरा काम हर समय माँ में कमियाँ निकालना था और माँ का काम उन कमियों पर विजय पाकर मुझे खुश रखने की हर संभव कोशिश करना। मैं दसवीं कक्षा में थी और भाई ध्रुव तीसरी में। माँ अभी भी हम दोनों को दूध पीते बच्चे समझती थी। हमारे रहने, खाने-पीने, सोने और पढ़ने की चीजों का ध्यान छोटे बच्चों की तरह रखती थी। पढ़ते-पढ़ते सोने पर किताबें समेट देती थी। सुबह स्कूल जाते समय बैग तैयार करके अपने कंधे पर लटका कर खड़ी हो जाती थी। रात में न जाने कितनी बार उठ-उठ कर चादर उढ़ा जाती थी। हम अक्सर खीझ कर माँ को अपने बड़े होने का अहसास कराते थे, लेकिन माँ हमारे साथ फिर से वहीं ---बच्चें की भान्ति पेश आती थी। आज माँ को मेरी दुनिया से हमेशा के लिए गए बीस दिन हो गए थे, मातम मना कर सभी सगे-संबंधी जा चुके थे। घर में केवल मैं, पापा और ध्रुव रह गए थे। मैं रोज़ की भांति गहरी नींद में ख्वाबों में सोई थी कि अभी माँ की ममतामयी आवाज़ आकर मुझे उठाएगी, गुड्डू जल्दी उठ, स्कूल के लिए देर हो जाएगी, टिफिन में क्या बनाऊं? लेकिन तभी पापा की दर्द भरी आवाज़ से मैं हड़बड़ा कर उठ गई, गुड्डू बेटा जल्दी उठो, मेरा, अपना और ध्रुव का खाना बना कर टिफिन में पैक करवा लो। आड़ी-तिरछी, आधी कच्ची- पक्की और जली रोटियाँ टिफन में पैक करते हुए ऐसा लग रहा था जैसे माँ कह रहीं हो, खाना बहुत स्वादिष्ट बना हैं,आज वास्तव में मेरी गुड्डू बहुत बड़ी हो गई हो---।

टिफ़िन माँ बच्चे

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