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पहले प्यार की जीत
पहले प्यार की जीत
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© Aarti Ayachit

Inspirational

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राधिका थोड़ी सकुचाई सी सहमी हुई मन ही मन सोच रही थी कि “आखिर किशन अचानक ही कुछ बिना बताए कहां चला गया।“

राधिका थोड़ी बहुत पढ़ी लिखी थी, सो अपने गांव की महिलाओं को शिक्षित करने के उद्देश्य से वह उनको पढ़ाती थी। उसकी मां बैचारी मेहनत-मजदूरी करते-करते बीमार हो गई, पैसों के अभाव में ठीक से उपचार नहीं हो सकने के कारण स्वर्ग सिधार चुकी थी। उसके पिता खेती- किसानी करते, उससे किसी तरह दो वक्त की रोटी का गुजारा हो जाता। गांव की महिलाएं, जो पहले घर से बाहर जाने के लिए ही कतराती रही, परंतु आजकल वे भी पढ़ना-लिखना चाहती हैं ताकि कम से कम सही ज्ञान की परख कर सकें।

राधिका और किशन दोनों ही एक-दूसरे को बहुत चाहते थे, पर सबसे पहले उनका सपना था कि गांव में सभी बुजुर्गों के लिए एक पाठशाला शुरू करेंगे। किशन ने जैसे-तैसे गांव की पाठशाला से १२वी उत्तीर्ण की थी, गांव के जमींदार का बेटा था। वह हर पल सोचता रहता कि अच्छी पढ़ाई करके ही वह अपनी मंजिल को पा सकता है और इसके लिए उसे शहर जाना ही होगा। उसके पिता उसे शहर भेजने के लिए राजी नहीं थे, उनको लगता क्या करेगा पढ़-लिखकर, शुरू से खानदान में जमींदारी की है तो बेटे ने भी वही करना चाहिए… वही पुरानी सोच….।

पर आखिरकार किशन ने हार नहीं मानी और पूर्ण कोशिश करने के बाद वह शहर में विश्वविद्यालय में अध्ययन करने लगा।

राधिका, वह भी अपने मिशन में व्यस्त रहती, कभी किशन की याद आती तो मुंह छिपा लेती। किशन जब भी अवकाश मिलता, गांव आता, राधिका से मिलता, पर वह हमेशा कहा करता कि यदि हमारी मंजिल सही है तो वह हमें अवश्य ही मिल के रहेगी। इधर राधिका के पिता की हालत भी कुछ नासाज रहने लगी थी। राधिका बोलती भी मुझे डर लगता है किशन कहीं मेरे पिता को कुछ हो गया तो फिर शादी के लिए तुम्हारे घर वाले मानेंगे कि नहीं ? किशन बोलता हमने कोई गलत काम थोड़े ही किया है, बस प्यार ही किया है और वह भी सच्चा प्यार राधिका, मैं नहीं चाहता सब लोग हमें लैला मजनू या हीर रांझा के प्यार की तरह जाने।

मैं चाहता हूं हमारे पहले प्यार की एक मिसाल कायम हो, बस उसी सपने को पूरा करने की कोशिश कर रहा हूं।

धीरे-धीरे वक्त बीतता गया, किशन शहर में अपना अध्ययन पूरा करके अब अच्छी नौकरी के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताओं में शामिल होने लगा। उसको जल्दी ही एक अच्छी कंपनी में नौकरी भी मिल गयी। वह बहुत खुश था और खुशी-खुशी घर मिलने आया तो क्या उसके पिता बहुत नाराज़ होकर कहने लगे कि तू मुंबई नहीं जाएगा, जो भी करना है वह इसी गांव में कर। किशन क्या सोच कर आया था और क्या हो गया, उसकी मां भी उसको नहीं समझ रही। बस इसी बात के कारण वह किसी से कुछ कह नहीं पाया और राधिका से भी मिल न सका और शहर लौट गया।

किशन ने हार नहीं मानी, सच्चा प्यार राधिका से दिल से किया था और वह किसी भी तरह पाना भी चाहता था और अपना सपना भी पूरा करने की क्षमता थी उसमें।

बस मन में इसी आशा के साथ उसने अपने दिल को पक्का करते हुए कंपनी में अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया और देखते ही देखते वह तरक्की पाते हुए उसे देश- विदेश भी प्रशिक्षण के लिए जाना पड़ा। उसके हौसले दिन पे दिन और बुलंद होने लगे। मार्केटिंग की कंपनी होने के कारण निवेशकों की पूंजी निवेश के आदान-प्रदान के माध्यम से एवं किशन ने पूर्ण दिलचस्पी रखते हुए बखूबी कंपनी को उन्नति के मार्ग पर ला दिया, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी के सभी कर्मचारियों को लाभ तो हुआ ही साथ ही साथ किशन उसी कंपनी में मैनेजर बन गया।

तो फिर देखा आपने प्यार में भी सब जायज है, मगर वह सच्चा प्यार वह भी राधिका से किया, वो इसीलिए कहते हैं न एक पुरुष की कामयाबी के साथ एक स्त्री ही उसकी हिम्मत बन कर खड़ी रहती है ।

इधर राधिका अकेली सोचा करती किशन तो बिना बताए गया है और जाने कहां… अब तक तो वह उसे भूल भी गया होगा, भोली-भाली राधिका क्या जाने। उसके पिता लेकिन उसकी हौसला अफजाई करते थे कि एक दिन अवश्य ही किशन गांव आएगा जरूर।

इतने में एक दिन राधिका पाठशाला में पढ़ा रही होती हैं तो छोटे बच्चों की आवाजें सुनाई देती है…. राधिका दीदी “किशन भैय्या आ गये…...किशन भैय्या आ गये।” राधिका को मानों पल भर के लिए केवल एक महज़ सपना सा लगा क्यो कि उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि किशन वापस भी आ सकता है। किशन सामने से आकर राधिका से बोलता है “सरप्राइज गिफ्ट डियर” तुम्हारे लिए। वो एकदम से बोली ये क्या होता है जी ? फिर किशन ने बताया- बरसों पहले हम दोनों ने गांव में बुजुर्गों की पाठशाला खोलने का जो सपना देखा था समझो कि वह पूरा हुआ। मेरी कंपनी की सहायता से गांव में एक भवन खरीद कर तुम्हारे नाम कर दिया राधिका । बस अब तुम बिंदास पढ़ाना।

राधिका की आंखों में रह-रहकर खुशी के आंसू छलक रहे थे, आखिर में ही सही पर उसने किशन की आंखों में अपने पहले प्यार की जीत जो देखी थी।

इतने में राधिका के पिता और किशन के माता-पिता आते हैं और सबकी रजामंदी से दोनों का धूमधाम से विवाह हो जाता है।

कामयाबी गाँव शहर

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